Mukhyamantri Adhosanrachna Mission: 2 और 4 लेन सड़कों के लिए तैयार होगा मास्टर प्लान; सीएम साय ने दिए समयबद्ध निर्माण के निर्देश

Mukhyamantri Adhosanrachna Mission Mukhyamantri Adhosanrachna Mission

रायपुर, 13 अक्टूबर: छत्तीसगढ़ के सर्वांगीण आर्थिक विकास, बढ़ती औद्योगिक गतिविधियों और आगामी दशकों की आबादी की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने बुनियादी ढांचे के कायाकल्प की ऐतिहासिक कार्ययोजना तैयार की है। मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने Mukhyamantri Adhosanrachna Mission (मुख्यमंत्री अधोसंरचना मिशन) की प्रगति और प्राथमिकताओं की गहन समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि राज्य में पूंजीगत व्यय (CapEx) केवल वर्तमान को देखकर नहीं, बल्कि ‘अंजोर विजन 2047’ के अनुरूप अगले 20-30 वर्षों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर किया जाए। इसके तहत पूरे प्रदेश में यातायात दबाव का आकलन कर दो-लेन और चार-लेन सड़कों का व्यापक सर्वे कराया जाएगा और एक दीर्घकालिक ‘रोड नेटवर्क मास्टर प्लान’ तैयार होगा। इसके साथ ही बजट प्रावधान से लेकर निर्माण पूर्ण होने तक हर चरण की सख्त समय-सीमा तय की गई है।

मुख्य बिंदु (Key Highlights):

  • ‘Mukhyamantri Adhosanrachna Mission’: सड़कों, भवनों और नागरिक सुविधाओं के निर्माण के लिए 5-वर्षीय समन्वित पूंजीगत निवेश ढांचा तैयार।
  • सड़कों का दीर्घकालिक मास्टर प्लान: पूरे प्रदेश में 2-लेन और 4-लेन सड़कों की आवश्यकता का होगा वैज्ञानिक सर्वे; निर्बाध कनेक्टिविटी पर जोर।
  • हर चरण की समय-सीमा तय: परियोजना की योजना, बजट, तकनीकी स्वीकृति, टेंडर और निर्माण पूर्ण होने तक समयबद्ध कैलेंडर अनिवार्य।
  • रखरखाव पर निर्माण जितना ही ध्यान: सार्वजनिक परिसंपत्तियों की कार्यशील आयु बढ़ाने के लिए योजना के साथ ही तय होगी नियमित मेंटेनेंस व्यवस्था।
  • स्कूल-कॉलेजों का फ्यूचर-प्रूफ डिजाइन: शैक्षणिक और सार्वजनिक भवनों में भविष्य के विस्तार, सुरक्षा और दिव्यांग पहुंच का पहले से होगा प्रावधान।
  • इंजीनियरों का कौशल उन्नयन: निर्माण में आधुनिक तकनीक, श्रेष्ठ राष्ट्रीय प्रथाओं और एकीकृत डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम को अपनाने के निर्देश।

Mukhyamantri Adhosanrachna Mission: 2 और 4-लेन सड़कों का राज्यव्यापी सर्वे

मंत्रालय में आयोजित समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि मजबूत अधोसंरचना किसी भी राज्य की आर्थिक रीढ़ होती है।

Mukhyamantri Adhosanrachna Mission के तहत लोक निर्माण विभाग (PWD) को निर्देश दिए गए हैं कि वह राज्य के सभी प्रमुख मार्गों पर वर्तमान और भविष्य के यातायात दबाव का वैज्ञानिक अध्ययन कराए। औद्योगिक कॉरिडोर, कृषि मंडियों, खनन क्षेत्रों और पर्यटन केंद्रों को जोड़ने वाली सड़कों में से किन मार्गों को दो-लेन से चार-लेन में बदलना जरूरी है, इसकी विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इस मास्टर प्लान का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों, नगरों और प्रमुख आर्थिक केंद्रों के बीच निर्बाध और सुरक्षित परिवहन गलियारा तैयार करना है।

बजट से लेकर निर्माण तक: प्रत्येक चरण के लिए तय होगी सख्त समय-सीमा

मुख्यमंत्री ने निर्माण परियोजनाओं में होने वाली अनावश्यक देरी और लागत वृद्धि (Cost Overrun) पर कड़ा संज्ञान लिया:

  • छह-चरणीय समयबद्ध कैलेंडर: परियोजना की अवधारणा (Concept), बजट प्रावधान, प्रशासकीय स्वीकृति (AS), तकनीकी स्वीकृति (TS), निविदा प्रक्रिया और कार्यादेश से लेकर निर्माण पूर्ण होने तक हर कदम की समय-सीमा पहले से तय होगी।
  • गुणवत्ता से शून्य समझौता: समय पर काम पूरा करने के साथ-साथ निर्माण सामग्री की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन अनिवार्य होगा। घटिया निर्माण पाए जाने पर संबंधित एजेंसियों और अधिकारियों पर जवाबदेही तय होगी।

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निर्माण जितना जरूरी, उतना ही आवश्यक नियमित रखरखाव: परिसंपत्तियों की बढ़ेगी उम्र

समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने एक बहुत ही व्यावहारिक और महत्वपूर्ण नीतिगत बिंदु उठाया—सार्वजनिक परिसंपत्तियों का समय पर संधारण (Maintenance):

उन्होंने कहा कि सड़कों और भवनों के निर्माण पर जनता की गाढ़ी कमाई का बड़ा बजट खर्च होता है। समय पर मेंटेनेंस न होने से छोटी-मोटी दरारें या गड्ढे बड़े नुकसान में बदल जाते हैं, जिससे बाद में मरम्मत पर दोहरा खर्च करना पड़ता है। इसलिए किसी भी परियोजना की डीपीआर (DPR) बनाते समय ही उसके 5 से 10 वर्षों के रखरखाव की स्पष्ट योजना और बजट शामिल किया जाए, ताकि सड़कों और भवनों की कार्यशील आयु (Asset Life) बढ़ाई जा सके।

स्कूल-कॉलेजों और सार्वजनिक भवनों में भविष्य के विस्तार का प्रावधान

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि शासकीय स्कूलों, कॉलेजों, अस्पतालों और तहसील कार्यालयों के भवनों का डिजाइन बनाते समय अगले 20 वर्षों की छात्र संख्या और स्टाफ वृद्धि का ध्यान रखा जाए:

  • मॉड्यूलर एवं वर्टिकल डिजाइन: भवनों का ढांचा ऐसा हो जिसमें भविष्य में अतिरिक्त मंजिलें या कमरे बनाते समय मूल ढांचे को तोड़ना न पड़े।
  • सुरक्षा एवं सुगम्यता: भवनों में पर्याप्त प्राकृतिक रोशनी, वेंटिलेशन, रेन वाटर हार्वेस्टिंग, दिव्यांगजनों के लिए रैंप और अग्निशमन सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम सुनिश्चित किए जाएं।

आधुनिक तकनीक और इंजीनियरों का नियमित कौशल उन्नयन (Up-skilling)

छत्तीसगढ़ के तकनीकी अमले को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय निर्माण मानकों से जोड़ने के लिए संस्थागत प्रशिक्षण व्यवस्था विकसित की जाएगी:

  • श्रेष्ठ राष्ट्रीय प्रथाओं का अध्ययन: अन्य राज्यों में सड़क निर्माण, पुल-पुलियों और हरित भवनों (Green Buildings) के क्षेत्र में अपनाए जा रहे उपयोगी नवाचारों को छत्तीसगढ़ की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार अपनाया जाएगा।
  • इंजीनियरों की ट्रेनिंग: लोक निर्माण, सेतु निर्माण और सिंचाई विभाग के इंजीनियरों को नवीनतम सॉफ्टवेयर, प्रोजेक्ट मैनेजमेंट टूल्स और आधुनिक निर्माण सामग्रियों का नियमित प्रशिक्षण दिया जाएगा।
  • एकीकृत डिजिटल डैशबोर्ड: विभिन्न विभागों के निर्माण कार्यों की भौतिक और वित्तीय प्रगति को एक सिंगल डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाएगा ताकि एक ही जगह पर दोबारा खुदाई या काम की पुनरावृत्ति (Duplication) न हो।

“विकास का वास्तविक पैमाना केवल यह नहीं है कि हमने कितने किलोमीटर डामर बिछाया या कितने कंक्रीट के भवन खड़े किए। असली पैमाना यह है कि उस अधोसंरचना से आम नागरिक का जीवन कितना सुगम हुआ और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को कितनी गति मिली। हमारा लक्ष्य ‘अंजोर विजन 2047’ के तहत ऐसी टिकाऊ और आधुनिक परिसंपत्तियां तैयार करना है जो आने वाली पीढ़ियों के काम आएं। पूंजीगत निवेश का एक-एक रुपया जनता के हित में परिणाम देना चाहिए।”— विष्णु देव साय, मुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़ शासन (समीक्षा बैठक संबोधन)

