ASI Chhattisgarh MoU: प्राचीन स्मारकों में बढ़ेंगी विश्वस्तरीय सुविधाएं, बनेंगे कैफेटेरिया व साइट म्यूजियम; ब्रेल पाथवे का भी प्रावधान

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रायपुर, 01 अक्टूबर: छत्तीसगढ़ की समृद्ध पुरातात्विक एवं सांस्कृतिक धरोहरों को सहेजते हुए राज्य में विरासत पर्यटन (हेरिटेज टूरिज्म) को नई दिशा देने के लिए भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण और राज्य सरकार के बीच ऐतिहासिक ASI Chhattisgarh MoU संपन्न हुआ है। भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण (ASI), भारत सरकार और संस्कृति विभाग, छत्तीसगढ़ शासन के मध्य हुए इस महत्वपूर्ण समझौते के तहत प्रदेश के राष्ट्रीय महत्व के संरक्षणाधीन स्मारकों और पुरातात्विक स्थलों पर उनकी ऐतिहासिक मौलिकता और मूल स्वरूप को सुरक्षित रखते हुए आधुनिक पर्यटक सुविधाओं और अधोसंरचना का सुनियोजित विकास किया जाएगा।

मुख्य बिंदु:

  • भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण (ASI) और छत्तीसगढ़ संस्कृति विभाग के मध्य ऐतिहासिक ‘ASI Chhattisgarh MoU’ पर हस्ताक्षर।
  • संरक्षित स्मारकों पर स्वच्छ पेयजल, विश्राम स्थल, कैफेटेरिया, पार्किंग, क्लॉक रूम, सूचना केंद्र और साइट म्यूजियम होंगे विकसित।
  • समावेशी पर्यटन के तहत दृष्टिबाधित और दिव्यांग पर्यटकों के लिए ब्रेल साइनेज और टैक्टाइल पाथवे का विशेष प्रावधान।
  • धरोहरों की मूल संरचना सुरक्षित रखना सर्वोच्च प्राथमिकता; केंद्र, राज्य, सीएसआर (CSR) और पीपीपी (PPP) मॉडल से जुटेंगे वित्तीय संसाधन।

संरक्षित स्मारकों पर विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचा: क्या-क्या सुविधाएं मिलेंगी?

समझौते के अनुसार छत्तीसगढ़ शासन द्वारा भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण के वरिष्ठ अधिकारियों और पुरातत्वविदों के तकनीकी परामर्श से प्रत्येक संरक्षित स्थल के लिए अलग-अलग विस्तृत मास्टरप्लान तैयार किया जाएगा।

पर्यटकों की यात्रा को सुगम और यादगार बनाने के लिए स्थलों पर स्वच्छ एवं आधुनिक शौचालय, आरओ शीतल पेयजल, छायादार विश्राम स्थल, कैफेटेरिया, व्यवस्थित वाहन पार्किंग और क्लॉक रूम जैसी प्राथमिक सुविधाएं जुटाई जाएंगी। इसके अलावा पर्यटकों को इतिहास से रूबरू कराने के लिए सुव्यवस्थित सूचना केंद्र (Tourist Information Centers), साइट म्यूजियम और ऐतिहासिक संदर्भ वाले साइनेज बोर्ड लगाए जाएंगे। परिसर के चारों ओर पर्यावरण के अनुकूल लैंडस्केपिंग और पाथवे का भी विकास होगा।

समावेशी पर्यटन: दिव्यांग पर्यटकों के लिए ब्रेल साइनेज और टैक्टाइल पाथवे

इस एमओयू का सबसे प्रगतिशील पहलू ‘समावेशी पर्यटन’ (Inclusive Tourism) पर जोर देना है। पुरातात्विक स्थलों को सभी वर्गों के लिए सुलभ और बाधा-मुक्त बनाया जाएगा।

