State Single Nodal Agency Chhattisgarh: राज्य योजनाओं में लागू होगा S-SNA मॉडल, ‘एक योजना–एक बैंक खाता’ से रुकेगी निष्क्रिय राशि और ब्याज भार

State Single Nodal Agency Chhattisgarh State Single Nodal Agency Chhattisgarh

रायपुर, 16 सितम्बर 2026: छत्तीसगढ़ में सरकारी धन के प्रवाह को पारदर्शी, सुरक्षित, कुशल और परिणामोन्मुख बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक युगांतकारी वित्तीय सुधार लागू करने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आयोजित मंत्रिपरिषद् (कैबिनेट) की बैठक में राज्य-पोषित योजनाओं के लिए State Single Nodal Agency Chhattisgarh (S-SNA) मॉडल लागू करने के प्रस्ताव को औपचारिक मंजूरी प्रदान की गई है। इस नई व्यवस्था का मूल मंत्र ‘एक योजना–एक बैंक खाता’ और ‘जस्ट-इन-टाइम’ (Just-in-Time) भुगतान प्रणाली है।

नई व्यवस्था के तहत विभिन्न क्रियान्वयन एजेंसियों के अनेक बैंक खातों में अग्रिम सरकारी राशि जमा रखने की पुरानी व्यवस्था समाप्त हो जाएगी। अब प्रत्येक चिन्हित राज्य योजना के लिए केवल एक केंद्रीकृत ‘S-SNA मदर एकाउंट’ (Mother Account) होगा। योजनाओं की राशि आवश्यकता पड़ने पर ही जारी होगी और वास्तविक भुगतान के समय संबंधित जीरो बैलेंस सब्सिडियरी अकाउंट (Zero Balance Subsidiary Account – ZBSA) के माध्यम से सीधे वेंडर अथवा हितग्राही के बैंक खाते में डिजिटली अंतरित की जाएगी। इससे विभिन्न खातों में सरकारी धन अकारण निष्क्रिय (Idle) नहीं रहेगा और फ्लोट लगभग शून्य हो जाएगा।

वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी ने इस वित्तीय नवाचार को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि State Single Nodal Agency Chhattisgarh मॉडल राज्य के वित्तीय प्रबंधन को आधुनिक, तकनीक-सक्षम और जवाबदेह बनाएगा। इस मॉडल से विभागीय खातों में वर्षों से लावारिस पड़ी लगभग ₹530 करोड़ की निष्क्रिय राशि तथा भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के डीईएएफ (DEAF) खातों में फंसी करीब ₹100 करोड़ की राशि जैसी गंभीर समस्याओं पर प्रभावी अंकुश लगेगा। साथ ही, अनावश्यक बाजार ऋण लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी, जिससे राज्य पर ब्याज का भार और राजस्व घाटा दोनों नियंत्रित होंगे।

S-SNA वित्तीय मॉडल: मुख्य तथ्य (Quick Facts)विवरण
मॉडल का नामState Single Nodal Agency Chhattisgarh (S-SNA मॉडल)
स्वीकृतिमुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में राज्य मंत्रिपरिषद् द्वारा
कोर सिद्धांत‘एक योजना–एक बैंक खाता’ एवं जस्ट-इन-टाइम (Just-in-Time) फंड रिलीज
खाता संरचनाS-SNA Mother Account एवं Zero Balance Subsidiary Account (ZBSA)
पारदर्शिता तंत्रमेकर-चेकर (Maker-Checker) आधारित डिजिटल ऑडिट ट्रेल
अर्जित ब्याज का उपयोगसीधे ‘राज्य की संचित निधि’ (Consolidated Fund) में जमा
नियंत्रित निष्क्रिय राशिविभागीय खातों में ~₹530 करोड़ एवं RBI DEAF में ~₹100 करोड़
आलेख लेखकसुनील त्रिपाठी (सहायक संचालक, जनसंपर्क, रायपुर)

मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री का दृष्टिकोण: वित्तीय अनुशासन से सुशासन

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि सरकार का लक्ष्य योजनाओं के लिए उपलब्ध प्रत्येक रुपये का अधिकतम और प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करना है। State Single Nodal Agency Chhattisgarh मॉडल से सरकारी धन के प्रवाह में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी तथा योजनाओं के क्रियान्वयन की रियल-टाइम निगरानी संभव होगी। यह व्यवस्था वित्तीय अनुशासन को मजबूत करने के साथ सुशासन को और अधिक प्रभावी बनाएगी।

वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी ने इस बात को विस्तार से समझाते हुए कहा:

  • नकदी प्रबंधन में सुधार: जिस राशि की सरकार को आज आवश्यकता नहीं है, उसे पहले से अलग-अलग बैंक खातों में रखने के बजाय आवश्यकता के समय ही उपयोग में लाया जाए। इससे राज्य की नकदी प्रबंधन (Cash Management) क्षमता बेहतर होगी।
  • ब्याज भार में कमी: एक ओर सरकार को विकास योजनाओं के लिए बाजार से ऋण लेकर ब्याज चुकाना पड़ता है, वहीं दूसरी ओर अरबों रुपये बैंकों में निष्प्रयोज्य पड़े रहते हैं। S-SNA मॉडल इस विसंगति को समाप्त कर राज्य के राजस्व घाटे को कम करेगा।

केंद्र की SNA तर्ज पर फंड फ्लो: ई-कोष से सीधे हितग्राही तक

केंद्र प्रायोजित योजनाओं (CSS) में भारत सरकार द्वारा लागू Single Nodal Agency व्यवस्था के अनुरूप अब राज्य योजनाओं में फंड फ्लो की शुरुआत State Treasury / e-Kosh से S-SNA खाते तक होगी। इसके बाद क्रियान्वयन एजेंसियों को अग्रिम नकदी देने के स्थान पर केवल निर्धारित आहरण सीमा (Spending/Drawing Limit) दी जाएगी।

वास्तविक भुगतान के समय ही हितग्राही (DBT) या वेंडर (Non-DBT) के खाते में राशि जारी होगी। डिजिटल प्रणाली में Maker-Checker आधारित ऑडिट ट्रेल होने से गबन, अनधिकृत भुगतान और वित्तीय धोखाधड़ी की संभावनाएं पूरी तरह समाप्त हो जाएंगी।

निष्क्रिय राशि, महालेखाकार (AG) आपत्तियां और संचित निधि

State Single Nodal Agency Chhattisgarh मॉडल से प्रशासनिक और वित्तीय तंत्र में कई बड़े सुधार होंगे:

  1. निष्क्रिय खातों का समाधान: वर्तमान में विभागों के निष्क्रिय खातों में लगभग ₹530 करोड़ तथा आरबीआई के डीईएएफ (DEAF) खातों में लगभग ₹100 करोड़ फंसे हुए हैं, जिन्हें अब नियंत्रित और पुन: उपयोग किया जा सकेगा।
  2. अर्जित ब्याज संचित निधि में: S-SNA व्यवस्था में खातों में शेष राशि पर अर्जित ब्याज किसी एजेंसी के पास रहने के बजाय सीधे राज्य की संचित निधि में जमा होगा।
  3. ऑडिट आपत्तियों का निराकरण: आहरण एवं संवितरण अधिकारियों (DDO) के पास राशि जमा रहने की समस्या खत्म होगी। इससे महालेखाकार (Accountant General – AG) कार्यालय द्वारा उठाए जाने वाले ऑडिट पैरा, विलंबित उपयोगिता प्रमाण-पत्र (Utilization Certificates – UC) और मैन्युअल समाधान की झंझट दूर होगी।

छह चरणों में क्रियान्वयन और व्यवस्था का दायरा

मंत्रिपरिषद् के निर्देशानुसार इस मॉडल को छह प्रमुख चरणों में लागू किया जाएगा:

  • चरण 1: योजना की पहचान
  • चरण 2: वित्त विभाग से औपचारिक अनुमोदन
  • चरण 3: स्कीम कोड (Scheme Code) का आवंटन
  • चरण 4: ई-कोष (e-Kosh) मैपिंग
  • चरण 5: S-SNA मदर अकाउंट एवं ZBSA खाते खोलना
  • चरण 6: ट्रेजरी से S-SNA और क्रियान्वयन एजेंसी के जरिए हितग्राही/वेंडर को अंतिम भुगतान।

व्यवस्था का दायरा एवं अपवाद: यह व्यवस्था राज्य सरकार द्वारा वित्तपोषित चिन्हित योजनाओं (DBT और Non-DBT दोनों) तथा जिला, ब्लॉक, पंचायत और ग्राम स्तर की क्रियान्वयन एजेंसियों पर लागू होगी। हालांकि, PFMS-SNA / SPARSH के तहत आने वाली केंद्र प्रायोजित योजनाएं, सेंट्रल सेक्टर योजनाएं तथा ऐसी योजनाएं जहां DDO सीधे e-Kosh के माध्यम से भुगतान करते हैं, इस व्यवस्था के दायरे से बाहर रहेंगी।


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CGPSC Static Facts: लोक वित्त, संचित निधि एवं वित्तीय नियंत्रण (100% प्रामाणिक तथ्य)

प्रतियोगी परीक्षाओं (CGPSC राज्य सेवा परीक्षा Paper-5 भारत एवं छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था तथा Paper-2 लोक प्रशासन) के लिए मानक तथ्य:

  • राज्य की संचित निधि (Consolidated Fund of the State):
    • संवैधानिक प्रावधान: भारतीय संविधान के अनुच्छेद 266(1) के अंतर्गत स्थापित।
    • नियम: राज्य सरकार को प्राप्त होने वाले सभी राजस्व, ऋण और ब्याज इस निधि में जमा होते हैं। राज्य विधानसभा की विधायी स्वीकृति (विनियोग अधिनियम) के बिना इसमें से एक भी रुपया आहरित नहीं किया जा सकता।
  • पब्लिक फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम (PFMS) एवं केंद्र का SNA मॉडल:
    • केंद्रीय वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग द्वारा वर्ष 2021 में केंद्र प्रायोजित योजनाओं (CSS) के लिए Single Nodal Agency (SNA) अनिवार्य किया गया था, जिसकी तर्ज पर अब छत्तीसगढ़ ने S-SNA मॉडल अपनाया है।
  • आरबीआई का डीईएएफ फंड (DEAF – Depositor Education and Awareness Fund):
    • बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 26A (Banking Laws Amendment Act, 2012 द्वारा जोड़ी गई) के तहत आरबीआई द्वारा 2014 में स्थापित
  • भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) एवं AG कार्यालय:
    • अनुच्छेद 148 से 151 तक सीएजी के कर्तव्य और शक्तियां निर्धारित हैं। प्रत्येक राज्य में स्थित महालेखाकार (AG) कार्यालय राज्य के संचित निधि व्यय का लेखांकन और अंकेक्षण करता है।

विश्लेषण: राजकोषीय अनुशासन (Fiscal Discipline) और नकदी प्रबंधन

(UPSC/CGPSC Mains Analysis – Public Financial Management & Good Governance)

1. ‘कैश-पुश’ से ‘डिमांड-पुल’ आधारित नकदी प्रबंधन: पारंपरिक बजटिंग व्यवस्था में वित्तीय वर्ष के अंत में बजट लैप्स होने के डर से विभाग धड़ाधड़ राशि निकालकर अलग-अलग कमर्शियल बैंकों में डंप कर देते थे। State Single Nodal Agency Chhattisgarh मॉडल वित्तीय प्रणाली को ‘कैश-पुश’ (अग्रिम राशि भेजना) से बदलकर ‘डिमांड-पुल’ (वास्तविक मांग पर भुगतान) में रूपांतरित करता है। इससे राज्य सरकार को अपनी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए बाजार से महंगे ब्याज पर ‘अर्थोपाय अग्रिम’ (Ways and Means Advances – WMA) या बॉन्ड जारी नहीं करने पड़ेंगे, जिससे सीधे तौर पर राज्य का राजकोषीय घाटा कम होगा।

2. मेकर-चेकर डिजिटल ऑडिट और लीकेज-रहित सुशासन: सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार और गबन का सबसे बड़ा छिद्र अप्रयुक्त और असमीक्षित विभागीय बैंक खाते होते हैं। S-SNA प्रणाली में प्रत्येक आहरण पर डिजिटल ऑडिट ट्रेल (Digital Audit Trail) और रियल-टाइम ट्रेजरी लिंकेज होने से वित्तीय धोखाधड़ी की गुंजाइश शून्य हो जाती है। यह सार्वजनिक वित्त के उपयोग में पारदर्शिता और दक्षता (Value for Money) स्थापित करने वाला संरचनात्मक सुधार है।


अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1. State Single Nodal Agency Chhattisgarh (S-SNA) मॉडल क्या है?

यह राज्य-पोषित योजनाओं के लिए ‘एक योजना–एक बैंक खाता’ पर आधारित वित्तीय मॉडल है, जिसमें राशि अलग-अलग खातों में जमा रखने के बजाय S-SNA मदर अकाउंट से आवश्यकता पड़ने पर सीधे ZBSA के जरिए हितग्राही या वेंडर को दी जाती है।

Q2. S-SNA मॉडल से राज्य सरकार के किन वित्तीय नुकसानों पर नियंत्रण लगेगा?

इससे विभागीय निष्क्रिय खातों में फंसी ~₹530 करोड़ और RBI DEAF के ~₹100 करोड़ जैसी निष्क्रिय राशि पर नियंत्रण लगेगा, अनावश्यक बाजार ऋण नहीं लेना पड़ेगा और ब्याज भार कम होगा।

Q3. इस व्यवस्था के क्रियान्वयन के लिए कितने चरण निर्धारित किए गए हैं?

इसके क्रियान्वयन के लिए 6 चरण निर्धारित किए गए हैं—योजना पहचान, वित्त विभाग अनुमोदन, स्कीम कोड आवंटन, e-Kosh मैपिंग, S-SNA व ZBSA खाते खोलना और अंतिम भुगतान।

स्रोत (Source)

सुनील त्रिपाठी, सहायक संचालक जनसंपर्क, छत्तीसगढ़ जनसंपर्क विभाग (DPR Chhattisgarh) आधिकारिक विशेष लेख, 16 सितम्बर 2026.

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