रायपुर, 16 अक्टूबर: छत्तीसगढ़ के नैसर्गिक वनांचलों, शांत नदी तटों और समृद्ध आदिवासी लोकजीवन को आजीविका का माध्यम बनाने की दिशा में धमतरी जिले ने एक अनूठी पहल की है। ‘सेवा संकल्प अभियान’ के अंतर्गत जिले के ग्राम घीकुड़िया में सोंढुर नदी के रेतीले तट पर Sondhur River Camping Dhamtari (सोंढुर रिवर कैंपिंग धमतरी) एवं ग्रामीण पर्यटन प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। 14 अक्टूबर को आयोजित इस अनुभवात्मक कार्यक्रम में प्रकृति के मनोरम सान्निध्य में ग्रामीण महिलाओं, युवतियों, बुजुर्गों और पर्यटन विशेषज्ञों ने खुले आसमान के नीचे टेंट कैंपिंग का आनंद लिया। इस आयोजन का सबसे विशिष्ट आकर्षण विशेष रूप से पिछड़ी कमार जनजाति की सदियों पुरानी ‘रेड़ी बांधना’ पारंपरिक मत्स्य आखेट पद्धति का जीवंत प्रदर्शन, 100 से अधिक प्रजातियों का पक्षी अवलोकन और लोक धुनों पर बाँसगीत की मधुर प्रस्तुति रही, जिसने साबित कर दिया कि सामुदायिक सहभागिता से ग्रामीण पर्यटन स्थानीय रोजगार का सबसे बड़ा साधन बन सकता है।
मुख्य बिंदु (Key Highlights):
- ‘Sondhur River Camping Dhamtari’: धमतरी के ग्राम घीकुड़िया में सोंढुर नदी के रेतीले तट पर रिवर कैंपिंग का सफल आयोजन।
- कमार जनजाति की पारंपरिक ज्ञान-परंपरा: विशेष पिछड़ी कमार जनजाति द्वारा नदी में ‘रेड़ी बांधना’ पद्धति से मछली पकड़ने की कला का जीवंत प्रदर्शन।
- तारों भरे आकाश के नीचे टेंट में रात्रि विश्राम: सोंढुर के रेत पर लगे टेंट्स; ग्रामीण युवतियों और महिलाओं ने सीखा हॉस्पिटैलिटी और कैंप प्रबंधन।
- लोकसंस्कृति की मधुर स्वर लहरियां: नदी तट पर ददरिया, राउत नाचा, मानस पाठ और बांसुरी वादन के साथ पारंपरिक ‘बाँसगीत’ की प्रस्तुति।
- 100 से अधिक पक्षी प्रजातियां: समृद्ध वेटलैंड और नदी तट पर सुबह बर्ड वॉचिंग (Bird Watching) और प्राकृतिक स्नान बना आकर्षण।
- सामुदायिक पर्यटन से महिला सशक्तिकरण: स्थानीय भोजन, आतिथ्य सत्कार और पर्यटन सेवाओं से ग्रामीणों को घर पर ही मिलेगा स्वरोजगार।
Sondhur River Camping Dhamtari: तारों भरे आकाश के नीचे सोंढुर तट पर टेंट कैंपिंग का जादू
धमतरी जिले का ग्राम घीकुड़िया अपनी विस्तृत रेतीली सोंढुर नदी और हरियाली से आच्छादित तटों के कारण प्रकृति प्रेमियों के लिए एक छिपा हुआ स्वर्ग है।
Sondhur River Camping Dhamtari कार्यक्रम के तहत नदी के रेतीले तट पर आधुनिक टेंट लगाए गए, जहाँ प्रतिभागियों ने रात्रि विश्राम किया। खुले आकाश के नीचे, मंद-मंद बहती नदी की कल-कल ध्वनि और शांत प्राकृतिक वातावरण में कैंपिंग करना सभी के लिए अविस्मरणीय अनुभव रहा। कैंपिंग स्थल पर स्थानीय पारंपरिक भोजन और सुबह के नाश्ते की व्यवस्था की गई। इस दौरान गांव की युवतियों ने विशेष रुचि दिखाई और पर्यटकों के स्वागत-सत्कार, टेंट प्रबंधन और स्थानीय सेवाओं के संचालन की व्यावहारिक बारीकियां सीखीं।
कमार जनजाति की ‘रेड़ी बांधना’ परंपरा: सदियों पुरानी मत्स्य आखेट पद्धति से साक्षात्कार
इस पूरे आयोजन का सबसे प्रामाणिक और बौद्धिक पहलू छत्तीसगढ़ की विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (PVTG) कमार जनजाति की जीवनशैली से रूबरू होना था:
