IIM Raipur Case Study Workshop: पंजीयन विभाग के प्रशासनिक सुधारों पर बनेगी केस स्टडी; अंतरराष्ट्रीय जर्नलों में होगी प्रकाशित

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नवा रायपुर, 16 अक्टूबर: छत्तीसगढ़ शासन द्वारा राजस्व, सुशासन और नागरिक-केंद्रित सेवाओं के सरलीकरण में किए गए नवाचार अब केवल सरकारी फाइलों तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि वे हार्वर्ड और अंतरराष्ट्रीय प्रबंधन संस्थानों की तर्ज पर वैश्विक अकादमिक अध्ययन का विषय बनेंगे। नवा रायपुर स्थित भारतीय प्रबंधन संस्थान में वाणिज्यिक कर (पंजीयन) विभाग के अधिकारियों के लिए आयोजित IIM Raipur Case Study Workshop (आईआईएम रायपुर केस स्टडी कार्यशाला) सफलतापूर्वक संपन्न हो गई है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और वित्त एवं पंजीयन मंत्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में 14 और 15 अक्टूबर को आयोजित ‘वर्कशॉप ऑन केस राइटिंग एंड कोलैबोरेटिव पब्लिकेशन’ में महानिरीक्षक पंजीयन एवं अधीक्षक मुद्रांक पुष्पेंद्र मीणा की अगुवाई में विभागीय अधिकारियों ने भाग लिया। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य छत्तीसगढ़ के पंजीयन सुधारों, रजिस्ट्री के डिजिटलीकरण और प्रशासनिक चुनौतियों के समाधान को प्रामाणिक केस स्टडीज में बदलकर देश-विदेश के प्रतिष्ठित जर्नलों में प्रकाशित कराना है।

मुख्य बिंदु (Key Highlights):

  • ‘IIM Raipur Case Study Workshop’: नवा रायपुर आईआईएम में पंजीयन विभाग के अधिकारियों की दो दिवसीय उच्चस्तरीय कार्यशाला संपन्न।
  • सुधारों का दस्तावेजीकरण: रजिस्ट्री कार्यालयों में लागू तकनीकी नवाचारों, चुनौतियों और समाधानों पर तैयार होंगी उच्चस्तरीय केस स्टडीज।
  • राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय प्रकाशन: वैश्विक रिसर्च जर्नलों में प्रकाशित होंगी छत्तीसगढ़ की केस स्टडीज; दुनिया भर के नीति-निर्माता सीखेंगे मॉडल।
  • आईआईएम के शीर्ष प्रोफेसर्स ने दी ट्रेनिंग: डायरेक्टर-इन-चार्ज प्रो. संजीव पाराशर और प्रोग्राम डायरेक्टर प्रो. प्रणित कुमार रॉय समेत 6 प्रोफेसर्स ने लिया सत्र।
  • प्रशासनिक अनुभव बनेगा संस्थागत ज्ञान: डीआईजी मदन लाल कोर्पे और डीआईजी उषा साहू सहित प्रतिभागियों को समापन पर मिले प्रमाणपत्र।

IIM Raipur Case Study Workshop: प्रशासनिक सुधारों को अकादमिक पहचान दिलाने की अनूठी पहल

सामान्यतः प्रशासनिक विभागों में होने वाले नवाचार अधिकारियों के तबादले या समय बीतने के साथ विस्मृत हो जाते हैं, लेकिन छत्तीसगढ़ ने इसे स्थायी ज्ञान में बदलने का बीड़ा उठाया है।

IIM Raipur Case Study Workshop के माध्यम से पंजीयन विभाग द्वारा विगत तीन वर्षों में किए गए ई-पंजीयन, टोकन प्रणाली, ऑनलाइन डीड ड्राफ्टिंग, और रजिस्ट्री में बिचौलियों की समाप्ति जैसे क्रांतिकारी सुधारों को शोध का आधार बनाया गया है। महानिरीक्षक पंजीयन पुष्पेंद्र मीणा ने कहा कि इन सुधारों को लागू करते समय फील्ड अफसरों के सामने कई विधिक, तकनीकी और सामाजिक बाधाएं आईं। अधिकारियों ने इन अड़चनों को स्थानीय स्तर पर कैसे दूर किया, यही व्यावहारिक प्रबंधन का सबसे बड़ा सबक है, जिसे अब दुनिया भर के नीति-निर्माता और लोक प्रशासन के छात्र पढ़ सकेंगे।

दो दिवसीय कार्यशाला का विस्तृत पाठ्यक्रम: डे-1 और डे-2 में क्या सिखाया गया?

