रायपुर, 26 अक्टूबर: कभी नक्सल हिंसा के खौफ और बीहड़ जंगलों के कारण बुनियादी सुविधाओं से कोसों दूर रहने वाले बस्तर के सुदूर गांवों में आज विकास, जनविश्वास और सुशासन की नई स्वर्णिम इबारत लिखी जा रही है। बस्तर के घोर संवेदनशील इलाकों में स्थापित लगभग 200 सुरक्षा कैंप अब केवल शांति स्थापना का साधन नहीं रहे, बल्कि वे जनसेवा और आर्थिक स्वावलंबन के सबसे बड़े केंद्र बन चुके हैं। Veer Gundadhur Seva Dera (वीर गुंडाधुर सेवा डेरा) परियोजना के तहत पहले चरण में 70 सुरक्षा कैंपों को आधुनिक नागरिक सुविधा केंद्रों में रूपांतरित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और ‘नियद नेल्ला नार’ योजना के समन्वय से संचालित यह ऐतिहासिक पहल बस्तर के आदिवासी ग्रामीणों को डिजिटल सेवाएं, बैंक सखी के जरिए वित्तीय समावेशन, कौशल विकास और स्वरोजगार से जोड़कर विकास की मुख्यधारा का सशक्त सहभागी बना रही है।
मुख्य बिंदु (Key Highlights):
- ‘Veer Gundadhur Seva Dera’: बस्तर के 200 सुरक्षा कैंपों को सेवा डेरा में बदलने का महाअभियान शुरू।
- पहले चरण में 70 कैंप रूपांतरित: आधार कार्ड, राशन, पेंशन और बैंकिंग सेवाएं अब गांव में ही उपलब्ध।
- नेतानार से ऐतिहासिक आगाज: 18 मई 2026 को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने किया था देश के पहले सेवा डेरा का शुभारंभ।
- 1910 के भूमकाल नायक को सम्मान: आदिवासी स्वाभिमान के प्रतीक अमर शहीद वीर गुंडाधुर के नाम पर सेवा केंद्र।
- महिला SHG की आर्थिक क्रांति: इमली पल्प, पारंपरिक ढेंकी चावल और सिलाई से महिलाएं कमा रहीं ₹1 लाख तक सालाना।
- NID अहमदाबाद से वैश्विक ब्रांडिंग: नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइनिंग की टीम बस्तर के उत्पादों को देगी अंतरराष्ट्रीय पहचान।
Veer Gundadhur Seva Dera: खौफ के साये से विकास के उजाले तक की ऐतिहासिक यात्रा
बस्तर के वनांचल में स्थापित सुरक्षा कैंपों की पहचान अब बंदूक और मोर्चों से आगे बढ़कर ग्रामीणों के सुख-दुख के साथी के रूप में स्थापित हो चुकी है।
Veer Gundadhur Seva Dera योजना के माध्यम से राज्य सरकार ने सुरक्षा कैंपों को लोक-कल्याण के केंद्र में तब्दील कर दिया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के संकल्प से बस्तर आज नक्सलवाद के प्रभाव से मुक्त हो रहा है। ‘नियद नेल्ला नार’ (आपका अच्छा गांव) योजना के तहत कैंपों के 5 किलोमीटर के दायरे में बसे गांवों में पक्की सड़कें, बिजली, शुद्ध पेयजल, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और स्कूल युद्धस्तर पर पहुंचाए जा रहे हैं, जिससे दशकों से अलग-थलग पड़े जनजातीय समाज में शासन के प्रति गहरा विश्वास पैदा हुआ है।
1910 के भूमकाल विद्रोह की पावन धरा नेतानार से शुरुआत
इस अनूठी योजना की शुरुआत बस्तर के उसी ऐतिहासिक गांव नेतानार से हुई, जिसने अंग्रेजी हुकूमत की चूलें हिला दी थीं:
- भूमकाल जननायक की जन्मस्थली: नेतानार अमर शहीद वीर गुंडाधुर की पावन जन्मभूमि है, जिन्होंने वर्ष 1910 के ऐतिहासिक भूमकाल विद्रोह में आदिवासी अस्मिता, आत्मसम्मान और जल-जंगल-जमीन के अधिकारों के लिए ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ सशस्त्र बिगुल फूंका था।
- गृह मंत्री द्वारा उद्घाटन: 18 मई 2026 को केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने नेतानार स्थित सीआरपीएफ कैंप परिसर में देश के पहले ‘शहीद वीर गुंडाधुर सेवा डेरा’ जन सुविधा केंद्र का लोकार्पण किया था, जो आज समूचे बस्तर में सुशासन का प्रेरणादायी मॉडल बन चुका है।
एक ही छत के नीचे डिजिटल, बैंकिंग और स्वास्थ्य सेवाएं
पूर्व में बस्तर के ग्रामीणों को एक छोटे से प्रमाण पत्र या बैंक से पैसे निकालने के लिए 20 से 30 किलोमीटर पैदल चलकर ब्लॉक मुख्यालय जाना पड़ता था, जो अब अतीत की बात हो गई है:
- डिजिटल समाधान केंद्र: सेवा डेरा में ग्रामीणों को नया आधार कार्ड बनवाने, फिंगरप्रिंट अपडेट करने, मोबाइल नंबर लिंक कराने, राशन कार्ड सुधारने तथा जन्म-मृत्यु, आय व जाति प्रमाण पत्र प्राप्त करने की सिंगल-विंडो सुविधा मिल रही है।
- बैंक सखी से घर-द्वार बैंकिंग: स्थानीय युवतियों को ‘बैंक सखी’ के रूप में प्रशिक्षित कर माइक्रो-एटीएम से लैस किया गया है। वे सेवा डेरा और घर-घर जाकर ग्रामीणों के खातों से नकद निकासी, जमा और डीबीटी (DBT) भुगतान का कार्य सुगमता से कर रही हैं।
महिला स्व-सहायता समूहों की आजीविका क्रांति: इमली पल्प से ढेंकी चावल तक
सेवा डेरा ने स्थानीय वनोपज और पारंपरिक शिल्पकला को बाजार से जोड़कर आदिवासी महिलाओं को आत्मनिर्भर बना दिया है:
- इमली पल्प से सालाना ₹1 लाख की आय: नेतानार के ‘गुंडाधुर महिला स्व-सहायता समूह’ की महिलाएं जंगलों से इमली एकत्र कर उसका उच्च गुणवत्ता वाला पल्प तैयार कर रही हैं। समूह की सदस्य लंबी नाग बताती हैं कि इस नवाचार से जुड़कर महिलाएं सालाना एक लाख रुपये तक की अतिरिक्त आय अर्जित करने की दिशा में अग्रसर हैं।
- पारंपरिक ढेंकी चावल: आदिवासी संस्कृति की पहचान पारंपरिक काष्ठ ढेंकी से बिना पॉलिश का पौष्टिक चावल तैयार कर बेचा जा रहा है, जिसकी महानगरों में भारी मांग है। वहीं इसके सह-उत्पाद (धान की भूसी) का उपयोग मवेशियों के चारे में हो रहा है। इसके साथ ही सिलाई केंद्रों के जरिए बेटियों को दर्जी प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
NID अहमदाबाद करेगा वैश्विक ब्रांडिंग: अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जुड़ेगा बस्तर
बस्तर की ग्रामीण महिलाओं द्वारा तैयार हस्तनिर्मित और वनोपज उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए देश के प्रतिष्ठित संस्थानों को जोड़ा गया है। हाल ही में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइनिंग (NID), अहमदाबाद के विशेषज्ञों की टीम ने नेतानार पहुंचकर इमली प्रसंस्करण, ढेंकी चावल और सिलाई कार्यों का जमीनी अध्ययन किया। NID की टीम इन उत्पादों के लिए आधुनिक, पर्यावरण-अनुकूल पैकेजिंग, ब्रांडिंग और लोगो डिजाइन कर रही है, जिससे बस्तर के ऑर्गेनिक उत्पाद राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर अपनी धाक जमा सकेंगे।
