बलरामपुर/रायपुर, 30 सितंबर: छत्तीसगढ़ के सुदूर आदिवासी बाहुल्य जिले बलरामपुर-रामानुजगंज ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और अत्याधुनिक डिजिटल तकनीक के क्षेत्र में ऐतिहासिक छलांग लगाई है। जिला प्रशासन और वैश्विक तकनीकी कंपनी प्रिज्मा एआई (Prisma AI) के बीच हुए गैर-वित्तीय एमओयू के तहत बलरामपुर में प्रदेश का पहला ‘कॉग्निटिव डेटा एनोटेशन सेंटर’ स्थापित किया जा रहा है। इस नवाचार के माध्यम से जिले के शिक्षित ग्रामीण युवाओं और महिला स्व-सहायता समूहों की सदस्यों को डेटा लेबलिंग, इमेज टैगिंग और एआई मॉडल्स के प्रशिक्षण का कार्य देकर स्थानीय स्तर पर ही उच्च तकनीक आधारित आजीविका से जोड़ा जाएगा।
मुख्य बिंदु:
- बलरामपुर-रामानुजगंज बना ‘कॉग्निटिव डेटा एनोटेशन सेंटर’ स्थापित करने वाला छत्तीसगढ़ का पहला जिला।
- जिला प्रशासन और प्रिज्मा एआई (Prisma AI) के बीच गैर-वित्तीय एमओयू (Non-Financial MoU) पर हस्ताक्षर।
- पायलट प्रोजेक्ट के तहत 10 सीटों का आधुनिक सेंटर होगा शुरू; समर्पित प्रशिक्षक और गुणवत्ता पर्यवेक्षक रहेंगे तैनात।
- 12वीं और ग्रेजुएट महिलाओं को इमेज टैगिंग व ऑब्जेक्ट क्लासिफिकेशन सिखाकर ‘लखपति दीदी’ बनाने का लक्ष्य।
कलेक्ट्रेट में हुआ ऐतिहासिक एमओयू: प्रिज्मा एआई और प्रशासन की साझा पहल
कलेक्ट्रेट कक्ष में आयोजित गरिमामय कार्यक्रम में जिला प्रशासन और प्रिज्मा एआई के शीर्ष अधिकारियों ने इस समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) आशुतोष चतुर्वेदी, प्रिज्मा एआई के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) डॉ. श्रीराम अय्यर, मुख्य परिचालन अधिकारी (सीओओ) अमिताभ राय चौधरी तथा मुख्य तकनीकी अधिकारी (सीटीओ) विनीत कुमार झा उपस्थित रहे।
इस ऐतिहासिक पहल की साक्षी बनने के लिए महिला स्व-सहायता समूह की सदस्य सपना और अनुजा भी विशेष रूप से मौजूद रहीं, जो इस डिजिटल क्रांति की पहली लाभार्थी बनेंगी।
पायलट प्रोजेक्ट में 10 सीटों से शुरुआत: क्या काम करेंगी दीदियां?
परियोजना के पहले चरण में बलरामपुर में 10 वर्कस्टेशनों (सीटों) का एक आधुनिक कंप्यूटर सेंटर शुरू किया जा रहा है। सेंटर के संचालन के लिए एक पूर्णकालिक तकनीकी प्रशिक्षक और गुणवत्ता पर्यवेक्षक तैनात रहेंगे।
पारदर्शी और संरचित चयन प्रणाली के माध्यम से चुने गए प्रतिभागियों को कंप्यूटर साक्षरता के साथ-साथ एआई साक्षरता, डिजिटल कौशल, डेटा लेबलिंग (Data Labeling), इमेज एवं ऑब्जेक्ट टैगिंग (Image & Object Tagging), डेटा वर्गीकरण (Classification), सत्यापन और गुणवत्ता समीक्षा का गहन व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा।
‘लखपति दीदी’ अभियान को मिलेगा डिजिटल बूस्ट: कलेक्टर चंदन त्रिपाठी
बलरामपुर-रामानुजगंज की कलेक्टर श्रीमती चंदन त्रिपाठी ने बताया कि जिले में 12वीं उत्तीर्ण और स्नातक महिलाओं वाले स्व-सहायता समूहों का एक बड़ा नेटवर्क मौजूद है, जो पहले से स्मार्टफोन और बुनियादी कंप्यूटर संचालन में दक्ष हैं।
यह सेंटर पारंपरिक सिलाई-बुनाई या लघु वनोपज संग्रहण से आगे बढ़कर दीदियों को सीधे ग्लोबल डिजिटल इकोनॉमी से जोड़ेगा। घर के पास ही सम्मानजनक, वातानुकूलित और नियमित आय का साधन मिलने से केंद्र सरकार के ‘लखपति दीदी’ मिशन को धरातल पर गति मिलेगी।
खर्च और जिम्मेदारियों का बंटवारा: टेक कंपनी उठाएगी पूरा वित्तीय भार
