रायपुर, 18 सितंबर 2026: छत्तीसगढ़ में श्वेत क्रांति को नई गति देने, पशुओं की आनुवंशिक क्षमता में सुधार करने और डेयरी क्षेत्र की बदलती प्राथमिकताओं के अनुरूप एक दूरदर्शी नीति तैयार करने के लिए राज्य सरकार ने कदम बढ़ा दिए हैं। राजधानी रायपुर स्थित न्यू सर्किट हाउस में ‘छत्तीसगढ़ पशुधन विकास एवं प्रजनन नीति 2026’ (Livestock Breeding Policy Chhattisgarh) के निर्धारण और प्रारूप तैयार करने के संबंध में शुक्रवार को एक उच्चस्तरीय हितधारक कार्यशाला (Stakeholder Workshop) संपन्न हुई।
इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य वर्तमान जलवायु परिस्थितियों, चारा उपलब्धता और डेयरी क्षेत्र की आधुनिक तकनीकी आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए राज्य की मौजूदा पशु प्रजनन नीति के प्रावधानों की गहन समीक्षा करना तथा देश-विदेश के विशेषज्ञों से बहुमूल्य सुझाव प्राप्त करना था। कार्यशाला में पशुचिकित्सा सेवाएं संचालक श्री चंद्रकांत वर्मा, राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के वरिष्ठ महाप्रबंधक डॉ. आर.ओ. गुप्ता, ग्रुप हेड (पशु प्रजनन) डॉ. निलेश नाइक, प्रबंधक डॉ. स्वप्निल गज्जर, तथा छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी दुग्ध महासंघ (देवभोग) के प्रबंध संचालक डॉ. एम. जयकृष्णा सहित पशु वैज्ञानिकों और दुग्ध उत्पादक किसानों ने भाग लिया।
कार्यशाला के दौरान उन्नत प्रजनन तकनीक (Advanced Reproductive Technology – ART), कृत्रिम गर्भाधान (AI) और पशुओं की उत्पादकता बढ़ाने पर विस्तृत विमर्श हुआ। विशेषज्ञों ने रेखांकित किया कि Livestock Breeding Policy Chhattisgarh को स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप बनाया जाना चाहिए, ताकि राज्य के पशुपालकों को कम लागत में उच्च गुणवत्ता वाली प्रजनन सेवाएं मिल सकें और ग्रामीण परिवारों की आय में स्थायी वृद्धि हो सके।
| पशुधन विकास एवं प्रजनन नीति कार्यशाला: मुख्य तथ्य (Quick Facts) | विवरण |
|---|---|
| नीति का नाम | Livestock Breeding Policy Chhattisgarh (पशुधन विकास एवं प्रजनन नीति 2026) |
| आयोजन स्थल | न्यू सर्किट हाउस, रायपुर (18 सितंबर 2026) |
| आयोजक | पशुधन विकास विभाग / पशुचिकित्सा सेवाएं, छत्तीसगढ़ शासन |
| प्रमुख तकनीकी सहयोगी | राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) एवं एनडीडीबी डेयरी सर्विसेज (NDS) |
| सहकारी संस्था | छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी दुग्ध महासंघ (देवभोग) |
| अकादमिक संस्थान | पशुचिकित्सा एवं पशुपालन महाविद्यालय, अंजोरा (दुर्ग) |
| कोर तकनीकी फोकस | उन्नत प्रजनन तकनीक (ART), स्थानीय देशी नस्ल संरक्षण व केंद्रीय वीर्य बैंक |
स्थानीय नस्लें, केंद्रीय वीर्य बैंक और ड्राफ्ट नीति पर विशेषज्ञों का व्याख्यान
Livestock Breeding Policy Chhattisgarh के विभिन्न तकनीकी पहलुओं पर पशुचिकित्सा एवं पशुपालन महाविद्यालय, अंजोरा (दुर्ग) के प्रतिष्ठित प्रोफेसरों एवं वैज्ञानिकों ने विशेष प्रस्तुतियां दीं:
- राज्य की स्थानीय नस्लें: डॉ. कौसर परवीन ने छत्तीसगढ़ की स्थानीय देशी नस्लों के आनुवंशिक गुणों, उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता और बदलती जलवायु में उनके संरक्षण की रणनीतियों पर व्याख्यान दिया।
- केंद्रीय वीर्य बैंक का आधुनिकीकरण: डॉ. भूपेन्द्र देवांगन ने राज्य के केंद्रीय वीर्य संग्रहालय (Central Semen Station) की क्षमता वृद्धि, उच्च कोटि के वीर्य स्ट्रा (Frozen Semen Straws) के उत्पादन और उनके फील्ड डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क को मजबूत करने पर विचार रखे।
- प्रस्तावित नीति का प्रारूप: डॉ. विवेक अवस्थी ने प्रस्तावित ‘पशुधन विकास एवं प्रजनन नीति 2026’ के ड्राफ्ट के मुख्य बिंदुओं, कानूनी प्रावधानों और लागू करने की समय-सारणी पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया।
उन्नत तकनीक और नीति निर्धारण
कार्यशाला के दौरान उन्नत प्रजनन तकनीक (Advanced Reproductive Technology) और पशु प्रजनन नीति के निर्धारण पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। इसमें पशुओं की उत्पादकता और उनकी आनुवंशिक क्षमता में सुधार लाने के उपायों पर विशेष जोर दिया गया।
इसके साथ ही, राज्य के किसानों और पशुपालकों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण प्रजनन सेवाएं आसानी से उपलब्ध कराने पर मंथन हुआ तथा पशुधन क्षेत्र के सतत विकास और डेयरी व्यवसाय को मजबूती प्रदान करने से जुड़े विभिन्न तकनीकी पहलुओं पर विस्तृत चर्चा की गई।
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CGPSC Static Facts: छत्तीसगढ़ की पशु नस्लें, दुग्ध महासंघ एवं कामधेनु विश्वविद्यालय (100% प्रामाणिक तथ्य)
प्रतियोगी परीक्षाओं (CGPSC राज्य सेवा परीक्षा Paper-5 भारत एवं छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था तथा Paper-3 कृषि व पशुपालन) के लिए मानक तथ्य:
- छत्तीसगढ़ की पंजीकृत देशी पशु नस्लें (NBAGR द्वारा मान्यता प्राप्त):
- कोसारली गाय (Kosali Cattle): राष्ट्रीय पशु आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो (NBAGR, करनाल) द्वारा पंजीकृत छत्तीसगढ़ की मूल गोवंशीय नस्ल। यह मुख्य रूप से मध्य मैदानी अंचल (रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर) में पाई जाती है। छोटे कद की, जुताई हेतु उत्कृष्ट और स्थानीय जलवायु व रोगों के प्रति अत्यधिक सहनशील होती है।
- छत्तीसगढ़ी भैंस (Chhattisgarhi Buffalo): राज्य की पंजीकृत देशी भैंस नस्ल, जो बिलासपुर, जांजगीर-चांपा, रायगढ़ और रायपुर क्षेत्र में पाई जाती है। यह अपने पौष्टिक व उच्च वसा (Fat) युक्त दूध और दलदली इलाकों में काम करने की क्षमता के लिए प्रसिद्ध है।
- दाऊ श्री वासुदेव चंद्राकर कामधेनु विश्वविद्यालय, अंजोरा (दुर्ग):
- स्थापना: 11 अप्रैल 2012 को स्थापित (इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय से पृथक कर राज्य पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय बनाया गया)।
- घटक कॉलेज: पशुचिकित्सा एवं पशुपालन महाविद्यालय अंजोरा (दुर्ग), दुग्ध प्रौद्योगिकी महाविद्यालय (रायपुर), और मात्स्यिकी महाविद्यालय (कवर्धा)।
- छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी दुग्ध महासंघ मर्यादित (देवभोग):
