Published on 18 August 2026 | By Ishan Verma, Editor, theexamhub.in
छत्तीसगढ़ में स्थानीय संसाधनों के दोहन, ग्रामीण उद्यमिता और महिला सशक्तिकरण की एक सुंदर तस्वीर सामने आई है। रक्षाबंधन के पावन पर्व के अवसर पर विष्णुभोग धान से बनी राखी ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी रचनात्मकता की छाप छोड़ी है। आज 18 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में आयोजित एक आत्मीय मुलाकात के दौरान छत्तीसगढ़ के नवगठित गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (GPM) जिले की राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) से जुड़ी महिला स्व-सहायता समूह की सदस्यों ने केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री श्री तोखन साहू से भेंट की और उन्हें यह विशेष निर्मित राखी भेंट की।
केंद्रीय राज्य मंत्री श्री तोखन साहू ने महिलाओं के इस अभिनव प्रयास और हुनर की भूरि-भूरि प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि स्थानीय विशिष्टता वाले उत्पादों का मूल्य संवर्धन (Value Addition) करके आजीविका के नए रास्ते तैयार करना न केवल सराहनीय है, बल्कि आत्मनिर्भर भारत और आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ की दिशा में एक बड़ा नीतिगत कदम है। इस अनूठी राखी ने सिद्ध किया है कि छत्तीसगढ़ के पारंपरिक कृषि उत्पाद देश के त्योहारों को भी नया स्वरूप देने में सक्षम हैं।
| महत्वपूर्ण संकेतक | विष्णुभोग धान से बनी राखी और बिहान परियोजना के मुख्य तथ्य व आंकड़े |
|---|---|
| रचनात्मक कला का उदाहरण | विष्णुभोग धान से बनी राखी का निर्माण |
| संबद्ध जिला और समूह | गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (GPM) जिला, बिहान महिला स्व-सहायता समूह (SHG) |
| मुख्य प्रयुक्त सामग्री | पारंपरिक सुगंधित ‘विष्णुभोग’ धान और चावल के दाने |
| सम्मानित व्यक्तित्व | श्री तोखन साहू (केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री, भारत सरकार) |
| नोडल सरकारी मिशन | दीनदयाल अंत्योदय योजना – राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM – बिहान) |
| मुख्य सामाजिक-आर्थिक उद्देश्य | स्थानीय कृषि उत्पादों को बढ़ावा देना, गैर-कृषि आय बढ़ाना और महिला आत्मनिर्भरता |
विष्णुभोग धान से बनी राखी: ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कलात्मक नवाचार का अनूठा संगम
छत्तीसगढ़ का गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिला अपनी प्राकृतिक वन संपदा और उपजाऊ भूमि के लिए जाना जाता है। यहाँ का पारंपरिक और सुगंधित विष्णुभोग चावल अपनी असाधारण खुशबू और महीन दाने के लिए ऐतिहासिक रूप से प्रसिद्ध रहा है:
- कृषि और लोक-कला का एकीकरण: गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के बिहान महिला स्व-सहायता समूह द्वारा तैयार की गई विष्णुभोग धान से बनी राखी पारंपरिक रक्षाबंधन पर्व को एक नया आर्थिक और सांस्कृतिक आयाम दे रही है। महिलाओं ने पारंपरिक रेशमी धागों के साथ विष्णुभोग धान के चमकीले सुनहरे दानों और सुगंधित चावल को जोड़कर एक उत्कृष्ट पर्यावरण-अनुकूल (Eco-friendly) हस्तशिल्प उत्पाद तैयार किया है।
- स्थानीय ब्रांडिंग और अतिरिक्त आय: यह पहल दर्शाती है कि स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कृषि उत्पादों का मूल्य संवर्धन करके अतिरिक्त आय के नए स्रोत विकसित किए जा सकते हैं। इस प्रकार की रचनात्मक कलाओं से ग्रामीण महिलाओं को मौसमी रोजगार मिलता है, जिससे उनकी घरेलू आय (Disposable Income) में सुधार होता है।
केंद्रीय मंत्री तोखन साहू द्वारा बिहान दीदियों के कौशल की सराहना
बिहान महिला स्व-सहायता समूहों (SHGs) द्वारा स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों का उपयोग करके तैयार किए जा रहे विभिन्न उत्पादों ने देश के नीति निर्माताओं का ध्यान खींचा है:
- उद्यमशीलता का प्रेरक उदाहरण: केंद्रीय मंत्री श्री तोखन साहू ने महिलाओं के उद्यम की सराहना करते हुए कहा कि यह पहल दर्शाती है कि विष्णुभोग धान से बनी राखी केवल एक हस्तनिर्मित रक्षासूत्र नहीं है, बल्कि ग्रामीण उद्यमिता का एक उत्कृष्ट पैमाना है। यह बिहान समूह की दीदियों के बढ़ते आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता को दर्शाता है।
- स्थानीय पहचान का वैश्विक संवर्धन: विष्णुभोग धान पेंड्रा और मरवाही क्षेत्र की एक विशिष्ट पहचान है। त्योहारों के माध्यम से इस सुगंधित धान को बाजार में लाकर महिलाएं सीधे तौर पर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त कर रही हैं। कलेक्ट्रेट और जिला प्रशासन द्वारा इन ग्रामीण उत्पादों को राष्ट्रीय और प्रांतीय प्रदर्शनियों में उचित स्थान दिलाने का प्रयास किया जा रहा है।
UPSC & CGPSC Prelims Fact Box: Gaurela-Pendra-Marwahi & “Bihan” Scheme
- गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (GPM): यह छत्तीसगढ़ के 28वें जिले के रूप में 10 फरवरी 2020 को अस्तित्व में आया। इसे तत्कालीन बिलासपुर जिले से विभाजित करके बनाया गया था। इसकी सीमाएं मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले (अमरकंटक क्षेत्र) से लगती हैं। सोन नदी का उद्गम स्थल ‘सोनमुड़ा’ पेंड्रा क्षेत्र के समीप ही स्थित है।
- विष्णुभोग चावल (Vishnubhog Rice): यह छत्तीसगढ़ की एक अत्यंत प्राचीन, सुगंधित और प्रीमियम धान प्रजाति है। इसके दाने अत्यंत बारीक होते हैं और पकने पर इसकी खुशबू अद्वितीय होती है। इसे प्राचीन काल में राजाओं की रसोई का मुख्य हिस्सा माना जाता था।
- बिहान योजना (Bihan / SRLM): छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (SRLM) को स्थानीय भाषा में ‘बिहान’ (जिसका अर्थ ‘नया सवेरा’ होता है) के नाम से जाना जाता है। यह दीनदयाल अंत्योदय योजना – राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) के तहत महिलाओं के स्व-सहायता समूहों को वित्तीय समावेशन, प्रशिक्षण और बाजार संपर्क प्रदान करने वाली देश की प्रमुख योजनाओं में से एक है।
UPSC & State PCS Mains Analysis: सहकारी कृषि, ग्रामीण आजीविका और महिला उद्यमिता के आयाम
मुख्य परीक्षा के ग्रामीण विकास, कृषि अर्थशास्त्र (Agricultural Economics) और सामाजिक कल्याण के दृष्टिकोण से, विष्णुभोग धान से बनी राखी का यह सफल प्रयोग राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के प्रभावी क्रियान्वयन को दर्शाता है। पारंपरिक रूप से भारतीय कृषि में ‘प्रच्छन्न बेरोजगारी’ (Disguised Unemployment) और कम जोत आकार के कारण ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक स्वायत्तता सीमित रही है।
इस चुनौती से निपटने के लिए, गैर-कृषि और ऑफ-फार्म (Off-Farm) गतिविधियों का विकास आवश्यक है। जब ‘बिहान’ योजना के तहत महिलाओं को स्थानीय विशिष्ट भौगोलिक पहचान (GI-like properties) वाले विष्णुभोग धान के मूल्य संवर्धन का प्रशिक्षण दिया जाता है, तो यह सीधे तौर पर कृषि उत्पादों की मूल्य श्रृंखला (Value Chain) में सुधार करता है। यह मॉडल ग्रामीण परिवारों को केवल पारंपरिक खरीफ उत्पादन पर निर्भर रहने के बजाय कुटीर उद्योगों से जोड़ता है, जिससे ग्रामीण ऋणग्रस्तता (Rural Indebtedness) और पलायन में कमी आती है। यह कड़ा प्रयास संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (SDG-5: लैंगिक समानता, SDG-8: सम्मानजनक कार्य और आर्थिक विकास, तथा SDG-1: शून्य गरीबी) की समयबद्ध प्राप्ति की दिशा में छत्तीसगढ़ के सामाजिक-आर्थिक नियोजन की एक मजबूत प्रशासनिक रीढ़ साबित होगा।
अभ्यास प्रश्न (Practice MCQs)
निम्नलिखित बहुविकल्पीय प्रश्नों के माध्यम से इस महत्वपूर्ण आजीविका पहल और छत्तीसगढ़ के प्रांतीय सामान्य ज्ञान का परीक्षण करें:
प्रश्न 1: हाल ही में किस जिले की बिहान महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा तैयार की गई विष्णुभोग धान से बनी राखी केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू को भेंट की गई, जिसे स्थानीय कृषि मूल्य संवर्धन का एक उत्कृष्ट उदाहरण माना गया है?
