प्रधानमंत्री जनजातीय विकास मिशन: जनजातीय वन अर्थव्यवस्था को मिला नया आयाम; 4,172 वन धन विकास केंद्र मंजूर, 12.48 लाख आदिवासी बने उद्यमी

प्रधानमंत्री जनजातीय विकास मिशन प्रधानमंत्री जनजातीय विकास मिशन

रायपुर | 20 अगस्त 2026


भारत की विशाल जनजातीय आबादी के आर्थिक सुदृढ़ीकरण, वन अधिकारों के संरक्षण और लघु वनोपज (MFP) के मूल्य संवर्धन को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री जनजातीय विकास मिशन (PMJVM) के अंतर्गत एक कड़ा ढांचागत बदलाव लाया गया है। आज 20 अगस्त 2026 को नई दिल्ली से जारी पत्र सूचना कार्यालय (PIB) की आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, भारत के लगभग 10.4 करोड़ अनुसूचित जनजातियों की आजीविका को सीधे बाजार और आधुनिक तकनीकों से जोड़ने के लिए यह मिशन एक अत्यंत प्रभावी माध्यम बनकर उभरा है।

ऐतिहासिक रूप से, सुदूर जंगलों में रहने वाले जनजातीय संग्राहक शहद, तेंदू पत्ता, महुआ, इमली, लाख और औषधीय जड़ी-बूटियों जैसी लघु वनोपजों को बिचौलियों के हाथों बेहद कम दामों में बेचने के लिए मजबूर थे। इस गंभीर विसंगति को दूर करने के लिए वर्ष 2021-22 में शुरू किया गया प्रधानमंत्री जनजातीय विकास मिशन अब उन्हें केवल वनोपज संग्राहक से बदलकर समुदाय-स्वामित्व वाले वन धन विकास केंद्रों (VDVKs) के माध्यम से ‘मूल्य-वर्धक उद्यमी’ (Value-adding Entrepreneurs) बना रहा है, जिससे जमीनी स्तर पर ग्रामीण आजीविका को नई ताकत मिली है।

महत्वपूर्ण संकेतकप्रधानमंत्री जनजातीय विकास मिशन (PMJVM) के मुख्य सांख्यिकीय आंकड़े व प्रगति
योजना का नामप्रधानमंत्री जनजातीय विकास मिशन (PMJVM – कार्यान्वयन)
संबद्ध केंद्रीय मंत्रालयजनजातीय कार्य मंत्रालय (Ministry of Tribal Affairs), भारत सरकार
स्वीकृत वन धन विकास केंद्र (VDVKs)कुल 4,172 वन धन विकास केंद्र स्वीकृत (2,911 वर्तमान में सक्रिय)
कुल सम्बद्ध जनजातीय हितग्राही12.48 लाख से अधिक आदिवासी सदस्य सीधे योजना से जुड़े
कुल संचयी बिक्री आंकड़े (31 जुलाई 2026)सक्रिय वन धन विकास केंद्रों के माध्यम से ₹168 करोड़ की कुल बिक्री दर्ज
न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) कवरेजकुल 87 लघु वनोपज (MFP) मदों के लिए एमएसपी निर्धारित
सरकारी खरीद रिकॉर्ड (2013-14 से अब तक)2,67,954 मीट्रिक टन वनोपज की ₹693.98 करोड़ की सीधी सरकारी खरीद

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प्रधानमंत्री जनजातीय विकास मिशन: लघु वनोपज (MFP) और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) का विधिक ढांचा

देश की वनाग्नि और जैव विविधता नीतियों को संरक्षित रखते हुए वन-निवास करने वाले आदिवासियों को उनकी आजीविका का कानूनी अधिकार देने में विधिक सुधारों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण रही है। ट्राइफेड (TRIFED) द्वारा संचालित प्रधानमंत्री जनजातीय विकास मिशन के तहत वर्तमान में कुल 87 लघु वनोपज मदों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) अधिसूचित किया गया है, जो बाजार के उतार-चढ़ाव से जनजातीय संग्राहकों की रक्षा करता है:

  • विधिक अधिकार प्रणालियां: वर्ष 2006 में अधिनियमित ‘वन अधिकार अधिनियम’ (Forest Rights Act 2006) स्पष्ट रूप से आदिवासियों को बांस, गोंद, मोम, लाख, कोकून और जड़ी-बूटियों जैसी लघु वनोपजों को सहेजने और बेचने का कानूनी अधिकार देता है। इसी तरह, पेसा अधिनियम 1996 (PESA Act 1996) के तहत ग्राम सभाओं को लघु वनोपज पर पूर्ण स्वामित्व अधिकार प्राप्त हैं।
  • ट्राइफेड (TRIFED) की नोडल भूमिका: बाजार की कीमतों की परवाह किए बिना भारतीय जनजातीय सहकारी विपणन विकास संघ (TRIFED) प्रांतीय सहकारी समितियों और निगमों के माध्यम से सीधे पूर्व-निर्धारित एमएसपी (MSP) पर इन उत्पादों की खरीद सुनिश्चित करता है, जिससे साहूकारों द्वारा होने वाले ऐतिहासिक आर्थिक शोषण का अंत हो गया है।

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वन धन विकास केंद्रों (VDVKs) का संगठनात्मक ढांचा और वित्तीय सहयोग

वन धन योजना (जिसकी शुरुआत 14 अप्रैल 2018 को हुई थी) इस मिशन का मुख्य आधार स्तंभ है। इसके अलावा, प्रधानमंत्री जनजातीय विकास मिशन के अंतर्गत जनजातीय संग्राहकों को स्वयं सहायता समूहों (SHGs) के रूप में संगठित करके वन धन विकास केंद्रों (VDVKs) का गठन किया गया है, जिसकी कड़ाई से निगरानी की जा रही है:

  • संगठनात्मक ढांचा: प्रत्येक वन धन विकास केंद्र (VDVK) में 15 स्वयं सहायता समूह (SHGs) शामिल होते हैं, जिनमें कुल मिलाकर लगभग 300 जनजातीय सदस्य होते हैं। इस विनियामक ढांचे के तहत यह अनिवार्य है कि कम से कम 60% सदस्य अनिवार्य रूप से अनुसूचित जनजाति (ST) समुदाय से हों।
  • तकनीकी और प्रसंस्करण सहायता: इन केंद्रों पर संग्राहकों को वैज्ञानिक कटाई, सुखाने, छंटनी, और पैकेजिंग उपकरणों की खरीद के लिए कार्यशील पूंजी (Working Capital) और प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है। इसके लिए राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति वित्त और विकास निगम (NSTFDC) और अन्य बैंकों के साथ सीधा ऋण संपर्क (Bank Linkage) कराया जाता है।
  • बाजार संपर्क और हाट बाजारों का आधुनिकीकरण: जनजातीय क्षेत्रों में स्थित 5,000 से अधिक स्थानीय हाट बाजारों को पक्के चबूतरों, पेयजल और डिजिटल तौल मशीनों से लैस कर आधुनिकीकृत किया जा रहा है, ताकि उत्पाद सीधे उपभोक्ताओं तक पहुँच सकें।

महिला सशक्तिकरण और प्रधानमंत्री जनजातीय विकास मिशन की सफलता की कहानी

चूंकि लघु वनोपजों के एकत्रीकरण और प्रसंस्करण का अधिकांश कार्य महिलाओं द्वारा किया जाता है, इसलिए यह मिशन सीधे तौर पर जनजातीय महिलाओं के वित्तीय सशक्तिकरण का सबसे बड़ा माध्यम बन चुका है। अरुणाचल प्रदेश के लेपाराडा जिले में स्थापित कड़ा महिला उद्यम यह दर्शाता है कि प्रधानमंत्री जनजातीय विकास मिशन केवल एक सरकारी योजना नहीं है, बल्कि जनजातीय महिलाओं की वित्तीय स्वायत्तता की नई रीढ़ है:

  • लेपाराडा का महिला गौरव एग्रो-उत्पाद: अक्टूबर 2021 में अरुणाचल के लेपाराडा जिले में 300 महिला स्वयं सहायता समूह सदस्यों के साथ स्थापित ‘न्यीगामाने, हो योरबे, मेदुमहागदुम वीडीवीके’ ने वनों और खेतों के उत्पादों का मूल्य संवर्धन कर बाजार में विशिष्ट स्थान बनाया है।
  • प्रमुख निर्मित और डिब्बाबंद उत्पाद: यह महिला-स्वामित्व वाला केंद्र स्थानीय स्तर पर पाई जाने वाली तीखी भूत जोलोकिया मिर्च से ‘किंग चिली अचार’, ‘बैम्बू शूट अचार’, शुद्ध हल्दी पाउडर, अदरक पाउडर, और अमरूद व अनानास के स्क्वैश व जैम तैयार करता है।
  • व्यावसायिक सफलता: वर्ष 2022-23 से अब तक इस महिला केंद्र ने ₹11 लाख से अधिक के उत्पादों की बिक्री की है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ये महिलाएँ यहाँ केवल मजदूर नहीं हैं, बल्कि वे इस ब्रांड की संयुक्त हिस्सेदार और मालिक (Co-owners) हैं, जो उन्हें सालों भर एक स्थायी आजीविका प्रदान करता है।

UPSC & CGPSC Civil Services Fact Box: PESA, FRA 2006 & TRIFED Structure

  • वन अधिकार अधिनियम, 2006 (Forest Rights Act): यह अधिनियम पारंपरिक रूप से वनों में रहने वाले अनुसूचित जनजातियों और अन्य पारंपरिक वन निवासियों के व्यक्तिगत और सामुदायिक वन अधिकारों (जैसे लघु वनोपज संग्रह का अधिकार) को मान्यता प्रदान करता है।
  • पेसा अधिनियम, 1996 (PESA Act): दिलीप सिंह भूरिया समिति की सिफारिशों पर लागू इस अधिनियम के तहत संविधान के ‘भाग IX’ के पंचायती राज प्रावधानों को अनुसूचित क्षेत्रों (पांचवीं अनुसूची के क्षेत्रों) तक विस्तारित किया गया। यह ग्राम सभाओं को लघु वनोपज पर मालिकाना हक प्रदान करता है।
  • ट्राइफेड (TRIFED): वर्ष 1987 में स्थापित ‘भारतीय जनजातीय सहकारी विपणन विकास संघ’ जनजातीय कार्य मंत्रालय के अधीन एक बहु-राज्य सहकारी समिति है, जो आदिवासियों के हस्तशिल्प और कृषि उत्पादों के विपणन का नोडल कार्य करती है।

UPSC & State PCS Mains Analysis: जनजातीय सुशासन, संसाधन अर्थशास्त्र और सतत विकास नीतियों का सामरिक महत्व

मुख्य परीक्षा के समाजशास्त्र, लोक नीति, जनजातीय कल्याण और संसाधन अर्थशास्त्र (Resource Economics) के दृष्टिकोण से प्रधानमंत्री जनजातीय विकास मिशन का यह सुव्यवस्थित ढांचा देश के सुदूरतम वनों में ‘सबका साथ, सबका विकास’ के आदर्शों को साकार करता है। भारतीय जनजातियों के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती उनके संसाधनों का बाहरी बिचौलियों द्वारा दोहन और आर्थिक अलगाव (Economic Alienation) रही है, जो कई बार अशांत क्षेत्रों में आंतरिक सुरक्षा संकटों को जन्म देती है।

इस चुनौती से निपटने के लिए, ‘वन धन विकास केंद्रों’ के माध्यम से जनजातीय संग्राहकों को उद्यमी बनाना ‘सहकारी संघवाद’ (Cooperative Federalism) और मूल्य संवर्धन (Value Addition) का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। जब स्थानीय स्तर पर ही भूत जोलोकिया मिर्च या बांस के अंकुरों का प्रसंस्करण किया जाता है, तो यह ‘असंगठित क्षेत्र’ के रोजगार को एक संगठित और टिकाऊ आकार प्रदान करता है, जिससे पलायन कम होता है। यह कड़ा कूटनीतिक सुधार सीधे तौर पर संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (SDG-1: शून्य गरीबी, SDG-5: लैंगिक समानता, SDG-8: सम्मानजनक कार्य और आर्थिक विकास, तथा SDG-15: भूमि पर जीवन) के समयबद्ध लक्ष्यों को पूरा करने में ‘विकसित भारत @ 2047’ के राष्ट्रीय लक्ष्यों को पूरा करने की सबसे मजबूत प्रशासनिक रीढ़ साबित होगा।


अभ्यास प्रश्न (Practice MCQs)

निम्नलिखित बहुविकल्पीय प्रश्नों के माध्यम से इस महत्वपूर्ण जनजातीय कल्याण योजना और संबंधित अधिनियमों पर अपनी समझ का परीक्षण करें:

प्रश्न 1: हाल ही में जारी आंकड़ों के अनुसार, प्रधानमंत्री जनजातीय विकास मिशन (PMJVM) के तहत वर्तमान में कुल कितने ‘वन धन विकास केंद्र’ (VDVKs) स्वीकृत किए जा चुके हैं, जो देश के 12.48 लाख से अधिक जनजातीय सदस्यों को लाभान्वित कर रहे हैं?

(A) 2,150 केंद्र
(B) 4,172 केंद्र (Total 4,172 VDVKs Sanctioned)
(C) 1,500 केंद्र
(D) 5,420 केंद्र

उत्तर: (B) 4,172 केंद्र (Total 4,172 VDVKs Sanctioned)
व्याख्या: प्रधानमंत्री जनजातीय विकास मिशन के तहत देश भर में कुल 4,172 वन धन विकास केंद्र स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें से 2,911 वर्तमान में पूरी तरह कार्यात्मक हैं और ₹168 करोड़ की बिक्री दर्ज कर चुके हैं।

प्रश्न 2: भारत के किस ऐतिहासिक अधिनियम के तहत लघु वनोपज (Minor Forest Produce – MFP) को ‘गैर-इमारती वनोपज’ के रूप में परिभाषित करते हुए जनजातियों को इसके संग्रहण और विक्रय का विधिक सामुदायिक अधिकार दिया गया है?

(A) वन संरक्षण अधिनियम, 1980
(B) अनुसूचित जनजाति और अन्य पारंपरिक वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम, 2006 (FRA 2006)
(C) वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972
(D) जैविक विविधता अधिनियम, 2002

उत्तर: (B) अनुसूचित जनजाति और अन्य पारंपरिक वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम, 2006 (FRA 2006)
व्याख्या: वन अधिकार अधिनियम, 2006 (FRA 2006) के तहत ही आदिवासियों और वन-निवासियों को लघु वनोपजों (बांस, लाख, मोम, शहद आदि) के संग्रहण और स्थानीय बाजार में व्यापार करने का वैधानिक अधिकार प्राप्त है।


Frequently Asked Questions (FAQs)

Q1. प्रधानमंत्री जनजातीय विकास मिशन क्या है और इसके क्रियान्वयन की नोडल एजेंसी कौन-सी है?

प्रधानमंत्री जनजातीय विकास मिशन (PMJVM) जनजातीय कार्य मंत्रालय के तहत संचालित एक महत्वाकांक्षी योजना है, जिसे जनजातीय सहकारी विपणन विकास संघ (TRIFED) के माध्यम से देश भर में क्रियान्वित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य लघु वनोपज के मूल्य संवर्धन और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के जरिए आदिवासियों की आय को बढ़ाना है।

Q2. ‘वन धन विकास केंद्र’ (VDVK) का संगठनात्मक ढांचा किस प्रकार काम करता है?

प्रत्येक वन धन विकास केंद्र (VDVK) में 15 जनजातीय स्वयं सहायता समूह (SHGs) शामिल होते हैं, जिनमें कुल मिलाकर लगभग 300 सदस्य होते हैं। इस केंद्र की विनियामक शर्त है कि इसमें कम से कम 60% सदस्य अनिवार्य रूप से अनुसूचित जनजाति (ST) समुदाय से होने चाहिए।

Q3. इस योजना के तहत लघु वनोपज (MFP) के लिए एमएसपी (MSP) की क्या व्यवस्था की गई है?

इस मिशन के अंतर्गत वर्तमान में 87 विशिष्ट लघु वनोपज मदों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) अधिसूचित किया गया है। बाजार की कीमतों में गिरावट होने पर भी ट्राईफेड (TRIFED) राज्य की नोडल एजेंसियों के माध्यम से सीधे पूर्व-निर्धारित एमएसपी पर इन उत्पादों की खरीद कर संग्राहकों को सुरक्षा प्रदान करता है।


तीन मुख्य निष्कर्ष (3 Key Takeaways)

  • संग्राहकों से बने उद्यमी: प्रधानमंत्री जनजातीय विकास मिशन के अंतर्गत देश भर के 12.48 लाख जनजातीय संग्राहकों को सीधे वन धन विकास केंद्रों (VDVKs) से जोड़ा गया है, जिससे बिचौलियों का अंत हो गया है और वे अब अपने उत्पादों के सह-मालिक बन गए हैं।
  • मजबूत विधिक सुरक्षा कवच: वन अधिकार अधिनियम 2006 और पेसा अधिनियम 1996 के तहत आदिवासियों को लघु वनोपज का मालिकाना हक देने के साथ ही कुल 87 उत्पादों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की विनियामक सुरक्षा प्रदान की गई है।
  • महिला केंद्रित आर्थिक सशक्तीकरण: प्रसंस्करण (Processing) और पैकेजिंग का अधिकांश कार्य महिलाओं के हाथ में होने से यह योजना दूरदराज के जंगलों में रहने वाली जनजातीय महिलाओं को सालों भर चलने वाली टिकाऊ गैर-कृषि आय प्रदान कर रही है।

UPSC & CGPSC Relevance (यूपीएससी और सीजीपीएससी प्रासंगिकता)

यह विषय मुख्य रूप से सीजीपीएससी मुख्य परीक्षा पेपर-5 (छत्तीसगढ़ और भारत का कृषि व वन भूगोल, लघु वनोपज मूल्य संवर्धन योजनाएं), पेपर-6 (छत्तीसगढ़ का सामाजिक परिदृश्य, जनजातीय कल्याण योजनाएं, पेसा और वन अधिकार नियम), तथा संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के सामान्य अध्ययन पेपर-2 (कमजोर वर्गों के लिए कल्याणकारी योजनाएं और उनका क्रियान्वयन, पेसा अधिनियम 1996, और वन अधिकार अधिनियम 2006) और सामान्य अध्ययन पेपर-3 (भारतीय कृषि, लघु वनोपज विपणन, ट्राईफेड की भूमिका, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग, और समावेशी विकास) के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण और प्रासंगिक समसामयिक नीति व सामाजिक-आर्थिक विषय है।

Official Source (आधिकारिक स्रोत)

यह लेख भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय, पत्र सूचना कार्यालय (PIB Delhi), जनजातीय सहकारी विपणन विकास संघ (TRIFED), और राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति वित्त और विकास निगम (NSTFDC) द्वारा 20 अगस्त 2026 को जारी किए गए आधिकारिक नीतिगत प्रतिवेदनों, प्रगति रिपोर्टों और सांख्यिकीय आंकड़ों पर आधारित है।

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