“शहीद वीर गुंडाधुर की पावन भूमि पर सुरक्षा कैंपों का सेवा डेरा में रूपांतरण इस बात का जीवंत प्रमाण है कि मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति और संवेदनशील प्रशासन से घोर उपेक्षित अंचलों की तकदीर बदली जा सकती है। यह केवल अधोसंरचना का विकास नहीं, बल्कि बस्तर के हर नागरिक के जीवन में सुरक्षा, स्वावलंबन और आत्मसम्मान का नया सवेरा है।”— श्री धनंजय राठौर, संयुक्त संचालक, जनसंपर्क संचालनालय, छत्तीसगढ़
वीर गुंडाधुर सेवा डेरा परियोजना: एक नजर में
- परियोजना का नाम: शहीद वीर गुंडाधुर सेवा डेरा जन सुविधा केंद्र
- कुल लक्ष्य: बस्तर के लगभग 200 सुरक्षा कैंपों का सेवा डेरा में रूपांतरण
- प्रथम चरण का कवरेज: 70 सुरक्षा कैंपों में नागरिक सेवाओं की शुरुआत
- उद्घाटन संदर्भ: 18 मई 2026 को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा (नेतानार कैंप)
- ऐतिहासिक प्रेरणा: 1910 भूमकाल विद्रोह के जननायक अमर शहीद वीर गुंडाधुर
- उपलब्ध डिजिटल सुविधाएं: आधार केंद्र, जाति/आय प्रमाण पत्र, राशन कार्ड, मोबाइल लिंकिंग
- वित्तीय समावेशन: बैंक सखी मॉडल के जरिए माइक्रो-एटीएम से घर-द्वार बैंकिंग
- प्रमुख आजीविका क्लस्टर: इमली पल्प यूनिट, पारंपरिक ढेंकी चावल, सिलाई प्रशिक्षण केंद्र
- ब्रांडिंग पार्टनर: नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइनिंग (NID), अहमदाबाद
- आलेख प्रस्तुति: श्री धनंजय राठौर, संयुक्त संचालक (जनसंपर्क संचालनालय)
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Veer Gundadhur Seva Dera परियोजना का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य बस्तर के नक्सल प्रभावित अंचलों में स्थापित सुरक्षा कैंपों को जनसेवा केंद्रों में बदलकर ग्रामीणों को आधार, बैंकिंग, प्रमाण पत्र, स्वास्थ्य और आजीविका की सुविधाएं गांव के पास ही उपलब्ध कराना है।
पहले चरण में बस्तर के कितने सुरक्षा कैंपों को सेवा डेरा में बदला जा रहा है?
योजना के तहत बस्तर के लगभग 200 सुरक्षा कैंपों को सेवा डेरा में बदलने का लक्ष्य है, जिसमें से पहले चरण में 70 कैंपों को आधुनिक जनसुविधा केंद्रों में रूपांतरित किया जा रहा है।
देश के पहले शहीद वीर गुंडाधुर सेवा डेरा का शुभारंभ कब और कहाँ हुआ था?
देश के पहले सेवा डेरा का शुभारंभ केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह द्वारा 18 मई 2026 को बस्तर जिले के नेतानार स्थित सीआरपीएफ कैंप परिसर में किया गया था।
सेवा डेरा से जुड़ी महिला स्व-सहायता समूहों के उत्पादों की ब्रांडिंग कौन कर रहा है?
नेतानार में तैयार इमली पल्प, पारंपरिक ढेंकी चावल और सिलाई उत्पादों की पैकेजिंग, लोगो और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय ब्रांडिंग नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइनिंग (NID), अहमदाबाद द्वारा की जा रही है।
आधिकारिक स्रोत: जनसंपर्क संचालनालय (DPR Raipur), छत्तीसगढ़ शासन / बस्तर संभाग जनसंपर्क कार्यालय, जगदलपुर