Published on 05 August 2026 | By Ishan Verma, Editor, theexamhub.in
छत्तीसगढ़ के सुदूर वनांचल और अनुसूचित क्षेत्रों (Scheduled Areas) में ग्राम स्वशासन को सुदृढ़ करने तथा जनजातीय समुदाय के पारंपरिक अधिकारों को कानूनी सुरक्षा प्रदान करने की दिशा में राज्य सरकार ने कड़े कदम उठाए हैं। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आज 5 अगस्त 2026 को महानदी मंत्रालय भवन में वन अधिकार अधिनियम (FRA) और पेसा कानून के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु गठित शीर्ष समिति की बैठक के बाद PESA Act Chhattisgarh Implementation 2026 को राज्य सरकार की शीर्ष प्राथमिकताओं में शामिल किया गया है।
इस पहली ऐतिहासिक बैठक में राज्य के अनुसूचित क्षेत्रों के समग्र एवं सतत विकास (Sustainable Development), स्थानीय जल-जंगल-जमीन पर सामुदायिक सहभागिता बढ़ाने तथा विभिन्न सरकारी विभागों के नियमों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के लिए एक बहु-आयामी और कड़ा रणनीतिक रोडमैप तैयार किया गया।
| महत्वपूर्ण संकेतक | PESA Act Chhattisgarh Implementation 2026 के प्रमुख तथ्य व निर्णय |
|---|---|
| संबद्ध ऐतिहासिक कानून | पेसा अधिनियम, 1996 (PESA Act) और वन अधिकार अधिनियम, 2006 (FRA) |
| बैठक की तिथि और स्थान | 5 अगस्त 2026, महानदी मंत्रालय भवन, रायपुर |
| शीर्ष विनियामक समिति का गठन | समन्वय हेतु ‘राज्य स्तरीय कार्ययोजना समिति’ (State Level Action Plan Committee) बनेगी |
| जमीनी स्तर पर निगरानी तंत्र | सभी 33 जिलों में ‘जिला स्तरीय पेसा निगरानी समितियों’ को सक्रिय किया जाएगा |
| प्राथमिक प्रशासनिक लक्ष्य | वन ग्रामों (Forest Villages) को राजस्व ग्रामों (Revenue Villages) में परिवर्तित करना |
| वन अधिकार समीक्षा क्षेत्र | सामुदायिक वन संसाधन अधिकार (CFRR) की मान्यता और प्रबंधन की प्रगति |
| जनजातीय जनसंख्या अनुपात (CG) | छत्तीसगढ़ की लगभग एक-तिहाई (लगभग 32%) आबादी आदिवासी समाज से है |
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PESA Act Chhattisgarh Implementation 2026: ग्राम स्वशासन और जनजातीय सशक्तिकरण का नया मॉडल
छत्तीसगढ़ में एक-तिहाई आबादी आदिवासी समाज से संबंधित है, जिसके कारण उनकी परंपराओं, अधिकारों और विकास को ध्यान में रखते हुए पेसा कानून का प्रभावी क्रियान्वयन अत्यंत आवश्यक है। इस PESA Act Chhattisgarh Implementation 2026 के माध्यम से राज्य के अनुसूचित क्षेत्रों में निम्नलिखित गुणात्मक सुधार किए जाएंगे:
- ग्राम सभाओं का सुदृढ़ीकरण: पेसा कानून का मुख्य उद्देश्य अनुसूचित क्षेत्रों के गांवों में ग्राम सभाओं को प्राकृतिक संसाधनों (लघु वनोपज, खनिज, जल) के प्रबंधन के लिए वास्तविक प्रशासनिक और विधायी शक्तियां प्रदान करना है।
- एकीकृत दृष्टिकोण (Integrated Approach): मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि वन अधिकार अधिनियम (FRA) और पेसा (PESA) दोनों पूरक कानून हैं। इन दोनों के प्रावधानों को अलग-अलग न देखकर एक एकीकृत दृष्टिकोण से लागू किया जाए ताकि विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे।
- तथ्यात्मक जागरूकता अभियान: पेसा नियमों को लेकर वनांचल क्षेत्रों में किसी भी प्रकार के भ्रम या भ्रामक प्रचार को समाप्त करने के लिए सरकार व्यापक रूप से जनजागरूकता अभियान चलाएगी।
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PESA Act Chhattisgarh Implementation 2026: राज्य और जिला स्तरीय निगरानी ढांचा
