Published on 07 August 2026 | By Ishan Verma, Editor, theexamhub.in
राष्ट्रीय हथकरघा दिवस 2026 के पावन अवसर पर राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र (RBCC) में आयोजित भव्य समारोह में शिरकत की। इस गरिमामयी समारोह का आयोजन केंद्रीय कपड़ा मंत्रालय द्वारा भारत की समृद्ध हथकरघा विरासत को सम्मानित करने और देश के उत्कृष्ट बुनकरों के असाधारण योगदान को सराहने के लिए किया गया।
समारोह के दौरान राष्ट्रपति ने वर्ष 2025 के लिए प्रतिष्ठित ‘संत कबीर हथकरघा पुरस्कार’ और ‘राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार’ प्रदान किए। कार्यक्रम में केंद्रीय कपड़ा मंत्री श्री गिरिराज सिंह, कपड़ा राज्य मंत्री श्री पाबित्र मार्गेरिटा और विभाग की सचिव श्रीमती नीलम शमी राव सहित देश भर के प्रसिद्ध शिल्पकार और गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
| महत्वपूर्ण संकेतक | राष्ट्रीय हथकरघा दिवस 2026 समारोह के प्रमुख तथ्य व आंकड़े |
|---|---|
| आयोजन की तिथि और स्थान | 7 अगस्त 2026, राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र (RBCC), नई दिल्ली |
| मुख्य अतिथि | राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू |
| प्रदान किए गए कुल पुरस्कार (2025) | 3 संत कबीर हथकरघा पुरस्कार और 19 राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार |
| विशिष्ट डाक टिकट विमोचन | भारतीय हथकरघा बुनाई (Handloom Weaves) पर 4 स्मारक डाक टिकट जारी |
| विमोचित आधिकारिक पुस्तक | ‘अर्थ. रूट. थ्रेड – आल डाइड हथकरघा वस्त्र’ (Aal Dyed Textiles of Central India) |
| ऐतिहासिक पृष्ठभूमि | 7 अगस्त 1905 को कोलकाता से शुरू हुआ स्वदेशी आंदोलन |
| कौशलात्मक प्रदर्शन (Live Demo) | पारंपरिक कनी बुनाई (Kani Weaving) और वॉल हैंगिंग बुनाई का जीवंत प्रदर्शन |
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राष्ट्रीय हथकरघा दिवस का इतिहास और स्वदेशी आंदोलन
प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए इस दिवस के ऐतिहासिक संदर्भ को समझना अत्यंत आवश्यक है। प्रत्येक वर्ष 7 अगस्त को राष्ट्रीय स्तर पर हथकरघा दिवस मनाया जाता है:
- 1905 का स्वदेशी आंदोलन: ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ 7 अगस्त 1905 को कलकत्ता (अब कोलकाता) के टाउन हॉल में एक विशाल जनसभा में ‘स्वदेशी आंदोलन’ की औपचारिक घोषणा की गई थी। इस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार करना और घरेलू भारतीय उद्योगों, विशेष रूप से हथकरघा बुनकरों को बढ़ावा देना था।
- दिवस की घोषणा: भारत सरकार ने स्वदेशी आंदोलन की इस ऐतिहासिक कल्पवृक्ष याद में वर्ष 2015 में प्रत्येक वर्ष 7 अगस्त को ‘राष्ट्रीय हथकरघा दिवस’ के रूप में मनाने की घोषणा की थी। वर्ष 2026 में देश अपना 12वां राष्ट्रीय हथकरघा दिवस मना रहा है।
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संत कबीर और राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार 2025
राष्ट्रपति भवन में आयोजित इस गरिमामयी समारोह में देश के उन सर्वोच्च बुनकरों को सम्मानित किया गया जिन्होंने भारत की लुप्त होती पारंपरिक बुनाई शैलियों को जीवित रखा है:
- 3 संत कबीर और 19 राष्ट्रीय पुरस्कार: राष्ट्रपति द्वारा कुल 3 शिल्पकारों को ‘संत कबीर हथकरघा पुरस्कार’ और 19 उत्कृष्ट बुनकरों को ‘राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार 2025’ से अलंकृत किया गया। यह पुरस्कार उनके द्वारा किए गए तकनीकी नवाचारों और अद्वितीय डिजाइनिंग कौशल का राष्ट्रीय सम्मान है।
- चार स्मारक डाक टिकट जारी: समारोह के दौरान भारतीय हथकरघा की बेजोड़ बुनाई शैलियों को सहेजने के लिए 4 नए खूबसूरत स्मारक डाक टिकट (Commemorative Postage Stamps) जारी किए गए।
- ‘आल’ डाइड टेक्सटाइल पुस्तक का विमोचन: मध्य भारत की अनूठी प्राकृतिक रंगाई परंपरा को प्रलेखित करने वाली पुस्तक ‘Earth. Root. Thread – Aal Dyed Handloom Textiles of Central India’ का विमोचन भी राष्ट्रपति द्वारा किया गया। यह पुस्तक मध्य भारत की ‘आल’ (Aal tree) की जड़ों से प्राप्त होने वाले प्राकृतिक रंगों के औषधीय और ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित करती है।
UPSC Prelims Fact Box: Swadeshi Movement 1905, Sant Kabir & Aal Dyeing
- स्वदेशी आंदोलन (1905): बंगाल विभाजन (लॉर्ड कर्जन के कार्यकाल) के विरोध में शुरू हुआ भारत का पहला जन-आंदोलन। इसके तहत कृष्ण कुमार मित्र के पत्र ‘संजीवनी’ में सबसे पहले विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार का सुझाव दिया गया था।
- आल रंगाई (Aal Dyeing): मध्य भारत (विशेषकर छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के जनजातीय क्षेत्रों) में उपयोग की जाने वाली प्राकृतिक रंगाई की एक अति-प्राचीन पद्धति। इसमें ‘आल’ या इंडियन मलबेरी (Morinda citrifolia) के पेड़ की जड़ों से लाल और कत्थई रंग तैयार किया जाता है, जो पूरी तरह से इको-फ्रेंडली और जैव-अनुकूल होता है।
- कनी बुनाई (Kani Weaving): कश्मीर की एक विश्वप्रसिद्ध पारंपरिक शॉल बुनाई कला, जिसमें लकड़ी की छोटी सुइयों (जिन्हें कनी कहा जाता है) का उपयोग कर पश्मीना धागों से जटिल प्राकृतिक पैटर्नों का निर्माण किया जाता है।
UPSC & State PCS Mains Analysis: हथकरघा क्षेत्र का सतत विकास, डिजिटल समावेशन और आजीविका सुरक्षा
मुख्य परीक्षा के दृष्टिकोण से, भारत का हथकरघा क्षेत्र (Handloom Sector) देश की कृषि के बाद दूसरी सबसे बड़ी रोजगार प्रदाता प्रणाली है, जो ग्रामीण भारत, विशेष रूप से महिलाओं (कुल बुनकरों का लगभग 70% महिला कार्यबल है) के आर्थिक सशक्तिकरण की मुख्य रीढ़ है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने संबोधन में दो अत्यंत महत्वपूर्ण नीतिगत सुझावों को रेखांकित किया। पहला, तकनीकी एकीकरण (Technology Integration): हथकरघा का अर्थ केवल पुरानी तकनीकों से बंधे रहना नहीं है। यदि इस क्षेत्र को टिकाऊ (Sustainable) बनाना है, तो डिजाइनिंग और बुनाई में आधुनिक अर्ध-स्वचालित उपकरणों का समावेश करना होगा ताकि बुनकरों के शारीरिक श्रम को कम किया जा सके और उत्पादन क्षमता बढ़ाई जा सके।
दूसरा, डिजिटल बाजार पहुंच (Digital Market Access): हथकरघा बुनकरों के सामने सबसे बड़ी चुनौती बिचौलियों (Middlemen) द्वारा किया जाने वाला आर्थिक शोषण है। ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म, ओएनडीसी (ONDC) जैसी सरकारी पहलों और डिजिटल कूटनीति के माध्यम से बुनकरों को सीधे शहरी और वैश्विक उपभोक्ताओं से जोड़ना (Direct-to-Consumer Model) आवश्यक है।
इसके अतिरिक्त, ‘आल’ (Aal Dyeing) जैसी जैविक और प्राकृतिक रंगाई पद्धतियों को बढ़ावा देना वैश्विक ‘सस्टेनेबल फैशन’ (Sustainable Fashion) के अनुकूल है। आधुनिक समय में जब दुनिया रासायनिक रंगों के प्रदूषण से जूझ रही है, भारत की ये पारंपरिक और कार्बन-तटस्थ (Carbon-neutral) तकनीकें देश के ‘ग्रीन गवर्नेंस’ (Green Governance) और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को विश्व मंच पर स्थापित करने की सबसे मजबूत प्रशासनिक रीढ़ साबित होंगी।
अभ्यास प्रश्न (Practice MCQs)
निम्नलिखित बहुविकल्पीय प्रश्नों के माध्यम से इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय और संवैधानिक विषय पर अपने ज्ञान का परीक्षण करें:
प्रश्न 1: प्रतिवर्ष 7 अगस्त को मनाए जाने वाले ‘राष्ट्रीय हथकरघा दिवस’ का ऐतिहासिक संबंध निम्नलिखित में से किस भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन से है?
(A) असहयोग आंदोलन (Non-Cooperation Movement), 1920
(B) सविनय अवज्ञा आंदोलन, 1930
(C) स्वदेशी आंदोलन (Swadeshi Movement), 1905
(D) भारत छोड़ो आंदोलन, 1942
उत्तर: (C) स्वदेशी आंदोलन (Swadeshi Movement), 1905
व्याख्या: 7 अगस्त 1905 को कलकत्ता के टाउन हॉल में स्वदेशी आंदोलन की औपचारिक घोषणा की गई थी, जिसमें विदेशी वस्त्रों का बहिष्कार कर स्वदेशी हथकरघा को अपनाने का संकल्प लिया गया था। इसी की याद में 2015 से प्रत्येक वर्ष 7 अगस्त को राष्ट्रीय हथकरघा दिवस मनाया जाता है।
प्रश्न 2: हाल ही में राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर विमोचित पुस्तक ‘Earth. Root. Thread’ में मध्य भारत की प्रसिद्ध ‘आल’ रंगाई (Aal Dyeing) का उल्लेख किया गया है। यह प्राकृतिक रंग मुख्य रूप से किस स्रोत से प्राप्त किया जाता है?
