रायपुर, 29 सितंबर: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मंत्रालय महानदी भवन में परिवहन विभाग के कामकाज की उच्चस्तरीय समीक्षा करते हुए प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं और मौतों को न्यूनतम करने के लिए ‘जीरो फेटेलिटी’ मिशन मोड पर काम करने के कड़े निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने सड़क हादसों में घायलों को तत्काल चिकित्सा उपलब्ध कराने के लिए ‘पीएम-राहत योजना’ के तहत 1.50 लाख रुपये तक त्वरित कैशलेस उपचार देने और मदद करने वाले नागरिकों को ‘राहवीर योजना’ से प्रोत्साहित करने पर जोर दिया। इसके साथ ही उन्होंने दूरदराज के वनांचलों तक ‘मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना’ का तेजी से विस्तार करने का आदेश दिया।
मुख्य बिंदु:
- ‘जीरो फेटेलिटी’ लक्ष्य के लिए परिवहन, पुलिस, स्वास्थ्य, लोक निर्माण और नगरीय निकाय मिलकर बनाएंगे साझा कार्ययोजना।
- ‘पीएम-राहत योजना’ के तहत सड़क दुर्घटना पीड़ितों को हादसे के 7 दिनों तक मिलेगा ₹1.50 लाख तक का मुफ्त कैशलेस इलाज।
- राज्य के 23 चिन्हित ‘ब्लैक स्पॉट’ पर सुधारात्मक इंजीनियरिंग कार्य तेज करने के निर्देश; मदद करने वालों के लिए ‘राहवीर योजना’।
- ‘मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना’ का होगा विस्तार; सुकमा के कोंटा-जगरगुंडा के बीच 6 घंटे का सफर घटकर हुआ 45 मिनट।
पीएम-राहत योजना: हादसे के बाद 7 दिन तक 1.50 लाख का मुफ्त इलाज
सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों का सबसे बड़ा कारण गोल्डन ऑवर (हादसे के तुरंत बाद का पहला घंटा) में इलाज न मिल पाना है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि आपात स्थिति में अस्पताल पहुंचने वाले घायलों से पैसों की मांग न की जाए।
‘पीएम-राहत योजना’ के तहत दुर्घटना की तारीख से अधिकतम 7 दिनों तक पात्र घायलों को सूचीबद्ध अस्पतालों में 1.50 लाख रुपये तक की कैशलेस इलाज की सुविधा अनिवार्य रूप से दी जाएगी। एंबुलेंस रिस्पॉन्स टाइम को घटाने के लिए पुलिस और स्वास्थ्य विभाग के बीच वायरलेस समन्वय पुख्ता किया जाएगा।
घायलों की जान बचाने वाले नागरिकों को ‘राहवीर योजना’ से प्रोत्साहन
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आम नागरिकों से अपील की कि वे सड़क पर किसी घायल को देखकर कानूनी पचड़ों या पुलिसिया पूछताछ के डर से कतराएं नहीं, बल्कि तुरंत मदद के लिए आगे आएं।
समय पर घायल को अस्पताल पहुंचाने वाले मददगार नागरिकों को ‘राहवीर योजना’ के तहत प्रोत्साहित किया जाएगा और उन्हें गुड सेमेरिटन (नेक नागरिक) नियमों के तहत पूर्ण कानूनी संरक्षण मिलेगा।
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मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा: वनांचलों में सुगम होगा सार्वजनिक परिवहन
समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने ग्रामीण और दुर्गम इलाकों में सार्वजनिक परिवहन की कमी पर संज्ञान लिया। वर्तमान में ‘मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना’ के तहत 13 जिलों के 106 मार्गों पर 107 बसें संचालित हो रही हैं।
मुख्यमंत्री ने इस सेवा का दायरा बढ़ाते हुए नए रूटों का सर्वे करने के निर्देश दिए। बैठक में अधिकारियों ने बताया कि सुकमा जिले के दुर्गम कोंटा से जगरगुंडा के बीच बस सेवा शुरू होने से जो सफर पहले पगडंडियों पर 6 घंटे में तय होता था, वह अब सुगम सड़क से मात्र 45 मिनट में पूरा हो रहा है।
ई-ट्रैक पर ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट और 23 ब्लैक स्पॉट पर सुधार