समीक्षा बैठक में उपस्थित शीर्ष मंत्रिमंडल एवं प्रशासनिक नेतृत्व

मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक में शासन के प्रमुख नीति-निर्माता और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे:

  • मंत्रिमंडल: उप मुख्यमंत्री एवं लोक निर्माण मंत्री श्री अरुण साव, वित्त एवं वाणिज्यिक कर मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी।
  • प्रशासनिक नेतृत्व: मुख्य सचिव श्री विकासशील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह, नगरीय प्रशासन प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा।
  • विभागीय सचिवगण: मुख्यमंत्री के सचिव श्री राहुल भगत, खनिज व मुख्यमंत्री के सचिव श्री पी. दयानंद, वित्त सचिव डॉ. रोहित यादव, लोक निर्माण विभाग (PWD) के सचिव श्री मुकेश बंसल, सूचना एवं प्रौद्योगिकी सचिव श्री अंकित आनंद।

मुख्यमंत्री अधोसंरचना मिशन समीक्षा 2026: एक नजर में

  • मिशन का नाम: मुख्यमंत्री अधोसंरचना मिशन (Mukhyamantri Adhosanrachna Mission)
  • बैठक स्थल व तिथि: मंत्रालय महानदी भवन, नवा रायपुर (13 अक्टूबर 2026)
  • अध्यक्षता: मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय (उपस्थिति: अरुण साव, ओ.पी. चौधरी, विकासशील)
  • दीर्घकालिक विजन: ‘अंजोर विजन 2047’ के तहत विकसित छत्तीसगढ़ का निर्माण
  • सड़क नेटवर्क योजना: 2-लेन एवं 4-लेन सड़कों का विस्तृत सर्वे और दीर्घकालिक मास्टर प्लान
  • परियोजना प्रबंधन: बजट से लेकर पूर्णता तक प्रत्येक चरण की अनिवार्य समय-सीमा निर्धारण
  • परिसंपत्ति प्रबंधन: निर्माण के साथ दीर्घकालिक नियमित रखरखाव (Maintenance) का प्रावधान
  • भवन निर्माण दिशा-निर्देश: स्कूल, कॉलेज व अस्पतालों में भविष्य के विस्तार योग्य मॉड्यूलर डिजाइन
  • तकनीकी सुधार: इंजीनियरों का नियमित कौशल उन्नयन एवं एकीकृत डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Mukhyamantri Adhosanrachna Mission का मुख्य उद्देश्य क्या है?

Mukhyamantri Adhosanrachna Mission का मुख्य उद्देश्य छत्तीसगढ़ में सड़कों, भवनों और सार्वजनिक परिसंपत्तियों का निर्माण ‘अंजोर विजन 2047’ के अनुरूप टिकाऊ, आधुनिक और भविष्य की आर्थिक जरूरतों के अनुसार करना है।

सड़क नेटवर्क के विस्तार को लेकर मुख्यमंत्री ने क्या निर्देश दिए हैं?

मुख्यमंत्री ने राज्यभर में बढ़ते यातायात दबाव का आकलन कर 2-लेन और 4-लेन सड़कों का विस्तृत सर्वे कराने और एक दीर्घकालिक रोड नेटवर्क मास्टर प्लान तैयार करने के निर्देश दिए हैं।

निर्माण परियोजनाओं में देरी रोकने के लिए क्या व्यवस्था बनाई गई है?

परियोजना की योजना, बजट प्रावधान, प्रशासनिक स्वीकृति, तकनीकी स्वीकृति, टेंडर और निर्माण कार्य पूर्ण होने तक हर एक चरण के लिए सख्त समय-सीमा तय की जाएगी ताकि लागत न बढ़े।

सार्वजनिक परिसंपत्तियों के रखरखाव (Maintenance) को लेकर क्या नीति तय हुई है?

निर्देश दिए गए हैं कि निर्माण की डीपीआर बनाते समय ही उसके नियमित रखरखाव की व्यवस्था तय की जाए ताकि परिसंपत्तियों की कार्यशील आयु बढ़े और सरकारी धन की बचत हो सके।

आधिकारिक स्रोत: मुख्यमंत्री सचिवालय / लोक निर्माण विभाग / जनसंपर्क विभाग, रायपुर (छत्तीसगढ़ शासन)

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