Published on 13 August 2026 | By Ishan Verma, Editor, theexamhub.in
भारत में डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) को अधिक समावेशी, बहुभाषी और लोक-केंद्रित बनाने की दिशा में Digital India Bhashini और NITI Aayog के बीच संपन्न हुआ नया समझौता देश में वॉइस-फर्स्ट एआई (Voice-First AI) और बहुभाषी सुशासन की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के डिजिटल इंडिया कॉर्पोरेशन के अधीन संचालित ‘डिजिटल इंडिया भाषिणी प्रभाग’ (DIBD) और नीति आयोग के बीच कल 12 अगस्त 2026 को एक विशेष सहमति पत्र (Statement of Intent – SoI) पर हस्ताक्षर किए गए हैं।
इस महत्वपूर्ण समझौते का मुख्य उद्देश्य नीति आयोग के विभिन्न डिजिटल और प्रशासनिक सुधारों को भाषाई रूप से सुलभ बनाने के लिए ‘भाषिणी सेवा/संचालन’ (BHASHINI for Seva/Sanchalan) पहल के तहत उन्नत वॉइस-फर्स्ट एआई (Voice-First AI) और बहुभाषी समाधानों को एकीकृत करना है। सहमति पत्र पर भाषिणी प्रभाग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) श्री अमिताभ नाग और नीति आयोग के निदेशक श्री शोयाब अहमद कलाल ने हस्ताक्षर किए हैं।
| महत्वपूर्ण संकेतक | नीति आयोग और भाषिणी समझौते के प्रमुख तथ्य व सटीक आंकड़े |
|---|---|
| समझौते का प्रकार (SoI) | भाषाई समावेशन हेतु विशेष सहमति पत्र (Statement of Intent) |
| मुख्य भागीदार संस्थाएं | डिजिटल इंडिया भाषिणी प्रभाग (DIBD) और नीति आयोग (NITI Aayog) |
| आधिकारिक विमोचन तिथि | 12 अगस्त 2026, नई दिल्ली |
| नोडल योजना/पहल का नाम | भाषिणी सेवा/संचालन (BHASHINI for Seva/Sanchalan) |
| संयोजित मुख्य एआई स्तंभ | भाषिणी उद्यत, भाषिणी मित्र, भाषिणी ऐपमित्र, भाषिणी सहयोगी और भाषिणी प्रवक्ता |
| सहयोगी डिजिटल टूल (SMRITI) | बैठकों के वास्तविक समय पर बहुभाषी अनुवाद हेतु स्वचालित ट्रांसक्रिप्शन इंटरफेस |
| भाषाई डेटा क्राउडसोर्सिंग | भाषिणी सहयोगी के तहत ‘भाषादान’ (BhashaDaan) कार्यक्रम को बढ़ावा |
| भाषिणी का वर्तमान कवरेज | 800+ सरकारी वेबसाइटें संचालित; 36 पाठ (Text) और 23 भारतीय आवाज भाषाएं समर्थित |
| संचित एआई निष्कर्ष (Inferences) | अब तक 900 करोड़ (9 Billion) से अधिक संचयी एआई निष्कर्ष पूरे |
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भाषिणी सेवा/संचालन पहल और वॉइस-फर्स्ट गवर्नेंस
इस द्विपक्षीय समझौते के माध्यम से नीति आयोग और डीडीडी (DIBD) मिलकर देश के नागरिकों को उनकी स्थानीय भाषाओं में सरकारी नीतियों और सेवाओं की सटीक पहुंच सुनिश्चित करेंगे:
- पांच आयामी भाषाई एकीकरण: इस समझौते के तहत भाषिणी के पांच मुख्य स्तंभों—उद्यत (Udyat), मित्र (Mitra), ऐपमित्र (AppMitra), सहयोगी (Sahayogi), और प्रवक्ता (Pravakta) का पूर्ण उपयोग किया जाएगा। यह तकनीकी एकीकरण नीति आयोग के दस्तावेज़ प्रबंधन प्रणालियों, संचार वर्कफ़्लो और अनुवाद संबंधी एपीआई (APIs) को पूरी तरह बहुभाषी बनाएगा।
- भाषादान (BhashaDaan) कूटनीति: भाषिणी सहयोगी के तहत संचालित भाषादान कार्यक्रम को दोनों संस्थाओं द्वारा बड़े पैमाने पर बढ़ावा दिया जाएगा। इसमें नीति आयोग के अधिकारी और देश के आम नागरिक अपनी क्षेत्रीय भाषाओं में पाठ (Text), ऑडियो (Audio) और वीडियो (Video) नमूने कलेक्ट व डोनेट करेंगे, ताकि भारतीय भाषाओं के एआई अनुवाद मॉडल को अधिक सटीक बनाया जा सके।
