Dhanpur Archaeological Site: छत्तीसगढ़ के पर्यटन मानचित्र पर चमका गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, धनपुर में मिले 9वीं से 12वीं शताब्दी के दुर्लभ पुरातात्विक अवशेष

Dhanpur Archaeological Site Dhanpur Archaeological Site

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही/रायपुर, 12 अक्टूबर 2026: प्राकृतिक सौंदर्य, शांत वादियों और समृद्ध प्राचीन इतिहास से परिपूर्ण छत्तीसगढ़ का गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (GPM) जिला अब राज्य के पर्यटन मानचित्र पर अपनी विशिष्ट पहचान तेजी से स्थापित कर रहा है। जिले के ऐतिहासिक एवं धार्मिक स्थल Dhanpur Archaeological Site (धनपुर) में हाल ही में कराए गए पुरातात्विक सर्वेक्षण के दौरान 9वीं से 12वीं शताब्दी के अत्यंत महत्वपूर्ण और दुर्लभ पुरातात्विक अवशेष प्राप्त हुए हैं। जिले के प्रभारी मंत्री एवं पर्यटन मंत्री श्री राजेश अग्रवाल की विशेष पहल पर लगभग दो माह पूर्व कराए गए इस सर्वेक्षण ने धनपुर के गौरवशाली अतीत को पुनः उजागर करते हुए क्षेत्र में हेरिटेज और सांस्कृतिक पर्यटन के नए द्वार खोल दिए हैं।

जिले में पर्यटन विकास की इन असीम संभावनाओं को एक संगठित और व्यावहारिक रूप देने के उद्देश्य से कलेक्ट्रेट के अरपा सभाकक्ष में कलेक्टर श्री विजय दयाराम के. की अध्यक्षता में ‘जिला स्तरीय पर्यटन समिति’ की उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि जिले में ‘प्रकृति एवं संस्कृति के संग प्रगति’ की अवधारणा पर कार्य किया जा रहा है, ताकि प्राचीन ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय युवाओं, महिलाओं और ग्रामीण परिवारों को पर्यटन से सीधे रोजगार और आजीविका के नए अवसर मिल सकें।

बैठक में मरवाही विधायक श्री प्रणव कुमार मरपची ने जिला प्रशासन के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि पवित्र तीर्थस्थल अमरकंटक से सटा होने के कारण जीपीएम जिले में देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित करने की अपार क्षमता है। जिले में आधुनिक पर्यटन सुविधाओं का विस्तार करते हुए मलेनिया जलाशय में फ्लोटिंग रेस्टोरेंट और बोटिंग की सुविधा शुरू की गई है, जबकि ठाढ़पथरा में मड हाउस तथा लमना में होम-स्टे व कम्युनिटी स्टे का सफल संचालन हो रहा है। इसके साथ ही विश्व पर्यटन दिवस पर जिले को मिले ‘सर्वश्रेष्ठ टूरिज्म अवार्ड’ और पर्यटन फोटोग्राफी विजेताओं को सम्मानित कर जिले की ब्रांडिंग को नई गति दी गई।

धनपुर पुरातत्व एवं जीपीएम पर्यटन विकास: मुख्य तथ्य (Quick Facts)विवरण
प्रमुख पुरातात्विक स्थलDhanpur Archaeological Site (धनपुर, जिला गौरेला-पेंड्रा-मरवाही)
खोजे गए पुरावशेषों का कालखंड9वीं से 12वीं शताब्दी के ऐतिहासिक व धार्मिक अवशेष
सर्वेक्षण पहलकर्ताश्री राजेश अग्रवाल (प्रभारी मंत्री एवं पर्यटन व संस्कृति मंत्री)
पर्यटन समिति बैठक अध्यक्षश्री विजय दयाराम के. (कलेक्टर, जीपीएम जिला)
प्रमुख जल पर्यटन नवाचारमलेनिया जलाशय में फ्लोटिंग रेस्टोरेंट एवं बोटिंग सुविधा
ग्रामीण एवं विलेज स्टे मॉडलठाढ़पथरा में मड हाउस | लमना में होम स्टे एवं कम्युनिटी स्टे
प्राप्त राज्य स्तरीय सम्मानविश्व पर्यटन दिवस (27 सितंबर) पर ‘सर्वश्रेष्ठ टूरिज्म अवार्ड’ प्राप्त

