Bastar Tourism Transformation: कभी संघर्ष के लिए चर्चित बस्तर अब बना वैश्विक पर्यटन का सिरमौर, होमस्टे, इको-टूरिज्म और ‘बस्तर 2.0’ से गढ़ी जा रही समृद्धि की नई कहानी

Bastar Tourism Transformation Bastar Tourism Transformation

रायपुर/जगदलपुर, 23 सितंबर 2026: छत्तीसगढ़ का बस्तर संभाग अब अपनी एक नई, सकारात्मक और शांतिपूर्ण वैश्विक पहचान गढ़ रहा है। कभी नक्सलवाद और हिंसा के साए में चर्चा में रहने वाला यह वनांचल अंचल आज अपनी अनुपम प्राकृतिक सुंदरता, समृद्ध जनजातीय संस्कृति, अद्वितीय काष्ठ व धातु शिल्प और आत्मीय लोक परंपराओं के बल पर देश और दुनिया के नक्शे पर पर्यटन के नए केंद्र के रूप में उभर चुका है। बदलते सुरक्षित वातावरण के बीच Bastar Tourism Transformation ने ग्रामीण पर्यटन, इको-टूरिज्म और स्थानीय आदिवासी उद्यमिता को पंख लगा दिए हैं।

बस्तर की सबसे बड़ी ताकत यहां प्रकृति और संस्कृति का अद्वितीय संगम है। भारत का नियाग्रा कहे जाने वाले चित्रकोट जलप्रपात, तीरथगढ़ जलप्रपात, कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान, कुटुमसर एवं कैलाश गुफाएं, मां दंतेश्वरी मंदिर, दलपत सागर और ऐतिहासिक बस्तर पैलेस जैसे स्थल सैलानियों को रोमांच, अध्यात्म और इतिहास का अनूठा अनुभव प्रदान कर रहे हैं। राज्य सरकार बस्तर को केवल दर्शनीय स्थल के रूप में नहीं, बल्कि ‘अनुभव-आधारित पर्यटन’ (Experiential Tourism) के विशिष्ट मॉडल के रूप में विकसित कर रही है, जहाँ पर्यटक बस्तर के पारंपरिक खान-पान, लोकनृत्य और जीवनशैली से सीधे जुड़ रहे हैं।

इस पर्यटन क्रांति को गति देने के लिए अधोसंरचना और कनेक्टिविटी को अभूतपूर्व विस्तार दिया जा रहा है। महत्वाकांक्षी ‘बस्तर 2.0’ ब्लूप्रिंट के तहत दूरस्थ अंचलों को जोड़ने के लिए 228 नई सड़कों और 267 पुलों के निर्माण का प्रस्ताव है। जगदलपुर स्थित मां दंतेश्वरी एयरपोर्ट से वर्तमान में रायपुर और हैदराबाद के लिए नियमित हवाई सेवाएं संचालित हैं, जबकि रावघाट-जगदलपुर रेल परियोजना से भविष्य का मार्ग प्रशस्त हो रहा है। इसके साथ ही ‘छत्तीसगढ़ होमस्टे नीति 2025-30’ के तहत ग्रामीणों को नए कमरे हेतु ₹1 लाख और नवीनीकरण हेतु ₹50 हजार का अनुदान देकर पर्यटन की आय सीधे स्थानीय परिवारों तक पहुंचाई जा रही है।

बस्तर पर्यटन कायाकल्प: मुख्य तथ्य (Quick Facts)विवरण
मुख्य विषयBastar Tourism Transformation (पर्यटन से विकास की नई राह)
अधोसंरचना ब्लूप्रिंट‘बस्तर 2.0’ ब्लूप्रिंट (228 नई सड़कें एवं 267 नए पुल प्रस्तावित)
हवाई एवं रेल संपर्कमां दंतेश्वरी एयरपोर्ट, जगदलपुर (रायपुर व हैदराबाद उड़ान) | रावघाट-जगदलपुर रेल लाइन
होमस्टे वित्तीय सहायतानया कमरा: ₹1 लाख/कमरा | नवीनीकरण: ₹50,000/कमरा (1 से 9 कमरों तक)
होमस्टे अद्यतन स्थिति85 प्रस्ताव बैंकों को प्रेषित | 27 होमस्टे छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड में पंजीकृत
वैश्विक पर्यटन गांवधुड़मारास (UN Tourism बेस्ट टूरिज्म विलेज अपग्रेड प्रोग्राम हेतु चयनित)
सांस्कृतिक महाआयोजनबस्तर पंडुम 2026 (12 विधाएं, 55 हजार प्रतिभागी, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की उपस्थिति)
स्थानीय कौशल विकास45 स्थानीय युवाओं को पर्यटन प्रबंधन (Tourism Management) का विशेष प्रशिक्षण

