Aashirwad Ka Diya Mahadev Ghat: सवा लाख दीपों की रोशनी से आलोकित हुआ खारुन का पावन तट, PM मोदी के 76वें जन्मदिवस पर CM विष्णु देव साय ने की भव्य महाआरती

Aashirwad Ka Diya Mahadev Ghat Aashirwad Ka Diya Mahadev Ghat

रायपुर, 17 सितम्बर 2026: प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के 76वें जन्मदिवस और उनके सार्वजनिक जीवन में निरंतर 25 वर्ष की राष्ट्रसेवा पूर्ण होने के ऐतिहासिक अवसर पर राजधानी रायपुर का प्रसिद्ध महादेव घाट सवा लाख दीपों की अलौकिक आभा से जगमगा उठा। खारुन नदी के पावन तट पर आयोजित विराट दीपोत्सव एवं महाआरती Aashirwad Ka Diya Mahadev Ghat कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने सपरिवार शामिल होकर प्रदेशवासियों के साथ प्रधानमंत्री के उत्तम स्वास्थ्य, सुदीर्घ और यशस्वी जीवन की मंगलकामना की। एक साथ प्रज्ज्वलित 1.25 लाख दीपों की ज्योति से समूचा महादेव घाट परिसर आस्था और जनभागीदारी के महाकुंभ में तब्दील हो गया।

विराट दीपोत्सव के पावन अवसर पर साध्वी प्रज्ञा भारती एवं विद्वान आचार्यों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के साथ जीवनदायिनी खारुन मैया की भव्य महाआरती संपन्न कराई गई, जिसमें मुख्यमंत्री श्री साय ने विधि-विधान से सहभागिता की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को समर्पित और साध्वी प्रज्ञा भारती द्वारा रचित एवं स्वरबद्ध किए गए विशेष भक्ति-गीत का आधिकारिक विमोचन भी किया। मुख्यमंत्री ने बताया कि महादेव घाट पर सवा लाख दीपों के अलावा अकेले राजधानी रायपुर के विभिन्न चौक-चौराहों और सार्वजनिक स्थलों पर नागरिकों द्वारा लगभग 32 लाख दीप प्रज्ज्वलित किए गए हैं।

जनसमूह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि Aashirwad Ka Diya Mahadev Ghat केवल दीप प्रज्ज्वलन नहीं, बल्कि 140 करोड़ देशवासियों के स्वाभिमान और विकसित भारत के संकल्प का प्रकटीकरण है। उन्होंने वर्ष 2014 में केंद्रीय राज्यमंत्री के रूप में प्रधानमंत्री श्री मोदी के मंत्रिमंडल में कार्य करने के अपने व्यक्तिगत अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि उनके कठोर अनुशासन, अथक परिश्रम और गरीब कल्याण के प्रति समर्पण को निकट से देखना उनके सार्वजनिक जीवन की सबसे बड़ी पूंजी रही है।

विराट दीपोत्सव एवं महाआरती: मुख्य तथ्य (Quick Facts)विवरण
कार्यक्रम का नामAashirwad Ka Diya Mahadev Ghat (विराट दीपोत्सव एवं महाआरती)
आयोजन स्थलमहादेव घाट, खारुन नदी तट, रायपुर
अवसर एवं संदर्भPM नरेंद्र मोदी का 76वां जन्मदिवस एवं सार्वजनिक सेवा के 25 वर्ष
प्रज्ज्वलित दीपों की संख्या1.25 लाख (सवा लाख) दीप (महादेव घाट) | रायपुर शहर में लगभग 32 लाख दीप
महाआरती नेतृत्वसाध्वी प्रज्ञा भारती एवं आचार्यों द्वारा (खारुन मैया महाआरती)
विशेष गीत विमोचनसाध्वी प्रज्ञा भारती द्वारा रचित एवं स्वरबद्ध गीत
कार्यक्रम संयोजिकाश्रीमती लक्ष्मी वर्मा (राज्यसभा सांसद)
सहयोगी संगठनसनातन ध्वज वाहिनी, स्वयंसेवक एवं नागरिक समाज

