रायपुर, 17 अक्टूबर: दिव्यांगजनों को केवल सरकारी सहायता या पेंशन पर निर्भर न रखकर उन्हें हुनरमंद बनाने और अपने पैरों पर खड़ा करने की दिशा में एक नई सामाजिक क्रांति शुरू हुई है। समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित Project Sambal Chhattisgarh (प्रोजेक्ट सम्बल छत्तीसगढ़) के अंतर्गत जिले के ग्राम पंचायत टोहे में आयोजित विशेष कार्यशाला में लगभग 50 दिव्यांगजनों को दैनिक उपयोग के कॉस्मेटिक उत्पाद, स्थानीय वनोपज महुआ से पौष्टिक खाद्य सामग्री और पापड़ तैयार करने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। इस अभिनव प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य विशेष आवश्यकता वाले व्यक्तियों की आंतरिक कार्यक्षमता को पहचानकर उन्हें स्थानीय स्तर पर उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों के मूल्य संवर्धन (Value Addition) से जोड़ना और गांव में ही उनका खुद का लघु उद्यम स्थापित कराना है।
मुख्य बिंदु (Key Highlights):
- ‘Project Sambal Chhattisgarh’: समाज कल्याण विभाग की पहल पर 50 दिव्यांगजनों को मिला हैंड्स-ऑन वोकेशनल प्रशिक्षण।
- चार गांवों की सहभागिता: ग्राम पंचायत टोहे, आश्रित ग्राम घोटिया, ग्राम पंचायत कहगांव और चौकी के दिव्यांग प्रतिभागियों ने लिया हिस्सा।
- कॉस्मेटिक उत्पाद निर्माण: प्रशिक्षक सुश्री हितेश्वरी निषाद ने सिखाया बॉडी लोशन, फेस वॉश और बॉडी वॉश बनाने का वैज्ञानिक तरीका।
- महुआ से खाद्य प्रसंस्कृत उत्पाद: प्रशिक्षक सुश्री मोनिका निषाद ने स्थानीय महुआ से स्वादिष्ट अचार, लड्डू और आलू पापड़ का दिया प्रशिक्षण।
- आधुनिक पैकेजिंग और ब्रांडिंग: उत्पादों को बाजार में प्रतिस्पर्धी दरों पर बेचने के लिए सील-पैकिंग और लेबलिंग की सिखाई गई तकनीक।
- स्वावलंबन और सम्मान: दिव्यांगजनों को पेंशनभोगी से बदलकर गांव का स्वाभिमानी ‘माइक्रो-एंटरप्रेन्योर’ (उद्यमी) बनाने का रोडमैप।
Project Sambal Chhattisgarh: ग्राम पंचायत टोहे में 50 दिव्यांगों को मिला व्यावहारिक प्रशिक्षण
मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले के ग्रामीण अंचल में आयोजित इस शिविर में दिव्यांगजनों का उत्साह देखते ही बनता था।
Project Sambal Chhattisgarh के तहत आयोजित इस प्रशिक्षण में ग्राम पंचायत टोहे के साथ-साथ उसके आश्रित गांव घोटिया, ग्राम पंचायत कहगांव और नगर पंचायत चौकी के 50 दिव्यांग युवक-युवतियों ने भाग लिया। समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों ने बताया कि अक्सर शारीरिक अक्षमता के कारण दिव्यांगजन खुद को समाज में उपेक्षित महसूस करते हैं। इस परियोजना का उद्देश्य उनके हाथों में ऐसा हुनर थमाना है जिससे वे अपने घर की चारदीवारी के भीतर ही सम्मानजनक आमदनी अर्जित कर सकें।
कॉस्मेटिक उत्पाद निर्माण: बॉडी लोशन, फेस वॉश और बॉडी वॉश बनाने के सीखे गुर
कार्यशाला के तकनीकी सत्र में प्रशिक्षक सुश्री हितेश्वरी निषाद ने प्रतिभागियों को दैनिक उपयोग में आने वाले कॉस्मेटिक उत्पादों के निर्माण की पूरी विधि सिखाई:
- फॉर्मूलेशन और सामग्री का अनुपात: प्रतिभागियों को रासायनिक सुरक्षा का ध्यान रखते हुए बॉडी लोशन, फेस वॉश और बॉडी वॉश में इस्तेमाल होने वाले सुरक्षित बेस और सुगंधित तत्वों के सही मिश्रण का अभ्यास कराया गया।
- कम लागत में घरेलू निर्माण: यह उत्पाद बेहद कम पूंजी में घर पर तैयार किए जा सकते हैं और स्थानीय ग्रामीण बाजारों तथा हाटों में इनकी भारी मांग रहती है।
स्थानीय महुआ का मूल्य संवर्धन: स्वादिष्ट अचार, लड्डू और आलू पापड़ का उत्पादन
छत्तीसगढ़ के जंगलों में प्रचुर मात्रा में मिलने वाला महुआ अब तक केवल पारंपरिक उपयोग तक सीमित था, लेकिन इस कार्यशाला में इसका पोषण और व्यावसायिक रूप सामने आया:
- महुआ खाद्य उत्पाद: प्रशिक्षक सुश्री मोनिका निषाद ने स्थानीय महुआ को साफ कर उसके औषधीय गुणों को संरक्षित रखते हुए महुआ का खट्टा-मीठा अचार और आयरन युक्त पौष्टिक लड्डू बनाने की रेसिपी और तकनीक सिखाई।