दृष्टिबाधित और दिव्यांग पर्यटकों की सहूलियत के लिए स्मारकों के इतिहास और दिशा-निर्देशों को ‘ब्रेल साइनेज’ (Braille Signage) के माध्यम से प्रदर्शित किया जाएगा। साथ ही चलने में आसानी के लिए ‘टैक्टाइल पाथवे’ (Tactile Pathways) और व्हीलचेयर रैंप्स का निर्माण किया जाएगा, ताकि कोई भी नागरिक ऐतिहासिक विरासत के दीदार से वंचित न रहे।


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स्मारकों की मौलिकता रहेगी सर्वोच्च: ASI की पूर्व अनुमति अनिवार्य

समझौते में यह स्पष्ट शर्त रखी गई है कि विकास कार्यों के दौरान प्राचीन स्मारकों की ऐतिहासिकता, निर्माण शैली और मूल स्वरूप से कोई छेड़छाड़ नहीं की जाएगी।

प्रस्तावित निर्माण कार्यों की डिजाइन, रंग-रूप और उपयोग की जाने वाली निर्माण सामग्री का चयन इस प्रकार होगा कि मूल स्मारक को किसी प्रकार का भौतिक या दृश्य नुकसान न पहुंचे। सभी परियोजनाएं प्राचीन संस्मारक तथा पुरातत्वीय स्थल और अवशेष अधिनियम (AMASR Act) के कड़े नियमों के तहत ही क्रियान्वित होंगी और किसी भी कार्य को शुरू करने से पहले एएसआई से पूर्व तकनीकी स्वीकृति लेना अनिवार्य होगा।

केंद्रीय बजट, CSR और PPP मॉडल से जुटाए जाएंगे वित्तीय संसाधन

पुरातात्विक स्थलों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं विकसित करने के लिए वित्तीय संसाधनों के विविध स्रोतों का प्रावधान किया गया है।

परियोजनाओं के लिए केंद्रीय पर्यटन और संस्कृति मंत्रालय से मिलने वाली वित्तीय सहायता के अलावा राज्य शासन की संबंधित एजेंसियों, बड़े औद्योगिक घरानों के कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) फंड और पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के जरिए पूंजी जुटाई जाएगी। निर्माण के उपरांत विकसित नागरिक सुविधाओं के दैनिक संचालन, साफ-सफाई और दीर्घकालिक रखरखाव का संपूर्ण दायित्व छत्तीसगढ़ शासन अथवा उसके द्वारा अधिकृत नोडल एजेंसी का होगा।

सतत निगरानी के लिए बनेगी ‘योजना एवं क्रियान्वयन समिति’

परियोजनाओं को कागजों से निकालकर समय-सीमा में धरातल पर उतारने के लिए एक उच्चस्तरीय “योजना एवं क्रियान्वयन समिति” (Planning and Implementation Committee) का गठन किया जाएगा।

यह समिति डीपीआर तैयार करने से लेकर बजट आवंटन, निर्माण कार्य की गुणवत्ता, पुरातात्विक नियमों के पालन और रखरखाव की निरंतर निगरानी करेगी, जिससे संस्कृति विभाग और भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण के बीच मजबूत समन्वय बना रहे।

एमओयू हस्ताक्षर समारोह में शीर्ष पुरातत्वविदों की मौजूदगी

इस महत्वपूर्ण समझौते के अवसर पर भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण, भारत सरकार के महानिदेशक के प्रतिनिधि के रूप में मध्य क्षेत्र (भोपाल) के निदेशक डॉ. टी. अरुण राज तथा रायपुर मंडल के अधीक्षण पुरातत्वविद् डॉ. एम. कलिमुथु विशेष रूप से उपस्थित रहे।

छत्तीसगढ़ शासन की ओर से संस्कृति एवं पर्यटन विभाग के सचिव डॉ. एस. भारतीदासन ने औपचारिक एमओयू पर हस्ताक्षर किए। इस दौरान संचालक पुरातत्त्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय डॉ. संजय कन्नौजे सहित संस्कृति विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

