Samudra Manthan Offshore Exploration Scheme 2026: कैबिनेट ने ₹84,084 करोड़ की ‘समुद्र मंथन’ राष्ट्रीय अपतटीय अन्वेषण योजना को दी मंजूरी, भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता को मिलेगा नया बल

Samudra Manthan Offshore Exploration Scheme 2026 Samudra Manthan Offshore Exploration Scheme 2026

Published on 01 August 2026 | By Ishan Verma, Editor, theexamhub.in


भारत की बढ़ती ऊर्जा मांगों को पूरा करने और कच्चे तेल के विशाल आयात बिल को कम करने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कल “समुद्र मंथन” राष्ट्रीय अपतटीय अन्वेषण योजना यानी Samudra Manthan Offshore Exploration Scheme 2026 को मंजूरी दे दी है। यह पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना (Central Sector Scheme) है, जिसका कुल वित्तीय परिव्यय ₹84,084 करोड़ निर्धारित किया गया है और इसे वित्तीय वर्ष 2030-31 तक लागू किया जाएगा।

यह भारत के इतिहास का अब तक का सबसे महत्वाकांक्षी अपतटीय हाइड्रोकार्बन अन्वेषण (Offshore Hydrocarbon Exploration) मिशन है। वर्तमान में भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल उपभोक्ता है, जिसका वार्षिक आयात बिल लगभग 144 बिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग ₹13 लाख करोड़) है। वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच ऊर्जा स्रोतों तक निर्बाध पहुंच बनाए रखने और घरेलू तेल एवं गैस उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए यह रणनीतिक हस्तक्षेप अत्यंत महत्वपूर्ण साबित होगा [1].

महत्वपूर्ण संकेतकSamudra Manthan Offshore Exploration Scheme 2026 के प्रमुख तथ्य व आंकड़े
योजना का नाम और नोडल मंत्रालयसमुद्र मंथन (National Offshore Exploration Scheme) – पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय
कुल वित्तीय बजट (आउटले)₹84,084 करोड़ (वित्त वर्ष 2030-31 तक कार्यान्वयन)
वित्तीय सहायता (प्रति कुआँ)गहरे पानी में ड्रिलिंग लागत का 50% या अधिकतम ₹675 करोड़ प्रति कुआँ (जो भी कम हो)
अन्वेषण कुओं का लक्ष्य60 गहरे पानी के खोजपूर्ण कुओं (Deepwater Exploration Wells) की ड्रिलिंग
वार्षिक उत्पादन लक्ष्यघरेलू तेल व गैस उत्पादन को 62 MMTOE से बढ़ाकर 80 MMTOE करना
संसाधन आधार विस्तार लक्ष्यदेश के हाइड्रोकार्बन भंडार को 1.6 बिलियन TOE से बढ़ाकर 2.2 बिलियन TOE करना
अनुमानित आयात बचतलगभग ₹1 लाख करोड़ वार्षिक आयात बिल में कमी
मुख्य लक्षित अपतटीय बेसिनकृष्णा-गोदावरी (KG), कावेरी, महानदी और अंडमान क्षेत्र

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Samudra Manthan Offshore Exploration Scheme 2026: प्रमुख घटक और वित्तीय आवंटन

अपतटीय अन्वेषण (Offshore Exploration) एक उच्च लागत और उच्च जोखिम वाली गतिविधि है, जिसमें प्रारंभिक खोज से लेकर व्यावसायिक उत्पादन शुरू होने में औसतन 5 से 10 वर्ष का समय लगता है। इस चुनौती से निपटने और निजी निवेश को आकर्षित करने के लिए Samudra Manthan Offshore Exploration Scheme 2026 के चार प्रमुख हिस्सों को रणनीतिक रूप से डिजाइन किया गया है:

  • 1. आधुनिक अपतटीय भूकंपीय डेटा का अधिग्रहण (आवंटन: ₹28,534 करोड़): अपतटीय क्षेत्रों के सटीक मानचित्रण के लिए व्यापक भूकंपीय सर्वेक्षण किए जाएंगे। इसके तहत 2D भूकंपीय डेटा अधिग्रहण के लिए ₹12,000 करोड़, 3D भूकंपीय डेटा के लिए ₹12,534 करोड़ और राष्ट्रीय डेटा रिपॉजिटरी (NDR) के री-प्रोसेसिंग व आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टूल के अनुप्रयोग के लिए ₹4,000 करोड़ आवंटित किए गए हैं।
  • 2. गहरे पानी में खोजपूर्ण ड्रिलिंग (आवंटन: ₹43,200 करोड़): इसके अंतर्गत गहरे पानी के 60 नए खोजपूर्ण कुओं की ड्रिलिंग का लक्ष्य है। सरकार निजी और सार्वजनिक क्षेत्र के ऑपरेटरों के वित्तीय जोखिम को साझा करने के लिए ड्रिलिंग लागत का 50% या अधिकतम ₹675 करोड़ प्रति कुआँ तक प्रत्यक्ष वित्तीय सहायता प्रदान करेगी।
  • 3. साझा अपतटीय अवसंरचना हब का विकास (आवंटन: ₹10,000 करोड़): नई खोजों को तेजी से व्यावसायिक स्तर पर लाने के लिए सामान्य बुनियादी ढांचा तैयार किया जाएगा, जिससे अलग-अलग कंपनियों को अपनी खुद की महंगी पाइपलाइन या प्रोसेसिंग हब बनाने की जरूरत नहीं होगी।
  • 4. तेल और गैस विनिर्माण एवं सेवा क्षेत्र (आवंटन: ₹2,000 करोड़): क्रिटिकल उपकरणों और सेवाओं के स्थानीयकरण (Localisation) और स्वदेशी विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए विशेष समर्पित विनिर्माण क्षेत्रों का विकास किया जाएगा।
  • इसके अतिरिक्त, योजना की निगरानी, डिजिटल हस्तक्षेप और जनसंपर्क गतिविधियों के लिए ₹350 करोड़ अलग से रखे गए हैं।

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Samudra Manthan Offshore Exploration Scheme 2026: जोखिम-साझाकरण मॉडल और नीतिगत सुधार

अन्वेषण के क्षेत्र में निजी निवेश को आकर्षित करने के लिए सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में कई नीतिगत सुधारों को अंजाम दिया है, जिन्हें Samudra Manthan Offshore Exploration Scheme 2026 के माध्यम से धरातल पर उतारा जा रहा है:

  • ‘नो-गो’ क्षेत्रों में 99% की कमी: सरकार ने पहले से प्रतिबंधित ‘नो-गो’ (No-Go) अपतटीय क्षेत्रों के 99% से अधिक हिस्से को अन्वेषण के लिए खोल दिया है। इससे भारत के अनन्य आर्थिक क्षेत्र (EEZ) का 10 लाख वर्ग किलोमीटर से अधिक का क्षेत्र पहली बार खोज के लिए उपलब्ध हुआ है।
  • वैधानिक और विनियामक सुधार: तेल क्षेत्र (विनियमन और विकास) संशोधन अधिनियम, 2025 (Oilfields Amendment Act, 2025) ने इस क्षेत्र को कानूनी स्थिरता प्रदान की है। इसके अतिरिक्त, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियम, 2025 (PNG Rules, 2025) ने ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ और नियमों को सरल बनाने की प्रक्रिया को लागू किया है।
  • अनुबंधों का आधुनिकीकरण: पुराना ‘उत्पादन साझाकरण अनुबंध’ (PSC) मॉडल अब ‘राजस्व साझाकरण अनुबंध’ (RSC) में बदल चुका है, जिससे विनियामक अड़चनें और प्रशासनिक हस्तक्षेप न्यूनतम हो गए हैं।
  • ONGC और ऑयल इंडिया का पुनर्गठन: सरकारी क्षेत्र के दोनों प्रमुख दिग्गजों के प्रदर्शन मानकों को पुनर्गठित कर अन्वेषण (Exploration) गतिविधियों पर विशेष ध्यान केंद्रित करने का निर्देश दिया गया है।

UPSC Prelims Fact Box: EEZ & Hydrocarbon Contracting Models

  • अनन्य आर्थिक क्षेत्र (Exclusive Economic Zone – EEZ): संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि (UNCLOS) के तहत किसी भी तटीय देश के आधार रेखा से 200 समुद्री मील (approx. 370 किमी) तक का समुद्री क्षेत्र ईईजेड कहलाता है, जहां उसे प्राकृतिक संसाधनों की खोज और दोहन का संप्रभु अधिकार होता है।
  • रेवेन्यू शेयरिंग कॉन्ट्रैक्ट (RSC) बनाम प्रोडक्शन शेयरिंग कॉन्ट्रैक्ट (PSC): PSC में ऑपरेटर पहले अपनी निवेश लागत वसूलता था और फिर मुनाफा सरकार के साथ साझा करता था, जिससे विवाद बढ़ते थे। RSC मॉडल में उत्पादन के पहले दिन से ही प्राप्त कुल राजस्व का एक निश्चित हिस्सा सरकार के साथ साझा किया जाता है, जिससे पारदर्शिता बढ़ती है।
  • TOE (Tonne of Oil Equivalent): यह ऊर्जा की एक मानक इकाई है जो एक मीट्रिक टन कच्चे तेल के दहन से प्राप्त होने वाली ऊर्जा के बराबर होती है। MMTOE का अर्थ ‘मिलियन मीट्रिक टन ऑयल इक्विवेलेंट’ होता है।

