रायपुर, 23 सितम्बर 2026: छत्तीसगढ़ में नवजात शिशुओं और बच्चों के शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक और सामाजिक विकास को एक नई वैज्ञानिक दिशा देने के उद्देश्य से महिला एवं बाल विकास विभाग ने एक विशाल राज्यव्यापी पहल शुरू की है। देश भर में आयोजित हो रहे 9वें राष्ट्रीय पोषण माह 2026 के अंतर्गत बच्चों के समुचित पोषण, स्वस्थ विकास और संवेदनशील परवरिश (Responsive Parenting) को बढ़ावा देने के लिए बुधवार को Parvarish Ke Champion Chhattisgarh कार्यक्रम के तहत एक उच्चस्तरीय राज्य स्तरीय ऑनलाइन उन्मुखीकरण (वेबिनार) का आयोजन किया गया।
महिला एवं बाल विकास विभाग के नवा रायपुर स्थित संचालनालय से आयोजित इस वृहद वेबिनार में प्रदेश के सभी 33 जिलों से जिला कार्यक्रम अधिकारी (DPO), बाल विकास परियोजना अधिकारी (CDPO), पर्यवेक्षक (Supervisors) एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं सहित रिकॉर्ड 11,669 प्रतिभागियों ने सक्रिय रूप से सहभागिता की। कार्यक्रम को महिला एवं बाल विकास विभाग के संयुक्त संचालक श्री डी. एस. मराबी, यूनिसेफ (UNICEF) कंसल्टेंट श्रीमती गार्गी परदेशी एवं श्री रविन्द्र कुमार यादव ने संबोधित किया। वक्ताओं ने बच्चों के सर्वांगीण विकास में परिवार और समुदाय की भूमिका को रेखांकित करते हुए संवेदनशील परवरिश के विभिन्न आयामों पर विस्तृत मार्गदर्शन दिया।
इस उन्मुखीकरण कार्यक्रम में विशेष रूप से तैयार की गई मार्गदर्शिका ‘परवरिश के चैम्पियन की वर्णमाला’ पुस्तक के ‘प से पोषण’ विषय को केंद्र में रखते हुए आगामी दिनों में आंगनबाड़ी केंद्रों में आयोजित होने वाले ‘पालक सत्रों’ (Parent Sessions) की कार्यप्रणाली साझा की गई। इसके साथ ही, मानव जीवन के ‘पहले 1000 दिनों’ (First 1,000 Days) में पोषण की अपरिहार्यता, जन्म के एक घंटे के भीतर नवजात को मां का पहला गाढ़ा पीला दूध (कोलोस्ट्रम) पिलाने, 6 माह तक केवल स्तनपान और स्थानीय पोषक तत्वों के उपयोग पर जोर दिया गया।
| परवरिश के चैम्पियन उन्मुखीकरण: मुख्य तथ्य (Quick Facts) | विवरण |
|---|---|
| कार्यक्रम का नाम | Parvarish Ke Champion Chhattisgarh (ऑनलाइन उन्मुखीकरण वेबिनार) |
| अवसर एवं संदर्भ | 9वां राष्ट्रीय पोषण माह 2026 (9th National Poshan Maah) |
| आयोजक संस्था | संचालनालय, महिला एवं बाल विकास विभाग, छत्तीसगढ़ शासन |
| कुल प्रतिभागी संख्या | 11,669 प्रतिभागी (DPO, CDPO, पर्यवेक्षक एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ता) |
| मुख्य वक्ता एवं विशेषज्ञ | श्री डी. एस. मराबी (संयुक्त संचालक), श्रीमती गार्गी परदेशी (यूनिसेफ), श्री रविन्द्र कुमार यादव (यूनिसेफ) |
| केंद्रीय संदर्भ पुस्तक / थीम | ‘परवरिश के चैम्पियन की वर्णमाला’ ➔ ‘प से पोषण’ |
| आगामी मैदानी गतिविधि | आंगनबाड़ी केंद्रों में नियमित ‘पालक सत्रों’ (Parent Sessions) का आयोजन |
| पोषण का मुख्य फोकस | जीवन के प्रथम 1,000 दिन (स्तनपान, पूरक आहार एवं स्थानीय खाद्य विविधता) |
संवेदनशील परवरिश (Responsive Parenting): केवल शारीरिक नहीं, मानसिक व भावनात्मक विकास
Parvarish Ke Champion Chhattisgarh के तहत मैदानी अमले को संवेदनशील परवरिश की अवधारणा को जन-जन तक पहुँचाने का प्रशिक्षण दिया गया:
- संवेदनशील परवरिश की परिभाषा: बच्चों के केवल खान-पान तक सीमित न रहकर उनके मानसिक, भावनात्मक और सामाजिक विकास के लिए घर में सुरक्षित, स्नेहपूर्ण और सहयोगी वातावरण का निर्माण करना।