धनपुर में 9वीं से 12वीं शताब्दी के अवशेष: प्राचीन वैभव की पुनर्स्थापना

Dhanpur Archaeological Site में किए गए सर्वेक्षण के पुरातात्विक महत्व को रेखांकित करते हुए कलेक्टर श्री विजय दयाराम के. ने महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं:

  • दो माह पूर्व हुआ सर्वेक्षण: पर्यटन मंत्री श्री राजेश अग्रवाल के निर्देश पर धनपुर क्षेत्र में विशेषज्ञों द्वारा सघन पुरातात्विक सर्वेक्षण कराया गया था।
  • गौरवशाली अतीत के साक्ष्य: सर्वेक्षण के दौरान 9वीं से 12वीं शताब्दी के प्राचीन मंदिरों, प्रस्तर प्रतिमाओं और स्थापत्य के अवशेष प्राप्त हुए हैं। यह प्रमाण सिद्ध करते हैं कि मध्यकाल में धनपुर एक अत्यंत समृद्ध धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र था।
  • धरोहर का संरक्षण: जिला प्रशासन इन प्राचीन धरोहरों की फेंसिंग, वैज्ञानिक संरक्षण और व्याख्या केंद्र (Interpretation Center) विकसित करने की दिशा में कार्य कर रहा है ताकि इतिहास के शोधार्थियों और पर्यटकों को आकर्षित किया जा सके।

फ्लोटिंग रेस्टोरेंट, बोटिंग और होम-स्टे: आधुनिक और अनुभव-आधारित पर्यटन

जिला पर्यटन नोडल अधिकारी डॉ. राहुल गौतम ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से जिले में विकसित की जा रही आधुनिक और इको-टूरिज्म सुविधाओं का विवरण दिया:

  • मलेनिया जलाशय में फ्लोटिंग रेस्टोरेंट: पर्यटकों को जल क्रीड़ा और अद्वितीय डाइनिंग का अनुभव कराने के लिए मलेनिया डैम में फ्लोटिंग रेस्टोरेंट और नियमित बोटिंग की सुविधा शुरू की गई है।
  • ठाढ़पथरा और लमना मॉडल: ठाढ़पथरा में पारंपरिक ‘मड हाउस’ (Mud House) और लमना पर्यटन क्षेत्र में ‘होम स्टे’ व ‘कम्युनिटी स्टे’ संचालित हो रहे हैं, जहाँ पर्यटक ग्रामीण परिवेश और स्थानीय खान-पान का सीधा अनुभव ले रहे हैं।
  • ऑनलाइन बुकिंग एवं सुरक्षा अधोसंरचना: पर्यटन स्थलों पर सीढ़ियां, सुरक्षा रेलिंग, हाईमास्ट लाइट, कैंटीन और आधिकारिक पर्यटन वेबसाइट के जरिए ऑनलाइन बुकिंग की व्यवस्था की गई है। सभी इकाइयों का संचालन स्थानीय पर्यटन समितियों द्वारा कराया जा रहा है जिससे स्थानीय युवाओं को सीधा रोजगार मिल रहा है।

राष्ट्रीय पहचान और ‘जीपीएम के रंग कैमरे के संग’ प्रतियोगिता के विजेता

जीपीएम जिले के पर्यटन को राष्ट्रीय मंचों पर मिली उपलब्धियों और रचनात्मक पहलों की जानकारी साझा की गई:

  • सर्वश्रेष्ठ टूरिज्म अवार्ड: 27 सितंबर को विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले को राज्य स्तर पर ‘सर्वश्रेष्ठ टूरिज्म अवार्ड’ से नवाजा गया।
  • सेंट्रल इंडिया कनेक्ट मार्केट प्लेस: छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड और छत्तीसगढ़ ट्रैवल ट्रेड एसोसिएशन द्वारा आयोजित इस प्रतिष्ठित मीट में जीपीएम जिले के पर्यटन स्थलों का विशेष स्टॉल लगाया गया।
  • रील मेकिंग प्रतियोगिता विजेता:
    1. प्रथम स्थान: श्री अपूर्व मित्रा
    2. द्वितीय स्थान: श्री विलास देशमुख
    3. तृतीय स्थान: श्री ओमप्रकाश मार्को
  • फोटोग्राफी प्रतियोगिता विजेता: सुश्री शारदा कंवर, श्री निलेश साहू, श्री ओमप्रकाश मार्को एवं श्री मोहम्मद फैजल फारूकी को प्रशस्ति पत्र और नकद पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

बैठक में उपस्थित जनप्रतिनिधि एवं प्रशासनिक अधिकारी

कलेक्ट्रेट के अरपा सभाकक्ष में आयोजित इस बैठक में जिले के प्रमुख नीति-निर्माता और स्टेकहोल्डर्स उपस्थित रहे:

  • मरवाही विधायक श्री प्रणव कुमार मरपची
  • जिला पंचायत अध्यक्ष सुश्री समीरा पैकरा
  • कोटा विधायक प्रतिनिधि श्री पंकज तिवारी
  • पुलिस अधीक्षक (SP) श्री मनोज कुमार खिलारी
  • जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) श्री मुकेश रावटे
  • पर्यटन प्रभारी डिप्टी कलेक्टर श्री देवेन्द्र सिरमोर
  • रिसॉर्ट प्रबंधक, होटल संचालक, टैक्सी यूनियन संघ के अध्यक्ष एवं जिला स्तरीय पर्यटन समिति के सदस्यगण।

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CGPSC Static Facts: धनपुर पुरातत्व, जीपीएम जिला एवं पर्यटन भूगोल

प्रतियोगी परीक्षाओं (CGPSC राज्य सेवा परीक्षा Paper-6 छत्तीसगढ़ का इतिहास व पुरातत्व तथा Paper-5 भूगोल व पर्यटन) के दृष्टिकोण से मानक तथ्य:

  • धनपुर पुरातात्विक स्थल (Dhanpur Archaeological Site):
    • ऐतिहासिक कालखंड: बिलासपुर-पेंड्रा मार्ग पर स्थित यह स्थल कलचुरि कालीन एवं पूर्व-मध्यकालीन (9वीं से 12वीं शताब्दी) हिंदू और जैन धर्म का प्रमुख केंद्र रहा है।
    • प्राप्त पुरावशेष: यहाँ प्राचीन प्रस्तर शिव मंदिरों के भग्नावशेष तथा जैन तीर्थंकरों (भगवान ऋषभदेव, पार्श्वनाथ एवं शांतिनाथ) की विशाल बलुआ पत्थर से निर्मित कायोत्सर्ग एवं पद्मासन मुद्रा की प्रतिमाएं उत्खनन में प्राप्त हुई हैं।
  • गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (GPM) जिले का भौगोलिक परिदृश्य:
    • जिला गठन: 10 फरवरी 2020 को बिलासपुर जिले से विभाजित होकर छत्तीसगढ़ का 28वां जिला बना।
    • पर्वत एवं नदी तंत्र: यह जिला विंध्य-सतपुड़ा की मैकल पर्वत श्रृंखला में स्थित है। पेंड्रा पठार की खोंडरी-खोंगसरा पहाड़ी से जीवनदायिनी अरपा नदी का उद्गम होता है। यह सोन नदी के अपवाह तंत्र का भी हिस्सा है।
    • सीमावर्ती जिला: मध्य प्रदेश के अनूपपुर और डिंडोरी जिलों से लगा हुआ है, जिससे यह अमरकंटक (नर्मदा उद्गम) का प्राकृतिक प्रवेश द्वार बनता है।
  • जीपीएम जिले के अन्य प्रमुख पर्यटन स्थल:
    • जलेश्वर महादेव (Jaleshwar Dham): अमरकंटक सीमा पर स्थित पौराणिक शिव मंदिर।
    • लक्ष्मणधारा एवं झोजा जलप्रपात: मैकल पहाड़ियों से गिरने वाले प्राकृतिक जलप्रपात।
    • शिवघाट मनौरा: सुरम्य नदी तट एवं धार्मिक स्थल।

