रायपुर, 09 अक्टूबर: छत्तीसगढ़ में आगामी खरीफ विपणन सत्र में धान खरीदी को पारदर्शी बनाने और वास्तविक किसानों के अधिकारों की रक्षा के लिए शासन ने कड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में मुख्य सचिव विकासशील ने राजस्व, कृषि और खाद्य विभाग को Digital Crop Survey Chhattisgarh (डिजिटल क्रॉप सर्वे छत्तीसगढ़) के तहत राज्य भर में शत-प्रतिशत गिरदावरी अनिवार्य रूप से सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि खेतों में बोई गई फसल का सटीक डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाए और सर्वे में दर्ज आंकड़ों का क्रॉस-वेरिफिकेशन सीधे ‘धान उपार्जन’ और ‘किसान पंजीयन’ के डेटाबेस से कराया जाए, ताकि किसी भी स्तर पर गड़बड़ी या फर्जी रकबे की गुंजाइश न रहे।
मुख्य बिंदु:
- ‘Digital Crop Survey Chhattisgarh’: मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में मंत्रालय में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक संपन्न।
- शत-प्रतिशत गिरदावरी का आदेश: बोई गई फसल की वास्तविक स्थिति का डिजिटल रिकॉर्ड और खसरावार सत्यापन अनिवार्य।
- क्रॉस-वेरिफिकेशन और फील्ड ऑडिट: राज्य स्तरीय विशेष टीमें जिलों में जाकर करेंगी मौके पर भौतिक सत्यापन और त्रुटि सुधार।
- धान खरीदी से सीधा मिलान: डिजिटल सर्वे के आंकड़ों की तुलना किसान पंजीयन और धान उपार्जन के रिकॉर्ड से की जाएगी।
खेतों का पॉलीगॉन और खसरा सत्यापन: वास्तविक फसल का बनेगा डिजिटल रिकॉर्ड
बैठक में मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि जिन-जिन क्षेत्रों में किसानों ने फसलें बोई हैं, वहां मौका मुआयना कर खसरों का शत-प्रतिशत सत्यापन किया जाए।
उन्होंने कहा कि केवल अनुमान के आधार पर गिरदावरी नहीं होनी चाहिए। निर्धारित तकनीकी प्रक्रिया के तहत खेतों का डिजिटल पॉलीगॉन (Polygon Mapping) बनाकर पोर्टल पर सटीक प्रविष्टि की जाए। इससे यह प्रमाणित होगा कि किस खसरे में धान, दलहन, तिलहन या उद्यानिकी फसल लगी है और कौन सा रकबा पड़त या गैर-कृषि प्रयोजन का है।
राज्य स्तरीय टीम करेगी क्रॉस-वेरिफिकेशन: गलत रिकॉर्ड पर होगी कार्रवाई
डिजिटल सर्वे की गुणवत्ता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए मुख्य सचिव ने एक सख्त निगरानी व्यवस्था लागू करने के निर्देश दिए:
- फील्ड वेरिफिकेशन टीमें: राज्य स्तर पर विशेष जांच दल गठित कर विभिन्न जिलों में अचानक फील्ड ऑडिट कराया जाएगा।
- त्रुटि रिपोर्ट और सुधार: जांच दल मौके पर जाकर देखेगा कि कितने खसरों का भौतिक सत्यापन हुआ, कितने रिकॉर्ड सही पाए गए और कहां लापरवाही बरती गई। कमियों को तुरंत दुरुस्त कर आंतरिक ऑडिट रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
धान उपार्जन और किसान पंजीयन से मिलान: बिचौलियों पर लगेगी लगाम
छत्तीसगढ़ में किसानों से ₹3,100 प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी की जाती है। ऐसे में फर्जी पंजीयन और दूसरे राज्यों से धान खपाने की कोशिशों को रोकने के लिए मुख्य सचिव ने एक बड़ा कदम उठाया है।
उन्होंने निर्देश दिए कि डिजिटल क्रॉप सर्वे के आंकड़ों का खाद्य विभाग के ‘धान उपार्जन पोर्टल’ और कृषि विभाग के ‘किसान पंजीयन’ के आंकड़ों के साथ तुलनात्मक परीक्षण किया जाए। यदि किसी खसरे में दर्ज फसल और किसान द्वारा पंजीकृत फसल के रकबे में अंतर मिलता है, तो उसका तत्काल फील्ड सत्यापन कर आवश्यक सुधार किया जाए ताकि सही किसान का ही धान खरीदा जा सके।
डिजिटल नक्शों की तकनीकी त्रुटियां दूर करने और कलेक्टरों को निर्देश
सर्वे के दौरान कुछ क्षेत्रों में नक्शों की अनुपलब्धता या भू-अभिलेखों में विसंगतियों की शिकायतों पर मुख्य सचिव ने राजस्व विभाग को तकनीकी समाधान विकसित करने को कहा।