हादसों पर लगाम लगाने के लिए राज्य के 23 संवेदनशील ब्लैक स्पॉट्स पर सुधारात्मक सड़क इंजीनियरिंग का काम तेजी से पूरा कराया जा रहा है। वाहनों की तकनीकी स्थिति परखने के लिए ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन (ATS) स्थापित किए जा रहे हैं और 15 साल पुराने व्यावसायिक वाहनों की फिटनेस जांच सख्त की गई है।
ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाने के लिए सेंसर और कैमरों से लैस कंप्यूटराइज्ड ‘ई-ट्रैक’ प्रणाली का विस्तार किया जाएगा, जिससे केवल दक्ष चालकों को ही ड्राइविंग लाइसेंस मिल सके।
“हमारा लक्ष्य केवल हादसों के आंकड़े दर्ज करना नहीं, बल्कि हर अनमोल मानव जीवन को बचाना है। सड़क सुरक्षा किसी एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं है। परिवहन, पुलिस, स्वास्थ्य और पीडब्ल्यूडी मिशन मोड में काम करें। ग्रामीण इलाकों तक सुरक्षित बस सेवा और आपातकालीन चिकित्सा की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।”— विष्णु देव साय, मुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़
सड़क पर चलने वाले आम नागरिकों और मुसाफिरों के लिए इसके क्या मायने हैं?
- इलाज के अभाव में नहीं जाएगी जान: पीएम-राहत योजना के लागू होने से दुर्घटना के शिकार व्यक्ति को अस्पताल में दाखिले के समय पैसे जमा करने की चिंता नहीं रहेगी; सरकार 1.50 लाख तक खर्च उठाएगी।
- ग्रामीण अंचलों में सस्ता आवागमन: अंदरूनी गांवों में सरकारी बसें चलने से छात्रों, मरीजों और ग्रामीणों को मनमाने किराए और निजी वाहनों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
- ब्लैक स्पॉट सुधरने से सुरक्षित सफर: खतरनाक मोड़ों और दुर्घटना संभावित पुलियों पर संकेतक बोर्ड, लाइट और सुधार होने से राष्ट्रीय व राज्य राजमार्गों पर बड़े हादसों का खतरा घटेगा।
परिवहन समीक्षा बैठक के 5 बड़े फैसले
- कैशलेस स्वास्थ्य सुरक्षा: पीएम-राहत योजना में सड़क दुर्घटना पीड़ितों को 7 दिनों तक ₹1.5 लाख का मुफ्त इलाज।
- नेक नागरिकों का सम्मान: घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाने वालों को ‘राहवीर योजना’ के तहत प्रोत्साहन और सुरक्षा।
- सड़क सुधार: राज्य के 23 ब्लैक स्पॉट्स पर प्राथमिकता के साथ इंजीनियरिंग सुधार कार्य।
- ग्रामीण कनेक्टिविटी: 13 जिलों के अलावा शेष जिलों में भी मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना का विस्तार।
- पारदर्शी लाइसेंस प्रणाली: मानव हस्तक्षेप खत्म करने के लिए कंप्यूटराइज्ड ई-ट्रैक से ड्राइविंग टेस्ट।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
पीएम-राहत योजना के तहत सड़क दुर्घटना पीड़ितों को क्या सुविधा मिलती है?
इस योजना के तहत सड़क दुर्घटना में घायल पात्र व्यक्तियों को हादसे की तारीख से अधिकतम 7 दिनों तक संबद्ध अस्पतालों में 1.50 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज मिलता है।
‘राहवीर योजना’ का उद्देश्य क्या है?
‘राहवीर योजना’ सड़क हादसे में घायल व्यक्ति को समय पर अस्पताल पहुंचाने और उसकी जान बचाने में मदद करने वाले नागरिकों को पुरस्कृत और प्रोत्साहित करने के लिए बनाई गई है।
छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना का क्या लाभ मिल रहा है?
इसके तहत दूरदराज के वनांचल गांवों को शहरों से जोड़ा जा रहा है, जिससे घंटों का दुर्गम सफर मिनटों में सिमट गया है और ग्रामीणों को सुलभ आवागमन मिल रहा है।
स्रोत (Source): छत्तीसगढ़ जनसंपर्क विभाग (DPR Raipur / परिवहन विभाग)