रायपुर, 26 सितंबर: छत्तीसगढ़ में ‘सेवा संकल्प अभियान’ के जरिए राजस्व प्रशासन ने ऐतिहासिक छलांग लगाई है। प्रदेश के सभी 33 जिलों के कुल 20,551 गांवों में से 19,805 गांवों (96.37%) में जमीन का विस्तृत डिजिटल सर्वेक्षण पूरा कर लिया गया है। ड्रोन कैमरों और अत्याधुनिक जीपीएस तकनीक से लैस राजस्व अमले के सीधे किसानों के दरवाजे तक पहुंचने से नामांतरण, सीमांकन और केसीसी लोन के लिए पटवारी और तहसील दफ्तरों के चक्कर काटने का पुराना दौर समाप्त हो रहा है।
मुख्य बिंदु:
- 33 जिलों के 20,551 राजस्व गांवों में से 19,805 गांवों में डिजिटल सर्वे पूरा (96.37% कवरेज)।
- रायपुर, महासमुंद, राजनांदगांव, कबीरधाम, बिलासपुर, जांजगीर-चांपा, सक्ती और सूरजपुर में 100% लक्ष्य हासिल।
- बस्तर संभाग के सुकमा, बीजापुर और नारायणपुर के वनांचलों में ड्रोन कैमरों से हाई-प्रिसिजन मैपिंग जारी।
- त्रुटिरहित डिजिटल नक्शों से जमीन विवादों और कोर्ट मुकदमों में भारी कमी, बिचौलियों का दखल समाप्त।
तहसील और पटवारी दफ्तरों के चक्करों से मिली राहत
ग्रामीण अंचलों में किसानों और भू-स्वामियों के जीवन का बड़ा हिस्सा जमीन के सीमांकन, नामांतरण और फौती दुरुस्ती के लिए सरकारी दफ्तरों में बीत जाता था। बिचौलियों की मनमानी और पड़ोसियों से मेड़ व सीमा विवाद के चलते किसान वर्षों तक अदालती मुकदमों में उलझे रहते थे।
‘सेवा का संकल्प, सेवा पहुंची आपके द्वार’ के तहत अब प्रशासनिक तंत्र खुद हाई-टेक जीपीएस मशीनों और प्रशिक्षित सर्वेयरों के साथ गांव-गांव पहुंच रहा है। इससे शासन और आम नागरिक के बीच का फासला मिट गया है।
8 जिलों में शत-प्रतिशत डिजिटल सर्वे, बस्तर में ड्रोन से मैपिंग
योजनाबद्ध क्रियान्वयन के चलते रायपुर, बिलासपुर, महासमुंद, राजनांदगांव, कबीरधाम, जांजगीर-चांपा, सक्ती और सूरजपुर जिलों में डिजिटल सर्वे का काम शत-प्रतिशत पूरा हो चुका है।
वहीं बस्तर संभाग के घने जंगलों और दुर्गम पहाड़ियों वाले जिलों—जैसे नारायणपुर, सुकमा और बीजापुर—में अत्याधुनिक ड्रोन कैमरों और सेटेलाइट तकनीक की मदद से एक-एक खेत और भूखंड को डिजिटल नक्शे पर दर्ज करने का काम युद्धस्तर पर चल रहा है।
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बैंक लोन और फसल बीमा में पारदर्शिता, खत्म हुआ बिचौलियों का जाल
डिजिटल और पारदर्शी राजस्व रिकॉर्ड तैयार होने से बैंकों के लिए भूमि सत्यापन की प्रक्रिया बेहद आसान हो गई है। अब किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) और कृषि ऋण बिना किसी मानवीय दखल या अनावश्यक देरी के सीधे स्वीकृत हो रहे हैं।
इसके साथ ही प्राकृतिक आपदा के समय मिलने वाली राहत राशि और फसल बीमा क्लेम का पैसा बिना किसी कटौती के सीधे वास्तविक भूमि स्वामी के बैंक खाते में ट्रांसफर हो रहा है।
“जब तकनीक और संवेदनशील प्रशासन एक साथ काम करते हैं, तो सुशासन कागजों से निकलकर सीधे जनता के दरवाजे पर पहुंचता है। 96% से अधिक गांवों का डिजिटल सर्वे पूरा होना छत्तीसगढ़ को शत-प्रतिशत पारदर्शी और त्रुटिरहित राजस्व प्रणाली वाला आदर्श राज्य बनाने की दिशा में निर्णायक कदम है।”— विष्णु प्रसाद वर्मा, सहायक संचालक, छत्तीसगढ़
आम किसानों और भू-स्वामियों के लिए इसके क्या मायने हैं?
- सीमा विवादों और मुकदमों से मुक्ति: जीपीएस आधारित डिजिटल नक्शों से मेड़ और रकबे की सटीक माप उपलब्ध है, जिससे पड़ोसियों के बीच होने वाले आपसी विवाद पूरी तरह खत्म हो रहे हैं।
- बिना बिचौलियों के काम: ऑनलाइन अभिलेख दुरुस्त होने से नामांतरण और खाता विभाजन के नाम पर दलालों द्वारा की जाने वाली अवैध वसूली पर रोक लग गई है।
- तत्काल बैंक लोन की सुविधा: बैंकों द्वारा डिजिटल खसरा और नक्शे का ऑनलाइन सत्यापन होने से कृषि ऋण कुछ ही दिनों में मंजूर हो जाता है।
- सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ: किसान न्याय योजना और सूखा-बाढ़ राहत की राशि सीधे आधार लिंक बैंक खाते में बिना किसी गड़बड़ी के पहुंच रही है।
डिजिटल राजस्व क्रांति के प्रमुख आंकड़े
- कुल राजस्व गांव: 20,551
- डिजिटल सर्वे पूर्ण: 19,805 गांव (96.37%)
- शत-प्रतिशत पूर्ण जिले: रायपुर, बिलासपुर, महासमुंद, राजनांदगांव, कबीरधाम, जांजगीर-चांपा, सक्ती और सूरजपुर।
- उपयोग की गई तकनीक: हाई-प्रिसिजन जीपीएस (DGPS), ड्रोन कैमरा मैपिंग और जीआईएस आधारित डिजिटल लैंड रिकॉर्ड्स।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
छत्तीसगढ़ में कितने प्रतिशत गांवों का डिजिटल भू-सर्वेक्षण पूरा हो चुका है?
छत्तीसगढ़ के सभी 33 जिलों के कुल 20,551 गांवों में से 19,805 गांवों यानी लगभग 96.37% राजस्व ग्रामों में डिजिटल सर्वेक्षण पूरा हो चुका है।
जमीन के डिजिटल सर्वे से किसानों को क्या सबसे बड़ा फायदा मिला है?
सटीक डिजिटल नक्शों से जमीन के सीमा विवाद समाप्त हो गए हैं और केसीसी लोन व फसल बीमा क्लेम बिना बिचौलियों के सीधे मिल रहा है।
दुर्गम और वनांचल क्षेत्रों में भूमि सर्वे के लिए किस तकनीक का उपयोग हो रहा है?
बस्तर संभाग के सुकमा, बीजापुर और नारायणपुर जैसे क्षेत्रों में हाई-प्रिसिजन जीपीएस और अत्याधुनिक ड्रोन कैमरों से मैपिंग की जा रही है।
स्रोत (Source): छत्तीसगढ़ जनसंपर्क विभाग (DPR Raipur) | विशेष लेख: विष्णु प्रसाद वर्मा (सहायक संचालक)