Inspire Award MANAK Chhattisgarh: राष्ट्रीय स्तर के लिए चयनित 40 विद्यार्थियों का सम्मान; शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने जापान से लौटे बाल वैज्ञानिकों को भी सराहा

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रायपुर, 10 अक्टूबर: छत्तीसगढ़ के सुदूर ग्रामीण और वनांचल स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की वैज्ञानिक सोच और नवाचार का डंका अब देश की राजधानी से लेकर अंतरराष्ट्रीय मंचों तक बज रहा है। राजधानी रायपुर के बीटीआई ग्राउंड परिसर स्थित राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT) के सभाकक्ष में आयोजित गरिमामय समारोह में स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) द्वारा संचालित Inspire Award MANAK Chhattisgarh (इंस्पायर अवार्ड मानक छत्तीसगढ़) के अंतर्गत राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता (नई दिल्ली) के लिए चयनित 40 मेधावी बाल वैज्ञानिकों को सम्मानित किया। इस अवसर पर जुलाई माह में इंस्पायर मानक योजना के तहत अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक भ्रमण पर जापान (Japan) जाकर लौटे राज्य के 5 प्रतिभाशाली विद्यार्थियों का भी विशेष सम्मान किया गया, जिन्होंने मंच पर अपने वैश्विक अनुभव साझा किए।

मुख्य बिंदु (Key Highlights):

  • ‘Inspire Award MANAK Chhattisgarh’: नई दिल्ली में राष्ट्रीय स्तर के 12वें NLEPC में भाग लेने जा रहे 40 बाल वैज्ञानिकों का एससीईआरटी रायपुर में सम्मान।
  • प्रदेश से 80 हजार नवाचारी विचार: छत्तीसगढ़ के स्कूलों से 80,000 मौलिक वैज्ञानिक विचार पोर्टल पर अपलोड किए गए।
  • जापान भ्रमण से लौटे 5 छात्र सम्मानित: रमन दास मानिकपुरी, समीक्षा साहू, सुनयना और शैयाद अली ने शिक्षा मंत्री संग साझा किए जापान के संस्मरण।
  • शिक्षा सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह का संदेश: ‘भाषा (अंग्रेजी, हिंदी, छत्तीसगढ़ी) केवल अभिव्यक्ति है; ज्ञान, नवाचार और मेहनत ही सफलता का असली आधार है।’
  • प्रोत्साहन राशि: चयनित प्रत्येक विद्यार्थी को मॉडल और प्रोटोटाइप बनाने के लिए डीबीटी (DBT) के जरिए मिलते हैं ₹10,000।

दिल्ली में राष्ट्रीय स्तर पर गूंजेगा छत्तीसगढ़ का नवाचार: 40 बाल वैज्ञानिकों का चयन

केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) और नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन (NIF) द्वारा आयोजित राष्ट्रीय स्तर की प्रदर्शनी (National Level Exhibition and Project Competition – NLEPC) में छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों से चयनित 40 बाल वैज्ञानिक भाग लेने नई दिल्ली रवाना हो रहे हैं।

समारोह को संबोधित करते हुए शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने कहा कि यह पूरे प्रदेश के लिए गर्व का क्षण है। केंद्र सरकार की इंस्पायर अवार्ड मानक योजना बच्चों में किताबी ज्ञान से परे जाकर दैनिक जीवन की समस्याओं का वैज्ञानिक समाधान खोजने की क्षमता विकसित कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बच्चे में कोई न कोई मौलिक प्रतिभा छिपी होती है, आवश्यकता केवल उसे सही समय पर पहचानकर तराशने और मंच देने की है।

80 हजार विचारों में से हुआ चयन: ड्रोन और दैनिक जीवन के नवाचार

शिक्षा मंत्री ने जानकारी दी कि इंस्पायर अवार्ड मानक के तहत छत्तीसगढ़ के प्राथमिक, पूर्व माध्यमिक और हाईस्कूलों से लगभग 80 हजार (80,000) नवाचारी विचार सामने आए हैं।

