रायपुर, 16 सितंबर 2026: छत्तीसगढ़ के सर्वांगीण और समावेशी विकास के लिए राज्य सरकार ने आधुनिक वित्तीय सेवाओं को महानगरों से निकालकर दूरस्थ वनांचलों तक पहुँचाने की दिशा में कड़ा रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने बुधवार को राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank) के उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल से सौजन्य मुलाकात के दौरान Rural Banking Expansion Chhattisgarh पर विशेष बल दिया। मुख्यमंत्री ने बैंक प्रबंधन को स्पष्ट निर्देश दिए कि बैंकिंग सेवाओं का दायरा केवल बड़े शहरों और व्यापारिक केंद्रों तक सीमित न रहे, बल्कि बस्तर एवं सरगुजा जैसे दूरस्थ एवं जनजातीय बहुल अंचलों के प्रत्येक गांव तक औपचारिक बैंकिंग तंत्र का विस्तार किया जाए।
यह मुलाकात एचडीएफसी बैंक द्वारा छत्तीसगढ़ में अपनी बैंकिंग सेवाओं के सफलतम 25 वर्ष पूर्ण करने के उपलक्ष्य में आयोजित की गई थी। इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर मुख्यमंत्री श्री साय ने बैंक प्रबंधन, समस्त अधिकारियों-कर्मचारियों और खाताधारकों को हार्दिक बधाई दी तथा 25 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में तैयार किए गए विशेष ‘स्मारक लोगो’ का विधिवत विमोचन किया। इस अवसर पर रायपुर उत्तर के विधायक श्री पुरंदर मिश्रा, एचडीएफसी बैंक के ग्रुप हेड श्री अरुण मेदीरत्ता तथा सेंट्रल इंडिया के ब्रांच बैंकिंग हेड श्री प्रतीक शर्मा सहित बैंक के प्रमुख प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि गांव के नजदीक बैंक की शाखा या ग्राहक सेवा केंद्र (CSP) उपलब्ध होने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सीधे नई ऊर्जा मिलती है। इससे ग्रामीणों को अपने ही पैसे निकालने या सामान्य बैंकिंग कार्यों के लिए मीलों दूर नहीं जाना पड़ता, जिससे उनके समय और धन की बचत होती है तथा औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था के प्रति उनका विश्वास दृढ़ होता है। उन्होंने रेखांकित किया कि Rural Banking Expansion Chhattisgarh से केंद्र व राज्य सरकार की प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) योजनाओं का पैसा पारदर्शी, सुरक्षित और समयबद्ध ढंग से अंतिम व्यक्ति तक पहुँचेगा और बिचौलियों की भूमिका समाप्त होगी।
| बैंकिंग नेटवर्क विस्तार एवं HDFC 25 वर्ष: मुख्य तथ्य (Quick Facts) | विवरण |
|---|---|
| मुख्य फोकस | Rural Banking Expansion Chhattisgarh (ग्रामीण बैंकिंग नेटवर्क विस्तार) |
| विशेष प्राथमिकता क्षेत्र | बस्तर एवं सरगुजा संभाग के दूरस्थ एवं जनजातीय अंचल |
| विशेष अवसर | छत्तीसगढ़ में HDFC बैंक के 25 वर्ष पूर्ण (विशेष लोगो का विमोचन) |
| मुलाकात स्थल | मुख्यमंत्री निवास कार्यालय, रायपुर |
| उपस्थित जनप्रतिनिधि | श्री पुरंदर मिश्रा (विधायक, रायपुर उत्तर) |
| उपस्थित बैंक नेतृत्व | श्री अरुण मेदीरत्ता (ग्रुप हेड) एवं श्री प्रतीक शर्मा (ब्रांच बैंकिंग हेड, सेंट्रल इंडिया) |
| लक्षित लाभार्थी वर्ग | महिला स्व-सहायता समूह (SHG), किसान, युवा उद्यमी और छोटे व्यवसायी |
महिला स्व-सहायता समूहों और ग्रामीण उद्यमिता को ऋण संबल
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने रेखांकित किया कि छत्तीसगढ़ की ग्रामीण महिलाएं आज स्व-सहायता समूहों (SHGs) के माध्यम से विभिन्न आजीविका गतिविधियों, खाद्य प्रसंस्करण और स्थानीय व्यवसायों से जुड़कर तेजी से आत्मनिर्भर बन रही हैं:
- महिला सशक्तिकरण: यदि वाणिज्यिक बैंक इन महिला समूहों तक रियायती ऋण, डिजिटल वित्तीय साक्षरता और नियमित बैंकिंग सुविधाएं पहुँचाएं, तो महिला उद्यमिता को भारी संबल मिलेगा, जिससे पूरे गांव की आर्थिकी मजबूत होगी।
- युवाओं को स्वरोजगार: प्रदेश के युवाओं के नवोन्मेषी विचारों और उद्यमशीलता को वित्तीय सहयोग (Credit Linkage) से जोड़ने में बैंक प्राथमिक भागीदार बनें, ताकि स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन तेज हो सके।
- किसानों व छोटे व्यापारियों को पूंजी: कृषि सहायक गतिविधियों, पशुपालन और खुदरा व्यापार के विस्तार हेतु समय पर कार्यशील पूंजी (Working Capital) उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
वित्तीय साक्षरता और सुरक्षित डिजिटल लेन-देन पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि Rural Banking Expansion Chhattisgarh केवल भौतिक शाखाएं खोलने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसके साथ वित्तीय साक्षरता (Financial Literacy) का प्रसार अनिवार्य है:
- ग्रामीण और वनांचल के नागरिकों को डिजिटल बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग, सुरक्षित यूपीआई (UPI) लेन-देन, साइबर धोखाधड़ी से बचाव, नियमित बचत और बीमा उत्पादों के बारे में जागरूक किया जाए।
- बैंक केवल लाभ कमाने वाले वित्तीय संस्थान नहीं हैं, बल्कि वे आम जनता के सपनों और आर्थिक आकांक्षाओं को संसाधनों से जोड़ने वाली संवेदनशील कड़ी हैं।
‘विकसित छत्तीसगढ़’ की यात्रा में निजी बैंकों की सहभागिता
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि आज छत्तीसगढ़ औद्योगिक विस्तार, अधोसंरचना, कृषि और नई अर्थव्यवस्था के दौर में तेजी से आगे बढ़ रहा है। राज्य सरकार का लक्ष्य विकास के इन अवसरों का समान वितरण सुनिश्चित करना है। निजी क्षेत्र के अग्रणी बैंकों को सरकार के इस मिशन में सक्रिय भागीदार बनना होगा। उन्होंने विश्वास जताया कि एचडीएफसी बैंक अपने 25 वर्षों के समृद्ध अनुभव का उपयोग करते हुए बस्तर और सरगुजा के अंतिम छोर तक बैंकिंग क्रांति का विस्तार करेगा।
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CGPSC Static Facts: वित्तीय समावेशन, SLBC एवं बैंकिंग संरचना (100% प्रामाणिक तथ्य)
प्रतियोगी परीक्षाओं (CGPSC राज्य सेवा परीक्षा Paper-5 भारत एवं छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था तथा Paper-2 लोक प्रशासन) के लिए मानक तथ्य:
- राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (SLBC – State Level Bankers’ Committee):
- “राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (SLBC) का गठन RBI द्वारा अप्रैल 1977 में सभी राज्यों के लिए किया गया। छत्तीसगढ़ में SLBC की पहली बैठक 26 मार्च 2001 को हुई और State Bank of India (SBI) Convenor Bank की भूमिका निभाता है।
- प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्रक ऋण (Priority Sector Lending – PSL):
- आरबीआई (RBI) के दिशा-निर्देशों के अनुसार, सभी घरेलू अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों को अपने समायोजित निवल बैंक ऋण (ANBC) का न्यूनतम 40% कृषि, सूक्ष्म-लघु-मध्यम उद्यमों (MSME), शिक्षा, आवास और कमजोर वर्गों को ऋण के रूप में देना अनिवार्य है।
