रायपुर, 24 सितंबर 2026: छत्तीसगढ़ के निर्माण श्रमिकों और उनके परिवारों को केवल असंगठित मजदूरी तक सीमित न रखकर उन्हें आधुनिक तकनीकी कौशल से संपन्न बनाने और औद्योगिक रोजगार से जोड़ने की दिशा में एक युगांतकारी पहल की गई है। नवा रायपुर अटल नगर स्थित निवास कार्यालय में छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल (BOCW) तथा देश के प्रतिष्ठित केंद्रीय पेट्रोकेमिकल्स इंजीनियरिंग एवं तकनीकी संस्थान (CIPET / सिपेट) रायपुर के मध्य BOCW CIPET Skill Training हेतु एक महत्वपूर्ण अनुबंध (Agreement) औपचारिक रूप से संपन्न हुआ।
श्रम मंत्री श्री लखन लाल देवांगन तथा छत्तीसगढ़ बीओसीडब्ल्यू मंडल के अध्यक्ष डॉ. रामप्रताप सिंह की गरिमामयी उपस्थिति में हस्ताक्षरित इस अनुबंध के तहत प्रदेश के 200 पंजीकृत निर्माण श्रमिकों अथवा उनके बच्चों को ‘कौशल विकास एवं परिवार सशक्तिकरण योजना’ के अंतर्गत 480 घंटे का पूर्णतः निःशुल्क आवासीय तकनीकी प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन एवं निर्देशानुसार शुरू की जा रही इस पहल का मुख्य उद्देश्य श्रमिक परिवारों की अगली पीढ़ी को परंपरागत मजदूरी के चक्रव्यूह से बाहर निकालकर आधुनिक विनिर्माण उद्योगों में सम्मानजनक तकनीकी रोजगार दिलाना है।
इस विशेष आवासीय प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को प्लास्टिक प्रोसेसिंग (Plastic Processing), इंजेक्शन मोल्डिंग (Injection Moulding) एवं एक्सट्रूज़न (Extrusion) जैसी आधुनिक पेट्रोकेमिकल व बहुलक तकनीकों में व्यावहारिक और रोजगारपरक हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग दी जाएगी। प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूर्ण होने के उपरांत सिपेट और श्रम विभाग द्वारा सभी प्रशिक्षित युवाओं को संबंधित प्लास्टिक, ऑटोमोबाइल, पैकेजिंग और विनिर्माण उद्योगों में शत-प्रतिशत रोजगार (प्लेसमेंट) दिलाने में संस्थागत सहायता दी जाएगी, जिससे उनके परिवारों की आय और आजीविका में क्रांतिकारी सुधार होगा।
| बीओसीडब्ल्यू-सिपेट कौशल प्रशिक्षण अनुबंध: मुख्य तथ्य (Quick Facts) | विवरण |
|---|---|
| साझेदार संस्थाएं | BOCW CIPET Skill Training (छत्तीसगढ़ BOCW मंडल 🤝 सिपेट रायपुर) |
| संबद्ध योजना | कौशल विकास एवं परिवार सशक्तिकरण योजना (BOCW बोर्ड) |
| लाभार्थी समूह | 200 पंजीकृत निर्माण श्रमिक अथवा उनके पुत्र/पुत्री |
| प्रशिक्षण की अवधि | 480 घंटे का पूर्णतः आवासीय तकनीकी प्रशिक्षण (Residential Training) |
| प्रमुख तकनीकी ट्रेड | प्लास्टिक प्रोसेसिंग, इंजेक्शन मोल्डिंग एवं एक्सट्रूज़न (Extrusion) |
| अनुबंध हस्ताक्षर स्थल | नवा रायपुर अटल नगर स्थित निवास कार्यालय (24 सितंबर 2026) |
| उपस्थित शीर्ष नेतृत्व | श्री लखन लाल देवांगन (श्रम मंत्री) एवं डॉ. रामप्रताप सिंह (अध्यक्ष, BOCW मंडल) |
प्लास्टिक प्रोसेसिंग, इंजेक्शन मोल्डिंग और एक्सट्रूज़न: व्यावहारिक तकनीकी प्रशिक्षण
BOCW CIPET Skill Training के तहत प्रतिभागियों को आधुनिक औद्योगिक मानकों के अनुरूप उच्च-स्तरीय मशीनों पर तकनीकी दक्षता प्रदान की जाएगी:
- रोजगारोन्मुखी तकनीकी क्षेत्र: प्रशिक्षण के दौरान निर्माण श्रमिकों और उनके बच्चों को प्लास्टिक प्रोसेसिंग, इंजेक्शन मोल्डिंग तथा एक्सट्रूज़न जैसे मुख्य विनिर्माण ट्रेडों में गहन प्रायोगिक (Hands-on) प्रशिक्षण मिलेगा।
- उद्योगों में सीधी मांग: ये तीनों तकनीकी विधाएं पाइप निर्माण, पैकेजिंग, ऑटोमोबाइल कंपोनेंट्स, विद्युत उपकरण और दैनिक उपयोग की प्लास्टिक वस्तुओं के निर्माण में अनिवार्य हैं, जिससे प्रशिक्षण के बाद रोजगार की त्वरित संभावनाएं बनती हैं।
- परिवार सशक्तिकरण: बीओसीडब्ल्यू मंडल ने रेखांकित किया कि यह पहल केवल पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के लिए नहीं है, बल्कि उनके बच्चों के लिए भी है। इससे श्रमिक परिवारों की युवा पीढ़ी को तकनीकी रूप से कुशल बनाकर उनके परिवारों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति को मजबूत किया जा सकेगा।
अनुबंध समारोह में उपस्थित प्रमुख प्रशासनिक एवं तकनीकी अधिकारी
नवा रायपुर में आयोजित इस महत्वपूर्ण अनुबंध हस्ताक्षर समारोह में श्रम विभाग और सिपेट के शीर्ष नीति-निर्माता सम्मिलित हुए:
- श्रम विभाग के सचिव श्री हिमशिखर गुप्ता
- सिपेट (CIPET) रायपुर के प्रधान निदेशक डॉ. आलोक साहू
- सिपेट के प्रशासनिक अधिकारी श्री नितेश कुमार जैन
- छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के सचिव श्री गिरीश रामटेके
- तथा श्रम विभाग और तकनीकी शिक्षा से जुड़े अन्य वरिष्ठ विभागीय अधिकारी।
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CGPSC Static Facts: सिपेट (CIPET), BOCW मंडल एवं प्लास्टिक प्रौद्योगिकी
प्रतियोगी परीक्षाओं (CGPSC राज्य सेवा परीक्षा Paper-5 उद्योग व अर्थव्यवस्था तथा Paper-2 श्रम कल्याण नीतियां) के दृष्टिकोण से मानक तथ्य:
- केंद्रीय पेट्रोकेमिकल्स इंजीनियरिंग एवं तकनीकी संस्थान (CIPET):
- मूल स्थापना: वर्ष 1968 में भारत सरकार द्वारा संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) के सहयोग से चेन्नई में स्थापित। यह केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के अधीन कार्यरत शीर्ष स्वायत्त संस्थान है।
- सिपेट रायपुर केंद्र: छत्तीसगढ़ में प्लास्टिक और पॉलिमर उद्योग हेतु कुशल तकनीकी जनशक्ति तैयार करने के उद्देश्य से भनपुरी औद्योगिक क्षेत्र (रायपुर) में स्थापित।
- छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल (BOCW):
- वैधानिक आधार: भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार (नियोजन का विनियमन एवं सेवा शर्तें) अधिनियम, 1996 की धारा 18 के अंतर्गत गठित सांविधिक निकाय।
- वित्तपोषण: ₹10 लाख से अधिक की लागत वाली निर्माण परियोजनाओं पर लगाए जाने वाले 1% कल्याण उपकर (Cess) से श्रमिकों के स्वास्थ्य, मातृत्व, शिक्षा, कौशल और पेंशन योजनाओं का संचालन किया जाता है।
- प्रमुख प्लास्टिक विनिर्माण तकनीकें (Industrial Processes):
- इंजेक्शन मोल्डिंग (Injection Moulding): पिघले हुए बहुलक (पॉलिमर) को उच्च दबाव में एक सांचे (Mould) में इंजेक्ट कर जटिल त्रि-आयामी उत्पाद (जैसे कार बंपर, बाल्टियां, बॉटल कैप, मोबाइल केसिंग) तैयार करने की तकनीक।