इनमें से चयनित 40 सर्वश्रेष्ठ मॉडलों में बच्चों ने आधुनिक ड्रोन तकनीक, सोलर एनर्जी, कचरा प्रबंधन, दिव्यांगजनों की सहायता और ग्रामीण कृषि से जुड़े दैनिक उपकरणों का अनूठा वैज्ञानिक विकल्प तैयार किया है। मंत्री ने बच्चों के साथ-साथ उनका मार्गदर्शन करने वाले शिक्षकों और माता-पिता के प्रति भी आभार व्यक्त किया जिन्होंने सीमित संसाधनों के बावजूद बच्चों की वैज्ञानिक सोच को पंख दिए।


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जापान की ‘सकुरा साइंस’ यात्रा से लौटे 5 छात्रों का सम्मान: साझा किए अनुभव

समारोह का मुख्य आकर्षण वे 5 छात्र रहे जिन्हें इंस्पायर मानक प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर जुलाई माह में भारत सरकार द्वारा जापान (Japan) के अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक अध्ययन दौरे पर भेजा गया था:

  • जापान से लौटे प्रतिभागी: रमन दास मानिकपुरी, समीक्षा साहू, सुनयना और शैयाद अली सहित 5 विद्यार्थियों को मंत्री ने मंच पर शॉल व स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया।
  • अंतरराष्ट्रीय अनुभव: छात्रों ने बताया कि कैसे जापान में आधुनिक रोबोटिक्स, हाई-स्पीड ट्रेन तकनीक और प्रयोगशालाओं को करीब से देखकर उनके सोचने का दायरा बदल गया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के ग्रामीण परिवेश से निकलकर टोक्यो के वैज्ञानिकों के सामने अपने विचार रखना उनके जीवन का सबसे अविस्मरणीय पल था।

‘भाषा बाधा नहीं, पृष्ठभूमि से फर्क नहीं पड़ता’: शिक्षा सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह ने बच्चों का हौसला बढ़ाते हुए अत्यंत प्रेरक मार्गदर्शन दिया:

  • नवाचार की वास्तविक परिभाषा: उन्होंने कहा कि नवाचार का अर्थ केवल कोई नया रॉकेट बनाना नहीं है, बल्कि सदियों पुराने कामों को नए, कम खर्चीले और बेहतर तरीकों से करना भी नवाचार है।
  • हीनभावना से मुक्ति: डॉ. कमलप्रीत सिंह ने कहा कि विद्यार्थी चाहे बस्तर के सुदूर वनांचल से हों या किसी छोटे गांव से, उन्हें खुद को कभी कमजोर नहीं समझना चाहिए। सफलता का आधार पारिवारिक पृष्ठभूमि नहीं, बल्कि मेहनत, लगन और सोचने का तरीका होता है।
  • भाषा केवल माध्यम: उन्होंने स्पष्ट किया कि अंग्रेजी, हिंदी या छत्तीसगढ़ी भाषा केवल अपनी बात कहने का जरिया है। मुख्य बात यह है कि आपको अपने विषय की कितनी समझ है और आप समाज की समस्याओं का क्या हल निकाल रहे हैं।

क्या है इंस्पायर-मानक योजना? ₹10,000 की प्रोत्साहन राशि और NIF की भूमिका

इंस्पायर–मानक (Million Minds Augmenting National Aspirations and Knowledge) योजना भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) और नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन (NIF) द्वारा संचालित की जाती है:

  • उद्देश्य: कक्षा 6वीं से 12वीं तक के स्कूली विद्यार्थियों में मौलिक वैज्ञानिक चिंतन और रचनात्मकता को बढ़ावा देना।
  • ₹10,000 की डीबीटी सहायता: पोर्टल पर चुने गए छात्रों के बैंक खाते में सीधे 10 हजार रुपये भेजे जाते हैं ताकि वे अपने आइडिया का वर्किंग प्रोटोटाइप/मॉडल बना सकें।
  • प्रतियोगिता का स्तर: जिला स्तर (DLEPC), राज्य स्तर (SLEPC) और राष्ट्रीय स्तर (NLEPC)। सर्वश्रेष्ठ 60 छात्रों को राष्ट्रपति भवन में सम्मानित किया जाता है और उनके आविष्कारों का मुफ्त पेटेंट कराया जाता है।

“जब हमारे सरकारी और ग्रामीण स्कूलों के बच्चे सौर ऊर्जा, ड्रोन और कृषि के अनूठे मॉडल बनाते हैं और जापान तक जाकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाते हैं, तो यह साबित होता है कि प्रतिभा किसी बड़े शहर की मोहताज नहीं है। छत्तीसगढ़ के 40 बच्चे अब दिल्ली में राष्ट्रीय मंच पर प्रदेश का मान बढ़ाएंगे। हमारा लक्ष्य है कि राज्य का हर बच्चा वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाकर विकसित भारत 2047 के निर्माण में अपना योगदान दे।”— गजेन्द्र यादव, स्कूल शिक्षा मंत्री, छत्तीसगढ़ शासन

छत्तीसगढ़ के स्कूली विद्यार्थियों और ग्रामीण अंचलों के लिए इसके क्या मायने हैं?