- डिजिटल साक्षरता और जिला स्तरीय पहुंच: ‘भाषिणी प्रवक्ता’ के तहत देश के सुदूर आकांक्षी जिलों (Aspirational Districts) और प्रखंडों (Blocks) में जिला अधिकारियों और आम नागरिकों को कम इंटरनेट साक्षरता के बावजूद बहुभाषी डिजिटल उपकरणों का उपयोग करने के लिए व्यापक प्रशिक्षण दिया जाएगा।
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नीति तारा (NITI TARA) और ‘स्मृति’ (SMRITI) प्रणालियों का एकीकरण
यह मजबूत तकनीकी समन्वय नीति आयोग के पहले से संचालित जमीनी विकास कार्यक्रमों को अधिक सुदृढ़ और पारदर्शी बनाएगा:
- नीति तारा (NITI TARA) टूलकिट: ‘टूलकिट फॉर एनालिसिस, REVIEW एंड एक्शन’ (NITI TARA) एक डेटा-संचालित विश्लेषण प्रणाली है, जिसके तहत देश भर में 200 से अधिक क्षमता निर्माण सत्र आयोजित कर 4,000 से अधिक जिला व ब्लॉक अधिकारियों को डेटा-आधारित साक्ष्य-उन्मुख निर्णय लेने के लिए प्रशिक्षित किया गया है। अब इस टूलकिट को भाषिणी के बहुभाषी एआई से जोड़ा जाएगा।
- स्मृति (SMRITI) स्वचालित प्रणाली: ‘सिस्टम फॉर मीटिंग रिकॉर्डिंग, इंफॉर्मेशन एंड ट्रांसक्रिप्शन इंटरफेस’ (SMRITI) को भाषिणी के सहयोग से विकसित किया गया है। यह प्रणाली बैठकों की कार्यवाही (Minutes of Meetings) को स्वतः रिकॉर्ड कर उसका वास्तविक समय पर विश्लेषण करती है और बहुभाषी अनुवाद को सुलभ बनाती है, जिससे प्रशासनिक फाइलों के निपटान में होने वाली देरी पर कड़ा नियंत्रण लगता है।
डिजिटल इंडिया भाषिणी प्रभाग (DIBD) की सटीक सांगठनिक आंकड़े
भाषिणी प्रभाग इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के डिजिटल इंडिया कॉर्पोरेशन के तहत भारत का राष्ट्रीय भाषा अनुवाद मिशन (NLTM) है, जो भारत के मेडटेक और न्यायिक कायाकल्प की तरह ही डिजिटल प्रशासन की मुख्य रीढ़ है:
- 800+ सरकारी वेबसाइटें संचालित: वर्तमान में भाषिणी तकनीक के माध्यम से देश की 800 से अधिक आधिकारिक सरकारी वेबसाइटें स्थानीय भाषाओं में अपनी सेवाएं दे रही हैं।
- 900 करोड़ संचयी निष्कर्ष: इस डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर ने अब तक 9 बिलियन (900 करोड़) से अधिक संचयी एआई निष्कर्ष (Inferences) पूरे किए हैं, तथा प्रतिदिन 2.4 करोड़ (24 Million) से अधिक एआई निष्कर्षों का सफल प्रसंस्करण किया जाता है।
- भाषाई कवरेज: भाषिणी वर्तमान में 36 भारतीय पाठ (Text) भाषाओं, 23 भारतीय आवाज (Voice) भाषाओं और 35 अंतरराष्ट्रीय भाषाओं का समर्थन करती है, जो डिजिटल इंडिया को अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने का सबसे समावेशी माध्यम है।
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- भाषिणी (National Language Translation Mission): इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा जुलाई 2022 में ‘डिजिटल इंडिया जेनेसिस’ के तहत लॉन्च किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य इंटरनेट और डिजिटल सेवाओं को भारतीय नागरिकों के लिए उनकी मातृभाषा में सुलभ बनाना है, जिसमें वॉइस-फर्स्ट और स्थानीय बोलियों के अनुवाद को प्राथमिकता दी जाती है।
- डिजिटल इंडिया कॉर्पोरेशन (DIC): यह इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के तहत स्थापित एक गैर-लाभकारी कंपनी (धारा 8 कंपनी) है, जो राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस परियोजनाओं के विकास, डिजिटल समावेशन और उन्नत सुधारात्मक तकनीकी नवाचारों का नेतृत्व करती है।