पेसा कानून के क्रियान्वयन में सबसे बड़ी व्यावहारिक चुनौती यह रही है कि राजस्व, वन, पंचायत और गृह जैसे विभिन्न विभागों द्वारा एक ही विषय पर अलग-अलग नियम बनाए गए हैं। इस समन्वय की कमी को दूर करने के लिए साय सरकार ने दो बड़े सुधारात्मक फैसले लिए हैं:
- राज्य स्तरीय कार्ययोजना समिति का गठन: यह समिति विभिन्न विभागों (राजस्व, वन, आदिम जाति विकास) के नियमों के बीच अभिसरण (Convergence) और समन्वय स्थापित करेगी। इस उच्च-स्तरीय समिति में संबंधित विभागों के विभागीय मंत्री और सचिव शामिल होंगे, जो समयबद्ध कार्ययोजना की सीधे निगरानी करेंगे।
- जिला स्तरीय पेसा निगरानी समितियों की सक्रियता: मैदानी स्तर पर पेसा प्रावधानों के सुचारू संचालन और ग्राम सभाओं के साथ समन्वय सुनिश्चित करने के लिए सभी जिलों में स्थापित पेसा निगरानी समितियों को तत्काल प्रभाव से सक्रिय किया जाएगा।
वन अधिकार दावों की समीक्षा और वन ग्रामों का राजस्व ग्रामों में परिवर्तन
मंत्रालय की इस महत्वपूर्ण बैठक में वर्ष 2006 के मूल वन अधिकार अधिनियम (FRA) की प्रगति की भी कड़े स्तर पर समीक्षा की गई:
- सामुदायिक वन संसाधन अधिकार (CFRR): राज्य में वन अधिकार अधिनियम के तहत प्राप्त, स्वीकृत और लंबित व्यक्तिगत व सामुदायिक दावों की गहन समीक्षा की गई, ताकि आदिवासियों को उनके पारंपरिक अधिकारों से वंचित न होना पड़े।
- राजस्व ग्रामों में परिवर्तन: वनांचल क्षेत्रों में स्थित पुराने ‘वन ग्रामों’ (Forest Villages) को पूर्ण विनियामक प्रक्रिया के तहत ‘राजस्व ग्रामों’ (Revenue Villages) में परिवर्तित करने के कार्य को तीव्र किया जाएगा, जिससे इन गाँवों के निवासियों को औपचारिक बैंक ऋण और अन्य सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ मिल सके।
- 2022 नियमों की समीक्षा: छत्तीसगढ़ पंचायत उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) नियम, 2022 के क्रियान्वयन की वर्तमान प्रगति की भी विभागवार समीक्षा की गई।
UPSC & CGPSC Prelims Fact Box: PESA Act 1996 & Fifth Schedule Provisions
- पेसा अधिनियम, 1996 (PESA Act): दिलीप सिंह भूरिया समिति की सिफारिशों पर संसद द्वारा वर्ष 1996 में पारित किया गया कानून। इसका मुख्य उद्देश्य संविधान के भाग IX (पंचायती राज) के प्रावधानों को विशिष्ट संशोधनों के साथ संविधान की पांचवीं अनुसूची (Fifth Schedule) के क्षेत्रों में विस्तारित करना है।
- संविधान की पांचवीं अनुसूची: संविधान के अनुच्छेद 244(1) के तहत असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम को छोड़कर अन्य राज्यों (जैसे छत्तीसगढ़) के अनुसूचित क्षेत्रों और अनुसूचित जनजातियों के प्रशासन और नियंत्रण से संबंधित प्रावधान। छत्तीसगढ़ के 33 जिलों में से अधिकांश आंशिक या पूर्ण रूप से पांचवीं अनुसूची के अंतर्गत आते हैं।
- वन ग्राम बनाम राजस्व ग्राम: वन ग्राम वे बस्तियां हैं जो औपनिवेशिक काल में वन विभाग द्वारा वानिकी कार्यों के लिए बसाई गई थीं, जहाँ बुनियादी ढांचागत अधिकार सीमित होते हैं। राजस्व ग्राम पूर्णतः नागरिक प्रशासन (राजस्व विभाग) के अधीन होते हैं, जहाँ निवासियों को भूमि पट्टा, बैंक ऋण और सभी बुनियादी शासकीय सुविधाओं की कानूनी पात्रता होती है।
UPSC & State PCS Mains Analysis: विकेंद्रीकृत जनजातीय सुशासन और अंतर-विभागीय समन्वय की चुनौतियां
