Rajbhasha Hindi Pakhwada 2026: ICAR-NIBSM रायपुर में हुआ समापन, वैज्ञानिकों ने लिया कामकाज में हिंदी अपनाने का संकल्प

Rajbhasha Hindi Pakhwada 2026 Rajbhasha Hindi Pakhwada 2026

रायपुर, 02 अक्टूबर: भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के प्रतिष्ठित राष्ट्रीय जैविक स्ट्रेस प्रबंधन संस्थान (NIBSM), रायपुर में ‘रिफॉर्म उत्सव’ और Rajbhasha Hindi Pakhwada 2026 (राजभाषा हिंदी पखवाड़ा-2026) का भव्य समापन समारोह उत्साहपूर्वक आयोजित किया गया। इस अवसर पर एक विशेष हिंदी कार्यशाला का भी आयोजन हुआ, जिसमें संस्थान के शीर्ष कृषि वैज्ञानिकों, अधिकारियों और कर्मचारियों ने सक्रिय सहभागिता की। समारोह में वैज्ञानिक अनुसंधान, पत्राचार और दैनिक प्रशासनिक कार्यों में राजभाषा हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग को बढ़ावा देने का सामूहिक संकल्प लिया गया।

मुख्य बिंदु:

  • ‘Rajbhasha Hindi Pakhwada 2026’ (राजभाषा हिंदी पखवाड़ा) और रिफॉर्म उत्सव का ICAR-NIBSM रायपुर में गरिमामय समापन।
  • पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर के सेवानिवृत्त प्राध्यापक प्रो. राजेश दुबे ने मुख्य वक्ता के रूप में दिया प्रेरक व्याख्यान।
  • संस्थान के निदेशक डॉ. पी.के. राय ने विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेता प्रतिभागियों को बांटे प्रमाण-पत्र और नकद पुरस्कार राशि।
  • कृषि शोध और जटिल जैविक अनुसंधानों को किसानों तक पहुंचाने के लिए हिंदी को बताया सबसे सशक्त और सहज माध्यम।

प्रो. राजेश दुबे का मुख्य व्याख्यान: कार्यालयीन कार्यों में हिंदी का सहज प्रयोग

समारोह में मुख्य वक्ता के रूप में आमंत्रित पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर के सेवानिवृत्त प्रोफेसर प्रो. राजेश दुबे ने राजभाषा हिंदी की संवैधानिक महत्ता और कार्यालयीन उपयोगिता पर विस्तृत प्रकाश डाला।

उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक और तकनीकी संस्थानों में अंग्रेजी की जटिल शब्दावली के स्थान पर सरल और बोधगम्य हिंदी का प्रयोग किया जाना चाहिए। पखवाड़े के दौरान आयोजित विभिन्न साहित्यिक और तकनीकी प्रतियोगिताओं की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से कर्मचारियों के भीतर भाषा के प्रति झिझक समाप्त होती है और वे दैनिक फाइलों, नोटिंग व ड्राफ्टिंग में आत्मविश्वास के साथ हिंदी का उपयोग करने के लिए प्रेरित होते हैं।

‘हिंदी केवल संवाद नहीं, जनसामान्य को जोड़ने वाला सेतु’: निदेशक डॉ. पी.के. राय

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए राष्ट्रीय जैविक स्ट्रेस प्रबंधन संस्थान के निदेशक डॉ. पी.के. राय ने राजभाषा के व्यावहारिक क्रियान्वयन पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि हिंदी केवल एक भाषा या संवाद का माध्यम मात्र नहीं है, बल्कि यह उच्च वैज्ञानिक अनुसंधान संस्थानों को देश के आम किसानों और जनसामान्य से जोड़ने वाली सबसे मजबूत कड़ी है। जब कृषि वैज्ञानिक अपनी प्रयोगशालाओं में तैयार जैविक तकनीकों और फसल सुरक्षा उपायों को किसानों की अपनी भाषा में समझाएंगे, तभी वैज्ञानिक शोध का वास्तविक लाभ खेतों तक पहुंचेगा। उन्होंने संस्थान के सभी प्रभागों से आग्रह किया कि वे राजभाषा नियमों का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित करें।


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राजभाषा अधिकारी ने प्रस्तुत किया वार्षिक प्रतिवेदन, विजेताओं को मिले पुरस्कार

संस्थान के राजभाषा अधिकारी प्रांशु राठौर ने पखवाड़े के दौरान आयोजित गतिविधियों, निबंध लेखन, वाद-विवाद, हिंदी टंकण और प्रशासनिक कार्यशालाओं का विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत किया।

प्रतिवेदन के उपरांत विभिन्न प्रतियोगिताओं के परिणामों की आधिकारिक घोषणा की गई। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले वैज्ञानिकों, तकनीकी सहायकों और प्रशासनिक कर्मचारियों को निदेशक डॉ. पी.के. राय द्वारा प्रशस्ति प्रमाण-पत्र और प्रोत्साहन पुरस्कार राशि प्रदान कर सम्मानित किया गया।