- नीति आयोग (NITI Aayog): ‘राष्ट्रीय भारत परिवर्तन संस्थान’ का गठन 1 जनवरी 2015 को केंद्रीय मंत्रिमंडल के एक प्रस्ताव के तहत पूर्ववर्ती ‘योजना आयोग’ (Planning Commission) के स्थान पर किया गया था। यह भारत सरकार का प्रमुख नीतिगत थिंक टैंक (Think Tank) है, जो सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) को बढ़ावा देता है।
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मुख्य परीक्षा के दृष्टिकोण से Digital India Bhashini NITI Aayog के बीच हुए इस द्विपक्षीय समझौते को भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) के भाषाई लोकतांत्रिकरण, ग्रामीण सुशासन और नीति निर्माण में आई संवेदनशीलता के रूप में विश्लेषणात्मक रूप से देखा जाना चाहिए।
भारत जैसे असाधारण भाषाई विविधता वाले देश में, जहाँ सैकड़ों बोलियाँ और भाषाएँ बोली जाती हैं, केवल अंग्रेजी या हिंदी आधारित डिजिटल सुशासन (e-Governance) अक्सर ग्रामीण और निरक्षर नागरिकों को कल्याणकारी योजनाओं से वंचित कर देता है, जिसे ‘भाषाई विभाजन’ (Linguistic Divide) कहा जाता है। नीति आयोग के नीतिगत थिंक-टैंक में ‘भाषिणी सेवा/संचालन’ और ‘वॉइस-फर्स्ट एआई’ तकनीकों का एकीकरण इस विभाजन को समाप्त करने का सबसे उत्कृष्ट प्रशासनिक साधन है।
इसके अतिरिक्त, ‘भाषादान’ (BhashaDaan) जैसी क्राउडसोर्सिंग पहलों के माध्यम से सुदूर जनजातीय अंचलों और बोलियों के डेटासेट (Text, Audio, Video) को इकट्ठा करना भारतीय कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) को अधिक संवेदनशील और पक्षपात-रहित (Unbiased) बनाएगा। जब ‘स्मृति’ (SMRITI) जैसी प्रणालियाँ प्रशासनिक बैठकों को स्वतः रिकॉर्ड कर स्थानीय भाषाओं में व्यवस्थित अनुवाद करती हैं, तो यह सीधे तौर पर प्रशासन में ‘जवाबदेही’ (Accountability) और पारदर्शिता को मजबूत करता है। यह तकनीक-आधारित संवेदनशील दृष्टिकोण अंततः देश की नीति निर्माण प्रणालियों को अधिक समावेशी बनाकर सतत विकास लक्ष्य-10 (SDG-10: असमानता में कमी) और सतत विकास लक्ष्य-16 (SDG-16: शांति, न्याय और मजबूत संस्थाएं) के राष्ट्रीय विज़न को समयबद्ध धरातल पर साकार करने की सबसे मजबूत प्रशासनिक और नैतिक रीढ़ साबित होगा।
अभ्यास प्रश्न (Practice MCQs)
निम्नलिखित बहुविकल्पीय प्रश्नों के माध्यम से इस महत्वपूर्ण डिजिटल और नीतिगत विषय पर अपने ज्ञान का परीक्षण करें:
प्रश्न 1: हाल ही में नीति आयोग ने सुशासन को बहुभाषी और समावेशी बनाने के लिए Digital India Bhashini NITI Aayog के तहत किस विशिष्ट प्रभाग के साथ एक महत्वपूर्ण सहमति पत्र (Statement of Intent) पर हस्ताक्षर किए हैं?
(A) राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC)
(B) डिजिटल इंडिया भाषिणी प्रभाग (DIBD)
(C) सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस कंप्यूटिंग (C-DAC)
(D) राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस डिवीजन (NeGD)
उत्तर: (B) डिजिटल इंडिया भाषिणी प्रभाग (DIBD)
व्याख्या: नीति आयोग और डिजिटल इंडिया कॉर्पोरेशन के डिजिटल इंडिया भाषिणी प्रभाग (DIBD) के बीच ‘भाषिणी सेवा/संचालन’ पहल के तहत वॉइस-फर्स्ट और बहुभाषी एआई तकनीकों को एकीकृत करने के लिए एक ऐतिहासिक सोआई (SoI) हस्ताक्षरित किया गया है।
प्रश्न 2: भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के अधीन कार्यरत उस गैर-लाभकारी राष्ट्रीय संस्था (Section 8 Company) का क्या नाम है, जिसके तहत ‘भाषिणी प्रभाग’ का नियमन किया जाता है?
(A) राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (NIELIT)
(B) डिजिटल इंडिया कॉर्पोरेशन (Digital India Corporation – DIC)
(C) भारतीय मानक ब्यूरो (BIS)
(D) नैसकॉम (NASSCOM)
उत्तर: (B) डिजिटल इंडिया कॉर्पोरेशन (Digital India Corporation – DIC)
व्याख्या: डिजिटल इंडिया कॉर्पोरेशन (DIC) इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के तहत स्थापित एक स्वायत्त गैर-लाभकारी सरकारी कंपनी है, जिसके अंतर्गत राष्ट्रीय भाषा अनुवाद मिशन ‘भाषिणी’ का सुचारू संचालन किया जाता है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
Q1. Digital India Bhashini NITI Aayog क्या है और इसके प्राथमिक लक्ष्य क्या हैं?
यह नीति आयोग और इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्रालय के डिजिटल इंडिया भाषिणी प्रभाग (DIBD) के बीच 12 अगस्त 2026 को हस्ताक्षरित एक ऐतिहासिक सहमति पत्र (SoI) है। इसका मुख्य उद्देश्य नीति आयोग की विभिन्न डिजिटल योजनाओं और नागरिक सेवाओं में वॉयस-फर्स्ट एआई और बहुभाषी अनुवाद तकनीकों को एकीकृत कर डिजिटल प्रशासन को अधिक समावेशी और पारदर्शी बनाना है।
Q2. इस तकनीकी सहयोग के अंतर्गत चर्चा में रहे ‘स्मृति’ (SMRITI) टूल की क्या उपयोगिता है?
‘स्मृति’ (System for Meeting Recording, Information & Transcription Interface) भाषिणी के सहयोग से विकसित की गई एक स्वचालित बैठक रिकॉर्डिंग और ट्रांसक्रिप्शन प्रणाली है। यह बैठकों की कार्यवाही (Minutes) को स्वतः रिकॉर्ड कर उसका वास्तविक समय पर विश्लेषण और बहुभाषी अनुवाद करती है, जिससे प्रशासनिक जवाबदेही मजबूत होती है।
Q3. भाषिणी के अंतर्गत चलाए जा रहे ‘भाषादान’ (BhashaDaan) कार्यक्रम का क्या रणनीतिक महत्व है?
भाषादान कार्यक्रम ‘भाषिणी सहयोगी’ के तहत एक क्राउडसोर्सिंग पहल है। इसके माध्यम से देश के आम नागरिक और अधिकारी अपनी स्थानीय बोलियों और भाषाओं में पाठ, ऑडियो और वीडियो नमूने दान (कलेक्ट) करते हैं, जिसका उपयोग भारतीय भाषाओं के एआई अनुवाद मॉडल को अधिक सटीक और पक्षपात-रहित बनाने के लिए किया जाता है।
तीन मुख्य निष्कर्ष (3 Key Takeaways)
- बहुभाषी वॉइस-फर्स्ट सुशासन: Digital India Bhashini NITI Aayog के माध्यम से नीति आयोग के सभी डेटा विश्लेषणों (NITI TARA) और बैठक प्रणालियों (SMRITI) को स्थानीय भारतीय भाषाओं में वॉइस-बॉट के साथ अपग्रेड किया जाएगा।
- 900 करोड़ से अधिक एआई निष्कर्ष: भारत का भाषिणी प्रभाग वर्तमान में 800 से अधिक सरकारी वेबसाइटों को संचालित कर रहा है और प्रतिदिन 2.4 करोड़ (24 Million) से अधिक एआई निष्कर्षों का सफल प्रसंस्करण करता है।
- भाषादान से समावेशी सशक्तिकरण: आकांक्षी जिलों में ‘भाषादान’ और ‘भाषिणी प्रवक्ता’ के क्रियान्वयन से सुदूर जनजातीय अंचलों के कम डिजिटल-साक्षर नागरिकों को भी उनकी स्थानीय बोलियों में सरकारी नीतियों की सीधी कूटनीतिक पहुंच मिलेगी।
UPSC Relevance (यूपीएससी प्रासंगिकता)
यह विषय मुख्य रूप से संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के सामान्य अध्ययन पेपर-2 (ई-गवर्नेंस के अनुप्रयोग, सुशासन सुधार, नीति आयोग की भूमिका, कमजोर वर्गों का भाषाई सशक्तिकरण) और सामान्य अध्ययन पेपर-3 (विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी—एआई, मशीन लर्निंग, भाषा अनुवाद कूटनीति) के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण और अनिवार्य समसामयिक मुद्दा है।
Official Source (आधिकारिक स्रोत)
यह लेख भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY), नीति आयोग (NITI Aayog), डिजिटल इंडिया कॉर्पोरेशन (DIC), और पत्र सूचना कार्यालय (PIB Delhi) द्वारा 12 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में हस्ताक्षरित आधिकारिक सहमति पत्र और तकनीकी प्रगति विवरण पर आधारित है।