होमस्टे से गांवों तक पहुँचा आर्थिक लाभ: ‘छत्तीसगढ़ होमस्टे नीति 2025-30’

Bastar Tourism Transformation का सबसे मानवीय और टिकाऊ पहलू यह है कि पर्यटन की आय बड़े कॉर्पोरेट होटलों तक सीमित न रहकर सीधे जनजातीय परिवारों के आंगन तक पहुँच रही है:

  • नीतिगत वित्तीय संबल: ‘छत्तीसगढ़ होमस्टे नीति 2025-30’ के अंतर्गत ग्रामीण परिवारों को नए कमरे के निर्माण पर प्रति कमरा ₹1 लाख तथा पूर्व से निर्मित कमरे के नवीनीकरण पर ₹50 हजार की वित्तीय सहायता दी जा रही है।
  • लचीला पैमाना: ग्रामीण परिवार न्यूनतम 1 से लेकर अधिकतम 9 कमरों तक के होमस्टे स्थापित कर सकते हैं। वर्तमान में 85 हितग्राहियों के ऋण एवं अनुदान प्रस्ताव बैंकों को भेजे जा चुके हैं, जबकि 27 होमस्टे पहले से ही छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड (CTB) में पंजीकृत होकर सफलतापूर्वक संचालित हो रहे हैं।
  • समग्र आजीविका तंत्र: होमस्टे से न केवल आवास प्रदाता, बल्कि भोजन बनाने वाली महिलाएं, स्थानीय टूरिस्ट गाइड, टैक्सी ड्राइवर और हस्तशिल्प विक्रेता भी सीधे आर्थिक लाभ प्राप्त कर रहे हैं।

संस्कृति बनी पर्यटन की सबसे बड़ी ताकत: ‘बस्तर पंडुम 2026’ का ऐतिहासिक मंच

बस्तर की समृद्ध जनजातीय परंपराएं, बेलमेटल (ढोकरा शिल्प), काष्ठ कला, बांस कला, पारंपरिक आभूषण, गौर नृत्य, मांदरी और बस्तर का पारंपरिक खान-पान देश-विदेश के पर्यटकों के मुख्य आकर्षण हैं:

  • बस्तर पंडुम 2026: राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु की गरिमामयी उपस्थिति में आयोजित इस सांस्कृतिक महाकुंभ में जनजातीय संस्कृति की 12 अलग-अलग विधाओं को राष्ट्रीय मंच मिला।
  • जनसहभागिता: इस आयोजन में बस्तर के लगभग 55 हजार आदिवासी नागरिकों ने सहभागिता की, जिसने बस्तर की सांस्कृतिक अस्मिता को वैश्विक पटल पर मजबूती से स्थापित किया।

आस्था से लेकर एडवेंचर तक: धुड़मारास बना अंतरराष्ट्रीय पहचान का केंद्र

बस्तर का पर्यटन परिदृश्य धार्मिक आस्था से लेकर हाई-एंड एडवेंचर स्पोर्ट्स तक विस्तृत हो चुका है:

  • धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्तंभ: 52 शक्तिपीठों में शामिल मां दंतेश्वरी मंदिर (दंतेवाड़ा) और विश्वप्रसिद्ध 75-दिवसीय ‘बस्तर दशहरा’ सांस्कृतिक पर्यटन की धुरी हैं।
  • धुड़मारास का वैश्विक गौरव: कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान में स्थित धुड़मारास (Dhudmaras) गांव को संयुक्त राष्ट्र पर्यटन (UN Tourism / UNWTO) के प्रतिष्ठित ‘बेस्ट टूरिज्म विलेज अपग्रेड/डेवलपमेंट प्रोग्राम’ के लिए चयनित किया गया है।
  • आगामी साहसिक परियोजनाएं: धुड़मारास और कांगेर घाटी में पर्यटकों के लिए रोमांचक एडवेंचर पर्यटन, ग्लास ब्रिज (Glass Bridge), कैनोपी वॉक (Canopy Walk) और कयाकिंग-बैंबू राफ्टिंग जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं विकसित की जा रही हैं।

कौशल विकास और स्थानीय समृद्धि: 45 युवाओं को पर्यटन प्रबंधन का प्रशिक्षण

बस्तर में पर्यटन को स्थायी आजीविका से जोड़ने के लिए युवाओं का क्षमता विकास किया जा रहा है:

  • युवाओं का प्रशिक्षण: बस्तर के पर्यटन रोडमैप के अंतर्गत प्रथम चरण में 45 स्थानीय आदिवासी युवाओं को पेशेवर पर्यटन प्रबंधन (Tourism Management) और गाइडिंग का गहन प्रशिक्षण दिया गया है।
  • स्थानीय रोजगार: स्थानीय ड्राइवर, होमस्टे संचालक, लोक कलाकार और साहसिक खेल प्रशिक्षक इस नई पर्यटन अर्थव्यवस्था के सक्रिय भागीदार बनकर स्वावलंबी बन रहे हैं।

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CGPSC Static Facts: बस्तर का भूगोल, पर्यटन स्थल एवं यूएन टूरिज्म विलेज

प्रतियोगी परीक्षाओं (CGPSC राज्य सेवा परीक्षा Paper-5 छत्तीसगढ़ का भूगोल व पर्यटन तथा Paper-6 जनजातीय संस्कृति) के लिए मानक तथ्य:

  • चित्रकोट जलप्रपात (Chitrakote Waterfall):
    • नदी एवं स्वरूप: बस्तर जिले में इंद्रावती नदी पर स्थित। घोड़े की नाल (Horseshoe) सदृश आकृति और लगभग 90 फीट ऊंचाई तथा 300 मीटर चौड़ाई के कारण इसे ‘भारत का नियाग्रा’ कहा जाता है।
  • तीरथगढ़ जलप्रपात (Tirathgarh Waterfall):
    • नदी: कांगेर घाटी में इंद्रावती की सहायक मुनगा-बहार नदी पर स्थित सीढ़ीनुमा (Block type) जलप्रपात (ऊंचाई: लगभग 300 फीट)।
  • कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान (Kanger Valley National Park):
    • स्थापना: वर्ष 1982 में स्थापित (क्षेत्रफल: 200 वर्ग किमी)। यह जैव विविधता का हॉटस्पॉट है, जहाँ छत्तीसगढ़ का राजकीय पक्षी ‘पहाड़ी मैना’ (Bastar Hill Myna) संरक्षित है। यहाँ भूमिगत चूना-पत्थर की कुटुमसर गुफा (प्रो. शंकर तिवारी द्वारा खोजी गई, अंधी मछलियां ‘केविकोला’ हेतु प्रसिद्ध), कैलाश गुफा और दंडक गुफा स्थित हैं।
  • धुड़मारास गांव (Dhudmaras Village) एवं UN Tourism:
    • कांगेर नदी के किनारे घने जंगलों में बसा आदिवासी गांव, जिसे संयुक्त राष्ट्र विश्व पर्यटन संगठन (UNWTO) द्वारा वर्ष 2024 में ‘बेस्ट टूरिज्म विलेज अपग्रेड प्रोग्राम’ हेतु भारत से चुना गया था। यहाँ स्थानीय धुरवा और गोंड युवाओं द्वारा पर्यावरण-अनुकूल बैंबू राफ्टिंग कराई जाती है।
  • ढोकरा शिल्प (Dhokra / Bell Metal Craft):
    • बस्तर के घड़वा समुदाय द्वारा प्राचीन मोम-धातु ढलाई विधि (Lost-wax Casting Technique) से पीतल और कांसे की कलाकृतियां बनाई जाती हैं। इसे भारत सरकार द्वारा भौगोलिक उपदर्शन (GI Tag) प्राप्त है।