- आलू पापड़ निर्माण: इसके साथ ही बाजार की मांग के अनुरूप कुरकुरे और स्वच्छ आलू पापड़ तैयार करने का हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण दिया गया, जिसे दिव्यांगजन बहुत कम शारीरिक श्रम से बना सकते हैं।
आकर्षक पैकेजिंग और बाजार प्रबंधन: खुद का लघु उद्यम स्थापित करेंगे दिव्यांगजन
किसी भी उत्पाद की बिक्री में उसकी पैकेजिंग का सबसे बड़ा रोल होता है। कार्यशाला में केवल उत्पाद बनाना ही नहीं, बल्कि उन्हें आकर्षक तरीके से पैक करना भी सिखाया गया:
प्रतिभागियों को एयर-टाइट कंटेनरों, पाउच सीलिंग मशीनों, एक्सपायरी डेट लेबलिंग और आकर्षक स्टिकर्स लगाने का प्रशिक्षण दिया गया। समाज कल्याण विभाग इन दिव्यांगजनों द्वारा बनाए गए उत्पादों को महिला स्व-सहायता समूहों के सी-मार्ट (C-Mart) स्टोरों, स्थानीय प्रदर्शनियों और सरकारी विभागों के आपूर्ति नेटवर्क से जोड़ने में मदद करेगा, जिससे तैयार होते ही उनका माल सीधे बिक सके।
“दिव्यांगता शरीर की एक अवस्था हो सकती है, लेकिन वह किसी के सपनों और प्रतिभा की सीमा नहीं हो सकती। ‘प्रोजेक्ट सम्बल’ के जरिए हमने देखा कि कैसे हमारे दिव्यांग भाइयों और बहनों ने कुछ ही घंटों में लोशन और महुआ के बेहतरीन उत्पाद तैयार कर दिए। जब इन्हें सही पैकेजिंग और बाजार मिलेगा, तो ये किसी पर बोझ नहीं रहेंगे, बल्कि अपने परिवार के सबसे मजबूत आर्थिक संबल बनेंगे।”— समाज कल्याण विभाग एवं मास्टर ट्रेनर्स, जिला मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी
दिव्यांगजनों की आत्मनिर्भरता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए इसके क्या मायने हैं?
- परिवार और समाज में सम्मान: जब दिव्यांग व्यक्ति खुद कमाकर घर में पैसे लाता है, तो परिवार और गांव में उसका सामाजिक मान-सम्मान कई गुना बढ़ जाता है।
- स्थानीय वनोपज का सदुपयोग: महुआ को कच्चा बेचने के बजाय उसके लड्डू और अचार बनाकर बेचने से ग्रामीणों को प्रति किलो तीन गुना अधिक मुनाफा मिलता है।
- सामूहिक स्वावलंबन: टोहे, घोटिया और कहगांव के दिव्यांगजन अब आपस में समूह बनाकर सहकारी आधार पर छोटा घरेलू कारखाना शुरू कर सकते हैं।
प्रोजेक्ट सम्बल प्रशिक्षण कार्यक्रम: एक नजर में
- परियोजना का नाम: प्रोजेक्ट सम्बल (Project Sambal Chhattisgarh)
- संचालक विभाग: समाज कल्याण विभाग, छत्तीसगढ़ शासन
- प्रशिक्षण स्थल: ग्राम पंचायत टोहे, जिला मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी
- प्रतिभागियों की संख्या: 50 दिव्यांगजन
- शामिल गांव: टोहे, घोटिया, कहगांव एवं चौकी
- प्रशिक्षक: सुश्री हितेश्वरी निषाद (कॉस्मेटिक्स) एवं सुश्री मोनिका निषाद (खाद्य प्रसंस्करण)
- सिखाए गए उत्पाद: बॉडी लोशन, फेस वॉश, बॉडी वॉश, महुआ अचार, महुआ लड्डू एवं आलू पापड़
- मुख्य घटक: निर्माण विधि, हाइजीन, गुणवत्ता नियंत्रण, पैकेजिंग व मार्केट लिंकेज
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Project Sambal Chhattisgarh का मुख्य उद्देश्य क्या है?
Project Sambal Chhattisgarh का मुख्य उद्देश्य दिव्यांगजनों को स्थानीय संसाधनों पर आधारित उत्पादों के निर्माण, पैकेजिंग और मार्केटिंग का व्यावहारिक प्रशिक्षण देकर उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है।
यह प्रशिक्षण किस जिले में और कितने दिव्यांगजनों को दिया गया?
यह प्रशिक्षण मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले के ग्राम पंचायत टोहे में आयोजित किया गया, जिसमें चार गांवों के लगभग 50 दिव्यांगजनों ने भाग लिया।
कार्यशाला में किन-किन उत्पादों को बनाने का प्रशिक्षण दिया गया?
कार्यशाला में बॉडी लोशन, फेस वॉश, बॉडी वॉश जैसे कॉस्मेटिक उत्पाद तथा स्थानीय महुआ से पौष्टिक अचार, लड्डू और आलू पापड़ बनाने का प्रशिक्षण दिया गया।
दिव्यांगजनों को प्रशिक्षण किसने प्रदान किया?
प्रशिक्षक सुश्री हितेश्वरी निषाद ने कॉस्मेटिक उत्पाद निर्माण का और सुश्री मोनिका निषाद ने महुआ आधारित खाद्य सामग्री व पापड़ निर्माण का प्रशिक्षण दिया।
आधिकारिक स्रोत: समाज कल्याण विभाग / जिला प्रशासन मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी / जनसंपर्क विभाग (DPR Raipur), छत्तीसगढ़ शासन