रायपुर, 29 अक्टूबर: देश के सुदूर ग्रामीण एवं जनजातीय अंचलों की वास्तविकताओं, लोक-संस्कृति और विकास की गाथाओं को राष्ट्रीय स्तर पर सशक्त पहचान दिलाने की दिशा में छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के दो प्रतिष्ठित उच्च शिक्षण संस्थानों ने ऐतिहासिक पहल की है। गुरुवार को राजधानी रायपुर स्थित कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय और महाराष्ट्र के गोंडवाना विश्वविद्यालय, गढ़चिरौली के मध्य Rural Journalism MoU Raipur (ग्रामीण पत्रकारिता एमओयू रायपुर) पर विधिवत हस्ताक्षर किए गए। इस महत्वपूर्ण साझेदारी का मुख्य उद्देश्य दोनों राज्यों के सीमावर्ती, वनांचल एवं आदिवासी क्षेत्रों में पत्रकारिता शिक्षा, संयुक्त शोध, फील्ड रिपोर्टिंग, छात्र इंटर्नशिप और सामुदायिक रेडियो की गतिविधियों को नई ऊंचाई प्रदान करना है। इस समझौते से ग्रामीण युवाओं के लिए मुख्यधारा के मीडिया में रोजगार एवं करियर के नए अवसर सृजित होंगे।
मुख्य बिंदु (Key Highlights):
- ‘Rural Journalism MoU Raipur’: छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के दो प्रमुख विश्वविद्यालयों के बीच हुआ द्विपक्षीय समझौता।
- ग्रामीण पत्रकारिता को राष्ट्रीय मंच: गांवों की समस्याओं, कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा और वनांचल विकास की खबरों को मिलेगी प्राथमिकता।
- कुलपतियों का साझा विजन: कुलपति प्रो. डॉ. मनोज दयाल एवं कुलपति प्रो. प्रशांत बोकारे ने बताया ऐतिहासिक कदम।
- हस्ताक्षरकर्ता अधिकारी: कुलसचिव श्री सुनील कुमार शर्मा और विभागाध्यक्ष डॉ. मोहम्मद सरफराज अंसारी ने किए हस्ताक्षर।
- सामुदायिक रेडियो और इंटर्नशिप: हाइब्रिड कार्यशालाएं, प्राध्यापक आदान-प्रदान और सामुदायिक रेडियो से सुदृढ़ होगा संचार।
- वरिष्ठ प्राध्यापक रहे उपस्थित: विभागाध्यक्ष डॉ. राजेन्द्र मोहंती, डॉ. नृपेन्द्र शर्मा और डॉ. आशुतोष मंडावी की रही मौजूदगी।
Rural Journalism MoU Raipur: ‘भारत की आत्मा गांवों में बसती है’: कुलपति प्रो. डॉ. मनोज दयाल
एमओयू के अवसर पर कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डॉ. मनोज दयाल ने ग्रामीण पत्रकारिता के सामाजिक सरोकारों को रेखांकित किया।
Rural Journalism MoU Raipur के दूरगामी महत्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के अनुसार भारत की वास्तविक आत्मा गांवों में बसती है। लोकतंत्र के चौथे स्तंभ का दायित्व है कि वह मेट्रो शहरों की चकाचौंध से आगे निकलकर खेत-खलिहान, आदिवासियों के पारंपरिक ज्ञान और ग्रामीण जीवन संघर्षों को सामने लाए। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि दोनों विश्वविद्यालयों के संयुक्त प्रयासों से ऐसे संवेदनशील और मूल्यनिष्ठ पत्रकार तैयार होंगे, जो सामाजिक प्रतिबद्धता के साथ स्थानीय समस्याओं और जनकल्याणकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत को निष्पक्षता से प्रस्तुत करेंगे।
संयुक्त शोध, कार्यशालाएं और सामुदायिक रेडियो का विस्तार
इस शैक्षणिक समझौते के तहत दोनों संस्थान आधुनिक संचार माध्यमों के जरिए ग्रामीण संचार तंत्र को मजबूत करेंगे:
- हाइब्रिड मोड में सेमिनार व संगोष्ठियां: दूरस्थ वनांचल के विद्यार्थियों, शोधार्थियों और फील्ड पत्रकारों को जोड़ने के लिए ऑनलाइन, ऑफलाइन और हाइब्रिड मोड में नियमित राष्ट्रीय कार्यशालाओं का आयोजन किया जाएगा।
- सामुदायिक रेडियो (Community Radio): स्थानीय बोलियों (जैसे हल्बी, गोंडी व मराठी) में सामुदायिक रेडियो के जरिए कृषि तकनीक, स्वास्थ्य जागरूकता और पोषण संबंधी कार्यक्रमों का निर्माण और प्रसारण किया जाएगा।
- छात्र व प्राध्यापक आदान-प्रदान: दोनों विश्वविद्यालयों के पत्रकारिता विद्यार्थी एक-दूसरे के राज्यों के ग्रामीण अंचलों में जाकर फील्ड इंटर्नशिप करेंगे और वास्तविक विकासात्मक रिपोर्टिंग की व्यावहारिक बारीकियां सीखेंगे।
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गोंडवाना विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. प्रशांत बोकारे: ग्रामीण प्रतिभाओं का होगा संवर्धन