- एक्सट्रूज़न (Extrusion): गर्म पॉलिमर को एक डाई (Die) के माध्यम से लगातार आगे धकेलकर निरंतर एकसमान क्रॉस-सेक्शन वाले उत्पाद (जैसे पीवीसी पाइप, केबल कोटिंग, प्लास्टिक शीट्स और फिल्म) बनाने की सतत विनिर्माण प्रक्रिया।
विश्लेषण: ‘अकुशल मजदूरी’ से ‘औद्योगिक कौशल’ में रूपांतरण और सामाजिक गतिशीलता
(UPSC/CGPSC Mains Analysis – Labor Economics, Skill Development & Social Mobility)
1. निर्माण मजदूरी के अंतर-पीढ़ीगत दुष्चक्र (Inter-generational Cycle) का अंत: भारत में निर्माण क्षेत्र की सबसे बड़ी सामाजिक विडंबना यह रही है कि राजमिस्त्री या रेजा-कुली का बेटा भी प्रायः परिस्थितियों के अभाव में निर्माण मजदूर ही बन जाता है। BOCW CIPET Skill Training इस सामाजिक अवरोध को सीधे तोड़ती है। 480 घंटे (लगभग 3 माह) का गहन आवासीय प्रशिक्षण श्रमिकों के बच्चों को एक ‘डिप्लोमा-तुल्य’ व्यावहारिक तकनीकी योग्यता देता है। जब एक मजदूर का बेटा या बेटी सिपेट से निकलकर प्लास्टिक या ऑटोमोबाइल फैक्ट्री में ‘मोल्डिंग तकनीशियन’ या ‘मशीन ऑपरेटर’ बनता है, तो वह पूरे परिवार को स्थायी रूप से असंगठित मजदूरी से बाहर निकालकर संगठित विनिर्माण क्षेत्र (Formal Manufacturing Sector) में स्थापित करता है।
2. श्रम कल्याण उपकर (Cess) का उत्पादक पूंजी में निवेश: पूर्व में श्रम मंडलों का ध्यान केवल मृत्यु अनुग्रह राशि या शादी सहायता जैसी उपभोग-आधारित नकद सब्सिडी (Doles) बांटने तक सीमित रहता था। कल्याण निधि का उपयोग देश के प्रतिष्ठित राष्ट्रीय तकनीकी संस्थान (CIPET) के साथ अनुबंध कर ‘कौशल विकास’ में करना राजकोषीय दृष्टि से अत्यंत बुद्धिमत्तापूर्ण है। यह राज्य के स्थानीय उद्योगों को कुशल स्थानीय कार्यबल (Local Skilled Workforce) उपलब्ध कराता है और मेक इन इंडिया व ‘अमृतकाल छत्तीसगढ़ विजन-2047’ के औद्योगिक लक्ष्यों को सीधे धरातल पर जोड़ता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Q1. BOCW CIPET Skill Training अनुबंध के तहत कितने निर्माण श्रमिकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा?
इस अनुबंध के तहत छत्तीसगढ़ के 200 पंजीकृत निर्माण श्रमिकों अथवा उनके बच्चों को 480 घंटे का निःशुल्क आवासीय तकनीकी प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।
Q2. सिपेट रायपुर में प्रशिक्षणार्थियों को किन विशिष्ट तकनीकी ट्रेडों में प्रशिक्षण मिलेगा?
प्रतिभागियों को प्लास्टिक प्रोसेसिंग, इंजेक्शन मोल्डिंग (Injection Moulding) और एक्सट्रूज़न (Extrusion) जैसे आधुनिक तकनीकी क्षेत्रों में व्यावहारिक एवं रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण दिया जाएगा।
Q3. यह प्रशिक्षण किस योजना के अंतर्गत और किन प्रमुख संस्थाओं के बीच संपन्न हुआ?
यह प्रशिक्षण ‘कौशल विकास एवं परिवार सशक्तिकरण योजना’ के अंतर्गत छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल (BOCW) तथा सिपेट (CIPET) रायपुर के मध्य अनुबंधित हुआ।
स्रोत (Source)
छत्तीसगढ़ जनसंपर्क विभाग (DPR Chhattisgarh) आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति, 24 सितम्बर 2026.