उन्होंने कहा कि तकनीकी अड़चनों के कारण किसानों का कार्य लंबित नहीं रहना चाहिए। राजस्व विभाग जिला कलेक्टरों के साथ तत्काल बैठकें आयोजित कर गांवों और खेतों के रिकॉर्ड का अद्यतनीकरण सुनिश्चित करे। बैठक में खाद्य सचिव रीना बाबा साहब कंगाले, कृषि सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेशी, राजस्व सचिव शमी आबिदी और भू-अभिलेख संचालक विनीत नंदनवार सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
“डिजिटल क्रॉप सर्वे किसानों के अधिकारों का सुरक्षा कवच है। हमारी प्राथमिकता है कि खेतों में खड़ी वास्तविक फसल का पारदर्शी और विश्वसनीय डिजिटल रिकॉर्ड तैयार हो। नक्शों की त्रुटियों को दूर कर शत-प्रतिशत गिरदावरी समय-सीमा में पूरी की जाए। धान खरीदी और किसान पंजीयन से सर्वे का मिलान सुनिश्चित करेगा कि सरकारी योजनाओं का पूरा लाभ वास्तविक किसानों तक ही पहुंचे।”— विकासशील (IAS), मुख्य सचिव, छत्तीसगढ़ शासन
छत्तीसगढ़ के किसानों और धान खरीदी व्यवस्था के लिए इसके क्या मायने हैं?
- किसानों का निर्बाध पंजीयन: वास्तविक रकबे का सही डिजिटल इंद्राज होने से किसानों को धान उपार्जन केंद्रों (समितियों) में टोकन काटने और बेचने में कोई तकनीकी दिक्कत नहीं आएगी।
- पारदर्शी गिरदावरी: पॉलीगॉन मैपिंग से पटवारी स्तर पर होने वाली गलत प्रविष्टियों और रकबा कटौती के विवादों से किसानों को मुक्ति मिलेगी।
- सरकारी खजाने की सुरक्षा: धान खरीदी के दौरान फर्जी खसरों के नाम पर होने वाले अवैध धान परिवहन और बिचौलिया तंत्र पर पूर्ण विराम लगेगा।
डिजिटल क्रॉप सर्वे एवं गिरदावरी समीक्षा: एक नजर में
- विषय: डिजिटल क्रॉप सर्वे, भू-अभिलेख अद्यतनीकरण एवं गिरदावरी समीक्षा
- अध्यक्षता: मुख्य सचिव श्री विकासशील (IAS)
- प्रमुख निर्देश: शत-प्रतिशत गिरदावरी और फसलों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करना
- तकनीकी प्रक्रिया: बोई गई फसलों का पॉलीगॉन बनाकर खसरा सत्यापन
- गुणवत्ता नियंत्रण: राज्य स्तरीय विशेष टीमों द्वारा जिलों में औचक फील्ड वेरिफिकेशन
- डेटा मिलान: खाद्य विभाग (धान उपार्जन) एवं कृषि विभाग (किसान पंजीयन) से तुलना
- उपस्थित अधिकारी: प्रमुख सचिव सुबोध सिंह, सचिव रीना कंगाले, सिद्धार्थ परदेशी, शमी आबिदी, विनीत नंदनवार व अन्य
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Digital Crop Survey Chhattisgarh का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका उद्देश्य खेतों में बोई गई वास्तविक फसलों का पॉलीगॉन बनाकर शत-प्रतिशत सटीक डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करना और गिरदावरी को पूरी तरह पारदर्शी बनाना है।
डिजिटल क्रॉप सर्वे का धान खरीदी से क्या संबंध है?
सर्वे के आंकड़ों का मिलान खाद्य विभाग के धान उपार्जन और कृषि विभाग के किसान पंजीयन से किया जाएगा, जिससे केवल वास्तविक बोए गए रकबे का ही धान समर्थन मूल्य पर बिक सके।
सर्वे में गड़बड़ी रोकने के लिए मुख्य सचिव ने क्या व्यवस्था बनाई है?
सर्वे की गुणवत्ता जांचने के लिए राज्य स्तर पर विशेष जांच टीमें बनाई जाएंगी जो जिलों में जाकर मौके पर भौतिक सत्यापन और क्रॉस-वेरिफिकेशन करेंगी।
डिजिटल नक्शों की त्रुटियों के समाधान के लिए क्या निर्देश दिए गए हैं?
राजस्व विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि नक्शों की अनुपलब्धता या तकनीकी समस्याओं के समाधान के लिए त्वरित आईटी समाधान तैयार करें और कलेक्टरों के साथ बैठक कर विसंगतियां दूर करें।
स्रोत (Source): राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग / सामान्य प्रशासन विभाग (DPR Raipur)