Project 17A INS Mahendragiri Commissioning: भारतीय नौसेना के पूर्वी बेड़े में शामिल हुआ देश का छठा स्वदेशी स्टील्थ युद्धपोत

Project 17A INS Mahendragiri Commissioning at Visakhapatnam Project 17A INS Mahendragiri Commissioning at Visakhapatnam

Published on July 11, 2026 | By Ishan Verma, Editor, theexamhub.in


भारतीय नौसेना के इतिहास और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता (Atmanirbharta) की दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ते हुए, स्वदेशी रूप से निर्मित उन्नत स्टील्थ फ्रिगेट (Stealth Frigate) ‘आईएनएस महेंद्रगिरि’ को नौसेना के पूर्वी बेड़े (Eastern Fleet) में शामिल कर लिया गया है। विशाखापत्तनम, आंध्र प्रदेश में 11 जुलाई 2026 को आयोजित एक भव्य और औपचारिक समारोह में रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह की गरिमामयी उपस्थिति में Project 17A INS Mahendragiri Commissioning की प्रक्रिया को सफलतापूर्वक संपन्न किया गया। यह अत्याधुनिक युद्धपोत भारतीय नौसेना की त्रि-आयामी (हवाई, सतह और पानी के नीचे) युद्धक क्षमताओं को अभूतपूर्व रूप से सुदृढ़ करेगा।

यह युद्धपोत ‘प्रोजेक्ट 17ए’ (Project 17A) के तहत निर्मित छठा और अंतिम उन्नत स्टील्थ फ्रिगेट है, जिसे महज डेढ़ साल की रिकॉर्ड समयावधि के भीतर नौसेना में कमीशन किया गया है। रक्षा मंत्री ने अपने संबोधन में इस युद्धपोत को ‘आत्मनिर्भर भारत’ का एक जीवंत प्रतीक और अत्याधुनिक समुद्री प्लेटफॉर्म के निर्माण में देश की बढ़ती डिजाइन व विनिर्माण क्षमता की एक बड़ी सफलता बताया। यूपीएससी (UPSC), राज्य लोक सेवा आयोग (जैसे CGPSC, State PCS) और अन्य सैन्य परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए Project 17A INS Mahendragiri Commissioning रक्षा विज्ञान, स्वदेशीकरण (Indigenisation) और राष्ट्रीय सुरक्षा नीतियों के अंतर्गत एक अत्यंत महत्वपूर्ण समसामयिक (Current Affairs) विषय है। इस विस्तृत विश्लेषण में हम इस स्टील्थ फ्रिगेट की तकनीकी विशिष्टताओं, प्रोजेक्ट 17ए के इतिहास, इसके निर्माण की रिकॉर्ड समय सीमा और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में इसके सामरिक महत्व का गहराई से अध्ययन करेंगे।

Table of Contents

Project 17A INS Mahendragiri Commissioning: त्वरित अवलोकन (Quick Highlights)

आईएनएस महेंद्रगिरि (INS Mahendragiri) और प्रोजेक्ट 17ए से जुड़े सबसे महत्वपूर्ण तथ्यों को नीचे दी गई तालिका के माध्यम से संक्षेपित किया गया है:

महत्वपूर्ण आयामविवरण
युद्धपोत का नामआईएनएस महेंद्रगिरि (INS Mahendragiri) – पर्वत श्रृंखला पर आधारित नाम
परियोजना का नामप्रोजेक्ट 17ए (Project 17A) स्टील्थ फ्रिगेट श्रृंखला
श्रृंखला में स्थानछठा और अंतिम स्वदेशी स्टील्थ फ्रिगेट युद्धपोत
कमीशनिंग तिथि और स्थान11 जुलाई 2026, विशाखापत्तनम (आंध्र प्रदेश)
मुख्य अभिकर्ता (Design & Build)नौसेना का वारशिप डिजाइन ब्यूरो (WDB) और मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL), मुंबई
स्वदेशी सामग्री का प्रतिशत75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग
विस्थापन और गतिलगभग 6,670 टन विस्थापन क्षमता और अधिकतम 28 नॉट (Knots) की गति
मुख्य मिसाइल प्रणालीब्रह्मोस (BrahMos) सुपरसोनिक सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइल

Project 17A INS Mahendragiri Commissioning की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

भारतीय नौसेना को एक ‘ब्लू-वाटर नेवी’ (Blue-water Navy) के रूप में स्थापित करने के लिए स्वदेशी स्तर पर युद्धपोतों का निर्माण हमेशा से एक प्राथमिक रणनीतिक लक्ष्य रहा है। प्रोजेक्ट 17ए (Project 17A) का विकास भारतीय नौसेना के ‘शिवालिक वर्ग’ (Project 17 – Shivalik Class) के फ्रिगेट्स के उन्नत अनुवर्ती के रूप में किया गया है। इस परियोजना के तहत उन्नत स्टील्थ विशेषताओं, अत्याधुनिक सेंसर प्रणालियों और आधुनिक हथियार प्रणालियों का एकीकरण किया गया है।

प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए यह जानना आवश्यक है कि पिछले 1.5 वर्षों के दौरान इस श्रृंखला के छह युद्धपोतों को नौसेना के बेड़े में शामिल किया गया है:

  1. आईएनएस नीलगिरि (INS Nilgiri): जनवरी 2025 (श्रृंखला का पहला युद्धपोत)
  2. आईएनएस उदयगिरि (INS Udaygiri): अगस्त 2025
  3. आईएनएस हिमगिरि (INS Himgiri): अगस्त 2025
  4. आईएनएस तारागिरि (INS Taragiri): अप्रैल 2026
  5. आईएनएस दूनागिरि (INS Dunagiri): जून 2026
  6. आईएनएस महेंद्रगिरि (INS Mahendragiri): जुलाई 2026 (अंतिम युद्धपोत)

इन सभी जहाजों का नाम भारत की प्रसिद्ध पर्वत श्रृंखलाओं पर रखा गया है। पूर्वी घाट (Eastern Ghats) की महेंद्रगिरि पर्वत श्रृंखला पर आधारित यह युद्धपोत ‘सामर्थ्य, अडिगता और अदम्य संकल्प’ का प्रतीक है, जिसका ध्येय वाक्य (Motto) “माइटी, मैजेस्टिक, मैचलेस” (Mighty, Majestic, Matchless) है। इस प्रकार, हाल ही में संपन्न हुआ Project 17A INS Mahendragiri Commissioning इस पूरी श्रृंखला की ऐतिहासिक सफलता और भारतीय जहाज निर्माण की परिपक्वता को दर्शाता है।

आईएनएस महेंद्रगिरि की प्रमुख तकनीकी विशेषताएं

आईएनएस महेंद्रगिरि केवल एक लड़ाकू जहाज नहीं है, बल्कि यह अत्याधुनिक समुद्री इंजीनियरिंग का एक उत्कृष्ट उदाहरण है:

1. स्टील्थ तकनीक और रडार सिग्नेचर में कमी

युद्धपोत को इस तरह डिजाइन किया गया है कि इसका रडार क्रॉस-सेक्शन (Radar Cross-section – RCS) न्यूनतम हो सके। इसका मतलब है कि दुश्मन के रडार और थर्मल इमेजरों के लिए इस जहाज को ट्रैक करना बेहद मुश्किल होगा। यह अदृश्यता या स्टील्थ विशेषता इसे आधुनिक समुद्री युद्ध में बहुत बड़ी बढ़त प्रदान करती है।

2. घातक हथियार प्रणालियां (Weapon Systems)

इस युद्धपोत में 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है, जिसके शस्त्रागार में निम्नलिखित घटक शामिल हैं:

  • ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल: यह दुनिया की सबसे तेज और सबसे घातक क्रूज मिसाइलों में से एक है, जो सतह से सतह पर मार करने की अदम्य क्षमता रखती है।
  • सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें (MRSAM): यह उन्नत मल्टी-फंक्शन रडार के साथ मिलकर हवाई खतरों (दुश्मन के फाइटर जेट, ड्रोन और एंटी-शिप मिसाइलों) को लंबी दूरी पर ही डिटेक्ट कर नष्ट कर सकती है।
  • पनडुब्बी रोधी क्षमता (ASW): इसमें स्वदेशी रॉकेट लॉन्चर, टॉरपीडो लॉन्चर और एक एकीकृत पनडुब्बी रोधी रक्षा प्रणाली (Integrated Anti-Submarine Defence System) स्थापित की गई है।
  • क्लोज-इन वेपन सिस्टम (CIWS): बेहद नजदीकी हवाई और मिसाइल खतरों से रक्षा के लिए अत्याधुनिक क्लोज-इन वेपन सिस्टम और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर (EW) सूट स्थापित किया गया है।

3. प्रणोदन और नेविगेशन (Propulsion)

यह फ्रिगेट एक उन्नत कॉम्बाइंड डीजल या गैस (CODOG) प्रणोदन प्रणाली से लैस है, जिसके माध्यम से यह पानी में 28 नॉट (लगभग 52 किमी/घंटा) की उच्च गति प्राप्त कर सकता है। साथ ही, इसके एकीकृत प्लेटफार्म प्रबंधन प्रणाली (IPMS) और नेटवर्क-केंद्रित लड़ाकू प्रणालियां जहाज की परिचालन क्षमता को स्वचालित और त्वरित बनाती हैं।

“INS Mahendragiri न केवल हमारी तटीय सीमाओं की रक्षा करेगा बल्कि गहरे महासागरों (Deep Blue Waters) में भी भारत के सामरिक हितों की रक्षा करेगा। यह अत्याधुनिक तकनीकों और पारंपरिक सैन्य क्षमता के सुंदर समन्वय का प्रतीक है।”— रक्षा मंत्री, श्री राजनाथ सिंह

मझगांव डॉक (MDL) की जहाज निर्माण दक्षता में रिकॉर्ड सुधार

समारोह को संबोधित करते हुए नौसेना स्टाफ के प्रमुख एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन ने जहाज निर्माण के क्षेत्र में हासिल किए गए ऐतिहासिक रिकॉर्ड की सराहना की। इस फ्रिगेट के निर्माण में एमडीएल (MDL) और नौसेना ने अभूतपूर्व मील के पत्थर स्थापित किए हैं:

  • लांच से डिलीवरी के समय में 50% की कमी: युद्धपोत के लांच से लेकर डिलीवरी के बीच की समय सीमा को आधा कर दिया गया। पहले यह अवधि लगभग 63 महीने हुआ करती थी, जो इस परियोजना में घटकर महज 31 महीने रह गई।
  • कुल निर्माण समय में 20% की बचत: जहाज के कुल निर्माण समय को 95 महीनों से घटाकर 75 महीने कर दिया गया है।
  • एकल समुद्री परीक्षण (Single Sea Trial): सामान्यतः किसी युद्धपोत को पूरी तरह स्वीकृत करने के लिए 5 से 7 समुद्री परीक्षण करने पड़ते हैं। लेकिन आईएनएस महेंद्रगिरि की तकनीकी उत्कृष्टता के कारण इसके सभी आवश्यक विश्लेषण महज एक ही समुद्री परीक्षण में सफलतापूर्वक पूर्ण कर लिए गए।

ये सभी उपलब्धियां 200 से अधिक भारतीय उद्योगों, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs), वारशिप ओवरसीइंग टीम और एमडीएल के कार्यबल के आपसी समन्वय के कारण संभव हुई हैं, जो Project 17A INS Mahendragiri Commissioning की प्रक्रिया को राष्ट्रीय गौरव का विषय बनाती हैं।

सामरिक और भू-राजनीतिक महत्व: पूर्वी बेड़े में समावेशन

आईएनएस महेंद्रगिरि का नौसेना के पूर्वी बेड़े (Eastern Fleet – जिसे Sunrise Fleet भी कहा जाता है) में शामिल होना हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है:

1. भारत का नेट सिक्योरिटी प्रोवाइडर (Net Security Provider) बनना

हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में चीन के बढ़ते नौसैनिक आधार और घुसपैठ को संतुलित करने के लिए भारत को एक मजबूत औरcombat-ready नौसेना की आवश्यकता है। भारतीय नौसेना ने आपदा राहत अभियानों (HADR), समुद्री डकैती रोधी अभियानों और संकट ग्रस्त क्षेत्रों से नागरिकों को सुरक्षित निकालने में अपनी त्वरित प्रतिक्रिया के बल पर हिंद-प्रशांत में ‘फर्स्ट रिस्पॉन्डर’ (First Responder) और ‘पसंदीदा सुरक्षा भागीदार’ (Preferred Security Partner) की पहचान अर्जित की है।

2. ऑपरेशन ऊर्जा सुरक्षा (Operation Urja Suraksha)

रक्षा मंत्री ने पश्चिमी एशिया के संघर्ष के दौरान भारतीय नौसेना द्वारा चलाई गई ‘ऑपरेशन ऊर्जा सुरक्षा’ का विशेष उल्लेख किया। इस ऑपरेशन के तहत भारतीय नौसेना ने आवश्यक माल ले जा रहे 18 व्यापारिक जहाजों (जिनका मूल्य ₹9,000 करोड़ से अधिक था) को सुरक्षित रूप से एस्कॉर्ट (Escort) किया। यह दर्शाता है कि नौसेना केवल एक युद्धक शक्ति नहीं है, बल्कि देश के आर्थिक हितों और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला की भी सबसे बड़ी रक्षक है। Project 17A INS Mahendragiri Commissioning इस समुद्री आर्थिक सुरक्षा को और अधिक सुदृढ़ बनाएगा।

3. भारत सरकार की मैरीटाइम विज़न

भारत सरकार अपनी तटीय सुरक्षा और जहाज निर्माण उद्योग को राष्ट्रीय जीडीपी का मुख्य हिस्सा बनाने के लिए प्रतिबद्ध है:

  • मैरीटाइम इंडिया विज़न 2030 (Maritime India Vision 2030): बंदरगाहों का आधुनिकीकरण, अंतर्देशीय जलमार्गों का विस्तार और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क का सुदृढ़ीकरण करना।
  • शिपबिल्डिंग वित्तीय सहायता योजना (SBFA): स्वदेशी जहाज निर्माण उद्योग और अनुसंधान को वित्तीय सहयोग और बुनियादी ढांचा प्रदान करना, ताकि भारत को वैश्विक जहाज निर्माण का केंद्र (Global Shipbuilding Hub) बनाया जा सके।

महानदी और सागर (SAGAR & MAHASAGAR Vision)
भारत सरकार हिंद-प्रशांत क्षेत्र में ‘सागर’ (Security and Growth for All in the Region – SAGAR) और समुद्री सहयोग के तहत ‘महासागर’ (MAHASAGAR) विज़न का पालन करती है। आईएनएस महेंद्रगिरि का पूर्वी बेड़े में शामिल होना बंगाली खाड़ी, मलक्का जलडमरूमध्य और व्यापक प्रशांत क्षेत्र में समुद्री संप्रभुता सुनिश्चित करने के इन विज़नों को गति प्रदान करता है।


प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए विशेष विश्लेषण (Exam Relevance Section)

यूपीएससी और राज्य सेवा मुख्य परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए यह टॉपिक विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा आंतरिक सुरक्षा के खंड (GS Paper III) के तहत एक अत्यंत प्रासंगिक समसामयिक विषय है।

