रायपुर, 09 अक्टूबर: कर प्रशासन को पारदर्शी, डिजिटल और उद्योग-अनुकूल बनाने की दिशा में छत्तीसगढ़ ने राष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ी नीतिगत छलांग लगाई है। नई दिल्ली में आयोजित जीएसटी परिषद की बैठक में वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी की पहल पर छत्तीसगढ़ को जीएसटी परिषद की प्रतिष्ठित ‘स्टैंडिंग कमेटी फॉर ऑफिसर्स’ (राष्ट्रीय लॉ कमेटी) में शामिल कर लिया गया है। देश के मात्र 12 अग्रणी राज्यों में छत्तीसगढ़ को यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिली है। इसके साथ ही, बैठक में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के समक्ष छत्तीसगढ़ के Chhattisgarh GST Law Committee (छत्तीसगढ़ जीएसटी तकनीकी मॉडल) का प्रस्तुतीकरण किया गया, जहाँ राज्य द्वारा लागू मशीन लर्निंग, डेटा एनालिटिक्स और ऑटोमेशन आधारित कर प्रणाली की देश भर के वित्त मंत्रियों और नीति-निर्माताओं ने मुक्तकंठ से सराहना की।
मुख्य बिंदु:
- ‘Chhattisgarh GST Law Committee’: देश के 12 प्रमुख राज्यों के साथ राष्ट्रीय जीएसटी लॉ कमेटी में शामिल हुआ छत्तीसगढ़।
- केंद्रीय वित्त मंत्री ने सराहा: निर्मला सीतारमण के समक्ष छत्तीसगढ़ के राजस्व सचिव ने पेश किया मशीन लर्निंग और ऑटोमेशन का मॉडल।
- व्यापारियों की आवाज बनेगी राष्ट्रीय: प्रदेश के उद्योगों, व्यापारिक संगठनों और कर सलाहकारों की समस्याएं सीधे जीएसटी परिषद तक पहुंचेंगी।
- अन्य राज्यों के लिए मॉडल: जीएसटी परिषद ने देश के अन्य राज्यों को छत्तीसगढ़ के तकनीकी कर सुधारों को अपनाने के लिए किया प्रोत्साहित।
देश के 12 प्रमुख राज्यों में छत्तीसगढ़ शामिल: राष्ट्रीय लॉ कमेटी में मिली जिम्मेदारी
जीएसटी व्यवस्था को अधिक व्यावहारिक और सरल बनाने के लिए जीएसटी परिषद की ‘स्टैंडिंग कमेटी फॉर ऑफिसर्स’ यानी लॉ कमेटी (Law Committee) सबसे महत्वपूर्ण संस्था मानी जाती है।
वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी की सक्रिय पहल के चलते देश भर के राज्यों में से केवल 12 प्रमुख राज्यों को इस राष्ट्रीय समिति में प्रतिनिधित्व दिया गया है, जिसमें छत्तीसगढ़ ने अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। यह समिति जीएसटी कानूनों, इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के नियमों, प्रक्रियाओं के सरलीकरण और कानूनी व्याख्याओं पर अंतिम नीतिगत प्रारूप तैयार करती है जिसे बाद में जीएसटी परिषद मंजूरी देती है।
मशीन लर्निंग और डेटा एनालिटिक्स: कर चोरी पर लगाम और ईमानदार करदाताओं को राहत
जीएसटी परिषद की बैठक के दौरान छत्तीसगढ़ के वाणिज्यिक कर एवं राजस्व सचिव ने राज्य में लागू किए गए डिजिटल सुधारों पर एक विस्तृत पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन दिया:
- मशीन लर्निंग (Machine Learning): फर्जी बिलिंग और बोगस इनपुट टैक्स क्रेडिट (Fake ITC) के नेटवर्क को पकड़ने के लिए एआई और एमएल एल्गोरिदम का उपयोग।
- डेटा एनालिटिक्स व ऑटोमेशन: ई-वे बिल, टोल डेटा और जीएसटी रिटर्न्स का ऑटोमेटेड मिलान, जिससे मानवीय हस्तक्षेप के बिना कर अनुपालन में सुधार हुआ है।
- पारदर्शी कर प्रशासन: ईमानदार व्यापारियों को बिना किसी विभागीय उत्पीड़न (Tax Harassment) के त्वरित रिफंड और सुगम पंजीकरण की ऑनलाइन सुविधा।
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस तकनीकी प्रस्तुति की सराहना करते हुए कहा कि अन्य राज्यों को भी छत्तीसगढ़ के इस डेटा-आधारित मॉडल से सीख लेकर अपने कर प्रशासन को आधुनिक बनाना चाहिए।
प्रदेश के व्यापारियों और उद्योगों की आवाज सीधे पहुंचेगी जीएसटी परिषद तक
लॉ कमेटी में छत्तीसगढ़ को स्थान मिलने का सबसे बड़ा लाभ राज्य के स्थानीय व्यापार और उद्योग जगत को मिलेगा। अब तक राज्य के व्यापारियों की प्रक्रियागत शिकायतों को दिल्ली तक पहुंचने में लंबा समय लगता था।
अब छत्तीसगढ़ चैंबर ऑफ कॉमर्स, सीआईआई (CII), राइस मिलर्स, स्पंज आयरन उत्पादकों और कैट (CAIT) जैसे व्यापारिक संगठनों की व्यावहारिक कठिनाइयों को राज्य सीधे इस समिति में रख सकेगा। इससे नियमों की जटिलताओं को दूर कराने और छत्तीसगढ़ के व्यापारिक हितों के अनुरूप राष्ट्रीय कर नीतियों में संशोधन कराने में सीधी मदद मिलेगी।
“हमारा उद्देश्य केवल राजस्व संग्रह बढ़ाना नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ में ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ का ऐसा माहौल बनाना है जहाँ व्यापारी बिना किसी डर और जटिलता के अपना कारोबार बढ़ा सकें। राष्ट्रीय जीएसटी लॉ कमेटी में छत्तीसगढ़ को स्थान मिलना और हमारे तकनीकी नवाचारों को केंद्रीय वित्त मंत्री द्वारा सराहा जाना यह सिद्ध करता है कि छत्तीसगढ़ अब आधुनिक वित्तीय प्रशासन में देश का नेतृत्व कर रहा है।”— ओ.पी. चौधरी, वित्त एवं वाणिज्यिक कर मंत्री, छत्तीसगढ़ शासन
छत्तीसगढ़ के व्यापारियों, सीए और उद्योगपतियों के लिए इसके क्या मायने हैं?
- व्यापारिक विसंगतियों का त्वरित समाधान: छत्तीसगढ़ के उद्योगों से जुड़ी स्थानीय समस्याओं (जैसे वनोपज, स्टील, सीमेंट और कृषि उपज पर टैक्स स्लैब) को राष्ट्रीय मंच पर प्रमुखता मिलेगी।
- विभाग के चक्कर काटने से मुक्ति: ऑटोमेशन और डिजिटल टूल्स के कारण स्क्रूटनी और असेसमेंट की प्रक्रियाएं फेसलेस और पारदर्शी होंगी।
- राष्ट्रीय कर नीति निर्माण में राज्य की हिस्सेदारी: भारत सरकार जब भी जीएसटी कानूनों में कोई बड़ा बदलाव करेगी, तो उस ड्राफ्टिंग टेबल पर छत्तीसगढ़ की सीधी सहमति होगी।
छत्तीसगढ़ जीएसटी लॉ कमेटी व तकनीकी सुधार: एक नजर में
- बड़ी उपलब्धि: जीएसटी परिषद की राष्ट्रीय लॉ कमेटी में छत्तीसगढ़ शामिल (12 राज्यों में चयन)
- राज्य का नेतृत्व: वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी (बैठक में प्रतिनिधित्व)
- प्रस्तुतिकरण का मंच: जीएसटी परिषद बैठक, नई दिल्ली (केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के समक्ष)
- कोर टेक्नोलॉजी: मशीन लर्निंग (ML), बिग डेटा एनालिटिक्स एवं ऑटोमेशन
- मुख्य उद्देश्य: पारदर्शी कर प्रशासन, कर चोरी पर अंकुश, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस
- प्रत्यक्ष लाभार्थी: प्रदेश के पंजीकृत व्यापारी, एमएसएमई इकाइयां, औद्योगिक संगठन एवं कर सलाहकार
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
छत्तीसगढ़ को जीएसटी परिषद की किस महत्वपूर्ण समिति में शामिल किया गया है?
छत्तीसगढ़ को जीएसटी परिषद की स्टैंडिंग कमेटी फॉर ऑफिसर्स (राष्ट्रीय लॉ कमेटी) में शामिल किया गया है, जिसमें देश के केवल 12 प्रमुख राज्यों को प्रतिनिधित्व मिला है।
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने छत्तीसगढ़ के किस मॉडल की सराहना की?
उन्होंने जीएसटी प्रशासन में छत्तीसगढ़ द्वारा लागू किए गए मशीन लर्निंग, ऑटोमेशन और डेटा एनालिटिक्स आधारित आधुनिक व पारदर्शी कर सुधारों की सराहना की।
राष्ट्रीय लॉ कमेटी में स्थान मिलने से छत्तीसगढ़ के व्यापारियों को क्या लाभ होगा?
प्रदेश के व्यापारियों और उद्योगों की व्यावहारिक समस्याओं, जटिल नियमों और सुझावों को अब राष्ट्रीय स्तर पर सीधे नीति-निर्माताओं के समक्ष रखकर हल कराया जा सकेगा।
जीएसटी परिषद की बैठक में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व किसने किया?
बैठक में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व राज्य के वित्त एवं वाणिज्यिक कर मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी ने किया।
स्रोत (Source): वाणिज्यिक कर (GST) विभाग / जनसंपर्क विभाग, रायपुर-नई दिल्ली (छत्तीसगढ़ शासन)