आईआईएम रायपुर के प्रबंधन विशेषज्ञों ने दो दिनों के सघन प्रशिक्षण में अधिकारियों को प्रशासनिक अनुभव को अकादमिक शोध में ढालने की पूरी प्रक्रिया सिखाई:

  • पहला दिन (14 अक्टूबर) – केस की रूपरेखा व समस्या की पहचान: केस स्टडी लेखन की आवश्यकता, उपयुक्त विषयों का चयन, प्रशासनिक निर्णयों के पीछे की परिस्थितियां और जमीनी संघर्षों को तथ्यात्मक रूप से प्रस्तुत करने की विधियां समझाई गईं।
  • दूसरा दिन (15 अक्टूबर) – विश्लेषणात्मक लेखन व पब्लिकेशन: डेटा संकलन, तथ्यों का सत्यापन, स्टेकहोल्डर्स के साक्षात्कार, केस के साथ ‘टीचिंग नोट’ (Teaching Note) तैयार करने और राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय इंडेक्स जर्नलों में प्रकाशन की समीक्षा प्रक्रिया का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।

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आईआईएम रायपुर के शीर्ष प्रोफेसर्स ने दी केस राइटिंग व पब्लिकेशन की ट्रेनिंग

कार्यशाला में आईआईएम रायपुर के डायरेक्टर-इन-चार्ज प्रो. संजीव पाराशर और कार्यक्रम निदेशक प्रो. प्रणित कुमार रॉय के साथ देश के ख्यातिलब्ध शिक्षाविदों ने विभिन्न सत्रों का संचालन किया:

  • प्रशिक्षक विशेषज्ञ मंडल: प्रो. सत्यसिबा दास, प्रो. मनोजीत चट्टोपाध्याय, प्रो. अर्चना पाराशर तथा प्रो. आर.के. जना।
  • विभागीय सहभागिता: पंजीयन विभाग के उप महानिरीक्षक (DIG) श्री मदन लाल कोर्पे, डीआईजी श्रीमती उषा साहू, वरिष्ठ जिला पंजीयक और उप पंजीयकों ने सक्रिय सहभागिता निभाई। समापन सत्र में उत्कृष्ट केस ड्राफ्ट तैयार करने वाले अधिकारियों को प्रमाणपत्र वितरित किए गए।

प्रशासनिक अनुभवों को संस्थागत ज्ञान (Institutional Knowledge) में बदलने का मॉडल

आईआईएम रायपुर के विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि एक आदर्श केस स्टडी केवल सफलता की कहानी नहीं होती, बल्कि वह निर्णय लेने की प्रक्रिया (Decision-Making Process), उपलब्ध विकल्पों और उनसे मिले नीतिगत सबकों का तटस्थ विश्लेषण होती है।

वित्त एवं पंजीयन मंत्री ओ.पी. चौधरी ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि जब नौकरशाही और देश के शीर्ष आईआईएम जैसे संस्थान हाथ मिलाते हैं, तो सुशासन को बौद्धिक गहराई मिलती है। यह केस स्टडीज भविष्य में लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (LBSNAA) मसूरी और राज्य प्रशासनिक अकादमी (न प्रशासनिक अकादमी, निमोरा) में नए आईएएस और राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों के प्रशिक्षण में केस मटीरियल के रूप में उपयोग की जा सकेंगी।

“छत्तीसगढ़ में हो रहे प्रशासनिक सुधार केवल राज्य तक सीमित नहीं रहने चाहिए। हमने जो सीखा, जो चुनौतियां झेलीं और जो डिजिटल समाधान निकाले, वे वैश्विक अकादमिक जगत के लिए अध्ययन का विषय हैं। आईआईएम रायपुर के साथ यह साझेदारी हमारे प्रशासनिक अनुभवों को संस्थागत ज्ञान में बदलने का ऐतिहासिक प्रयास है। हमारी केस स्टडीज अंतरराष्ट्रीय जर्नलों में छपकर छत्तीसगढ़ के सुशासन मॉडल को वैश्विक पटल पर स्थापित करेंगी।”— पुष्पेंद्र मीणा (IAS), महानिरीक्षक पंजीयन एवं अधीक्षक मुद्रांक, छत्तीसगढ़ शासन

छत्तीसगढ़ के प्रशासनिक ढांचे और नीति-निर्माताओं के लिए इसके क्या मायने हैं?