विश्लेषण: ‘बंदूक से बांस की पतवार तक’— बस्तर में स्थायी शांति और सामुदायिक पर्यटन

(UPSC/CGPSC Mains Analysis – Conflict Resolution, Community-Based Tourism & Internal Security)

1. सुरक्षा मॉडल से आर्थिक सशक्तिकरण की ओर रणनीतिक प्रस्थान: Bastar Tourism Transformation इस स्थापित सिद्धांत की पुष्टि करता है कि उग्रवाद और हिंसा का स्थायी समाधान केवल सुरक्षा बलों की तैनाती से नहीं, बल्कि स्थानीय समुदायों को आकर्षक आर्थिक विकल्प देने से ही संभव है। जब धुड़मारास या चित्रकोट का एक पूर्व-उपेक्षित आदिवासी युवा होमस्टे चलाकर या टूरिस्ट गाइड बनकर महीने में ₹25,000 से ₹40,000 कमाता है, तो वह राज्य की संवैधानिक और लोकतांत्रिक व्यवस्था का सबसे बड़ा रक्षक बन जाता है। ‘बस्तर 2.0’ की 228 सड़कें विकास को अंतिम छोर तक पहुँचाकर अलगाव को समाप्त कर रही हैं।

2. पारिस्थितिकीय संवेदनशीलता बनाम अंधाधुंध व्यावसायीकरण: बस्तर का पर्यटन मॉडल कंक्रीट के बड़े फाइव-स्टार रिसॉर्ट्स बनाने के बजाय ‘होमस्टे और कम्युनिटी-बेस्ड इको-टूरिज्म’ पर टिका है। यूएन टूरिज्म द्वारा धुड़मारास की मान्यता यह सिद्ध करती है कि बस्तर का मॉडल पर्यावरण को नष्ट किए बिना आदिवासियों की भाषा, वेशभूषा और जैव-विविधता का मुद्रीकरण (Monetization) कर रहा है। यह ग्लोबल साउथ के उन क्षेत्रों के लिए एक केस स्टडी है जो संघर्ष के बाद सतत विकास का मार्ग तलाश रहे हैं।


अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1. Bastar Tourism Transformation के तहत ‘बस्तर 2.0’ ब्लूप्रिंट में कनेक्टिविटी का क्या लक्ष्य है?

‘बस्तर 2.0’ ब्लूप्रिंट के अंतर्गत बस्तर के दूरस्थ वनांचलों तक निर्बाध पहुंच बनाने के लिए 228 नई सड़कों और 267 नए पुलों के निर्माण का प्रस्ताव रखा गया है।

Q2. छत्तीसगढ़ होमस्टे नीति 2025-30 के तहत कमरे के निर्माण पर कितना अनुदान दिया जा रहा है?

नीति के तहत नए कमरे के निर्माण पर प्रति कमरा ₹1 लाख तथा पुराने कमरे के नवीनीकरण पर प्रति कमरा ₹50,000 की वित्तीय सहायता (न्यूनतम 1 से 9 कमरों तक) का प्रावधान है।

Q3. बस्तर का कौन-सा गांव संयुक्त राष्ट्र पर्यटन (UN Tourism) के वैश्विक कार्यक्रम के लिए चयनित हुआ है?

कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान में स्थित ‘धुड़मारास’ (Dhudmaras) गांव को यूएन टूरिज्म के ‘बेस्ट टूरिज्म विलेज अपग्रेड प्रोग्राम’ के लिए आधिकारिक रूप से चयनित किया गया है।

स्रोत (Source)

छत्तीसगढ़ जनसंपर्क विभाग (DPR Chhattisgarh) आधिकारिक विशेष प्रेस रिपोर्ट, 23 सितम्बर 2026.

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