UPSC & State PCS Mains Analysis: ऊर्जा सुरक्षा, भू-राजनीतिक लचीलापन और आत्मनिर्भर भारत

भारत के पुराने तेल और गैस क्षेत्रों में प्राकृतिक रूप से हर साल लगभग 6 से 7 प्रतिशत उत्पादन की गिरावट दर्ज की जा रही है। इस गिरावट को रोकने और ऊर्जा मांग को पूरा करने के लिए नए क्षेत्रों की लगातार खोज करना आवश्यक है। इस परिदृश्य में, Samudra Manthan Offshore Exploration Scheme 2026 भारत की भू-आर्थिक कूटनीति और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक गेम-चेंजर साबित हो सकती है।

गहरे और अति-गहरे पानी (Deepwater & Ultra-Deepwater) जैसे कि कृष्णा-गोदावरी, कावेरी, महानदी और अंडमान के सुदूर सीमांत बेसिनों में एक खोजपूर्ण कुआँ खोदने की लागत लगभग 125 से 150 मिलियन डॉलर (लगभग ₹1,000 से ₹1,200 करोड़) होती है। निजी क्षेत्र इतनी उच्च जोखिम वाली गतिविधियों में निवेश करने से कतराता है क्योंकि सफलता की कोई गारंटी नहीं होती।

सरकार द्वारा 50% वित्तीय जोखिम साझा (Risk-Sharing) करने का निर्णय वैश्विक तेल दिग्गजों (जैसे एक्सॉनमोबिल, शेवरॉन, शेल) को भारत के अपतटीय क्षेत्रों में उन्नत तकनीक लाने के लिए प्रोत्साहित करेगा। यह न केवल भारत के चालू खाता घाटे (CAD) को संतुलित करेगा, बल्कि देश को वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखलाओं के झटकों (जैसे पश्चिम एशिया के तनाव) से भी सुरक्षित रखेगा। घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने वाला ₹2,000 करोड़ का अंतिम घटक देश में अत्याधुनिक रक्षा-ग्रेड समुद्री इंजीनियरिंग और जहाज निर्माण क्षमताओं के विकास को भी प्रेरित करेगा।


अभ्यास प्रश्न (Practice MCQs)

निम्नलिखित बहुविकल्पीय प्रश्नों के माध्यम से इस अत्यंत महत्वपूर्ण राष्ट्रीय नीति पर अपने ज्ञान का परीक्षण करें:

प्रश्न 1: हाल ही में स्वीकृत Samudra Manthan Offshore Exploration Scheme 2026 के तहत कुल कितना वित्तीय परिव्यय तय किया गया है और इसे किस वर्ष तक लागू किया जाएगा?

(A) ₹55,200 करोड़, वित्त वर्ष 2028-29 तक
(B) ₹84,084 करोड़, वित्त वर्ष 2030-31 तक
(C) ₹1,00,000 करोड़, वित्त वर्ष 2035-36 तक
(D) ₹43,200 करोड़, वित्त वर्ष 2029-30 तक

उत्तर: (B) ₹84,084 करोड़, वित्त वर्ष 2030-31 तक
व्याख्या: केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा स्वीकृत ‘समुद्र मंथन’ योजना (Samudra Manthan Scheme) का कुल बजट ₹84,084 करोड़ है और इसे 31 मार्च 2031 (वित्त वर्ष 2030-31) तक चरण-1 के रूप में लागू किया जाएगा।

प्रश्न 2: ‘समुद्र मंथन’ योजना के तहत अपतटीय गहरे पानी में खोजपूर्ण ड्रिलिंग के लिए वित्तीय सहायता मॉडल के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?