रिफॉर्म उत्सव और हिंदी कार्यशाला: वैज्ञानिक अमले ने लिया संकल्प

कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित विशेष हिंदी कार्यशाला में प्रशासनिक कार्यों को सरल हिंदी में संपादित करने की व्यावहारिक पद्धतियां समझाई गईं।

समारोह में संस्थान के संयुक्त निदेशक, वरिष्ठ वैज्ञानिक, वित्त एवं लेखा अधिकारी तथा समस्त कर्मचारी उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में रिफॉर्म उत्सव की भावना को अपनाते हुए अपने कार्यालयीन दायित्वों में राजभाषा हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग को अपनी कार्यशैली का अभिन्न अंग बनाने का दृढ़ संकल्प लिया।

“कृषि और जैविक स्ट्रेस प्रबंधन से जुड़े हमारे अनुसंधान तभी सार्थक हैं जब वे गांव के अंतिम छोर पर खड़े किसान की समझ में आएं। हिंदी देश की धड़कन है और वैज्ञानिक संस्थानों का यह कर्तव्य है कि वे अपनी खोजों को जनभाषा में प्रस्तुत करें। संस्थान में राजभाषा का वातावरण और अधिक मजबूत किया जाएगा।”— डॉ. पी.के. राय, निदेशक, ICAR-NIBSM रायपुर

वैज्ञानिक संस्थानों और आम किसानों के लिए इसके क्या मायने हैं?

  • कृषि अनुसंधान का लोकतंत्रीकरण: फसलों में लगने वाले जैविक रोगों, कीट प्रबंधन और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों पर तैयार शोध पत्र जब हिंदी में सुलभ होंगे, तो ग्रामीण कृषि विस्तार कार्यकर्ताओं को तकनीकी जानकारी आसानी से मिलेगी।
  • कार्यालयीन कार्यकुशलता में सुधार: मातृभाषा में फाइल नोटिंग और संवाद होने से कर्मचारियों के कार्य निष्पादन की गति तेज होती है और प्रशासनिक त्रुटियों की आशंका कम होती है।
  • स्थानीय किसानों से सीधा संपर्क: राष्ट्रीय स्तर के केंद्रीय संस्थान द्वारा हिंदी को प्राथमिकता देने से छत्तीसगढ़ के स्थानीय किसान बेझिझक वैज्ञानिकों से अपनी समस्याओं का समाधान पा सकेंगे।

हिंदी पखवाड़ा 2026 के मुख्य बिंदु एक नजर में

  • आयोजक संस्थान: भा.कृ.अनु.प – राष्ट्रीय जैविक स्ट्रेस प्रबंधन संस्थान (ICAR-NIBSM), रायपुर
  • अभियान: रिफॉर्म उत्सव एवं राजभाषा हिंदी पखवाड़ा-2026
  • मुख्य वक्ता: प्रो. राजेश दुबे (सेवानिवृत्त प्रोफेसर, पं. रविशंकर शुक्ल विवि)
  • अध्यक्षता: डॉ. पी.के. राय (निदेशक, ICAR-NIBSM)
  • प्रतिवेदन प्रस्तुति: प्रांशु राठौर (राजभाषा अधिकारी)
  • प्रमुख गतिविधियां: हिंदी कार्यशाला, तकनीकी प्रतियोगिताएं और पुरस्कार वितरण।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Rajbhasha Hindi Pakhwada 2026 का आयोजन किस केंद्रीय संस्थान में किया गया?

इसका आयोजन भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के अधीन रायपुर स्थित राष्ट्रीय जैविक स्ट्रेस प्रबंधन संस्थान (NIBSM) में किया गया।

समापन समारोह में मुख्य वक्ता के रूप में किसने अपना व्याख्यान दिया?

पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर के सेवानिवृत्त प्रोफेसर प्रो. राजेश दुबे ने मुख्य वक्ता के रूप में प्रशासनिक कार्यों में हिंदी के महत्व पर व्याख्यान दिया।

संस्थान के निदेशक डॉ. पी.के. राय ने हिंदी के प्रयोग पर क्या विचार रखे?

उन्होंने कहा कि हिंदी केवल संवाद का माध्यम नहीं बल्कि संस्थानों को जनसामान्य और किसानों से जोड़ने का सशक्त सेतु है, इसलिए वैज्ञानिक कार्यों में इसका अधिकाधिक प्रयोग होना चाहिए।

पखवाड़े के दौरान उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को क्या दिया गया?

प्रतियोगिताओं के विजेता प्रतिभागियों को संस्थान के निदेशक द्वारा प्रशस्ति प्रमाण-पत्र और नकद पुरस्कार राशि देकर सम्मानित किया गया।

स्रोत (Source): भा.कृ.अनु.प – राष्ट्रीय जैविक स्ट्रेस प्रबंधन संस्थान (ICAR-NIBSM), रायपुर / जनसंपर्क प्रभाग

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