- सकारात्मक संवाद: माता-पिता का बच्चों के साथ प्रतिदिन आत्मीय संवाद करना, उनके डर, जिज्ञासाओं और जरूरतों को समझना तथा उनके साथ सकारात्मक और गैर-हिंसक व्यवहार अपनाना।
- ‘प से पोषण’ और पालक सत्र: ‘परवरिश के चैम्पियन की वर्णमाला’ पुस्तक के आधार पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताएं गांवों में माताओं और पिताओं के साथ ‘पालक सत्र’ आयोजित करेंगी, जहाँ उन्हें खेल-खेल में बच्चों को सिखाने और पोषित करने के व्यावहारिक तौर-तरीके बताए जाएंगे।
जीवन के पहले 1000 दिनों में पोषण का विशेष महत्व
वेबिनार में विशेषज्ञों ने वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर शिशु के शुरुआती 1000 दिनों को जीवन की सबसे महत्वपूर्ण खिड़की (Critical Window) बताया:
- जन्म के एक घंटे के भीतर स्तनपान: प्रसव के तुरंत बाद एक घंटे के भीतर नवजात को मां का दूध प्रारंभ कराना शिशु मृत्यु दर (IMR) घटाने की सबसे पहली सीढ़ी है।
- 6 माह तक केवल स्तनपान (Exclusive Breastfeeding): शिशु को छह माह की आयु तक पानी या घुट्टी सहित बाहर की कोई भी वस्तु न देते हुए केवल मां का दूध पिलाना अनिवार्य है।
- उम्र अनुरूप पूरक आहार: छह माह पूर्ण होने के बाद मां के दूध के साथ-साथ घर का बना मसला हुआ ताजा, विविध और पौष्टिक पूरक आहार (Complementary Feeding) शुरू किया जाए।
- धात्री माताओं का पोषण: स्तनपान कराने वाली माताओं के स्वास्थ्य को शिशु के स्वास्थ्य से जोड़ते हुए उनके लिए पर्याप्त कैलोरी और पौष्टिक आहार सुनिश्चित किया जाए।
- स्थानीय खाद्य विविधता: महंगी दवाओं या पैकेटबंद सप्लीमेंट्स के बजाय स्थानीय स्तर पर उपलब्ध मौसमी फल, हरी सब्जियां, दालें, अंडा, दूध और आंगनबाड़ी केंद्रों से मिलने वाले रेडी-टू-ईट (THR) पूरक पोषण आहार का नियमित सेवन कराया जाए।
आंगनबाड़ी केन्द्र: पोषण वितरण से आगे ‘व्यवहार परिवर्तन’ (BCC) का केंद्र
कार्यक्रम के माध्यम से स्पष्ट संदेश दिया गया कि आंगनबाड़ी केंद्र केवल सूखा राशन या पका हुआ भोजन बांटने के केंद्र नहीं हैं:
- व्यवहार परिवर्तन का केंद्र: आंगनबाड़ी केंद्र समुदाय और पालकों तक स्वस्थ खान-पान, स्वच्छता, बेहतर परवरिश और पोषण संबंधी व्यवहार परिवर्तन संचार (Social & Behavior Change Communication – SBCC) का मुख्य केंद्र बनेंगे।
- सामुदायिक भागीदारी: राष्ट्रीय पोषण माह के दौरान परिवारों को जागरूक कर समुदाय की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना ही ‘परवरिश के चैम्पियन’ का मूल ध्येय है।
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CGPSC/UPSC Static Facts: प्रथम 1,000 दिन, नर्चरिंग केयर फ्रेमवर्क एवं ICDS
प्रतियोगी परीक्षाओं (UPSC GS-2 सामाजिक न्याय/स्वास्थ्य तथा CGPSC Paper-6 महिला एवं बाल विकास) के दृष्टिकोण से मानक तथ्य:
- जीवन के प्रथम 1,000 दिन (The First 1,000 Days Window):
- गणना: मां के गर्भधारण से लेकर बच्चे के दूसरे जन्मदिन तक की अवधि (गर्भावस्था के 270 दिन + प्रथम वर्ष के 365 दिन + द्वितीय वर्ष के 365 दिन = कुल 1,000 दिन)।
- महत्व: न्यूरोलॉजिकल अध्ययनों के अनुसार, मानव मस्तिष्क का 80% से अधिक विकास इसी अवधि में पूर्ण होता है। इस दौरान हुआ कुपोषण बच्चे के वयस्क होने पर उसकी बौद्धिक क्षमता और उत्पादकता को स्थायी रूप से क्षति पहुँचाता है (Irreversible Cognitive Damage)।
- नर्चरिंग केयर फ्रेमवर्क (WHO एवं UNICEF):
- शिशु के समग्र विकास के लिए 5 परस्पर जुड़े घटक अनिवार्य हैं:
- उत्कृष्ट स्वास्थ्य (Good Health)
- पर्याप्त पोषण (Adequate Nutrition)