  • अधिकारियों में बौद्धिक दृष्टिकोण का विकास: मैदानी अफसरों में केवल रूटीन फाइलें निपटाने के बजाय नीतिगत विश्लेषण, डेटा रिसर्च और अकादमिक लेखन की क्षमता विकसित होगी।
  • अन्य विभागों के लिए रोल मॉडल: पंजीयन विभाग की इस पहल के बाद आबकारी, खनिज, खाद्य और पंचायत विभाग भी अपने सफल नवाचारों का दस्तावेजीकरण करने के लिए प्रेरित होंगे।
  • वैश्विक पहचान और साख: अंतरराष्ट्रीय प्रबंधन सम्मेलनों और प्रतिष्ठित जर्नलों में छत्तीसगढ़ का नाम एक प्रगतिशील और पारदर्शी राज्य के रूप में उभरेगा।

पंजीयन विभाग केस राइटिंग कार्यशाला: एक नजर में

  • कार्यशाला का नाम: वर्कशॉप ऑन केस राइटिंग एंड कोलैबोरेटिव पब्लिकेशन (IIM Raipur Case Study Workshop)
  • आयोजन स्थल व तिथि: भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM), नवा रायपुर (14 एवं 15 अक्टूबर 2026)
  • सहभागी विभाग: पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग, वाणिज्यिक कर विभाग, छत्तीसगढ़ शासन
  • मार्गदर्शन: मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय एवं वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी
  • विभागीय नेतृत्व: श्री पुष्पेंद्र मीणा (IAS, महानिरीक्षक पंजीयन), श्री मदन लाल कोर्पे (DIG), श्रीमती उषा साहू (DIG)
  • आईआईएम विशेषज्ञ फैकल्टी: प्रो. संजीव पाराशर, प्रो. प्रणित कुमार रॉय, प्रो. सत्यसिबा दास, प्रो. मनोजीत चट्टोपाध्याय, प्रो. अर्चना पाराशर, प्रो. आर.के. जना
  • मुख्य उद्देश्य: प्रशासनिक सुधारों, तकनीकी नवाचारों और निर्णय प्रक्रियाओं पर केस स्टडी तैयार कर अंतरराष्ट्रीय जर्नलों में प्रकाशन

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

IIM Raipur Case Study Workshop का मुख्य उद्देश्य क्या था?

IIM Raipur Case Study Workshop का मुख्य उद्देश्य छत्तीसगढ़ पंजीयन विभाग के प्रशासनिक सुधारों, तकनीकी नवाचारों और व्यावहारिक चुनौतियों पर गुणवत्तापूर्ण केस स्टडीज तैयार कर उन्हें राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय शोध जर्नलों में प्रकाशित कराना था।

यह कार्यशाला कब और कहाँ आयोजित की गई?

यह दो दिवसीय कार्यशाला 14 और 15 अक्टूबर 2026 को नवा रायपुर स्थित भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम रायपुर) के परिसर में आयोजित की गई।

आईआईएम रायपुर की ओर से किन प्रमुख प्रोफेसर्स ने प्रशिक्षण दिया?

आईआईएम रायपुर के डायरेक्टर-इन-चार्ज प्रो. संजीव पाराशर, कार्यक्रम निदेशक प्रो. प्रणित कुमार रॉय, प्रो. सत्यसिबा दास, प्रो. मनोजीत चट्टोपाध्याय, प्रो. अर्चना पाराशर और प्रो. आर.के. जना ने अधिकारियों को प्रशिक्षित किया।

इस पहल से भविष्य में प्रशासनिक व्यवस्था को क्या लाभ मिलेगा?

विभागीय अनुभवों के दस्तावेजीकरण से संस्थागत ज्ञान तैयार होगा, जिसका उपयोग भविष्य में नए प्रशासनिक अधिकारियों के प्रशिक्षण, नीति निर्माण और अन्य राज्यों के साथ सफल मॉडल साझा करने में किया जा सकेगा।

आधिकारिक स्रोत: पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग / भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) रायपुर / जनसंपर्क विभाग (DPR Raipur), छत्तीसगढ़ शासन

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