UPSC Prelims Fact Box: Project 17A INS Mahendragiri Commissioning

  • मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL): मुंबई में स्थित भारत सरकार का एक प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम (PSU) है, जो नौसेना के लिए युद्धपोतों और पनडुब्बियों के निर्माण में विशेषज्ञता रखता है।
  • वारशिप डिजाइन ब्यूरो (WDB): भारतीय नौसेना की आंतरिक डिजाइन विंग, जो पहले स्वदेशी युद्धपोतों की डिजाइन का कार्य करती है।
  • स्टील्थ फ्रिगेट (Stealth Frigate): मध्यम आकार के वे युद्धपोत जो हवाई, सतह और पनडुब्बी रोधी युद्ध में समान रूप से सक्षम होते हैं और दुश्मन के रडार से अदृश्य रहने की क्षमता रखते हैं।
  • CODOG प्रणाली: ‘कॉम्बाइंड डीजल या गैस’ प्रणोदन तकनीक, जिसमें सामान्य गति के लिए डीजल इंजन और तेज गति के लिए गैस टरबाइन का उपयोग किया जाता है।

UPSC Mains Analysis (GS Paper III: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा सुरक्षा)

प्रश्न: “युद्धपोत निर्माण का स्वदेशीकरण (Indigenisation of Shipbuilding) केवल देश की सैन्य शक्ति को सुदृढ़ नहीं करता, बल्कि यह राष्ट्र की औद्योगिक और विनिर्माण अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़े उत्प्रेरक (Catalyst) के रूप में कार्य करता है।” हाल ही में संपन्न हुए Project 17A INS Mahendragiri Commissioning के विशेष संदर्भ में इस कथन का समालोचनात्मक विश्लेषण कीजिए।

उत्तर की रूपरेखा:

  • प्रस्तावना: विशाखापत्तनम में आईएनएस महेंद्रगिरि के पूर्वी बेड़े में शामिल होने और Project 17A INS Mahendragiri Commissioning के महत्व से उत्तर प्रारंभ करें।
  • सैन्य सुदृढ़ीकरण और रणनीतिक संप्रभुता: समझाएं कि कैसे 75% स्वदेशी सामग्री वाले स्टील्थ फ्रिगेट का नौसेना में समावेशन गहरे समुद्र (Blue Waters) में चीन की घुसपैठ को संतुलित करने और ‘सागर’ (SAGAR) विज़न को साकार करने में मदद करता है। ब्रह्मोस और एंटी-सबमरीन क्षमता का उल्लेख करें।
  • आर्थिक और विनिर्माण उत्प्रेरक (Economic Catalyst):
    • संबद्ध उद्योगों का विकास: युद्धपोत निर्माण से स्टील, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेंसर, सॉफ्टवेयर, सटीक इंजीनियरिंग (Precision Engineering) और लॉजिस्टिक्स जैसे बहु-आयामी क्षेत्रों में विकास होता है।
    • रोजगार और अनुसंधान: आईएनएस महेंद्रगिरि के निर्माण में 200 से अधिक भारतीय उद्योगों और MSMEs की भागीदारी ने स्थानीय रोजगार और तकनीकी कौशल का विकास किया है।
    • आत्मनिर्भर भारत: विदेशी आयातों पर निर्भरता कम होने से रक्षा बजट की बचत होती है और घरेलू रक्षा विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र (Naval-Industrial Ecosystem) मजबूत होता है।
  • चुनौतियां: कतिपय महत्वपूर्ण इंजनों और सेंसरों के लिए अभी भी कुछ हद तक विदेशी आयात पर निर्भरता, अनुसंधान एवं विकास (R&D) पर जीडीपी का कम आवंटन, और निजी क्षेत्र के रक्षा स्टार्टअप्स को अधिक अवसर देने की आवश्यकता।
  • निष्कर्ष: यह निष्कर्ष दें कि ‘महेंद्रगिरि’ का कमीशनिंग इस बात की पुष्टि करता है कि भारत अब केवल एक रक्षा आयातक नहीं रहा, बल्कि वह एक अग्रणी रक्षा निर्माता और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में ‘नेट सिक्योरिटी प्रोवाइडर’ के रूप में अपनी भूमिका का निर्वहन करने के लिए पूरी तरह सक्षम है।

संबद्ध स्टेटिक जीके (Static GK Connection)

भारतीय नौसेना और प्रोजेक्ट 17ए से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण स्टेटिक सामान्य ज्ञान तथ्य जो परीक्षाओं में पूछे जा सकते हैं:

  1. पूर्वी नौसेना कमान (Eastern Naval Command): इसका मुख्यालय विशाखापत्तनम, आंध्र प्रदेश में स्थित है। यह बंगाल की खाड़ी और हिंद महासागर में परिचालन कमान का मुख्य केंद्र है। आईएनएस महेंद्रगिरि इसी कमान के पूर्वी बेड़े का हिस्सा बना है।
  2. ब्रह्मोस मिसाइल (BrahMos Missile): यह भारत के रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) और रूस के एनपीओ मशिनोस्त्रोयेनिया (NPO Mashinostroyeniya) के बीच विकसित एक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है। इसका नाम भारत की ब्रह्मपुत्र और रूस की मस्कवा नदी के नाम पर रखा गया है।
  3. ऑपरेशन सिंधु (Operation Sindoor): रक्षा मंत्री द्वारा उल्लेखित वह प्रमुख नौसैनिक और सैन्य अभियान जिसके तहत अत्याधुनिक तकनीकों और पारंपरिक क्षमताओं का बेहतरीन समन्वय प्रदर्शित किया गया था।

एक मिनट का रिवीज़न (One Minute Revision)

त्वरित परीक्षा उपयोगी पुनरीक्षण के लिए Project 17A INS Mahendragiri Commissioning के सबसे महत्वपूर्ण बिंदु:

  • Final Frigate: आईएनएस महेंद्रगिरि प्रोजेक्ट 17ए के तहत निर्मित छठा और अंतिम स्टील्थ फ्रिगेट युद्धपोत है।
  • Inaugurated By: रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह द्वारा 11 जुलाई 2026 को विशाखापत्तनम में नौसेना में कमीशन किया गया।
  • Eastern Fleet: यह युद्धपोत भारतीय नौसेना के विशाखापत्तनम स्थित पूर्वी बेड़े (Sunrise Fleet) का हिस्सा बना है।
  • MDL Achievement: मझगांव डॉक ने इसके निर्माण के समय (लांच से डिलीवरी) को 63 महीनों से घटाकर रिकॉर्ड 31 महीने कर दिया है।
  • BrahMos Armored: यह युद्धपोत ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल, एमआरएसएएम हवाई रक्षा प्रणाली और पनडुब्बी रोधी हथियारों से लैस है।
  • Net Security Provider: यह हिंद-प्रशांत में ‘फर्स्ट रिस्पॉन्डर’ और भारत के ‘सागर’ (SAGAR) विज़न को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

अभ्यास प्रश्न (Practice MCQs)

निम्नलिखित बहुविकल्पीय प्रश्नों के माध्यम से इस कूटनीतिक और सैन्य विषय पर अपने ज्ञान का परीक्षण करें:

प्रश्न 1: हाल ही में जुलाई 2026 में विशाखापत्तनम में नौसेना में शामिल किए गए छठे और अंतिम प्रोजेक्ट 17ए स्टील्थ फ्रिगेट का क्या नाम है?

(A) आईएनएस दूनागिरि (INS Dunagiri)
(B) आईएनएस तारागिरि (INS Taragiri)
(C) आईएनएस महेंद्रगिरि (INS Mahendragiri)
(D) आईएनएस नीलगिरि (INS Nilgiri)

उत्तर: (C) आईएनएस महेंद्रगिरि (INS Mahendragiri)
व्याख्या: 11 जुलाई 2026 को रक्षा मंत्री की उपस्थिति में ‘आईएनएस महेंद्रगिरि’ को आधिकारिक रूप से नौसेना में शामिल किया गया, जो प्रोजेक्ट 17ए श्रृंखला का छठा और अंतिम युद्धपोत है।

प्रश्न 2: प्रोजेक्ट 17ए स्टील्थ फ्रिगेट श्रृंखला के तहत युद्धपोतों का डिजाइन मुख्य रूप से नौसेना की किस आंतरिक विंग द्वारा किया गया है?