महाराष्ट्र के गढ़चिरौली स्थित गोंडवाना विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. प्रशांत बोकारे ने इस साझेदारी को पत्रकारिता शिक्षा के क्षेत्र में युगांतरकारी करार दिया। उन्होंने कहा कि गढ़चिरौली और बस्तर जैसे जनजातीय बाहुल्य क्षेत्रों की भौगोलिक और सामाजिक परिस्थितियां काफी मिलती-जुलती हैं। इस एमओयू के जरिए दोनों राज्यों के आदिवासी और ग्रामीण युवाओं को आधुनिक डिजिटल पत्रकारिता, पॉडकास्टिंग और डेटा जर्नलिज्म की तकनीकों में दक्ष किया जाएगा, जिससे वे अपने समाज की आवाज स्वयं बन सकें।
समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर और उपस्थित शिक्षाविद
औपचारिक रूप से एमओयू दस्तावेज पर दोनों विश्वविद्यालयों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों द्वारा हस्ताक्षर किए गए:
- हस्ताक्षरकर्ता: कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विश्वविद्यालय की ओर से कुलसचिव श्री सुनील कुमार शर्मा तथा गोंडवाना विश्वविद्यालय की ओर से पत्रकारिता विभागाध्यक्ष डॉ. मोहम्मद सरफराज अंसारी ने हस्ताक्षर का आदान-प्रदान किया।
- वरिष्ठ प्राध्यापकों की गरिमामयी मौजूदगी: इस अवसर पर पत्रकारिता विश्वविद्यालय के वरिष्ठ विभागाध्यक्ष डॉ. राजेन्द्र मोहंती, डॉ. नृपेन्द्र शर्मा और डॉ. आशुतोष मंडावी सहित विभिन्न संकायों के प्राध्यापकगण और शोधार्थी उपस्थित रहे।
“सच्ची पत्रकारिता वही है जो समाज के अंतिम व्यक्ति के आंसू पोंछने और उसकी समस्याओं को नीति-निर्माताओं तक पहुंचाने का माध्यम बने। कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विवि और गोंडवाना विवि के बीच हुआ यह एमओयू छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के वनांचल में जमीनी पत्रकारिता के नए युग का सूत्रपात करेगा।”— प्रो. डॉ. मनोज दयाल (कुलपति, केटीयूजेएम रायपुर) एवं प्रो. प्रशांत बोकारे (कुलपति, गोंडवाना विवि)
ग्रामीण पत्रकारिता एमओयू 2026: एक नजर में
- सहयोग का विषय: ग्रामीण एवं जनजातीय पत्रकारिता संवर्धन एमओयू (Rural Journalism MoU Raipur)
- साझेदार विश्वविद्यालय: कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विवि (रायपुर) एवं गोंडवाना विवि (गढ़चिरौली, महाराष्ट्र)
- मार्गदर्शक नेतृत्व: कुलपति प्रो. डॉ. मनोज दयाल एवं कुलपति प्रो. प्रशांत बोकारे
- हस्ताक्षरकर्ता: कुलसचिव श्री सुनील कुमार शर्मा एवं विभागाध्यक्ष डॉ. मोहम्मद सरफराज अंसारी
- आयोजन स्थल व तिथि: रायपुर, छत्तीसगढ़ (29 अक्टूबर 2026)
- प्रमुख कार्यक्षेत्र: संयुक्त शोध, छात्र इंटर्नशिप, फैकल्टी एक्सचेंज, सामुदायिक रेडियो व सेमिनार
- मुख्य फोकस विषय: ग्रामीण विकास, कृषि, जनजातीय संस्कृति, स्वास्थ्य एवं स्थानीय समस्याएं
- उपस्थित विभागाध्यक्ष: डॉ. राजेन्द्र मोहंती, डॉ. नृपेन्द्र शर्मा, डॉ. आशुतोष मंडावी
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Rural Journalism MoU Raipur किन दो विश्वविद्यालयों के बीच संपन्न हुआ है?
यह समझौता ज्ञापन छत्तीसगढ़ के कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, रायपुर और महाराष्ट्र के गोंडवाना विश्वविद्यालय, गढ़चिरौली के बीच संपन्न हुआ है।
इस एमओयू का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका मुख्य उद्देश्य दोनों राज्यों के ग्रामीण और आदिवासी अंचलों में जमीनी पत्रकारिता, संयुक्त शोध, सामुदायिक रेडियो और मीडिया प्रशिक्षण को बढ़ावा देकर ग्रामीण मुद्दों को मुख्यधारा में लाना है।
एमओयू दस्तावेज पर किन अधिकारियों ने हस्ताक्षर किए?
एमओयू पर कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विश्वविद्यालय के कुलसचिव श्री सुनील कुमार शर्मा तथा गोंडवाना विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभागाध्यक्ष डॉ. मोहम्मद सरफराज अंसारी ने हस्ताक्षर किए।
पत्रकारिता के विद्यार्थियों को इस साझेदारी से क्या व्यावहारिक लाभ मिलेगा?
विद्यार्थियों को अंतरराज्यीय फील्ड इंटर्नशिप, हाइब्रिड कार्यशालाओं, सामुदायिक रेडियो संचालन और जनजातीय विकास पर आधारित प्रैक्टिकल रिपोर्टिंग सीखने का प्रत्यक्ष अवसर प्राप्त होगा।
आधिकारिक स्रोत: कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, रायपुर / गोंडवाना विश्वविद्यालय, गढ़चिरौली / जनसंपर्क संचालनालय (DPR Raipur)