- राज्य की शीर्ष सहकारी दुग्ध संस्था, जो राज्य भर के दुग्ध उत्पादक किसानों से दूध संकलित कर ‘देवभोग’ (Devbhog) ब्रांड नाम से दूध और दुग्ध उत्पादों का प्रसंस्करण एवं विपणन करती है।
- राष्ट्रीय गोकुल मिशन (Rashtriya Gokul Mission):
- दिसंबर 2014 में शुरू किया गया राष्ट्रीय कार्यक्रम, जिसका उद्देश्य देशी गोजातीय नस्लों का आनुवंशिक सुधार, उत्पादकता वृद्धि और कृत्रिम गर्भाधान नेटवर्क का शत-प्रतिशत संतृप्तिकरण करना है।
विश्लेषण: पशुधन नीति, जलवायु सहनशीलता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था
(UPSC/CGPSC Mains Analysis – Agriculture Economics, Livestock Sector & Sustainable Dairy)
1. विदेशी संकर नस्ल (Exotic Cross-Breeding) बनाम देशी नस्ल संरक्षण का द्वंद्व: अब तक की नीतियों में दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए अंधाधुंध संकर प्रजनन (जर्सी और होल्स्टीन फ्रीजियन) पर जोर दिया गया, जिससे पशुओं की दूध मात्रा तो बढ़ी लेकिन वे छत्तीसगढ़ की भीषण गर्मी, उमस और स्थानीय परजीवी रोगों के प्रति अत्यधिक संवेदनशील हो गए। Livestock Breeding Policy Chhattisgarh का यह नया मंथन यह रेखांकित करता है कि राज्य को अब ‘कोसारली’ जैसी स्थानीय नस्लों के चयन और आनुवंशिक उन्नयन (Grading Up) पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, जो कम लागत और स्थानीय चारे में भी दीर्घकालिक स्थिरता प्रदान करती हैं।
2. सेक्स-सॉर्टेड सीमेन और आवारा पशु (Stray Cattle) समस्या का स्थायी समाधान: छत्तीसगढ़ में ‘रोका-छेका’ और गोधन प्रबंधन के बावजूद नर बछड़ों की अनुपयोगिता के कारण सड़कों पर लावारिस पशुओं की संख्या बढ़ रही है। नई नीति में एनडीडीबी के सहयोग से यदि ‘सेक्स-सॉर्टेड सीमेन’ (Sex-Sorted Semen) को 90% से अधिक रियायती दरों पर ग्रामीण स्तर तक उपलब्ध कराया जाए, तो 90% से अधिक केवल बछिया का जन्म होगा। यह न केवल ग्रामीण पशुपालकों के लिए डेयरी को अत्यधिक लाभकारी बनाएगा, बल्कि फसलों की सुरक्षा और आवारा पशु प्रबंधन का स्थायी वैज्ञानिक समाधान भी प्रस्तुत करेगा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Q1. Livestock Breeding Policy Chhattisgarh 2026 के लिए हितधारक कार्यशाला कहाँ आयोजित की गई?
इस नीति के निर्धारण और ड्राफ्ट पर विमर्श के लिए कार्यशाला 18 सितंबर 2026 को राजधानी रायपुर स्थित न्यू सर्किट हाउस में आयोजित की गई।
Q2. छत्तीसगढ़ की पंजीकृत आधिकारिक देशी गोवंश नस्ल का क्या नाम है?
राष्ट्रीय पशु आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो (NBAGR) द्वारा पंजीकृत छत्तीसगढ़ की मूल देशी गोवंश नस्ल का नाम ‘कोसारली’ (Kosali) है।
Q3. इस कार्यशाला में तकनीकी सहयोग प्रदान करने वाली प्रमुख राष्ट्रीय संस्था कौन-सी है?
इस नीति निर्धारण कार्यशाला में मुख्य तकनीकी भागीदार राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) और एनडीडीबी डेयरी सर्विसेज (NDS) रहे।
स्रोत (Source)
छत्तीसगढ़ जनसंपर्क विभाग (DPR Chhattisgarh) आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति, 18 सितंबर 2026.
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