RAKSHAK Course Chhattisgarh: प्रदेश के 6 विश्वविद्यालयों में एक साथ शुरू हुआ ‘रक्षक’ पीजी डिप्लोमा, बाल अधिकारों के लिए तैयार होंगे विशेषज्ञ

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रायपुर, 01 अक्टूबर: बच्चों के अधिकारों के संरक्षण, संवर्धन और कानूनी सुरक्षा को अकादमिक स्तर पर मजबूत करने के लिए छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अनूठी पहल पर RAKSHAK Course Chhattisgarh की कक्षाएं राज्य के छह प्रमुख विश्वविद्यालयों में एक साथ प्रारंभ हो गईं। ‘पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स’ (PG Diploma in Protection of Child Rights – RAKSHAK) नामक इस नवाचारी पाठ्यक्रम के शुभारंभ पर आयोजित उच्चस्तरीय ऑनलाइन बैठक में उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा, महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े, आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा तथा छहों विश्वविद्यालयों के कुलपतियों ने सहभागिता की।

मुख्य बिंदु:

  • ‘RAKSHAK Course Chhattisgarh’: प्रदेश के 6 शासकीय व निजी विश्वविद्यालयों में पीजी डिप्लोमा इन चाइल्ड राइट्स की कक्षाएं एक साथ शुरू।
  • छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की पहल पर बाल कानूनों और बाल कल्याण हेतु तैयार होगा प्रशिक्षित कैडर।
  • उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा और महिला-बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने ऑनलाइन जुड़कर छात्रों को दी शुभकामनाएं।
  • पंडित रविशंकर शुक्ल, कुशाभाऊ ठाकरे, संत गहिरा गुरु, एमिटी, आंजनेय और शंकराचार्य विश्वविद्यालय में शुरू हुआ पाठ्यक्रम।

बाल अधिकार संरक्षण आयोग की ऐतिहासिक पहल: डॉ. वर्णिका शर्मा ने की अगुवाई

छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा के नेतृत्व में यह पाठ्यक्रम तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य समाज, प्रशासन और न्याय व्यवस्था के बीच ऐसे संवेदनशील और प्रशिक्षित पेशेवर तैयार करना है जो बच्चों से जुड़े मुद्दों पर विशेषज्ञता के साथ काम कर सकें।

शुभारंभ सत्र के दौरान विद्यार्थियों ने बाल अधिकारों, बाल श्रम रोकथाम, पॉक्सो (POCSO) एक्ट, दत्तक ग्रहण (Adoption) और किशोर न्याय प्रणाली से जुड़े व्यावहारिक सवाल पूछे। आयोग की अध्यक्ष और सचिव ने विद्यार्थियों के प्रश्नों के विस्तार से उत्तर देकर उनका मार्गदर्शन किया।

प्रदेश के इन 6 विश्वविद्यालयों में शुरू हुआ ‘रक्षक’ पाठ्यक्रम

राज्य के शासकीय और निजी विश्वविद्यालयों के आपसी समन्वय से यह पाठ्यक्रम एक साथ संचालित किया जा रहा है। इनमें शामिल संस्थान हैं:

  • पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर (PRSU)
  • कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, रायपुर (KTUJM)
  • संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय, सरगुजा/अंबिकापुर
  • एमिटी विश्वविद्यालय, रायपुर
  • आंजनेय विश्वविद्यालय, रायपुर
  • श्री शंकराचार्य प्रोफेशनल विश्वविद्यालय, भिलाई

सभी छह विश्वविद्यालयों के कुलपतियों ने बाल अधिकारों के संरक्षण और सुरक्षित भविष्य के निर्माण के लिए पाठ्यक्रम को उच्च शैक्षणिक गुणवत्ता के साथ संचालित करने की औपचारिक प्रतिबद्धता जताई।


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उच्च शिक्षा और महिला-बाल विकास मंत्रियों ने बढ़ाया उत्साह

उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा ने ऑनलाइन बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि विश्वविद्यालयों में केवल पारंपरिक शिक्षा ही नहीं, बल्कि समसामयिक सामाजिक चुनौतियों के समाधान से जुड़े पाठ्यक्रम संचालित होने चाहिए। बाल अधिकारों का संरक्षण समाज की नैतिक और संवैधानिक जिम्मेदारी है।

महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि बच्चों का सुरक्षित बचपन ही विकसित समाज की बुनियाद है। जब विश्वविद्यालय स्तर से प्रशिक्षित युवा निकलेंगे, तो वे बाल कल्याण समितियों (CWC), किशोर न्याय बोर्डों (JJB) और मैदानी स्तर पर बच्चों के अधिकारों की रक्षा अधिक प्रभावी ढंग से कर सकेंगे।

“‘रक्षक’ पाठ्यक्रम केवल एक डिप्लोमा डिग्री नहीं है, बल्कि बाल संरक्षण के क्षेत्र में संस्थागत स्तर पर संवेदनशील और कानूनी रूप से दक्ष मानव संसाधन तैयार करने का राष्ट्रव्यापी मॉडल है। हमारा ध्येय है कि प्रदेश के हर बच्चे को शोषण मुक्त, सुरक्षित और गरिमापूर्ण वातावरण मिले।”— डॉ. वर्णिका शर्मा, अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग

विद्यार्थियों और समाज के लिए इसके क्या मायने हैं?

  • करियर और रोजगार के नए अवसर: यह डिप्लोमा करने वाले छात्रों के लिए यूनिसेफ, चाइल्डलाइन, राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय एनजीओ, बाल संरक्षण आयोगों और समाज कल्याण विभागों में रोजगार के सीधे द्वार खुलेंगे।
  • कानूनी और प्रशासनिक दक्षता: जेजे एक्ट (Juvenile Justice Act), पॉक्सो एक्ट और आरटीई (RTE) जैसे जटिल बाल संरक्षण कानूनों की गहरी समझ युवाओं को बाल मामलों का विशेषज्ञ बनाएगी।
  • स्कूलों और अस्पतालों में काउंसलिंग सपोर्ट: प्रशिक्षित छात्र भविष्य में स्कूलों, हॉस्टलों और बाल गृहों में बाल परामर्शदाता (Child Counselor) के रूप में अपनी सेवाएं दे सकेंगे।

‘रक्षक’ (RAKSHAK) पाठ्यक्रम की मुख्य रूपरेखा

  • पाठ्यक्रम का नाम: पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स (रक्षक)
  • प्रणेता संस्था: छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग
  • सहभागी विश्वविद्यालय: 6 विश्वविद्यालय (शासकीय एवं निजी)
  • लक्ष्य: बाल अधिकारों के प्रति जागरूकता और प्रशिक्षित कानूनी-सामाजिक मानव संसाधन तैयार करना।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

RAKSHAK Course Chhattisgarh का पूरा नाम और उद्देश्य क्या है?

इसका पूरा नाम ‘पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स’ (रक्षक) है। इसका मुख्य उद्देश्य बाल अधिकारों के संरक्षण और संवर्धन के लिए प्रशिक्षित एवं संवेदनशील पेशेवर तैयार करना है।

छत्तीसगढ़ के किन विश्वविद्यालयों में यह पाठ्यक्रम शुरू किया गया है?

यह पंडित रविशंकर शुक्ल विवि, कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विवि, संत गहिरा गुरु विवि सरगुजा, एमिटी विवि, आंजनेय विवि और शंकराचार्य विवि भिलाई में एक साथ शुरू किया गया है।

इस पाठ्यक्रम की शुरुआत किस संस्था की पहल पर हुई है?

इस पाठ्यक्रम की शुरुआत छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की पहल पर आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा के नेतृत्व में की गई है।

स्रोत (Source): छत्तीसगढ़ जनसंपर्क विभाग (DPR Raipur / छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग)

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