(A) बिलासपुर जिला
(B) गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिला (GPM District)
(C) मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिला
(D) सरगुजा जिला
उत्तर: (B) गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिला (GPM District)
व्याख्या: गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के बिहान (राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन) समूह की महिलाओं ने जिले के प्रसिद्ध सुगंधित विष्णुभोग धान और चावल से विशेष राखी तैयार कर केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू को भेंट की।
प्रश्न 2: छत्तीसगढ़ के ग्रामीण विकास सुधारों के अंतर्गत क्रियान्वित ‘बिहान’ (Bihan) योजना, जो महिला स्व-सहायता समूहों को सशक्त बनाती है, केंद्र सरकार के किस प्रमुख राष्ट्रीय मिशन का राज्य-स्तरीय नाम है?
(A) प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना
(B) राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM)
(C) मनरेगा (MGNREGA)
(D) राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम
उत्तर: (B) राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM)
व्याख्या: छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन को स्थानीय भाषा में ‘बिहान’ योजना के नाम से जाना जाता है, जिसका अर्थ ग्रामीण महिलाओं के जीवन में एक ‘नया सवेरा’ लाना है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
Q1. विष्णुभोग धान से बनी राखी किस जिले की महिलाओं द्वारा और किस सामग्री से तैयार की गई है?
विष्णुभोग धान से बनी राखी छत्तीसगढ़ के नवगठित जिले गौरेला-पेंड्रा-मरवाही के बिहान महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा वहां के प्रसिद्ध पारंपरिक सुगंधित ‘विष्णुभोग’ धान और चावल के दानों से बनाई गई है।
Q2. बिहान (Bihan) योजना क्या है और छत्तीसगढ़ में इसकी क्या भूमिका है?
‘बिहान’ छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) का राज्य-स्तरीय स्वरूप है। यह ग्रामीण महिलाओं के स्व-सहायता समूहों को ऋण सहायता, तकनीकी प्रशिक्षण, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और स्थानीय उत्पादों के विपणन के अवसर प्रदान करता है।
Q3. केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री श्री तोखन साहू ने इस राखी की क्यों सराहना की?
उन्होंने इसे ग्रामीण महिलाओं के कलात्मक नवाचार, स्थानीय पहचान के संरक्षण और कृषि उत्पादों के मूल्य संवर्धन का एक उत्कृष्ट उदाहरण मानते हुए सराहा। यह ग्रामीण आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने वाली एक सकारात्मक पहल है।
तीन मुख्य निष्कर्ष (3 Key Takeaways)
- कृषि आधारित नवाचार: विष्णुभोग धान से बनी राखी की यह अनूठी पहल साबित करती है कि स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कृषि उत्पादों का मूल्य संवर्धन (Value Addition) करके अतिरिक्त आय के नए स्रोत विकसित किए जा सकते हैं।
- ग्रामीण महिलाओं का स्वावलंबन: ‘बिहान’ (NRLM) के तहत संगठित होकर वनांचल और ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं, जिससे उनके परिवार का सामाजिक-आर्थिक ढांचा सुदृढ़ हो रहा है।
- राष्ट्रीय स्तर पर स्थानीय पहचान का सम्मान: गौरेला-पेंड्रा-मरवाही के इस सुगंधित धान को राखी के रूप में देश के केंद्रीय मंत्रियों तक पहुँचाना छत्तीसगढ़ के पारंपरिक कृषि ब्रांडों की राष्ट्रीय स्वीकार्यता को दर्शाता है।
UPSC & CGPSC Relevance (यूपीएससी और सीजीपीएससी प्रासंगिकता)
यह विषय मुख्य रूप से सीजीपीएससी मुख्य परीक्षा पेपर-5 (छत्तीसगढ़ का कृषि एवं वन भूगोल, ग्रामीण विकास योजनाएं), पेपर-6 (छत्तीसगढ़ का सामाजिक परिदृश्य, महिला सशक्तिकरण एवं स्व-सहायता समूह), तथा संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के सामान्य अध्ययन पेपर-2 (स्व-सहायता समूहों (SHGs) की भूमिका, सरकारी कल्याणकारी नीतियां एवं उनका क्रियान्वयन) और सामान्य अध्ययन पेपर-3 (भारतीय कृषि, मूल्य संवर्धन, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन, खाद्य सुरक्षा और समावेशी विकास) के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण और प्रासंगिक समसामयिक विषय है।
Official Source (आधिकारिक स्रोत)
यह लेख छत्तीसगढ़ शासन के जनसंपर्क विभाग (DPRCG), गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिला कलेक्टरेट प्रशासन, केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA), और छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) द्वारा 18 अगस्त 2026 को जारी किए गए आधिकारिक विवरणों और आजीविका प्रगति रिपोर्टों पर आधारित है।
2 thoughts on “विष्णुभोग धान से बनी राखी: गौरेला-पेंड्रा-मरवाही की बिहान दीदियों ने केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू को सौंपी अनूठी सौगात; सुगंधित विष्णुभोग चावल और धान से रचा रोजगार का नया अध्याय”