By: Ishan Verma (Founder & Editor, TheExamHub.in)
रायपुर | 3 जून
When Audit Matters Book: भारत में लोकतंत्र (Democracy) केवल चुनाव तक सीमित नहीं है, बल्कि यह इस बात पर भी टिका है कि जनता की गाढ़ी कमाई (Public Money) का इस्तेमाल कितनी ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ किया जा रहा है। सरकार के इसी खजाने की रखवाली करने वाली संस्था के राज और कहानियों को अब एक ऐतिहासिक किताब के रूप में जनता के सामने पेश किया गया है।
भारत के उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने आज उपराष्ट्रपति भवन (Uprashtrapati Bhawan) में आयोजित एक गरिमामय समारोह में When Audit Matters Book (‘व्हेन ऑडिट मैटर्स: कैग इंटरवेंशंस दैट मेड ए डिफरेंस’) का आधिकारिक रूप से विमोचन किया। इस पुस्तक का संपादन भारत के पूर्व नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) श्री विनोद राय (Vinod Rai) द्वारा किया गया है।
चाणक्य के ‘अर्थशास्त्र’ से लेकर आज के लोकतंत्र तक का सफर
समारोह को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने ऑडिट (लेखापरीक्षा) को ‘लोकतंत्र को मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण साधन’ बताया।
उन्होंने भारतीय इतिहास का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत में जवाबदेही और नैतिक शासन (Ethical Governance) की परंपराएं आज की नहीं हैं। ये भारतीय महाकाव्यों और धर्मग्रंथों में वर्णित ‘धर्म’, ‘राज धर्म’ और सार्वजनिक कर्तव्य की अवधारणाओं में गहराई से निहित हैं।
- कौटिल्य का अर्थशास्त्र: उपराष्ट्रपति ने याद दिलाया कि कौटिल्य (चाणक्य) के ‘अर्थशास्त्र’ में वित्तीय निगरानी और जवाबदेही के सिद्धांत बहुत पहले ही तय कर दिए गए थे।
- आजादी के बाद, भारतीय संविधान ने ‘कानून का शासन’ और संसदीय निगरानी के तहत एक ‘स्वतंत्र कैग (CAG)’ की स्थापना करके इन्हीं आदर्शों को संस्थागत रूप दिया।
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क्यों खास है पूर्व CAG विनोद राय की यह किताब?
यह किताब केवल आंकड़ों का पुलिंदा नहीं है। उपराष्ट्रपति ने इस बात की विशेष सराहना की कि श्री विनोद राय और उनके सहयोगियों ने पूर्व वरिष्ठ ऑडिट अधिकारियों के संस्मरणों को एक साथ जोड़ा है। इस किताब में उन महत्वपूर्ण ‘ऑडिट्स’ के पीछे की अनकही कहानियों को बहुत ही रोचक और किस्सागोई (Anecdotal style) के अंदाज में पेश किया गया है।
किस प्रोजेक्ट का है हिस्सा?
यह प्रकाशन नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर (National University of Singapore) के ‘इंस्टीट्यूट ऑफ साउथ एशियन स्टडीज (ISAS)’ के नेतृत्व में चल रहे एक प्रोजेक्ट का हिस्सा है, जो दक्षिण एशिया में शासन और जवाबदेही का गहराई से परीक्षण करता है।

“ऑडिटर्स की खुद की ईमानदारी सबसे ज्यादा जरूरी”
संसदीय लोकतंत्र में ‘लोक लेखा समितियों’ (Public Accounts Committees – PAC) की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि केवल ऑडिट करना काफी नहीं है, बल्कि ऑडिटिंग सिस्टम में लगातार सुधार होना चाहिए।
उन्होंने डेटा एनालिटिक्स (Data Analytics), तकनीक के अपग्रेडेशन और विषय विशेषज्ञों की जरूरत पर बल दिया। इसके साथ ही उन्होंने एक बहुत कड़ा संदेश भी दिया— “दूसरों का ऑडिट करने वाले ऑडिटर्स को भी सत्यनिष्ठा (Integrity) और नैतिक आचरण के उच्चतम मानकों का पालन करना चाहिए।”
इस भव्य विमोचन समारोह में डॉ. इकबाल सिंह सेवेया (निदेशक, ISAS सिंगापुर), श्री कपीश मेहरा (एमडी, रूपा पब्लिकेशंस), और भारतीय लेखा परीक्षा एवं लेखा सेवा के कई पूर्व वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे जिन्होंने इस किताब में अपना योगदान दिया है।
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आगामी UPSC, SSC, Banking और State PSC परीक्षाओं के लिए इस खबर का ‘निचोड़’ (Quick Revision):
- चर्चित पुस्तक का नाम: When Audit Matters: CAG Interventions That Made a Difference।
- संपादक (Editor): श्री विनोद राय (भारत के पूर्व नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक – CAG)।
- विमोचनकर्ता: भारत के उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन।
- चर्चित अंतर्राष्ट्रीय संस्थान: इंस्टीट्यूट ऑफ साउथ एशियन स्टडीज (ISAS), नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर।
- प्रकाशन: रूपा पब्लिकेशंस (Rupa Publications)।
- चर्चित प्राचीन ग्रंथ: कौटिल्य का ‘अर्थशास्त्र’ (जिसमें वित्तीय निगरानी के सिद्धांत हैं)।
- संविधान में कैग (CAG) का अनुच्छेद: अनुच्छेद 148 (Article 148)।
When Audit Matters Book: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: हाल ही में उपराष्ट्रपति द्वारा विमोचित पुस्तक ‘When Audit Matters’ के संपादक कौन हैं?
उत्तर: इस बहुचर्चित पुस्तक का संपादन भारत के पूर्व नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) श्री ‘विनोद राय’ द्वारा किया गया है। यह किताब महत्वपूर्ण ऑडिट्स के पीछे की कहानियों पर आधारित है।
प्रश्न 2: भारत में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट की जांच संसद की किस समिति द्वारा की जाती है?
उत्तर: भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) द्वारा प्रस्तुत की गई ऑडिट रिपोर्ट की विस्तार से जांच संसद की ‘लोक लेखा समिति (Public Accounts Committee – PAC)’ द्वारा की जाती है।
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