“छत्तीसगढ़ की पुरातात्विक संपदा अद्भुत है, लेकिन पर्यटकों के लिए आधुनिक सुविधाओं की कमी के कारण ये स्थल पूरी क्षमता से वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर नहीं उभर पा रहे थे। ASI Chhattisgarh MoU हमारी ऐतिहासिक धरोहरों को सुरक्षित रखते हुए सिरपुर, भोरमदेव, मल्हार और ताला जैसे स्थलों को विश्वस्तरीय हेरिटेज डेस्टिनेशन बनाएगा।”— संस्कृति एवं पर्यटन विभाग, छत्तीसगढ़ शासन

पर्यटकों, शोधार्थियों और स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए इसके क्या मायने हैं?

  • विदेशी व घरेलू पर्यटकों की आवक में वृद्धि: स्वच्छ शौचालय, कैफेटेरिया और साइट म्यूजियम जैसी सुविधाएं मिलने से राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों के ठहरने की अवधि (Stay Duration) बढ़ेगी।
  • स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन: पुरातात्विक स्थलों पर कैफेटेरिया, गाइड सेवा, स्थानीय हस्तशिल्प और परिवहन के क्षेत्र में आसपास के युवाओं और ग्रामीणों को नियमित रोजगार मिलेगा।
  • शोधार्थियों और विद्यार्थियों के लिए सुलभता: साइट म्यूजियम और प्रमाणिक सूचना केंद्रों से इतिहास और पुरातत्व के शोधार्थियों को दुर्लभ अभिलेखों और मूर्तिकला के अध्ययन में सहायता मिलेगी।

एमओयू के मुख्य बिंदु एक नजर में

  • भागीदार: भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण (ASI) एवं संस्कृति विभाग, छत्तीसगढ़ शासन।
  • प्राथमिक कार्य: स्वच्छ पेयजल, आधुनिक टॉयलेट्स, विश्राम स्थल, कैफेटेरिया, पार्किंग व साइट म्यूजियम।
  • विशेष नवाचार: दिव्यांगजनों के लिए ब्रेल साइनेज एवं टैक्टाइल पाथवे।
  • वित्तीय मॉडल: केंद्र व राज्य बजट, सीएसआर (CSR) और पीपीपी (PPP) निवेश।
  • निगरानी तंत्र: संयुक्त ‘योजना एवं क्रियान्वयन समिति’ द्वारा प्रोजेक्ट्स का सुपरविजन।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

ASI Chhattisgarh MoU का मुख्य उद्देश्य क्या है?

इस एमओयू का मुख्य उद्देश्य छत्तीसगढ़ के संरक्षित प्राचीन स्मारकों की मूल संरचना को सुरक्षित रखते हुए वहां पर्यटकों के लिए आधुनिक बुनियादी सुविधाएं विकसित करना है।

संरक्षित स्मारकों पर पर्यटकों के लिए कौन-सी प्रमुख सुविधाएं विकसित की जाएंगी?

स्मारकों पर स्वच्छ पेयजल, आधुनिक शौचालय, कैफेटेरिया, विश्राम स्थल, पार्किंग, क्लॉक रूम, सूचना केंद्र, साइट म्यूजियम और दिव्यांगों के लिए ब्रेल साइनेज विकसित किए जाएंगे।

क्या विकास कार्यों से ऐतिहासिक स्मारकों के मूल स्वरूप को कोई क्षति पहुंचेगी?

नहीं, समझौते में स्मारकों की मौलिकता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। सभी निर्माण कार्य पुरातात्विक नियमों के अनुसार और एएसआई की पूर्व तकनीकी स्वीकृति के बाद ही होंगे।

इस परियोजना के लिए वित्तीय संसाधन कहां से जुटाए जाएंगे?

परियोजनाओं के लिए केंद्रीय वित्तीय सहायता, राज्य सरकार की एजेंसियों के बजट, कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) और पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) से संसाधन जुटाए जाएंगे।

स्रोत (Source): छत्तीसगढ़ जनसंपर्क विभाग (DPR Raipur / संस्कृति एवं पर्यटन विभाग)

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