(A) डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट आर्गेनाईजेशन (DRDO)
(B) वारशिप डिजाइन ब्यूरो (Warship Design Bureau – WDB)
(C) भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO)
(D) मझगांव डॉक डिजाइन विंग

उत्तर: (B) वारशिप डिजाइन ब्यूरो (Warship Design Bureau – WDB)
व्याख्या: इन अत्याधुनिक युद्धपोतों का पूर्ण स्वदेशी डिजाइन भारतीय नौसेना के ‘वारशिप डिजाइन ब्यूरो’ द्वारा तैयार किया गया है, जो हमारी उत्कृष्ट डिजाइन क्षमता को दर्शाता है।

प्रश्न 3: ‘Project 17A INS Mahendragiri Commissioning’ की प्रक्रिया के तहत युद्धपोत आईएनएस महेंद्रगिरि का निर्माण निम्नलिखित में से किस संस्था द्वारा किया गया है?

(A) गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE), कोलकाता
(B) कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL), कोच्चि
(C) मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL), मुंबई
(D) हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड (HSL), विशाखापत्तनम

उत्तर: (C) मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL), मुंबई
व्याख्या: प्रोजेक्ट 17ए के तहत इस फ्रिगेट का निर्माण मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL), मुंबई द्वारा अत्यधिक उन्नत और रिकॉर्ड समय सीमा के भीतर किया गया है।

प्रश्न 4: आईएनएस महेंद्रगिरि युद्धपोत के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

1. इसमें 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है।
2. यह सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस (BrahMos) को दागने की क्षमता से लैस है।
उपरोक्त में से कौन सा/से कथन सत्य है/हैं?

(A) केवल 1
(B) केवल 2
(C) 1 और 2 दोनों
(D) न तो 1 और न ही 2

उत्तर: (C) 1 और 2 दोनों
व्याख्या: दोनों कथन पूरी तरह सही हैं। आईएनएस महेंद्रगिरि एक अत्याधुनिक स्वदेशी युद्धपोत है जो 75% स्वदेशी सामानों से बना है और इस पर ब्रह्मोस क्रूज मिसाइलें तैनात की जा सकती हैं।

प्रश्न 5: हाल ही में भारतीय नौसेना द्वारा पश्चिमी एशिया संघर्ष के दौरान व्यापारिक जहाजों को सुरक्षित रास्ता देने के लिए चलाए गए सफल सुरक्षा ऑपरेशन का क्या नाम था?

(A) ऑपरेशन संजीवनी
(B) ऑपरेशन सिंधु
(C) ऑपरेशन ऊर्जा सुरक्षा (Operation Urja Suraksha)
(D) ऑपरेशन सागर रक्षा

उत्तर: (C) ऑपरेशन ऊर्जा सुरक्षा (Operation Urja Suraksha)
व्याख्या: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में बताया कि ‘ऑपरेशन ऊर्जा सुरक्षा’ के तहत नौसेना ने ₹9,000 करोड़ से अधिक मूल्य के आवश्यक माल ले जा रहे 18 व्यापारिक जहाजों को सुरक्षित रूप से उनके गंतव्य तक पहुँचाया।


Frequently Asked Questions (FAQs)

Q1. Project 17A INS Mahendragiri Commissioning का क्या महत्व है?

Project 17A INS Mahendragiri Commissioning भारतीय नौसेना के प्रोजेक्ट 17ए के तहत निर्मित छठे और अंतिम स्वदेशी स्टील्थ फ्रिगेट को नौसेना के पूर्वी बेड़े में शामिल करने की प्रक्रिया है। यह भारत की रक्षा विनिर्माण क्षमता में आत्मनिर्भरता और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री हितों की सुरक्षा को सुदृढ़ करता है।

Q2. ‘आईएनएस महेंद्रगिरि’ का नाम किस पर आधारित है और इसका ध्येय वाक्य क्या है?