- संवेदनशील देखभाल/परवरिश (Responsive Caregiving)
- सुरक्षा एवं संरक्षा (Security and Safety)
- प्रारंभिक अधिगम के अवसर (Opportunities for Early Learning)।
- शिशु के समग्र विकास के लिए 5 परस्पर जुड़े घटक अनिवार्य हैं:
- राष्ट्रीय पोषण माह (National Poshan Maah):
- केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा ‘पोषण अभियान’ (प्रारंभ: 8 मार्च 2018) के तहत प्रतिवर्ष सितंबर माह को देश भर में ‘राष्ट्रीय पोषण माह’ के रूप में मनाया जाता है। वर्ष 2026 में इसका 9वां संस्करण आयोजित हो रहा है।
- समेकित बाल विकास सेवाएं (ICDS):
- शुरुआत: 2 अक्टूबर 1975 को 6 बुनियादी सेवाओं (पूरक पोषण, टीकाकरण, स्वास्थ्य जांच, रेफरल, अनौपचारिक पूर्व-स्कूली शिक्षा, पोषण एवं स्वास्थ्य शिक्षा) के साथ प्रारंभ। वर्तमान में ‘सक्षम आंगनबाड़ी एवं पोषण 2.0’ के अंतर्गत संचालित।
विश्लेषण: कैलोरी-केंद्रित दृष्टिकोण से ‘संवेदनशील परवरिश’ (Responsive Parenting) की ओर प्रतिमान बदलाव
(UPSC/CGPSC Mains Analysis – Early Childhood Development, Public Health & Human Capital)
1. पूरक पोषण से संज्ञान (Cognition) और भावनात्मक बंधन का विस्तार: पारंपरिक रूप से भारत के बाल विकास कार्यक्रमों में कुपोषण को केवल ‘भोजन या कैलोरी की कमी’ मानकर टेक-होम राशन (THR) बांटने पर जोर दिया जाता था। Parvarish Ke Champion Chhattisgarh यह स्वीकार करता है कि जब तक बच्चे को भोजन खिलाते समय मां या पिता का भावनात्मक जुड़ाव, बातचीत और प्यार (Responsive Feeding) नहीं मिलेगा, तब तक पोषक तत्वों का जैविक अवशोषण और मस्तिष्क का विकास अधूरा रहेगा। माता-पिता को ‘परवरिश का चैम्पियन’ बनाना सामाजिक रूढ़ियों को तोड़कर पिताओं को भी बाल-देखभाल में साझीदार बनाता है।
2. 11,669 मैदानी कर्मियों का क्षमता संवर्धन और जनसांख्यिकीय लाभांश: छत्तीसगढ़ जैसे जनजातीय बहुल राज्य में जहाँ अंधविश्वास, झाड़-फूंक और शुरुआती स्तनपान में देरी जैसी समस्याएं रही हैं, 11 हजार से अधिक आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सुपरवाइजर्स को एक साथ प्रशिक्षित करना एक बड़ा प्रशासनिक कदम है। जब आंगनबाड़ी कार्यकर्ता गांव में ‘पालक सत्र’ के माध्यम से वैज्ञानिक parenting सिखाएगी, तो यह कुपोषण और बाल मृत्यु दर (IMR/U5MR) को घटाकर राज्य के मानव विकास सूचकांक (HDI) को दीर्घकालिक रूप से ऊपर उठाएगा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Q1. Parvarish Ke Champion Chhattisgarh कार्यक्रम का ऑनलाइन उन्मुखीकरण किस अवसर पर आयोजित किया गया?
इस राज्य स्तरीय ऑनलाइन उन्मुखीकरण का आयोजन 9वें राष्ट्रीय पोषण माह 2026 के अंतर्गत महिला एवं बाल विकास विभाग, छत्तीसगढ़ द्वारा 23 सितम्बर 2026 को किया गया।
Q2. इस राज्य स्तरीय वेबिनार में प्रदेश भर से कितने प्रतिभागियों ने सहभागिता की?
वेबिनार में प्रदेश के सभी जिलों से जिला कार्यक्रम अधिकारी, बाल विकास परियोजना अधिकारी, पर्यवेक्षक और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं सहित लगभग 11,669 प्रतिभागियों ने भाग लिया।
Q3. उन्मुखीकरण में किस मार्गदर्शिका पुस्तक और विषय को केंद्र में रखा गया?
कार्यक्रम में ‘परवरिश के चैम्पियन की वर्णमाला’ पुस्तक के ‘प से पोषण’ विषय को केंद्र में रखकर आगामी पालक सत्रों के आयोजन की रूपरेखा समझाई गई।
स्रोत (Source)
महिला एवं बाल विकास विभाग संचालनालय, छत्तीसगढ़ जनसंपर्क विभाग (DPR Chhattisgarh), 23 सितम्बर 2026.
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