Sahakar Se Samriddhi Bastar: जगदलपुर में पहली बार राष्ट्रीय सहकारिता सम्मेलन शुरू; केंद्रीय सचिव ने दिया 2 लाख नए पैक्स का विजन

Sahakar Se Samriddhi Bastar Sahakar Se Samriddhi Bastar

रायपुर, 08 अक्टूबर: दशकों तक संघर्ष और नक्सल हिंसा के साए में रहे बस्तर की पावन धरा अब देश के आर्थिक पुनर्जागरण और सहकारिता क्रांति का केंद्र बन गई है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में भारत सरकार के सहकारिता मंत्रालय द्वारा आयोजित 9वीं दो दिवसीय राष्ट्रीय वर्कशॉप Sahakar Se Samriddhi Bastar (सहकार से समृद्धि बस्तर) का भव्य शुभारंभ जगदलपुर में हुआ। बस्तर के इतिहास में यह पहला अवसर है जब किसी केंद्रीय मंत्रालय ने इस स्तर का अखिल भारतीय विचार-मंथन यहाँ आयोजित किया है। सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए भारत सरकार के सहकारिता सचिव डॉ. आशीष कुमार भूटानी ने देश भर में 2 लाख नए बहुउद्देशीय पैक्स (PACS) के गठन, उनके डिजिटलीकरण और विश्व की सबसे बड़ी अनाज भंडारण योजना को दूरदराज के वनांचल तक पहुंचाने का रोडमैप रखा।

मुख्य बिंदु:

  • ‘Sahakar Se Samriddhi Bastar’: जगदलपुर में भारत सरकार के सहकारिता मंत्रालय का पहला राष्ट्रीय सम्मेलन शुरू।
  • असम से बस्तर की तुलना: केंद्रीय सचिव डॉ. आशीष भूटानी ने कहा—’जैसे असम में शांति के बाद विकास आया, वैसा ही बदलाव अब बस्तर में है।’
  • राष्ट्रीय एजेंडा: देश में 2 लाख नए पैक्स की स्थापना, कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) में रूपांतरण और माइक्रो-एटीएम से लैस करने पर जोर।
  • छत्तीसगढ़ की उपलब्धि: मुख्य सचिव विकास शील ने बताया—राज्य में 500 से अधिक नए पैक्स गठित; कोंडागांव मक्का व कवर्धा गन्ना एथेनॉल प्लांट मॉडल बने।

बस्तर में पहली बार राष्ट्रीय सम्मेलन: ‘असम जैसी शांति और विकास अब बस्तर में’

सम्मेलन को संबोधित करते हुए भारत सरकार के सहकारिता सचिव डॉ. आशीष कुमार भूटानी ने कहा कि सहकारिता आंदोलन की असली परीक्षा देश के सबसे पिछड़े, आकांक्षी और जनजातीय अंचलों के अंतिम व्यक्ति तक समृद्धि पहुंचाना है।

उन्होंने असम में बोडो शांति समझौते के बाद आए अभूतपूर्व आर्थिक बदलाव का उदाहरण देते हुए कहा कि आज बस्तर की धरती पर भी ठीक वैसा ही सकारात्मक परिवर्तन महसूस किया जा रहा है। सहकारिता के माध्यम से अब बस्तर के तेंदूपत्ता संग्राहकों, कोसा बुनकरों और वनोपज संग्राहक आदिवासियों को सीधे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ा जाएगा।

2 लाख नए बहुउद्देशीय पैक्स और विश्व की सबसे बड़ी अनाज भंडारण योजना

केंद्रीय सचिव ने देश के सहकारी तंत्र को पुनर्जीवित करने के लिए चार बड़े स्तंभों की कार्ययोजना साझा की:

  • देश भर में 2 लाख नए पैक्स: देश की हर उस ग्राम पंचायत में बहुउद्देशीय प्राथमिक कृषि साख समिति (PACS) बनेगी जहाँ अब तक सहकारी समितियां नहीं थीं।
  • माइक्रो-एटीएम और सीएससी मॉडल: पैक्स को केवल खाद-बीज बांटने तक सीमित न रखकर बैंकिंग (Micro-ATM), रेल टिकट बुकिंग, पैन कार्ड और सरकारी योजनाओं के कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) में बदला जा रहा है।
  • विकेंद्रीकृत अनाज भंडारण: नाबार्ड और एनसीडीसी के सहयोग से स्थानीय स्तर पर गोदाम बनाए जा रहे हैं ताकि किसानों को अपनी उपज औने-पौने दामों में न बेचनी पड़े।
  • इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और डेयरी: एनडीडीबी के सहयोग से पैक्स को डेयरी, मत्स्य पालन और ई-व्हीकल चार्जिंग स्टेशनों के व्यवसाय से भी जोड़ा जा रहा है।

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छत्तीसगढ़ में 500 से अधिक नए पैक्स: मक्का और गन्ना एथेनॉल संयंत्रों का मॉडल

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जुड़े छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव विकास शील ने बताया कि राज्य ने सहकारिता के विविधीकरण में देश के सामने उदाहरण पेश किया है:

छत्तीसगढ़ में अब तक 500 से अधिक नई बहुउद्देशीय पैक्स का गठन किया जा चुका है। समितियों को डिजिटल करने के साथ किसानों की उपज का मूल्य संवर्धन (Value Addition) किया जा रहा है। उन्होंने कोंडागांव में मक्का आधारित एथेनॉल संयंत्र और कवर्धा में गन्ना आधारित एथेनॉल संयंत्र का उल्लेख करते हुए बताया कि नेफेड (NAFED), एनसीसीएफ (NCCF) और भारतीय बीज सहकारी समिति (BBSSL) के साथ मिलकर स्थानीय उत्पादों की मजबूत सप्लाई चेन बनाई गई है।