एमओयू की शर्तों के अनुसार इस परियोजना का वित्तीय और तकनीकी मॉडल बेहद व्यावहारिक रखा गया है:
- प्रिज्मा एआई का दायित्व: केंद्र की संपूर्ण सॉफ्टवेयर तकनीक, दैनिक संचालन, विशेषज्ञ प्रशिक्षण, गुणवत्ता पर्यवेक्षण, प्रतिभागियों का मासिक पारिश्रमिक, प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन राशि और हाई-स्पीड इंटरनेट लीज लाइन का पूरा खर्च कंपनी वहन करेगी।
- जिला प्रशासन का दायित्व: जिला प्रशासन उपयुक्त परिसर और बुनियादी भवन उपलब्ध कराएगा, पात्र अभ्यर्थियों की स्क्रीनिंग और चयन में मदद करेगा तथा राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) व कौशल विकास विभाग से समन्वय और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करेगा।
“आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस केवल महानगरों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। बलरामपुर जैसे वनांचल जिले की बेटियां जब एआई एल्गोरिदम के लिए डेटा एनोटेट करेंगी, तो यह डिजिटल खाई को पाटने का सबसे सशक्त उदाहरण होगा। यह केंद्र हमारे जनजातीय अंचल के युवाओं को विश्वस्तरीय भविष्योन्मुखी कौशल देगा।”— चंदन त्रिपाठी, कलेक्टर, बलरामपुर-रामानुजगंज
वनांचल के युवाओं और महिला स्व-सहायता समूहों के लिए इसके क्या मायने हैं?
- स्थानीय स्तर पर टेक रोजगार: ग्रामीण शिक्षित युवाओं को डेटा एंट्री और बीपीओ जैसे कार्यों के लिए बेंगलुरु, हैदराबाद या दिल्ली जैसे बड़े शहरों में पलायन करने की मजबूरी समाप्त होगी।
- भविष्य की नौकरियों के लिए तैयार: ऑटोनॉमस व्हीकल्स, मेडिकल एआई और फेशियल रिकॉग्निशन में डेटा लेबलिंग की वैश्विक मांग है; इस हुनर से महिलाओं की बाजार में मांग बढ़ेगी।
- सामाजिक-आर्थिक उत्थान: नियमित मासिक मानदेय मिलने से आदिवासी परिवारों की क्रय शक्ति बढ़ेगी और बच्चों की बेहतर शिक्षा पर निवेश संभव होगा।
डेटा एनोटेशन सेंटर की मुख्य विशेषताएं एक नजर में
- केंद्र का नाम: कॉग्निटिव डेटा एनोटेशन सेंटर (Cognitive Data Annotation Center)
- स्थान: जिला मुख्यालय बलरामपुर (छत्तीसगढ़)
- प्रारंभिक क्षमता: 10 सीटें (पायलट चरण)
- साझेदार कंपनी: प्रिज्मा एआई (Prisma AI)
- प्रशिक्षण मॉड्यूल: इमेज टैगिंग, ऑब्जेक्ट बाउंडिंग बॉक्स, डेटा क्लासिफिकेशन और क्वालिटी ऑडिट।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
छत्तीसगढ़ के किस जिले में पहला कॉग्निटिव डेटा एनोटेशन सेंटर स्थापित किया गया है?
बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में छत्तीसगढ़ का पहला कॉग्निटिव डेटा एनोटेशन सेंटर स्थापित किया गया है, जो एआई और डेटा लेबलिंग पर केंद्रित है।
डेटा एनोटेशन सेंटर के लिए किस कंपनी के साथ एमओयू हुआ है?
इस केंद्र की स्थापना और संचालन के लिए जिला प्रशासन बलरामपुर ने वैश्विक तकनीकी फर्म प्रिज्मा एआई (Prisma AI) के साथ गैर-वित्तीय एमओयू किया है।
इस केंद्र में काम करने वाली महिलाओं को क्या लाभ मिलेगा?
स्व-सहायता समूह की 12वीं व ग्रेजुएट महिलाओं को एआई डेटा लेबलिंग और इमेज टैगिंग का व्यावहारिक प्रशिक्षण मिलेगा और कंपनी द्वारा नियमित पारिश्रमिक व प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।
स्रोत (Source): छत्तीसगढ़ जनसंपर्क विभाग (DPR Raipur / बलरामपुर-रामानुजगंज)