विश्लेषण: हेरिटेज-इको टूरिज्म का अभिसरण और स्थानीय आजीविका का सशक्तिकरण

(UPSC/CGPSC Mains Analysis – Heritage Tourism, Regional Economics & Decentralized Livelihoods)

1. ‘पारगमन पर्यटन’ (Transit Point) से स्वतंत्र ‘हेरिटेज डेस्टिनेशन’ का निर्माण: भौगोलिक दृष्टि से जीपीएम जिला लंबे समय तक केवल अमरकंटक जाने वाले तीर्थयात्रियों के लिए एक पारगमन मार्ग (Transit Route) बना हुआ था, जहाँ पर्यटक रुकते नहीं थे। Dhanpur Archaeological Site में 9वीं-12वीं सदी के प्राचीन अवशेषों का पुनरुद्धार और मलेनिया जलाशय में फ्लोटिंग रेस्टोरेंट जैसी सुविधाएं पर्यटकों के ठहरने की अवधि (Stay Duration) को बढ़ाएंगी। यह मॉडल प्राचीन स्थापत्य कला को आधुनिक जल-क्रीड़ा और इको-टूरिज्म से जोड़कर जिले को एक स्वतंत्र पर्यटन सर्किट बनाता है।

2. कम्युनिटी बेस्ड टूरिज्म (CBT) द्वारा स्थानीय अर्थव्यवस्था का विस्तार: ठाढ़पथरा में मडहाउस और लमना में होम-स्टे का संचालन पूरी तरह स्थानीय पर्यटन समितियों, ग्रामीणों और टैक्सी यूनियनों को सौंपना ‘समावेशी विकास’ का उत्कृष्ट उदाहरण है। जब पर्यटन का राजस्व बाहरी बड़े होटलों के बजाय सीधे स्थानीय आदिवासी गाइडों, नाव चालकों और हस्तशिल्पियों के पास जाता है, तो यह वनांचल के युवाओं को गैर-कृषि सेवा क्षेत्र में टिकाऊ स्वरोजगार उपलब्ध कराता है।


अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1. Dhanpur Archaeological Site किस जिले में स्थित है और यहाँ किस कालखंड के अवशेष मिले हैं?

धनपुर पुरातात्विक स्थल छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (GPM) जिले में स्थित है, जहाँ हालिया सर्वेक्षण में 9वीं से 12वीं शताब्दी के प्राचीन पुरातात्विक व धार्मिक अवशेष मिले हैं।

Q2. जीपीएम जिले के किस जलाशय में फ्लोटिंग रेस्टोरेंट और बोटिंग की सुविधा विकसित की गई है?

जिले के प्रसिद्ध मलेनिया जलाशय (Maleniya Reservoir) में पर्यटकों के लिए फ्लोटिंग रेस्टोरेंट और बोटिंग की आधुनिक सुविधा विकसित की गई है।

Q3. विश्व पर्यटन दिवस 2026 पर गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले को किस पुरस्कार से सम्मानित किया गया?

27 सितंबर को विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले को राज्य स्तर पर ‘सर्वश्रेष्ठ टूरिज्म अवार्ड’ (Best Tourism Award) से सम्मानित किया गया।

स्रोत (Source)

जिला जनसंपर्क कार्यालय (DPRO), गौरेला-पेंड्रा-मरवाही एवं DPR Chhattisgarh, 12 अक्टूबर 2026.

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