प्रधानमंत्री के नेतृत्व में ऐतिहासिक परिवर्तन: धारा 370 से राम मंदिर तक

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने Aashirwad Ka Diya Mahadev Ghat के मंच से प्रधानमंत्री मोदी के ऐतिहासिक निर्णयों का स्मरण किया:

  • दशकों पुराने संकल्पों की सिद्धि: जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निष्प्रभावी करने से लेकर अयोध्या में भव्य मंदिर में भगवान श्री रामलला के विराजमान होने तक, देश ने अभूतपूर्व आत्मविश्वास और सांस्कृतिक गौरव का अनुभव किया है।
  • गरीब कल्याण का अंत्योदय मॉडल: पक्के आवास (PMAY), घर-घर शौचालय, उज्ज्वला गैस कनेक्शन, जन-धन खाते और मुफ्त खाद्यान्न सुरक्षा ने समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा है।

छत्तीसगढ़ से आत्मीय जुड़ाव और बस्तर में शांति की पुनर्स्थापना

मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार के सतत मार्गदर्शन और बस्तर के कायाकल्प पर प्रकाश डालते हुए कहा:

  • माओवादी हिंसा पर निर्णायक नियंत्रण: प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व, केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह की दृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्ति और सुरक्षा बलों के अदम्य साहस से छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के विरुद्ध निर्णायक बढ़त हासिल हुई है।
  • बस्तर का नया युग: वर्षों तक हिंसा और पिछड़ेपन का दंश झेलने वाले बस्तर के सुदूर वनांचलों तक अब पक्की सड़कें, बिजली, मोबाइल कनेक्टिविटी, स्कूल और स्वास्थ्य केंद्र पहुँच रहे हैं। राज्य सरकार बस्तर की वन संपदा, पर्यटन और संस्कृति को स्थानीय युवाओं की समृद्धि से जोड़ रही है।
  • सेवा संकल्प अभियान: 17 सितम्बर से 17 अक्टूबर 2026 तक चलने वाले माहव्यापी अभियान के तहत प्रदेश भर में स्वच्छता, पोषण, स्वास्थ्य और पौधरोपण के कार्य जनभागीदारी से किए जा रहे हैं।

विराट आयोजन में शामिल गणमान्य जनप्रतिनिधि एवं आयोग प्रमुख

खारुन तट पर आयोजित इस ऐतिहासिक दीपोत्सव में शासन और समाज के प्रमुख प्रतिनिधि उपस्थित रहे:

  • संयोजक एवं सांसद: कार्यक्रम की संयोजिका एवं राज्यसभा सांसद श्रीमती लक्ष्मी वर्मा
  • विधायकगण: रायपुर पश्चिम विधायक श्री राजेश मूणत एवं धरसीवां विधायक श्री मोतीलाल साहू
  • नगरीय नेतृत्व: रायपुर नगर निगम की महापौर श्रीमती मीनल चौबे एवं श्रीमती कौशल्या साय (मुख्यमंत्री की धर्मपत्नी)

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CGPSC Static Facts: खारुन नदी एवं ऐतिहासिक हटकेश्वर महादेव मंदिर (100% प्रामाणिक तथ्य)

प्रतियोगी परीक्षाओं (CGPSC राज्य सेवा परीक्षा Paper-5 छत्तीसगढ़ का भूगोल तथा Paper-6 इतिहास एवं स्थापत्य) के लिए मानक तथ्य:

  • खारुन नदी (Kharun River) का भौगोलिक विवरण:
    • उद्गम: बालोद जिले की संजारी-बालोद तहसील स्थित पेटेचुवा की पहाड़ियों से होता है।
    • प्रवाह क्षेत्र: यह बालोद, दुर्ग और रायपुर जिलों की सीमा बनाते हुए उत्तर दिशा में प्रवाहित होती है।
    • संगम (समापन): बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के सोमनाथ (सिमगा के निकट) में यह जीवनदायिनी शिवनाथ नदी में विलीन हो जाती है। यह शिवनाथ की प्रमुख सहायक नदी है।
  • हटकेश्वर महादेव मंदिर, महादेव घाट (Hatkeshwar Mahadev Temple):
    • निर्माण काल: 14वीं-15वीं शताब्दी (लगभग 1402 ईस्वी)।
    • राजवंश: रायपुर की कलचुरि शाखा के शासक राजा ब्रह्मदेव राय के शासनकाल में उनके मंत्री (नायक हाजीराज) द्वारा खारुन नदी के तट पर इस भव्य मंदिर का निर्माण कराया गया था।
    • पुन्नी मेला: प्रतिवर्ष कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर महादेव घाट पर प्रसिद्ध ‘पुन्नी मेला’ आयोजित होता है, जहाँ श्रद्धालु खारुन में स्नान कर हटकेश्वर महादेव के दर्शन करते हैं।
  • संवैधानिक एवं सांविधिक निकाय:
    • राज्य महिला आयोग, राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग और गौ सेवा आयोग राज्य में कमजोर वर्गों और सांस्कृतिक संवर्धन हेतु स्थापित महत्वपूर्ण सांविधिक (Statutory) संस्थाएं हैं।

विश्लेषण: नदी संस्कृति का पुनरुद्धार और सामाजिक पूंजी (Social Capital)

(UPSC/CGPSC Mains Analysis – Cultural Heritage, Urban Ecology & Internal Security)

1. नदी तटों का सांस्कृतिक एवं पारिस्थितिकीय पुनरुद्धार (River Front Revival): आधुनिक शहरीकरण ने नदियों को केवल गंदे नालों और अपशिष्ट विसर्जन तक सीमित कर दिया था। Aashirwad Ka Diya Mahadev Ghat जैसे विशाल जनभागीदारी आयोजनों से खारुन नदी के प्रति नागरिकों में पर्यावरणीय चेतना और आध्यात्मिक जुड़ाव पुनर्जागृत होता है। जब लाखों नागरिक नदी तट पर एकत्र होकर महाआरती करते हैं, तो यह जल स्रोतों के संरक्षण के लिए सामुदायिक दबाव और ‘सामाजिक पूंजी’ (Social Capital) का निर्माण करता है।

2. सुरक्षा अभियानों से स्थायी शांति की ओर संक्रमण: मुख्यमंत्री का बस्तर में माओवादी हिंसा के विरुद्ध निर्णायक सफलता और विकास का उल्लेख आंतरिक सुरक्षा के नए प्रतिमान को दर्शाता है। सुरक्षा कैंपों की स्थापना के बाद सड़कों, मोबाइल टावरों और सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) का विस्तार यह सुनिश्चित करता है कि सुरक्षा बलों द्वारा मुक्त कराए गए क्षेत्रों में प्रशासनिक शून्यता (Administrative Vacuum) न बने। विकास का यह प्रवाह आदिवासियों को हिंसा से दूर कर राज्य की लोकतांत्रिक व्यवस्था में भागीदार बनाता है।


अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1. Aashirwad Ka Diya Mahadev Ghat कार्यक्रम में कितने दीप प्रज्ज्वलित किए गए?

रायपुर के महादेव घाट पर खारुन नदी के तट पर सवा लाख (1.25 लाख) दीप जलाए गए, जबकि समूचे रायपुर शहर में विभिन्न स्थानों पर लगभग 32 लाख दीप प्रज्ज्वलित किए गए।

Q2. खारुन नदी का उद्गम कहाँ से होता है और यह किस नदी में मिलती है?

खारुन नदी का उद्गम बालोद जिले की पेटेचुवा पहाड़ियों से होता है और यह बलौदाबाजार जिले के सोमनाथ (सिमगा के निकट) में शिवनाथ नदी में मिल जाती है।

Q3. महादेव घाट स्थित हटकेश्वर महादेव मंदिर का निर्माण किस राजवंश के काल में हुआ था?

हटकेश्वर महादेव मंदिर का निर्माण 1402 ईस्वी में रायपुर के कलचुरि शासक राजा ब्रह्मदेव राय के शासनकाल के दौरान कराया गया था।

स्रोत (Source)

छत्तीसगढ़ जनसंपर्क विभाग (DPR Chhattisgarh) आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति, 17 सितम्बर 2026.

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