Sangeet Natak Akademi Awards 2026: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रदान किए राष्ट्रीय फेलोशिप और अकादमी पुरस्कार; बोलीं—”कलाकार भारत के सांस्कृतिक मानचित्र के रक्षक हैं”

Sangeet Natak Akademi Awards 2026 Sangeet Natak Akademi Awards 2026

Published on 13 August 2026 | By Ishan Verma, Editor, theexamhub.in


भारत की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत को सहेजने, कलात्मक शुचिता को बढ़ावा देने और देश के सर्वोत्कृष्ट कला साधकों को सम्मानित करने की दिशा में Sangeet Natak Akademi Awards 2026 अलंकरण समारोह का भव्य आयोजन आज विज्ञान भवन, नई दिल्ली में किया गया। आज 13 अगस्त 2026 को भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने वर्ष 2024 और 2025 के लिए चुने गए देश के 115 प्रतिष्ठित कलाकारों को राष्ट्रीय फेलोशिप (अकादमी रत्न) और संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार (अकादमी पुरस्कार) प्रदान किए।

समारोह को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि आज सम्मानित होने वाले प्रदर्शनकारी कलाकार सामूहिक रूप से भारत का एक जीवंत “सांस्कृतिक मानचित्र” (Cultural Map of India) प्रस्तुत करते हैं। यह एक ऐसा मानचित्र है जो इस मिट्टी की प्राचीन कहानियों, लोक धुनों, भाषाओं और बोलियों की स्मृतियों से बुना गया है, जिसे सदियों से हमारे पुरखों ने संजोया है।

महत्वपूर्ण संकेतकSangeet Natak Akademi Awards 2026 के प्रमुख तथ्य व कड़े संदेश
समारोह का नाम और तिथिराष्ट्रीय संगीत, नृत्य और नाटक अलंकरण समारोह – 13 अगस्त 2026
मुख्य पुरस्कार प्रदाताराष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू (विज्ञान भवन, नई दिल्ली)
सांस्कृतिक विरासत का संरक्षणलुप्तप्राय लोक कलाओं को बचाने के लिए शुरू हुआ ‘कला-दीक्षा’ (Kala-Diksha) कार्यक्रम
संवैधानिक और गुरु परंपरा विज़न“भारतीय प्रदर्शन कलाओं में गुरु ही सबसे महत्वपूर्ण ‘पुस्तक’ (Book) है”
हाशिए के कलाकारों को मुख्यधारालोक और जनजातीय कलाओं में सामूहिक चेतना और प्रकृति के प्रति प्रेम समाहित है
वैश्विक कूटनीतिक दृष्टिकोणसंगीत नाटक अकादमी को भारत की सांस्कृतिक ऊर्जा और ‘सॉफ्ट पावर’ (Soft Power) का मुख्य केंद्र माना गया
विजेताओं की कुल संख्या7 प्रतिष्ठित फेलो (अकादमी रत्न) और 108 अकादमी पुरस्कार विजेता (कुल 115)

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Table of Contents

Sangeet Natak Akademi Awards 2026: कला दीक्षा (Kala-Diksha) कार्यक्रम और विरासत का दस्तावेजीकरण

राष्ट्रपति ने वर्तमान में तेजी से बदलती जीवनशैली के कारण हमारी कई दुर्लभ लोक कलाओं और पारंपरिक प्रदर्शन विधाओं के विलुप्त होने के खतरे पर गहरी चिंता व्यक्त की:

  • ‘कला-दीक्षा’ (Kala-Diksha) पहल की सराहना: राष्ट्रपति ने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि संगीत नाटक अकादमी लुप्तप्राय लोक कलाओं के संरक्षण, प्रलेखन (Documentation) और उन्हें जीवित रखने के उद्देश्य से ‘कला-दीक्षा’ कार्यक्रम का संचालन कर रही है।
  • गुरु-शिष्य परंपरा (Guru-Shishya Parampara): राष्ट्रपति ने कहा कि भारतीय कलाओं में गुरु ही सबसे महत्वपूर्ण पुस्तक होता है। उन्होंने देश के सभी वयोवृद्ध और वरिष्ठ कला साधकों से आग्रह किया कि वे युवा पीढ़ी को अपनी कलात्मक विरासत व्यवस्थित रूप से हस्तांतरित करने के लिए सक्रिय प्रयास करें।
  • प्रकृति से गहरा जुड़ाव: हमारी लोक और जनजातीय कलाएं प्रकृति के साथ गहरे जुड़ाव और जीवन के प्रति अगाध उत्साह को दर्शाती हैं। भारतीय नृत्य, परिधान, संगीत और भोजन सब कुछ प्रकृति से प्रेरित हैं, जहाँ पक्षियों की चहचहाहट, झरनों की आवाज और बादलों के गरजने को सुरों में ढाला जाता है।

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भारतीय सॉफ्ट पावर (Soft Power) के रूप में संगीत नाटक अकादमी

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संगीत नाटक अकादमी को भारत की सांस्कृतिक ऊर्जा और वैश्विक ‘सॉफ्ट पावर’ का एक अत्यंत महत्वपूर्ण केंद्र बताया:

  • सामूहिक चेतना की अभिव्यक्ति: लोक और जनजातीय कलाओं में समाज की सामूहिक चेतना और स्मृतियां स्वतः अभिव्यक्त होती हैं, यही कारण है कि ये कलाएं भारत की वास्तविक सांस्कृतिक पहचान का आधार हैं।
  • वैश्विक समृद्धिकरण: राष्ट्रपति ने विश्वास व्यक्त किया कि अकादमी भविष्य में भी भारत की इस सांस्कृतिक और आध्यात्मिक ऊर्जा से पूरी दुनिया को समृद्ध करने में अग्रणी भूमिका निभाती रहेगी।

UPSC Prelims Fact Box: Sangeet Natak Akademi, Kala-Diksha & UNESCO ICH

  • संगीत नाटक अकादमी (SNA): भारत सरकार के तत्कालीन शिक्षा मंत्रालय द्वारा वर्ष 1952 में स्थापित स्वतंत्र और सर्वोच्च राष्ट्रीय प्रदर्शन कला अकादमी। इसका मुख्यालय रवींद्र भवन, नई दिल्ली में है।
  • कला-दीक्षा कार्यक्रम: संगीत नाटक अकादमी की एक अनूठी पहल, जिसका उद्देश्य देश के सुदूर अंचलों में विलुप्त हो रही मौखिक, जनजातीय और लोक कला विधाओं को ‘गुरु-शिष्य परंपरा’ के तहत प्रलेखित (Document) करना और नई पीढ़ी को प्रशिक्षित करना है।
  • यूनेस्को अमूर्त सांस्कृतिक विरासत (UNESCO ICH): इसके तहत उन अमूर्त प्रथाओं, मौखिक परंपराओं, प्रदर्शन कलाओं, सामाजिक रीति-रिवाजों और पारंपरिक शिल्प कौशलों को संरक्षित किया जाता है जो मानवता की अमूल्य धरोहर हैं (जैसे भारत का कालबेलिया नृत्य, छऊ नृत्य और संकीर्तन)।

UPSC & State PCS Mains Analysis: अमूर्त विरासत का दस्तावेजीकरण, सॉफ्ट पावर कूटनीति और कला-दीक्षा

मुख्य परीक्षा के दृष्टिकोण से Sangeet Natak Akademi Awards 2026 अलंकरण समारोह की घोषणाएं भारत की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, समावेशी सामाजिक विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा कूटनीति के सुदृढ़ीकरण को रेखांकित करती हैं।

राष्ट्रपति का यह वक्तव्य कि “कलाकार हमारी सामूहिक स्मृति के संरक्षक हैं”, लोक नीति (Public Policy) में कला के महत्व को स्पष्ट करता है। वैश्वीकरण और तीव्र शहरीकरण के इस दौर में, जब देश के सुदूर ग्रामीण अंचलों की पारंपरिक कलाएं (जैसे बस्तर के लोक वाद्य यंत्रों की धुनें या कनी बुनाई) लुप्तप्राय होने के कगार पर हैं, तब ‘कला-दीक्षा’ और ‘गुरु-शिष्य परंपरा’ का संस्थागत सुदृढ़ीकरण एक अनिवार्य विनियामक सुधार है। यह प्रणाली मौखिक ज्ञान के क्षरण को रोकती है।

इसके अतिरिक्त, राष्ट्रीय स्तर पर बस्तर बैंड के अनूप रंजन पांडेय और रायगढ़ कथक घराने के गुरु रामलाल बरेठ जैसे कलाकारों को सम्मानित करना ‘सांस्कृतिक लोकतंत्र’ (Cultural Democracy) की स्थापना को दर्शाता है, जहाँ हाशिए पर खड़े समाज की कलाओं को दिल्ली के विज्ञान भवन में वही सर्वोच्च स्थान मिलता है जो शास्त्रीय विधाओं को प्राप्त है। यह समावेशी कूटनीति समाज के विभिन्न स्तरों के बीच ‘पारस्परिक विश्वास’ और ‘सॉफ्ट पावर’ को मजबूत करती है, जो अंततः ‘विकास भी, विरासत भी’ के राष्ट्रीय दृष्टिकोण के तहत भारत को वैश्विक पटल पर एक सांस्कृतिक महाशक्ति के रूप में समयबद्ध तरीके से स्थापित करने की सबसे मजबूत प्रशासनिक और नैतिक रीढ़ साबित होगी।


अभ्यास प्रश्न (Practice MCQs)

निम्नलिखित बहुविकल्पीय प्रश्नों के माध्यम से इस समसामयिक और कलात्मक अलंकरण विषय पर अपने ज्ञान का परीक्षण करें:

प्रश्न 1: हाल ही में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा प्रदान किए गए Sangeet Natak Akademi Awards 2026 के दौरान, देश की लुप्तप्राय लोक कलाओं और पारंपरिक प्रदर्शन विधाओं के संरक्षण व दस्तावेजीकरण के लिए अकादमी के किस प्रमुख कार्यक्रम की सराहना की गई है?

(A) कला-दीक्षा कार्यक्रम (Kala-Diksha Programme)
(B) संस्कृति सेतु अभियान
(C) भारत माता वाहिनी योजना
(D) राष्ट्रीय धरोहर संवर्धन मिशन

उत्तर: (A) कला-दीक्षा कार्यक्रम (Kala-Diksha Programme)
व्याख्या: राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में संगीत नाटक अकादमी द्वारा संचालित ‘कला-दीक्षा’ कार्यक्रम की विशेष सराहना की, जिसका उद्देश्य लुप्तप्राय लोक कलाओं का प्रलेखन करना और गुरु-शिष्य परंपरा के माध्यम से नई पीढ़ी को प्रशिक्षित करना है।

प्रश्न 2: भारत के अमूर्त सांस्कृतिक संरक्षण के संदर्भ में, संयुक्त राष्ट्र की किस अंतरराष्ट्रीय संस्था द्वारा ‘अमूर्त सांस्कृतिक विरासत’ (Intangible Cultural Heritage) की सूची का नियमन और वैश्विक संरक्षण किया जाता है?

(A) यूएनडीपी (UNDP)
(B) यूनेस्को (UNESCO)
(C) यूनिसेफ (UNICEF)
(D) विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO)

उत्तर: (B) यूनेस्को (UNESCO)
व्याख्या: यूनेस्को (संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन) द्वारा वैश्विक स्तर पर मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत (जैसे योग, कुंभ मेला, छऊ नृत्य) की सूची जारी की जाती है और उनके संरक्षण का नियमन किया जाता है।


Frequently Asked Questions (FAQs)

Q1. Sangeet Natak Akademi Awards 2026 अलंकरण समारोह में राष्ट्रपति ने कलाकारों को किस रूप में परिभाषित किया है?

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने विजेताओं को बधाई देते हुए कहा कि हमारे कलाकार केवल प्रदर्शनकर्ता नहीं हैं, बल्कि वे भारतीय परंपरा के सच्चे संवाहक, हमारी सामूहिक स्मृति के संरक्षक (Guardians of our collective memory) और भविष्य के हमारे दृष्टिकोण के निर्माता हैं।

Q2. राष्ट्रपति के भाषण में संगीत नाटक अकादमी को देश के लिए किस महत्वपूर्ण रूप में रेखांकित किया गया है?

राष्ट्रपति ने संगीत नाटक अकादमी को भारत की सांस्कृतिक कूटनीति और वैश्विक ‘सॉफ्ट पावर’ (Soft Power) का एक अत्यंत महत्वपूर्ण केंद्र बताया, जो संपूर्ण विश्व को भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक ऊर्जा से समृद्ध करने में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।

Q3. इस अलंकरण समारोह में ‘गुरु-शिष्य परंपरा’ के बारे में राष्ट्रपति का क्या मुख्य विज़न रहा?

राष्ट्रपति ने गुरु-शिष्य परंपरा को भारतीय कलाओं की रीढ़ बताते हुए कहा कि हमारी प्रदर्शन कलाओं में गुरु ही सबसे महत्वपूर्ण ‘पुस्तक’ (Book) होता है, और आधुनिक समय में वरिष्ठ कलाकारों को नई पीढ़ी को अपनी कलात्मक विरासत हस्तांतरित करने के व्यवस्थित प्रयास करने चाहिए।


तीन मुख्य निष्कर्ष (3 Key Takeaways)

  • भारतीय सॉफ्ट पावर का मुख्य केंद्र: Sangeet Natak Akademi Awards 2026 के माध्यम से राष्ट्रपति ने इस बात पर जोर दिया कि अकादमी देश की सांस्कृतिक ऊर्जा और सॉफ्ट पावर की वैश्विक पहचान को मजबूत करने वाली सर्वोच्च संस्था है।
  • ‘कला-दीक्षा’ द्वारा लुप्तप्राय कलाओं का संरक्षण: तेजी से बदलते आधुनिक समय में लुप्त हो रही लोक और जनजातीय कलाओं के दस्तावेजीकरण और संरक्षण के लिए अकादमी के कला-दीक्षा कार्यक्रम को राष्ट्रीय प्राथमिकता दी गई है।
  • विविधता में एकता का सांस्कृतिक मानचित्र: देश के 115 सम्मानित कलाकार सामूहिक रूप से भारत का एक ऐसा सांस्कृतिक मानचित्र प्रस्तुत करते हैं, जो इस मिट्टी के सुरों, लोक-कथाओं, और प्रकृति के साथ हमारे गहरे आध्यात्मिक जुड़ाव से बुना गया है।

UPSC Relevance (यूपीएससी प्रासंगिकता)

यह विषय मुख्य रूप से संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के सामान्य अध्ययन पेपर-1 (भारतीय संस्कृति के विविध रूप—संगीत, नृत्य और पारंपरिक रंगमंच, लोक और जनजातीय कलाएं), सामान्य अध्ययन पेपर-2 (सांस्कृतिक और शैक्षणिक संस्थाएं, कमजोर वर्गों का आर्थिक संवर्धन) और राज्य लोक सेवा आयोगों (State PCS) के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण और अनिवार्य समसामयिक मुद्दा है।

Official Source (आधिकारिक स्रोत)

यह लेख भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय, संगीत नाटक अकादमी (SNA), राष्ट्रपति सचिवालय, और पत्र सूचना कार्यालय (PIB Delhi) द्वारा 13 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में आयोजित अलंकरण समारोह की आधिकारिक प्रेस समीक्षा और राष्ट्रपति के उद्बोधन पर आधारित है।

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