मुख्य परीक्षा और जनजातीय सुशासन के दृष्टिकोण से PESA Act Chhattisgarh Implementation 2026 केवल एक कानूनी नियमन नहीं है, बल्कि यह हमारे लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण (Democratic Decentralization) और वास्तविक सामाजिक-आर्थिक लोकतंत्र की स्थापना का एक मौलिक साधन है।
पेसा कानून और वन अधिकार अधिनियम (CFRR) के क्रियान्वयन में सबसे बड़ी बाधा ‘अधिकार क्षेत्र की ओवरलैपिंग’ (Jurisdictional Overlaps) रही है। उदाहरण के लिए, वन भूमि पर लघु वनोपज के अधिकार को लेकर वन विभाग और पंचायत विभाग के नियमों में अक्सर विरोधाभास होता है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय द्वारा ‘राज्य स्तरीय कार्ययोजना समिति’ के गठन की घोषणा इस अंतर-विभागीय संघर्ष को समाप्त करने और ‘नीतिगत समरूपता’ (Policy Coherence) लाने की दिशा में एक बड़ा प्रशासनिक सुधार है।
इसके अतिरिक्त, वनांचल क्षेत्रों के वन ग्रामों को ‘राजस्व ग्रामों’ में बदलना राज्य के नीति निदेशक तत्वों (DPSP – अनुच्छेद 38 और 39) के तहत आर्थिक न्याय सुनिश्चित करने का सबसे प्रभावी तरीका है। जब एक वन ग्राम राजस्व ग्राम बनता है, तो वहाँ के आदिवासियों को औपचारिक ऋण प्रणाली तक पहुंच प्राप्त होती है, जिससे वे ‘साहूकारी शोषण चक्र’ से मुक्त होते हैं। यह मॉडल न केवल बस्तर और सरगुजा संभाग में उग्रवाद (LWE) के वैचारिक आधार को समाप्त करेगा, बल्कि जनजातीय समुदायों में राज्य की लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति गहरा ‘विश्वास’ (Democratic Trust) पैदा करेगा, जो ‘विकसित छत्तीसगढ़’ के सपने को समयबद्ध तरीके से साकार करने की मजबूत प्रशासनिक और सामाजिक रीढ़ साबित होगा।
अभ्यास प्रश्न (Practice MCQs)
निम्नलिखित बहुविकल्पीय प्रश्नों के माध्यम से इस समसामयिक और पंचायती राज विषय पर अपने ज्ञान का परीक्षण करें:
प्रश्न 1: हाल ही में संपन्न हुई बैठक के अनुसार, PESA Act Chhattisgarh Implementation 2026 के तहत विभिन्न सरकारी विभागों के नियमों और प्रक्रियाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के लिए किस विशेष समिति का गठन किया जाएगा?
(A) राज्य स्तरीय खेल विकास प्राधिकरण
(B) राज्य स्तरीय कार्ययोजना समिति (State Level Action Plan Committee)
(C) जनजातीय मानवाधिकार संरक्षण मंच
(D) छत्तीसगढ़ ई-गवर्नेंस परिषद
उत्तर: (B) राज्य स्तरीय कार्ययोजना समिति (State Level Action Plan Committee)
व्याख्या: मुख्यमंत्री ने घोषणा की है कि पेसा कानून के प्रभावी क्रियान्वयन और विभिन्न विभागों (राजस्व, वन, पंचायत) के नियमों में समन्वय सुनिश्चित करने के लिए ‘राज्य स्तरीय कार्ययोजना समिति’ का गठन किया जाएगा।
प्रश्न 2: भारत के संविधान के किस अनुच्छेद के तहत राज्यों में अनुसूचित क्षेत्रों और अनुसूचित जनजातियों के प्रशासन के लिए ‘पांचवीं अनुसूची’ (Fifth Schedule) का प्रावधान किया गया है?
(A) अनुच्छेद 244(1)
(B) अनुच्छेद 243(M)
(C) अनुच्छेद 275(1)
(D) अनुच्छेद 164(1)
उत्तर: (A) अनुच्छेद 244(1)
व्याख्या: संविधान के अनुच्छेद 244(1) के तहत पांचवीं अनुसूची के प्रावधानों के अंतर्गत देश के विभिन्न राज्यों (असम, मेघालय, त्रिपुरा, मिजोरम को छोड़कर) के अनुसूचित क्षेत्रों और जनजातियों के प्रशासन का नियमन किया जाता है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
Q1. PESA Act Chhattisgarh Implementation 2026 क्या है और इसके तहत ग्राम सभाओं को सशक्त करने के लिए क्या निर्णय लिए गए हैं?