- रेड़ी बांधना पद्धति (Traditional Fishing): कमार जनजाति के ग्रामीणों ने नदी के बहाव में पत्थरों, बांस और स्थानीय झाड़ियों की मदद से ‘रेड़ी’ बनाकर बिना किसी आधुनिक जाल के प्राकृतिक तरीके से मछली पकड़ने के अपने पैतृक कौशल का प्रदर्शन किया।
- पारंपरिक ज्ञान का सम्मान: प्रतिभागियों ने देखा कि कैसे जनजातीय समाज प्रकृति को नुकसान पहुंचाए बिना अपनी जरूरतें पूरी करता है। इस पारंपरिक ज्ञान को ग्रामीण पर्यटन से जोड़ने से विलुप्त होती देशज विधाओं को संरक्षण और सामाजिक सम्मान मिलेगा।
ददरिया, राउत नाचा और बाँसगीत: लोकसंस्कृति बनी ग्रामीण पर्यटन की आत्मा
ग्रामीण पर्यटन केवल नदी या पहाड़ देखना नहीं है, बल्कि उस माटी की संस्कृति में रम जाना है। शाम ढलते ही सोंढुर के तट पर लोककलाओं का अद्भुत समागम हुआ:
- बाँसगीत की गूंज: नदी के शांत तट पर जब लोक कलाकारों ने बांसुरी और पारंपरिक ‘बाँसगीत’ की तान छेड़ी, तो पूरा माहौल आध्यात्मिक शांति से भर गया।
- पारंपरिक लोकविधाएं: ग्रामीणों ने पर्यटकों के समक्ष ददरिया, राउत नाचा और मानस पाठ की प्रस्तुतियां दीं। विशेषज्ञों ने जोर दिया कि इन लोककलाओं को नियमित पर्यटन पैकेज का हिस्सा बनाया जाए ताकि स्थानीय कलाकारों को सतत आमदनी मिल सके।
100 से अधिक पक्षी प्रजातियां: बर्ड वॉचिंग और प्रकृति प्रेमियों के लिए नया केंद्र
कैंपिंग के अगले दिन तड़के प्रतिभागियों ने सोंढुर नदी के तटीय वेटलैंड और जंगलों में पक्षी अवलोकन (Bird Watching) ट्रेल में भाग लिया:
स्थानीय पक्षी विशेषज्ञों और वन अमले के अनुसार, घीकुड़िया और सोंढुर नदी के कैचमेंट एरिया में 100 से अधिक दुर्लभ और स्थानीय पक्षियों की प्रजातियां पाई जाती हैं। सुबह के समय कलरव करते देशी-विदेशी पक्षियों को दूरबीन से देखना और उसके बाद नदी के शीतल जल में प्राकृतिक स्नान करना पर्यटकों को तनावमुक्त करने वाला साबित हुआ। यह विविधता इस क्षेत्र को ईको-टूरिज्म का बड़ा केंद्र बनाती है।
महिलाओं की आजीविका और सामुदायिक पर्यटन: गांव के भीतर ही स्वरोजगार का सृजन
कार्यशाला के दौरान उप संचालक शशि रत्न पाराशर और पर्यटन विशेषज्ञों ने ग्रामीण महिलाओं के साथ संवाद कर पर्यटन आधारित आजीविका का मॉडल समझाया:
- स्थानीय खानपान से कमाई: छत्तीसगढ़ी पारंपरिक व्यंजन (चीला, फरा, मुनगा भाजी, महुआ के पकवान और देशी चूल्हे की रोटी) पर्यटकों को परोसकर महिला स्व-सहायता समूह नियमित आय अर्जित कर सकते हैं।
- पर्यावरण-अनुकूल पर्यटन: ग्रामीणों ने संकल्प लिया कि वे नदी के तट को पूरी तरह प्लास्टिक-मुक्त रखेंगे, कचरे का वैज्ञानिक निस्तारण करेंगे और सोंढुर की पवित्रता बनाए रखते हुए जिम्मेदार पर्यटन (Responsible Tourism) को बढ़ावा देंगे।
“ग्रामीण पर्यटन की असली पहचान फाइव-स्टार होटलों में नहीं, बल्कि गांव की चौपाल, नदी के रेतीले तट और आदिवासियों के पारंपरिक ज्ञान में है। सोंढुर नदी के तट पर घीकुड़िया में आयोजित रिवर कैंपिंग ने साबित किया है कि प्रकृति और कमार संस्कृति का संगम पर्यटकों को आत्मिक शांति देता है। यदि स्थानीय युवा और महिलाएं इसे आजीविका का माध्यम बनाएं, तो हमारी सांस्कृतिक धरोहर भी बचेगी और गांवों में खुशहाली भी आएगी।”— शशि रत्न पाराशर, उप संचालक (जनसंपर्क), धमतरी
धमतरी के वनांचल, कमार जनजाति और युवाओं के लिए इसके क्या मायने हैं?
