रायपुर, 09 अक्टूबर: राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम (NTEP) के तहत छत्तीसगढ़ ने देश भर में सार्वजनिक स्वास्थ्य का नया इतिहास रच दिया है। TB Free Blocks Chhattisgarh (टीबी मुक्त ब्लॉक छत्तीसगढ़) के अंतर्गत प्रदेश के 4 विकासखंडों—खड़गंवा, सोनहत, बतौली और घरघोड़ा को आधिकारिक रूप से टीबी मुक्त घोषित किया गया है। यह गौरव हासिल करने वाले ये न केवल छत्तीसगढ़, बल्कि पूरे भारत के पहले विकासखंड बन गए हैं। इस ऐतिहासिक उपलब्धि के अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने खड़गंवा से राज्यस्तरीय ‘जोश टीम’ (JOSH Team) का शुभारंभ किया। इस विशेष अभियान में ‘माय भारत’ (MY Bharat) के युवा स्वयंसेवकों और एनसीसी (NCC) कैडेटों को गांव-गांव में टीबी जागरूकता और जांच का जिम्मा सौंपा गया है।
मुख्य बिंदु:
- ‘TB Free Blocks Chhattisgarh’: खड़गंवा, सोनहत, बतौली व घरघोड़ा बने छत्तीसगढ़ और भारत के पहले टीबी मुक्त विकासखंड।
- ‘जोश टीम’ का राज्यव्यापी आगाज: माय भारत के युवा स्वयंसेवक और एनसीसी कैडेट घर-घर जाकर करेंगे टीबी लक्षणों की पहचान।
- 4,676 ग्राम पंचायतें सम्मानित: वर्ष 2025 के लिए निर्धारित कड़े मानकों को पूरा कर टीबी मुक्त बनी 4,676 पंचायतों का जिला स्तर पर सम्मान।
- स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल का आह्वान: ‘टीबी उन्मूलन केवल डॉक्टरों का काम नहीं, यह सामाजिक कलंक मिटाने का सामूहिक जन-आंदोलन है।’
देश में रचा इतिहास: खड़गंवा, सोनहत, बतौली और घरघोड़ा बने पहले टीबी मुक्त ब्लॉक
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के कड़े वैज्ञानिक मापदंडों, सघन सीबी-नॉट (CBNAAT) जांच, निक्षय पोर्टल पर रियल-टाइम ट्रैकिंग और 100% उपचार सफलता दर के आधार पर इन चार ब्लॉकों को प्रमाणित किया गया है:
- खड़गंवा (MCB जिला) व सोनहत (कोरिया जिला): कठिन पहाड़ी और वनांचल क्षेत्र होने के बावजूद स्वास्थ्य अमले ने अंतिम छोर तक हर संदिग्ध मरीज की जांच कर शून्य संक्रमण का स्तर हासिल किया।
- बतौली (सरगुजा जिला): जनजातीय बाहुल्य अंचल में मितानिनों और निक्षय मित्रों के सहयोग से टीबी के मामलों में ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई।
- घरघोड़ा (रायगढ़ जिला): खनन और औद्योगिक परिवेश के बावजूद प्रभावी दवा प्रबंधन और पोषण सहायता से इस ब्लॉक ने यह मुकाम पाया।
क्या है ‘जोश टीम’? माय भारत और एनसीसी कैडेट्स संभालेंगे मोर्चा
टीबी उन्मूलन को सरकारी दफ्तरों से निकालकर जन-आंदोलन बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने युवा शक्ति को जोड़ा है।
‘जोश टीम’ के तहत मेरा युवा भारत (MY Bharat) पोर्टल पर पंजीकृत युवा वॉलिंटियर्स और एनसीसी (NCC) कैडेट्स को विशेष पैरामेडिकल ट्रेनिंग दी गई है। ये युवा अपने-अपने वार्डों और गांवों में दो हफ्ते से ज्यादा समय से खांसी, बुखार और वजन घटने जैसी समस्याओं से जूझ रहे मरीजों की पहचान करेंगे, उन्हें प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHCs) तक जांच के लिए ले जाएंगे और दवाओं का नियमित सेवन (DOTS) सुनिश्चित कराएंगे।
4,676 ग्राम पंचायतें टीबी मुक्त: जिला मुख्यालयों पर हुआ सम्मान
समारोह के दौरान राज्य भर के सभी जिला मुख्यालयों में जन-प्रतिनिधियों और कलेक्टरों की मौजूदगी में वर्ष 2025 के लिए प्रमाणित 4,676 टीबी-मुक्त ग्राम पंचायतों के सरपंचों, सचिवों और मितानिनों को सम्मानित किया गया।
संचालक स्वास्थ्य सेवाएं ने कहा कि यह उपलब्धि स्वास्थ्य विभाग, मितानिनों, निक्षय मित्रों और ग्रामीणों की साझी तपस्या का नतीजा है। अब हमारा लक्ष्य इन पंचायतों में टीबी मुक्त स्थिति को बरकरार रखना और बाकी पंचायतों को भी इस श्रेणी में लाना है।
“टीबी का इलाज पूरी तरह संभव और मुफ्त है, लेकिन अज्ञानता और सामाजिक झिझक के कारण लोग समय पर अस्पताल नहीं पहुंचते। खड़गंवा, सोनहत, बतौली और घरघोड़ा ने पूरे देश को रास्ता दिखाया है कि इच्छाशक्ति हो तो टीबी को हराया जा सकता है। ‘जोश टीम’ के हमारे एनसीसी और माय भारत के युवा प्रदेश के हर नागरिक तक यह संदेश पहुंचाएंगे कि टीबी से डरना नहीं, जांच कराकर स्वस्थ होना है।”— श्याम बिहारी जायसवाल, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री, छत्तीसगढ़ शासन
छत्तीसगढ़ के वनांचल और आम नागरिकों के लिए इसके क्या मायने हैं?