- बिजनेस कॉरेस्पॉन्डेंट (BC) / ‘बैंक सखी’ मॉडल:
- जहाँ बैंक शाखाएं खोलना आर्थिक रूप से व्यवहार्य नहीं होता, वहाँ आरबीआई द्वारा अधिकृत बिजनेस कॉरेस्पॉन्डेंट्स (बैंक मित्र) और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के तहत ‘बैंक सखी’ के माध्यम से बायोमेट्रिक आधार-सक्षम भुगतान प्रणाली (AePS) द्वारा घर-घर बैंकिंग सेवाएं दी जाती हैं।
- संवैधानिक नीति-निदेशक तत्व (DPSP):
- अनुच्छेद 38 एवं 39(b): राज्य ऐसी आर्थिक व्यवस्था का निर्माण करेगा जिससे भौतिक संसाधनों और साख (Credit) का स्वामित्व एवं नियंत्रण इस प्रकार बंटे जिससे सामूहिक हित का सर्वोत्तम साधन हो सके।
विश्लेषण: वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का सुदृढ़ीकरण
(UPSC/CGPSC Mains Analysis – Economy, Inclusive Growth & Governance)
1. ‘लेन-देन लागत’ (Transaction Cost) में कमी और अनौपचारिक ऋणजाल से मुक्ति: जब बस्तर और सरगुजा के दूरस्थ गांवों में बैंकिंग नेटवर्क नहीं होता, तो ग्रामीणों को महतारी वंदन, मनरेगा मजदूरी या किसान सम्मान निधि के ₹1,000-₹2,000 निकालने के लिए ₹200-₹300 का बस किराया और पूरा दिन खर्च करना पड़ता है। Rural Banking Expansion Chhattisgarh इस छिपी हुई लेन-देन लागत को समाप्त करता है। इसके अतिरिक्त, जब बैंकों से सहज साख उपलब्ध होती है, तो ग्रामीण सूदखोरों और साहूकारों के शोषणकारी ब्याज चक्र से मुक्त होते हैं।
2. महिला समूहों का सशक्तिकरण और स्थानीय पूंजी निर्माण (Capital Formation): मुख्यमंत्री का स्व-सहायता समूहों (SHGs) को बैंकिंग ऋण से जोड़ने का आह्वान ग्रामीण अर्थव्यवस्था में ‘मल्टीप्लायर इफेक्ट’ पैदा करता है। ग्रामीण महिलाएं ऋण लेकर इमली प्रसंस्करण, कोसा रेशम, महुआ मूल्यवर्धन और जैविक कृषि जैसे उद्यम शुरू करती हैं। बैंक खातों में जमा ग्रामीण बचत वापस उसी क्षेत्र में ऋण के रूप में पुनर्निवेशित (Reinvested) होती है, जिससे स्थानीय सकल मूल्यवर्धन (GVA) में वृद्धि होती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Q1. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने किन क्षेत्रों में विशेष रूप से बैंकिंग विस्तार का आह्वान किया?
मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से बस्तर और सरगुजा संभाग के ग्रामीण और दूरस्थ जनजातीय अंचलों में आधुनिक बैंकिंग नेटवर्क और शाखाओं के विस्तार का आह्वान किया।
Q2. मुख्यमंत्री निवास में किस निजी बैंक के 25 वर्ष पूर्ण होने पर विशेष लोगो का विमोचन किया गया?
छत्तीसगढ़ में अपनी सेवाओं के 25 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank) के विशेष स्मारक लोगो का विमोचन मुख्यमंत्री द्वारा किया गया।
Q3. इस मुलाकात के दौरान बैंक प्रबंधन और शासन के कौन-से प्रमुख प्रतिनिधि उपस्थित थे?
मुलाकात में रायपुर उत्तर के विधायक श्री पुरंदर मिश्रा, एचडीएफसी बैंक के ग्रुप हेड श्री अरुण मेदीरत्ता और सेंट्रल इंडिया के ब्रांच बैंकिंग हेड श्री प्रतीक शर्मा उपस्थित थे।
स्रोत (Source)
छत्तीसगढ़ जनसंपर्क विभाग (DPR Chhattisgarh) आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति, 16 सितंबर 2026.
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