यह छत्तीसगढ़ में पेसा अधिनियम 1996 और वन अधिकार कानून 2006 के समन्वय से अनुसूचित क्षेत्रों के जनजातीय स्वशासन को सुदृढ़ करने का राज्य का एक कड़ा अभियान है। इसके तहत विभिन्न विभागों के नियमों में समन्वय लाने के लिए एक ‘राज्य स्तरीय कार्ययोजना समिति’ के गठन और जिला स्तरीय पेसा निगरानी समितियों को सक्रिय करने का निर्णय लिया गया है।
Q2. पेसा (PESA) कानून का मुख्य उद्देश्य क्या है और यह छत्तीसगढ़ में कब से लागू है?
पेसा (Panchayats Extension to Scheduled Areas) अधिनियम 1996 का मुख्य उद्देश्य पांचवीं अनुसूची के क्षेत्रों में पारंपरिक ग्राम सभाओं को सशक्त बनाना है। छत्तीसगढ़ में इस केंद्रीय कानून के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए ‘छत्तीसगढ़ पंचायत उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) नियम, 2022’ को अधिसूचित किया गया था।
Q3. वन ग्रामों (Forest Villages) को राजस्व ग्रामों (Revenue Villages) में परिवर्तित करने से आदिवासियों को क्या मुख्य लाभ प्राप्त होंगे?
वन ग्रामों को राजस्व ग्रामों में बदलने से स्थानीय आदिवासियों को उनकी कृषि भूमि के औपचारिक पट्टे प्राप्त होंगे, जिससे वे बैंकों से आसान कृषि ऋण (KCC) ले सकेंगे। इसके अतिरिक्त, उन्हें नागरिक प्रशासन की सभी बुनियादी विकास योजनाओं और ढांचागत परियोजनाओं का सीधा कानूनी लाभ प्राप्त होगा।
तीन मुख्य निष्कर्ष (3 Key Takeaways)
- नीतिगत समरूपता के लिए कार्ययोजना समिति: PESA Act Chhattisgarh Implementation 2026 के तहत अलग-अलग विभागों (राजस्व, वन, पंचायत) के जटिल और ओवरलैपिंग नियमों के अभिसरण के लिए एक विशेष राज्य स्तरीय समिति का गठन किया जाएगा।
- वनांचल ग्रामों का कायाकल्प: राज्य के सभी लंबित सामुदायिक वन संसाधन दावों (CFRR) का निपटारा तीव्र किया जाएगा तथा वन ग्रामों को राजस्व ग्रामों में बदलकर आदिवासियों को भूमि पट्टा और बैंकिंग सुविधाएं दी जाएंगी।
- जिला स्तर पर सुदृढ़ निगरानी: जमीनी स्तर पर ग्राम सभाओं की वास्तविक भागीदारी बढ़ाने और पेसा के भ्रामक प्रचार को समाप्त करने के लिए सभी 33 जिलों की जिला पेसा निगरानी समितियों को तत्काल सक्रिय किया जाएगा।
UPSC & CGPSC Relevance (यूपीएससी और सीजीपीएससी प्रासंगिकता)
यह विषय मुख्य रूप से संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के सामान्य अध्ययन पेपर-2 (पंचायती राज, पेसा अधिनियम 1996, स्थानीय स्वशासन, कमजोर और जनजातीय वर्गों का कल्याण), तथा सीजीपीएससी मुख्य परीक्षा पेपर-3 (छत्तीसगढ़ का प्रशासनिक ढांचा), पेपर-6 (छत्तीसगढ़ का सामाजिक परिदृश्य, जनजातीय नीतियां व कल्याणकारी कार्यक्रम) के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण और अनिवार्य समसामयिक मुद्दा है।
Official Source (आधिकारिक स्रोत)
यह लेख छत्तीसगढ़ शासन के आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग, और मंत्रालय महानदी भवन द्वारा 5 अगस्त 2026 को मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में संपन्न हुई वन अधिकार अधिनियम (FRA) व पेसा (PESA) टास्क फोर्स की पहली उच्च-स्तरीय बैठक के आधिकारिक निर्णयों पर आधारित है।