- सामाजिक भेदभाव का अंत: युवाओं की भागीदारी से टीबी के मरीजों के प्रति समाज में फैली छुआछूत और झिझक खत्म होगी।
- निक्षय पोषण योजना का 100% लाभ: पहचान होते ही मरीजों को पोषण आहार के लिए ₹500 से ₹1,000 की मासिक सहायता सीधे बैंक खाते (DBT) में मिलना सुनिश्चित होगा।
- स्वास्थ्य अधोसंरचना पर बढ़ता भरोसा: चार ब्लॉकों की यह राष्ट्रीय सफलता यह साबित करती है कि छत्तीसगढ़ का प्राथमिक स्वास्थ्य नेटवर्क देश के शीर्ष राज्यों के बराबर कार्य कर रहा है।
टीबी मुक्त ब्लॉक एवं जोश टीम अभियान: एक नजर में
- ऐतिहासिक उपलब्धि: छत्तीसगढ़ में पहली बार 4 ब्लॉक घोषित हुए ‘टीबी मुक्त’ (देश में भी प्रथम)
- टीबी मुक्त ब्लॉक: खड़गंवा (MCB), सोनहत (कोरिया), बतौली (सरगुजा) एवं घरघोड़ा (रायगढ़)
- नई पहल: ‘जोश टीम’ (JOSH Team) का राज्यव्यापी शुभारंभ (खड़गंवा से शुरुआत)
- सहभागी युवा शक्ति: माय भारत (MY Bharat) स्वयंसेवक एवं एनसीसी (NCC) कैडेट्स
- सम्मानित पंचायतें: राज्य की 4,676 ग्राम पंचायतों को मिला टीबी मुक्त प्रमाण पत्र
- मुख्य अतिथि: स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
छत्तीसगढ़ के कौन-से 4 विकासखंड टीबी मुक्त घोषित किए गए हैं?
खड़गंवा (MCB जिला), सोनहत (कोरिया जिला), बतौली (सरगुजा जिला) और घरघोड़ा (रायगढ़ जिला) को देश और राज्य के पहले टीबी मुक्त विकासखंड घोषित किया गया है।
टीबी उन्मूलन के लिए शुरू की गई ‘जोश टीम’ क्या है?
‘जोश टीम’ स्वास्थ्य विभाग, माय भारत (MY Bharat) के युवा स्वयंसेवकों और एनसीसी कैडेटों का संयुक्त दल है, जो गांवों में टीबी मरीजों की पहचान और दवा निगरानी का कार्य करेगा।
छत्तीसगढ़ में कितनी ग्राम पंचायतों को टीबी मुक्त घोषित किया गया है?
कड़े स्वास्थ्य मानकों को पूरा करने के बाद राज्य की 4,676 ग्राम पंचायतों को वर्ष 2025 के लिए आधिकारिक तौर पर टीबी मुक्त घोषित कर सम्मानित किया गया है।
‘जोश टीम’ का राज्य स्तरीय शुभारंभ कहाँ से किया गया?
स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल की उपस्थिति में इस अभियान का राज्य स्तरीय शुभारंभ खड़गंवा विकासखंड (जिला MCB) से किया गया।
स्रोत (Source): स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग / राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (DPR Raipur)