रायपुर, 09 अक्टूबर: छत्तीसगढ़ में सरकारी योजनाओं को केवल फाइलों तक सीमित न रखकर उनके वास्तविक परिणामों को धरातल पर परखने की व्यवस्था को राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी सराहना मिली है। नीति आयोग, भारत सरकार के विकास निगरानी एवं मूल्यांकन कार्यालय (DMEO) की महानिदेशक सुश्री निधि छिब्बर ने Chhattisgarh State NITI Aayog (छत्तीसगढ़ राज्य नीति आयोग) द्वारा डेटा-आधारित नीति निर्माण और योजनाओं के सतत मूल्यांकन के क्षेत्र में किए गए नवाचारों की मुक्तकंठ से प्रशंसा की है। राज्य नीति आयोग के उपाध्यक्ष श्री गणेश शंकर मिश्रा की अध्यक्षता में मंत्रालय में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में तय किया गया कि यूनिसेफ के सहयोग से देश का अग्रणी ‘बाल कल्याण सूचकांक’ (Child Welfare Index) तैयार किया जाएगा और सरकारी योजनाओं के निष्पक्ष मूल्यांकन के लिए IIM रायपुर तथा IIT भिलाई की तकनीकी विशेषज्ञता ली जाएगी।
मुख्य बिंदु:
- ‘Chhattisgarh State NITI Aayog’: नीति आयोग (DMEO) की महानिदेशक निधि छिब्बर ने राज्य के निगरानी व मूल्यांकन तंत्र को सराहा।
- यूनिसेफ संग ‘बाल कल्याण सूचकांक’: बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण और शिक्षा की सटीक मैपिंग के लिए देश की अग्रणी पहल शुरू।
- IIM रायपुर और IIT भिलाई से साझेदारी: योजनाओं के स्वतंत्र और शोध-आधारित मूल्यांकन के लिए राष्ट्रीय संस्थानों की ली जाएगी मदद।
- ‘अंजोर विजन-2047 पोर्टल’: विकसित छत्तीसगढ़ के लक्ष्यों की ट्रैकिंग के लिए पोर्टल और सतत विकास लक्ष्यों (SDG) आधारित बजट विश्लेषण।
नीति आयोग DMEO की डीजी निधि छिब्बर ने की तारीफ: ‘छत्तीसगढ़ का मॉनिटरिंग सिस्टम मजबूत’
भारत सरकार के डीएमईओ (DMEO) की महानिदेशक निधि छिब्बर ने राज्य नीति आयोग द्वारा स्टेट सपोर्ट मिशन के तहत संचालित गतिविधियों की सघन समीक्षा की।
उन्होंने कहा कि योजनाओं की सफलता केवल उनके बजट खर्च करने से तय नहीं होती, बल्कि यह देखना जरूरी है कि अंतिम व्यक्ति के जीवन में क्या बदलाव आया। छत्तीसगढ़ ने बेहद कम समय में केंद्र सरकार के आउटपुट-आउटकम मॉनिटरिंग फ्रेमवर्क (OOMF) और डेटा गवर्नेंस क्वालिटी इंडेक्स (DGQI) को स्थानीय जरूरतों के अनुसार अपनाकर एक मजबूत तंत्र खड़ा किया है। उन्होंने आश्वस्त किया कि नीति आयोग छत्तीसगढ़ को संस्थागत और तकनीकी रूप से हरसंभव सहयोग देगा।
यूनिसेफ के सहयोग से ‘बाल कल्याण सूचकांक’: बच्चों के विकास की रीयल-टाइम मैपिंग
बैठक का सबसे बड़ा नीतिगत निर्णय बच्चों के समग्र विकास को लेकर सामने आया। राज्य नीति आयोग यूनिसेफ (UNICEF) के सहयोग से राज्यव्यापी ‘बाल कल्याण सूचकांक’ विकसित कर रहा है:
- जिलावार सटीक डेटा: इस सूचकांक के माध्यम से बस्तर और सरगुजा से लेकर मैदानी जिलों तक बच्चों के पोषण, टीकाकरण, स्कूली शिक्षा और सुरक्षा सेवाओं के वास्तविक प्रभाव को नापा जाएगा।
- लक्षित निवेश: जिस जिले या ब्लॉक में बच्चों की स्थिति कमजोर पाई जाएगी, वहाँ सरकार अतिरिक्त बजट और विशेष स्वास्थ्य-शिक्षा अभियान केंद्रित करेगी।
IIM रायपुर और IIT भिलाई करेंगे सरकारी योजनाओं का वैज्ञानिक मूल्यांकन
योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग के सचिव श्री भुवनेश यादव ने बताया कि सरकारी विभागों के आंतरिक दावों से इतर योजनाओं का निष्पक्ष ऑडिट कराने के लिए राष्ट्रीय संस्थानों को जोड़ा जा रहा है।
भारतीय प्रबंध संस्थान (IIM) रायपुर और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) भिलाई के प्रोफेसर और शोधार्थी राज्य की प्रमुख लोक-कल्याणकारी योजनाओं का जमीनी प्रभाव (Impact Assessment) परखेंगे। इसके तहत 9 प्राथमिक क्षेत्रों में त्वरित पायलट अध्ययन किए जा रहे हैं ताकि नीतिगत खामियों को समय रहते दूर किया जा सके।
‘अंजोर विजन पोर्टल’ और परिणाम आधारित बजट (SDG Outcome Budgeting)
राज्य नीति आयोग के उपाध्यक्ष श्री गणेश शंकर मिश्रा ने बताया कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के ‘अंजोर विजन-2047’ के लक्ष्यों की निगरानी के लिए एक विशेष ‘अंजोर विजन पोर्टल’ बनाया जा रहा है।
इसके साथ ही, छत्तीसगढ़ अब सतत विकास लक्ष्यों (SDG) आधारित बजट विश्लेषण की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। इसका अर्थ यह है कि भविष्य में बजट बनाते समय यह देखा जाएगा कि शिक्षा, स्वास्थ्य, गरीबी उन्मूलन और पर्यावरण संरक्षण के 17 वैश्विक लक्ष्यों को हासिल करने में किस विभाग ने कितना ठोस परिणाम दिया है। जिलों की प्रगति मापने के लिए जिला स्तरीय एसडीजी डैशबोर्ड पहले ही सक्रिय कर दिया गया है।
“राज्य नीति आयोग केवल एक दफ्तर नहीं, बल्कि विकसित छत्तीसगढ़ 2047 का थिंक-टैंक है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में हमारा संकल्प है कि डेटा और वैज्ञानिक पद्धतियों के आधार पर नीतियां बनें। जब योजनाओं का सटीक मूल्यांकन होगा, तभी जनता के टैक्स के एक-एक पैसे का सही सदुपयोग सुनिश्चित होगा।”— गणेश शंकर मिश्रा, उपाध्यक्ष, राज्य नीति आयोग (छत्तीसगढ़ शासन)
आम नागरिकों और नीति-निर्माण के लिए इसके क्या मायने हैं?
- योजनाओं का लीकेज रुकेगा: आउटकम-आधारित मॉनिटरिंग से कागजी आंकड़ों पर रोक लगेगी और लाभ सीधे वास्तविक हितग्राही तक पहुंचेगा।
- कमजोर जिलों पर फोकस: बाल कल्याण सूचकांक से दूरस्थ आदिवासी क्षेत्रों के बच्चों को बेहतर स्वास्थ्य और शिक्षा की गारंटी मिलेगी।
- पारदर्शी सरकारी बजट: जनता को यह साफ पता चलेगा कि सरकार द्वारा खर्च किए गए पैसों से समाज और पर्यावरण में क्या वास्तविक सुधार आया।
छत्तीसगढ़ राज्य नीति आयोग समीक्षा बैठक: एक नजर में
- समीक्षा विषय: स्टेट सपोर्ट मिशन एवं योजनाओं का निगरानी-मूल्यांकन तंत्र
- मुख्य अतिथि/समीक्षक: सुश्री निधि छिब्बर, महानिदेशक, DMEO (नीति आयोग, भारत सरकार)
- बैठक की अध्यक्षता: श्री गणेश शंकर मिश्रा, उपाध्यक्ष, राज्य नीति आयोग
- प्रमुख पहल 1: यूनिसेफ के सहयोग से ‘बाल कल्याण सूचकांक’ (Child Welfare Index)
- प्रमुख पहल 2: IIM रायपुर और IIT भिलाई द्वारा योजनाओं का वैज्ञानिक मूल्यांकन
- डिजिटल प्लेटफॉर्म: ‘अंजोर विजन पोर्टल’ एवं जिला स्तरीय SDG डैशबोर्ड
- उपस्थित अधिकारी: श्री भुवनेश यादव (सचिव), श्री तीर्थराज अग्रवाल (संचालक, आर्थिक एवं सांख्यिकी)
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
नीति आयोग DMEO की महानिदेशक निधि छिब्बर ने छत्तीसगढ़ के किस कार्य की सराहना की?
उन्होंने छत्तीसगढ़ राज्य नीति आयोग द्वारा कम समय में विकसित किए गए डेटा-आधारित नीति निर्माण, आउटपुट-आउटकम मॉनिटरिंग फ्रेमवर्क और पारदर्शी मूल्यांकन व्यवस्था की सराहना की।
छत्तीसगढ़ में ‘बाल कल्याण सूचकांक’ किसकी मदद से बनाया जा रहा है?
राज्य नीति आयोग द्वारा बच्चों के स्वास्थ्य, शिक्षा, पोषण और सुरक्षा की सटीक निगरानी के लिए यूनिसेफ (UNICEF) के तकनीकी सहयोग से बाल कल्याण सूचकांक विकसित किया जा रहा है।
शासकीय योजनाओं के मूल्यांकन में किन राष्ट्रीय संस्थानों का सहयोग लिया जा रहा है?
योजनाओं के निष्पक्ष और शोध-आधारित मूल्यांकन के लिए भारतीय प्रबंध संस्थान (IIM) रायपुर और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) भिलाई की विशेषज्ञता का उपयोग किया जाएगा।
‘अंजोर विजन पोर्टल’ का क्या उद्देश्य है?
यह पोर्टल मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के विजन डॉक्यूमेंट ‘अंजोर विजन-2047’ के लक्ष्यों की रीयल-टाइम मॉनिटरिंग और विभागों के प्रदर्शन का आकलन करने के लिए तैयार किया जा रहा है।
स्रोत (Source): राज्य नीति आयोग, छत्तीसगढ़ / योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग (DPR Raipur)