इस युद्धपोत का नाम पूर्वी घाट की प्रसिद्ध महेंद्रगिरि पर्वत श्रृंखला पर रखा गया है, जो दृढ़ता और अदम्य संकल्प का प्रतीक है। इसका आधिकारिक ध्येय वाक्य ‘Mighty, Majestic, Matchless’ (माइटी, मैजेस्टिक, मैचलेस) है।

Q3. इस फ्रिगेट के निर्माण में एमडीएल (MDL) ने क्या रिकॉर्ड बनाया है?

मझगांव डॉक (MDL) ने इस फ्रिगेट के लांच से डिलीवरी के समय को लगभग 50% तक कम कर दिया है, जो 63 महीनों से घटकर महज 31 महीने रह गया। साथ ही, इसके सभी तकनीकी मापदंडों और समुद्र में संचालन की कसौटी को सामान्यतः 5 से 7 परीक्षणों के बजाय महज एक ही समुद्री परीक्षण (Single Sea Trial) में पूरा कर लिया गया।

Q4. आईएनएस महेंद्रगिरि पर कौन-कौन से घातक हथियार तैनात किए गए हैं?

यह युद्धपोत ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल, मीडियम-रेंज सरफेस-टू-एयर मिसाइल (MRSAM), पनडुब्बी रोधी रॉकेट व टॉरपीडो लॉन्चर, एकीकृत पनडुब्बी रोधी रक्षा प्रणाली, और क्लोज-इन वेपन सिस्टम (CIWS) से लैस है।

Q5. भारत सरकार का ‘सागर’ (SAGAR) विज़न क्या है?

‘सागर’ (Security and Growth for All in the Region – SAGAR) विज़न का अर्थ ‘क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास’ है। इसके तहत भारत हिंद महासागर और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में एक जिम्मेदार कूटनीतिक शक्ति और ‘नेट सिक्योरिटी प्रोवाइडर’ के रूप में सभी देशों के साथ शांतिपूर्ण समुद्री सहयोग सुनिश्चित करता है।


निष्कर्ष (Conclusion)

विशाखापत्तनम में आयोजित हुई यह भव्य कमीशनिंग प्रक्रिया Project 17A INS Mahendragiri Commissioning भारतीय रक्षा विनिर्माण उद्योग और जहाज निर्माण क्षेत्र के स्वर्ण युग की शुरुआत का प्रतीक है। प्रोजेक्ट 17ए के तहत महज 1.5 वर्षों के भीतर 6 अत्यंत जटिल, अत्याधुनिक और घातक स्टील्थ युद्धपोतों का निर्माण कर नौसेना को सौंपना मझगांव डॉक और हमारे रक्षा वैज्ञानिकों की उत्कृष्ट तकनीकी क्षमता को दर्शाता है।

आईएनएस महेंद्रगिरि का नौसेना के विशाखापत्तनम स्थित पूर्वी बेड़े (Sunrise Fleet) में शामिल होना बंगाली खाड़ी, हिंद महासागर और व्यापक हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री हितों की संप्रभुता को अजेय बनाएगा। ‘ऑपरेशन ऊर्जा सुरक्षा’ जैसी सफलताओं से सिद्ध है कि भारतीय नौसेना न केवल देश की सीमा रक्षक है, बल्कि भारत के आर्थिक विकास और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला की भी सबसे बड़ी रक्षक है। ‘सागर’ (SAGAR) और ‘महासागर’ (MAHASAGAR) के विज़न को साकार करते हुए, यह “माइटी, मैजेस्टिक, मैचलेस” युद्धपोत आने वाले समय में गहरे समुद्रों में भारत के तिरंगे का गौरव बनाए रखेगा और वैश्विक स्तर पर भारत को एक जिम्मेदार ‘नेट सिक्योरिटी प्रोवाइडर’ और सुरक्षित समुद्री महाशक्ति के रूप में स्थापित करने में केंद्रीय भूमिका निभाएगा।

Official Sources:

2 thoughts on “Project 17A INS Mahendragiri Commissioning: भारतीय नौसेना के पूर्वी बेड़े में शामिल हुआ देश का छठा स्वदेशी स्टील्थ युद्धपोत

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *