विशेष लेख: तिहारू भी जान गया है, क्या है सुराज; जनविश्वास और जनकल्याण की नई पहचान बना ‘सुशासन तिहार’

सुशासन तिहार सुशासन तिहार

रायपुर, 23 अगस्त। बस्तर का आयतु हो, सरगुजा जिले का तिहारू या फिर धमतरी जिले के आदिवासी बहुल नगरी अंचल के ईतवारी राम कमार—आज छत्तीसगढ़ का आम नागरिक प्रदेश के मुखिया श्री विष्णु देव साय के समक्ष पूरी बेबाकी से अपनी बात रख सकता है कि सरकारी उचित मूल्य की दुकान (PDS) से राशन व खाद्यान्न सामग्री सही समय पर और उचित दर पर मिल रही है या नहीं। सुशासन तिहार छत्तीसगढ़ शासन की एक संवेदनशील, पारदर्शी और लोक-केंद्रित पहल के रूप में उभरा है, जिसने शासन को जनता के द्वार तक पहुंचाकर ‘गुड गवर्नेंस’ (सुराज) को धरातल पर जीवंत कर दिया है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में गांव, गरीब, किसान और वंचित वर्ग की समस्याओं का मौके पर ही त्वरित समाधान करने के उद्देश्य से पूरे प्रदेश में 01 मई से 10 जून 2026 तक सुशासन तिहार का प्रभावी और सफल संचालन किया गया।


सुशासन तिहार: समाज के अंतिम व्यक्ति तक प्रशासन की सहज और सीधी पहुंच

सुशासन का वास्तविक अर्थ केवल लोकलुभावन योजनाओं की घोषणा करना नहीं, बल्कि प्रशासनिक तंत्र को इतना संवेदनशील और उत्तरदायी बनाना है कि विकास की किरणें समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक सहजता से पहुंचें। सुशासन तिहार इसी सोच का जीवंत उदाहरण है।

“सुशासन का मतलब है ऐसा शासन जो पूरी तरह जनता के प्रति जवाबदेह और पारदर्शी हो। जब तक सरकार अंतिम व्यक्ति के सुख-दुख में सीधे भागीदार नहीं बनती, तब तक सुराज की परिकल्पना अधूरी है।”

— छगन लाल लोन्हारे, संयुक्त संचालक, जनसंपर्क

अभियान के दौरान वैशाख-ज्येष्ठ की तपती दोपहरी में जब मुख्यमंत्री का हेलीकॉप्टर अचानक सुदूरवर्ती गांवों में उतरता, तो ग्रामीणों का कौतूहल देखते ही बनता था। मुखिया को अपने बीच पाकर ग्रामीणों ने चौपालों में बिना किसी झिझक के अपनी सार्वजनिक आवश्यकताएं रखीं, जिन्हें मुख्यमंत्री ने मौके पर ही तत्काल प्रशासनिक मंजूरी प्रदान की।

सुशासन तिहार
सुशासन तिहार

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33 जिलों, 146 ब्लॉकों और 19 हजार गांवों में पहुंचा प्रशासनिक अमला

सुशासन तिहार को प्रभावी बनाने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में 15 से 20 ग्राम पंचायतों के समूह और शहरी क्षेत्रों में वार्ड क्लस्टर स्तर पर विशेष शिविरों का आयोजन किया गया:

  • व्यापक कवरेज: प्रदेश के सभी 33 जिलों के 146 विकासखंडों, 11 हजार 693 ग्राम पंचायतों और लगभग 19 हजार 820 गांवों तक अभियान पहुंचा।
  • पैदल भ्रमण व रात्रि विश्राम: विभिन्न विभागों के हजारों अधिकारियों और कर्मचारियों के दलों ने पैदल भ्रमण किया और गांवों में रात रुककर चौपालों के जरिए जनसमस्याओं और स्थानीय जरूरतों की जानकारी ली।
  • उच्च स्तरीय मॉनिटरिंग: मुख्यमंत्री, जिलों के प्रभारी मंत्रियों, प्रभारी सचिवों और त्रिस्तरीय पंचायती राज के निर्वाचित जनप्रतिनिधियों ने आकस्मिक दौरे कर योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन का मूल्यांकन किया।

मौके पर स्वीकृत हुईं जनसुविधाएं: हैंडपंप से लेकर बिजली विस्तार तक

ग्रामीण चौपालों में आम जनता द्वारा उठाई गई बुनियादी मांगों को मौके पर ही हल किया गया। इनमें प्रमुख रूप से:

  1. पेयजल हेतु नए हैंडपंपों की स्थापना एवं पेयजल स्रोतों की साफ-सफाई।
  2. तालाबों में पक्के घाट का निर्माण, सामुदायिक भवन और आंगनबाड़ी भवनों की स्वीकृति।
  3. पहुंचविहीन बस्तियों के लिए पहुंचमार्ग (सड़क) का निर्माण और नई विद्युत लाइनों का विस्तार।
  4. स्कूलों में शिक्षकों की नियमित उपस्थिति और बच्चों के मध्यान्ह भोजन (MDM) की गुणवत्ता की प्रत्यक्ष जांच।

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शासकीय योजनाओं, राशन, राजस्व एवं रोजगार कार्यों की सघन समीक्षा

सुशासन तिहार के दौरान शासन की फ्लैगशिप योजनाओं की गहन समीक्षा कर व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त किया गया:

  • राशन व खाद्य सुरक्षा: अंत्योदय अन्न योजना के तहत अनाज भंडारण और वितरण, मानसून पूर्व पहुंचविहीन क्षेत्रों में अग्रिम खाद्यान्न भंडारण तथा बीपीएल परिवारों को अमृत नमक वितरण की जांच।
  • मनरेगा व मजदूरी भुगतान: महात्मा गांधी नरेगा के तहत रोजगार मूलक कार्यों की प्रगति और श्रमिकों के मजदूरी भुगतान की समयबद्धता सुनिश्चित की गई।
  • राजस्व प्रकरणों का निराकरण: वर्षों से लंबित अविवादित नामांतरण, खाता बंटवारा और सीमांकन के मामलों का त्वरित निपटारा।
  • विद्युत एवं कृषि संवर्धन: ट्रांसफार्मरों और विद्युत लाइनों का रख-रखाव, कृषि पंपों का ऊर्जीकरण और एकल बत्ती कनेक्शनों की स्थिति की समीक्षा।
  • सामाजिक सुरक्षा व स्वास्थ्य: ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं, वृद्धावस्था पेंशन, निराश्रित पेंशन, सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों, सम्पूर्ण स्वच्छता अभियान तथा निर्मल ग्राम योजना की प्रगति की समीक्षा।

Official Source (आधिकारिक स्रोत): सुशासन तिहार पर केंद्रित यह विशेष लेख संयुक्त संचालक जनसंपर्क श्री छगन लाल लोन्हारे के आलेख तथा छत्तीसगढ़ जनसंपर्क विभाग (DPRCG) द्वारा 23 अगस्त 2026 को जारी आधिकारिक प्रतिवेदन पर आधारित है।

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