  • वैज्ञानिक सोच का विस्तार: 80 हजार विचारों का आना यह दर्शाता है कि अब सरकारी स्कूलों में रटने की प्रवृत्ति की जगह प्रयोग करने और सवाल पूछने की संस्कृति पनप रही है।
  • वैश्विक मंचों तक पहुंच: जापान दौरे जैसी पहलों से साधारण किसान परिवारों के बच्चों को भी अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक एक्सपोजर मिल रहा है।
  • सरकारी स्कूलों की साख में वृद्धि: लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) और एससीईआरटी के संयुक्त प्रयासों से स्वामी आत्मानंद और सामान्य शासकीय स्कूलों के बच्चों का आत्मविश्वास राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ा है।

इंस्पायर अवार्ड मानक छत्तीसगढ़ सम्मान समारोह: एक नजर में

  • आयोजन: इंस्पायर अवार्ड मानक राष्ट्रीय चयन एवं जापान दल सम्मान समारोह
  • आयोजन स्थल: एससीईआरटी (SCERT) सभागार, बीटीआई ग्राउंड परिसर, रायपुर
  • मुख्य अतिथि: श्री गजेन्द्र यादव, स्कूल शिक्षा मंत्री, छत्तीसगढ़ शासन
  • विशिष्ट अतिथि: डॉ. कमलप्रीत सिंह (सचिव, स्कूल शिक्षा) एवं श्री ऋतुराज रघुवंशी (संचालक, लोक शिक्षण)
  • राष्ट्रीय प्रतियोगिता हेतु चयनित: छत्तीसगढ़ के 40 बाल वैज्ञानिक (नई दिल्ली में सहभागिता)
  • अंतरराष्ट्रीय प्रतिभागी (जापान दौरा): 5 छात्र (रमन दास मानिकपुरी, समीक्षा साहू, सुनयना, शैयाद अली व अन्य)
  • राज्य से कुल प्रविष्टियां: लगभग 80,000 मौलिक नवाचारी विचार
  • संचालक संस्थाएं: DST (भारत सरकार) एवं NIF (नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन)

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

रायपुर के एससीईआरटी में किस योजना के तहत सम्मान समारोह आयोजित किया गया?

भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) और NIF द्वारा संचालित ‘इंस्पायर अवार्ड मानक योजना’ के तहत चयनित 40 राष्ट्रीय प्रतिभागियों और जापान दौरे से लौटे 5 विद्यार्थियों के लिए यह समारोह आयोजित हुआ।

छत्तीसगढ़ से इंस्पायर अवार्ड के लिए कुल कितने विचार भेजे गए थे?

स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव के अनुसार, छत्तीसगढ़ के स्कूली विद्यार्थियों द्वारा इस वर्ष लगभग 80 हजार (80,000) मौलिक और नवाचारी वैज्ञानिक विचार प्रस्तुत किए गए।

जापान अध्ययन दौरे से लौटे किन विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया?

जुलाई माह में जापान जाकर वैज्ञानिक अनुभव लेकर लौटे रमन दास मानिकपुरी, समीक्षा साहू, सुनयना और शैयाद अली सहित कुल 5 विद्यार्थियों को मंच पर विशेष रूप से सम्मानित किया गया।

इंस्पायर अवार्ड मानक योजना में चयनित विद्यार्थियों को कितनी राशि मिलती है?

इस योजना के अंतर्गत चयनित प्रत्येक विद्यार्थी को अपने नवाचारी विचार का वर्किंग मॉडल या प्रोटोटाइप तैयार करने के लिए सीधे बैंक खाते में ₹10,000 की प्रोत्साहन राशि (DBT) दी जाती है।

आधिकारिक स्रोत: स्कूल शिक्षा विभाग / लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) / जनसंपर्क विभाग, रायपुर (छत्तीसगढ़ शासन)

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