(A) पलाश के फूलों के पत्तों से
(B) ‘आल’ (इंडियन मलबेरी) वृक्ष की जड़ों से
(C) नील (Indigo) के पौधों के पत्तों से
(D) हल्दी और कत्था के मिश्रण से
उत्तर: (B) ‘आल’ (इंडियन मलबेरी) वृक्ष की जड़ों से
व्याख्या: ‘आल रंगाई’ मध्य भारत की एक पारंपरिक जैविक पद्धति है, जिसमें ‘आल’ (Morinda citrifolia) के पेड़ की जड़ों से लाल और कत्थई रंग तैयार कर धागों को रंगा जाता है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
Q1. राष्ट्रीय हथकरघा दिवस 2026 की मुख्य विशेषताएं क्या रहीं और इसका आयोजन कहाँ किया गया था?
12वां राष्ट्रीय हथकरघा दिवस समारोह 7 अगस्त 2026 को राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र (RBCC), नई दिल्ली में आयोजित किया गया था। इस अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उत्कृष्ट बुनकरों को संत कबीर और राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार प्रदान किए तथा भारतीय बुनाई पर 4 नए स्मारक डाक टिकट जारी किए।
Q2. इस वर्ष के समारोह में कितने बुनकरों को संत कबीर और राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान किए गए?
राष्ट्रपति द्वारा देश की समृद्ध बुनाई परंपराओं को संरक्षित और पुनर्जीवित करने वाले असाधारण शिल्पकारों को वर्ष 2025 के लिए कुल 3 ‘संत कबीर हथकरघा पुरस्कार’ और 19 ‘राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार’ प्रदान किए गए।
Q3. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने हथकरघा क्षेत्र के सतत विकास के लिए क्या प्रमुख सुझाव दिए?
राष्ट्रपति ने सुझाव दिया कि हथकरघा उद्योग के संवर्धन के लिए आधुनिक डिजिटल और ई-कॉमर्स तकनीकों का उपयोग कर सीधे बाजार तक पहुंच (Market Access) बनानी होगी, तथा नई पीढ़ी के युवा उद्यमियों को सरकारी योजनाओं के माध्यम से कड़ा मार्गदर्शन (Hand-holding) देना होगा।
तीन मुख्य निष्कर्ष (3 Key Takeaways)
- ऐतिहासिक सेंचुरी का गौरव: राष्ट्रीय हथकरघा दिवस 2026 के अवसर पर देश के 22 शीर्ष बुनकरों को संत कबीर (3) और राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कारों (19) से अलंकृत कर देश के पारंपरिक कौशल को राष्ट्रीय सम्मान दिया गया है।
- डिजिटल और तकनीकी समावेशन की आवश्यकता: राष्ट्रपति ने हथकरघा क्षेत्र को आत्मनिर्भर और प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्मों और आधुनिक विनिर्माण तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा देने की कड़ी वकालत की है।
- सांस्कृतिक विरासत का दस्तावेज: भारतीय हथकरघा बुनाई पर 4 स्मारक डाक टिकटों और मध्य भारत की प्राचीन ‘आल’ प्राकृतिक रंगाई पद्धति पर आधारित आधिकारिक पुस्तक का विमोचन कला के ऐतिहासिक संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम है।
UPSC Relevance (यूपीएससी प्रासंगिकता)
यह विषय मुख्य रूप से संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के सामान्य अध्ययन पेपर-1 (भारतीय कला का इतिहास, आधुनिक इतिहास—स्वदेशी आंदोलन 1905, पारंपरिक कुटीर उद्योग), सामान्य अध्ययन पेपर-2 (कमजोर और संवेदनशील ग्रामीण वर्गों—बुनकरों व महिला कार्यबल के कल्याण के लिए सरकारी नीतियां), तथा सामान्य अध्ययन पेपर-3 (एमएसएमई का विकास, समावेशी विकास और कृषि-संबद्ध गैर-कृषि रोजगार) के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण और अनिवार्य समसामयिक मुद्दा है।
Official Source (आधिकारिक स्रोत)
यह लेख भारत सरकार के कपड़ा मंत्रालय, विकास आयुक्त (हथकरघा) कार्यालय, और पत्र सूचना कार्यालय (PIB Delhi) द्वारा 7 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की गरिमामयी उपस्थिति में आयोजित राष्ट्रीय हथकरघा दिवस समारोह की आधिकारिक रिपोर्ट पर आधारित है।