- स्थानीय युवाओं का नहीं होगा पलायन: रिवर गाइड, टेंट ऑपरेटर, बर्ड वॉचिंग गाइड और नाव संचालक के रूप में युवाओं को गांव में ही सम्मानजनक कमाई होगी।
- कमार जनजाति के ज्ञान को वैश्विक मंच: पीवीटीजी कमार आदिवासियों की लुप्तप्राय जीवनशैली को देश-विदेश के शोधार्थियों और पर्यटकों के बीच पहचान मिलेगी।
- सस्टेनेबल ईको-टूरिज्म मॉडल: बिना किसी भारी कंक्रीट निर्माण के केवल टेंट और स्थानीय संसाधनों से पर्यटन विकसित करने का यह पर्यावरण-अनुकूल मॉडल पूरे छत्तीसगढ़ के लिए अनुकरणीय है।
घीकुड़िया रिवर कैंपिंग एवं ग्रामीण पर्यटन: एक नजर में
- आयोजन का नाम: सोंढुर नदी रिवर कैंपिंग एवं ग्रामीण पर्यटन प्रशिक्षण
- स्थल: ग्राम घीकुड़िया, सोंढुर नदी तट, जिला धमतरी, छत्तीसगढ़
- आयोजन तिथि: 14 अक्टूबर 2026 (समीक्षा आलेख: 16 अक्टूबर 2026)
- प्रेरणा अभियान: सेवा संकल्प अभियान (Seva Sankalp Abhiyan)
- आलेख लेखक: श्री शशि रत्न पाराशर (उप संचालक, जनसंपर्क, धमतरी)
- मुख्य जनजातीय आकर्षण: कमार जनजाति की ‘रेड़ी बांधना’ मत्स्य आखेट पद्धति
- जैव-विविधता: 100 से अधिक पक्षी प्रजातियों का प्राकृतिक रहवास (बर्ड वॉचिंग ट्रेल)
- प्रदर्शित लोककलाएं: बाँसगीत, ददरिया, राउत नाचा, मानस पाठ एवं बांसुरी वादन
- सहभागी: स्थानीय ग्रामीण महिलाएं, युवतियां, कमार आदिवासी, बच्चे एवं पर्यटन विशेषज्ञ
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Sondhur River Camping Dhamtari का आयोजन कहाँ और किस अभियान के तहत किया गया?
Sondhur River Camping Dhamtari का आयोजन धमतरी जिले के ग्राम घीकुड़िया में सोंढुर नदी के रेतीले तट पर ‘सेवा संकल्प अभियान’ के अंतर्गत 14 अक्टूबर 2026 को किया गया।
इस रिवर कैंपिंग में कमार जनजाति की किस पारंपरिक कला का प्रदर्शन हुआ?
कार्यक्रम में विशेष पिछड़ी कमार जनजाति द्वारा नदी के बहाव में प्राकृतिक रूप से ‘रेड़ी बांधना’ पद्धति से मछली पकड़ने के पारंपरिक कौशल का जीवंत प्रदर्शन किया गया।
घीकुड़िया सोंढुर नदी क्षेत्र में प्रकृति प्रेमियों के लिए क्या विशेष आकर्षण है?
यहाँ सोंढुर नदी के रेतीले तट पर तारों भरे आकाश के नीचे टेंट कैंपिंग, 100 से अधिक पक्षी प्रजातियों का अवलोकन (Bird Watching), पारंपरिक बाँसगीत और नदी में प्राकृतिक स्नान प्रमुख आकर्षण हैं।
ग्रामीण पर्यटन से स्थानीय महिलाओं को किस प्रकार का रोजगार मिलेगा?
स्थानीय महिलाएं पर्यटकों के लिए पारंपरिक छत्तीसगढ़ी भोजन तैयार करने, स्थानीय व्यंजनों की बिक्री, अतिथि सत्कार और कैंपिंग सेवाओं के प्रबंधन के माध्यम से नियमित आजीविका अर्जित कर सकेंगी।
आधिकारिक आलेख एवं स्रोत: श्री शशि रत्न पाराशर (उप संचालक, जनसंपर्क, धमतरी) / पर्यटन एवं जनसंपर्क विभाग (DPR Raipur), छत्तीसगढ़ शासन