(A) सरकार ड्रिलिंग की कुल लागत का 100% प्रदान करेगी।
(B) सरकार केवल सरकारी कंपनियों जैसे ONGC को ही वित्तीय सहायता देगी।
(C) सरकार पात्र ड्रिलिंग लागत का 50% या अधिकतम ₹675 करोड़ प्रति कुआँ (जो भी कम हो) तक वित्तीय सहायता देगी।
(D) सरकार केवल उथले पानी के कुओं के लिए सहायता प्रदान करेगी।

उत्तर: (C) सरकार पात्र ड्रिलिंग लागत का 50% या अधिकतम ₹675 करोड़ प्रति कुआँ (जो भी कम हो) तक वित्तीय सहायता देगी।
व्याख्या: अत्यधिक जोखिम और उच्च निवेश को देखते हुए, गहरे पानी की खोजपूर्ण ड्रिलिंग को बढ़ावा देने के लिए सरकार जोखिम-साझाकरण मॉडल के तहत 50% लागत या अधिकतम ₹675 करोड़ प्रति कुआँ की सब्सिडी प्रदान करेगी।


Frequently Asked Questions (FAQs)

Q1. Samudra Manthan Offshore Exploration Scheme 2026 क्या है और इसके मुख्य लक्ष्य क्या हैं?

Samudra Manthan Offshore Exploration Scheme 2026 भारत सरकार द्वारा स्वीकृत एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना है, जिसका उद्देश्य देश के अनन्य आर्थिक क्षेत्र (EEZ) में गहरे पानी में कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के अन्वेषण को तेज करना है। इसका मुख्य लक्ष्य घरेलू उत्पादन को 62 MMTOE से बढ़ाकर 80 MMTOE करना और कच्चे तेल के आयात बिल में सालाना ₹1 लाख करोड़ की बचत करना है।

Q2. ‘नो-गो’ (No-Go) क्षेत्रों को हटाने का क्या अर्थ है और इससे अपतटीय क्षेत्र को क्या लाभ हुआ है?

पूर्व में रक्षा, अंतरिक्ष और पर्यावरण संबंधी कारणों से भारत के अनन्य आर्थिक क्षेत्र (EEZ) का एक बड़ा हिस्सा अन्वेषण के लिए प्रतिबंधित था, जिन्हें ‘नो-गो’ क्षेत्र कहा जाता था। सरकार ने इन प्रतिबंधों को 99% से अधिक हटा दिया है, जिससे पहली बार लगभग 10 लाख वर्ग किलोमीटर से अधिक का अपतटीय क्षेत्र अन्वेषण और विकास के लिए उपलब्ध हो गया है।

Q3. इस योजना के तहत वित्तीय सहायता का लाभ किन बेसिनों को मिलेगा?

इस योजना का मुख्य ध्यान भारत के गहरे और अति-गहरे पानी के बेसिनों पर है, जिनमें मुख्य रूप से कृष्णा-गोदावरी (KG), कावेरी, महानदी और अंडमान के समुद्री क्षेत्र शामिल हैं, जहाँ तेल और गैस मिलने की सबसे अधिक संभावनाएँ हैं।


तीन मुख्य निष्कर्ष (3 Key Takeaways)

  • ₹84,084 करोड़ का मेगा बजट: भारत की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ‘समुद्र मंथन’ योजना के तहत व्यापक भूकंपीय डेटा संग्रह, 60 गहरे कुओं की ड्रिलिंग और साझा बुनियादी ढांचा विकसित किया जाएगा।
  • जोखिम-साझाकरण दृष्टिकोण: गहरे पानी की ड्रिलिंग की अत्यधिक उच्च लागत (125-150 मिलियन डॉलर प्रति कुआँ) को देखते हुए सरकार द्वारा 50% वित्तीय सहायता (अधिकतम ₹675 करोड़ प्रति कुआँ) दी जाएगी।
  • विशाल आर्थिक प्रभाव: सफल क्रियान्वयन से भारत का घरेलू उत्पादन बढ़कर 80 MMTOE वार्षिक हो जाएगा, जिससे आयात निर्भरता में कमी आएगी और देश के ₹1 लाख करोड़ सालाना की बचत होगी।

UPSC Relevance (यूपीएससी प्रासंगिकता)

यह विषय मुख्य रूप से सामान्य अध्ययन पेपर-3 (आर्थिक विकास, बुनियादी ढांचा—ऊर्जा, सरकारी बजट और वैज्ञानिक अनुप्रयोग तथा स्वदेशी तकनीक) के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण है।

Official Source (आधिकारिक स्रोत)

यह लेख भारत सरकार के पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय, और पत्र सूचना कार्यालय (PIB Delhi) द्वारा 1 अगस्त 2026 को जारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित है .

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