15 दिन पहले जलमग्न था सभागार: बस्तर प्रशासन ने रिकॉर्ड समय में किया कायाकल्प

सत्र के शुभारंभ पर छत्तीसगढ़ के सहकारिता सचिव डॉ. सी. आर. प्रसन्ना ने बस्तर के जीवट और प्रशासन की कार्यकुशलता की प्रेरक कहानी साझा की। उन्होंने बताया कि मात्र 15 दिन पहले जगदलपुर में भारी मानसूनी जलभराव के कारण सम्मेलन का पूरा सभागार कई दिनों तक पानी में डूबा हुआ था।

कलेक्टर आकाश छिकारा और जिला प्रशासन की टीम ने इस प्राकृतिक आपदा को चुनौती माना और दिन-रात काम करके परिसर का कायाकल्प कर दिया, जिससे आज देश भर के प्रतिनिधि यहाँ बैठकर सहकारिता की नई नीति बना पा रहे हैं। सम्मेलन में तमिलनाडु की अतिरिक्त मुख्य सचिव पी. अमुधा ने भी अपने राज्य के 5-वर्षीय सहकारिता विजन डॉक्यूमेंट को साझा किया।

“सहकारिता आंदोलन की असली सार्थकता तब है जब इसका लाभ समाज के अंतिम छोर पर खड़े ग्रामीण और जनजातीय नागरिक तक पहुंचे। बस्तर में राष्ट्रीय सहकारिता सम्मेलन का आयोजन यह सिद्ध करता है कि यह क्षेत्र अब बंदूक नहीं, समृद्धि और स्वावलंबन के नए युग में प्रवेश कर चुका है। पैक्स का आधुनिकीकरण आदिवासियों की आजीविका को नई ऊंचाई देगा।”— डॉ. आशीष कुमार भूटानी (IAS), सचिव, सहकारिता मंत्रालय, भारत सरकार

बस्तर के किसानों और जनजातीय युवाओं के लिए इसके क्या मायने हैं?

  • गांव में ही बैंकिंग और सरकारी सेवाएं: पैक्स में माइक्रो-एटीएम और सीएससी आने से ग्रामीणों को पेंशन, छात्रवृत्ति और बैंकिंग के लिए 20-30 किलोमीटर दूर शहर जाने की जरूरत नहीं होगी।
  • वनोपज और फसलों का सही दाम: विकेंद्रीकृत भंडारण से महुआ, इमली, कोदो-कुटकी और मक्का उत्पादक किसानों को अपनी उपज सुरक्षित रखने और ऊंचे दाम पर बेचने की ताकत मिलेगी।
  • युवाओं के लिए नए रोजगार: सहकारी समितियों के डिजिटलीकरण और डेयरी-मत्स्य पालन विस्तार से स्थानीय युवाओं को समितियों में कंप्यूटर ऑपरेटर और प्रबंधक के रूप में काम मिलेगा।

राष्ट्रीय सहकारिता सम्मेलन जगदलपुर: एक नजर में

  • सम्मेलन का नाम: राष्ट्रीय ‘सहकार से समृद्धि’ वर्कशॉप (9वां संस्करण)
  • आयोजन स्थल: जगदलपुर, जिला बस्तर (छत्तीसगढ़)
  • आयोजक: सहकारिता मंत्रालय, भारत सरकार
  • मुख्य वक्ता: डॉ. आशीष कुमार भूटानी (केंद्रीय सहकारिता सचिव)
  • विशेष सहभागिता: विकास शील (मुख्य सचिव, छ.ग.), पी. अमुधा (अपर मुख्य सचिव, तमिलनाडु)
  • प्रशासनिक नेतृत्व: डॉ. सी.आर. प्रसन्ना (सचिव), डोमन सिंह (कमिश्नर), आकाश छिकारा (कलेक्टर)
  • मुख्य विषय: 2 लाख नए पैक्स, अनाज भंडारण योजना, प्राथमिक समितियों का डिजिटलीकरण

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

बस्तर के जगदलपुर में किस राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया है?

भारत सरकार के सहकारिता मंत्रालय द्वारा दो दिवसीय 9वीं राष्ट्रीय ‘सहकार से समृद्धि’ वर्कशॉप का आयोजन पहली बार जगदलपुर (बस्तर) में किया गया है।

केंद्रीय सहकारिता सचिव डॉ. आशीष भूटानी ने क्या प्रमुख घोषणाएं कीं?

उन्होंने देश भर में 2 लाख नए बहुउद्देशीय पैक्स (PACS) के गठन, उनके पूर्ण डिजिटलीकरण, कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) में रूपांतरण और विकेंद्रीकृत अनाज भंडारण योजना पर जोर दिया।

छत्तीसगढ़ में पैक्स (PACS) के गठन की क्या स्थिति है?

मुख्य सचिव विकास शील के अनुसार, छत्तीसगढ़ में 500 से अधिक नई बहुउद्देशीय प्राथमिक कृषि साख समितियों (PACS) का गठन हो चुका है और इन्हें माइक्रो-एटीएम से लैस किया गया है।

सम्मेलन में किन सफल औद्योगिक सहकारी मॉडल्स का उल्लेख किया गया?

सम्मेलन में छत्तीसगढ़ के कोंडागांव स्थित मक्का आधारित एथेनॉल संयंत्र और कवर्धा स्थित गन्ना आधारित एथेनॉल संयंत्र को सफल सहकारी मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया गया।

स्रोत (Source): सहकारिता मंत्रालय, भारत सरकार / जनसंपर्क विभाग, बस्तर (छत्तीसगढ़ शासन)

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