नमो दीदी ड्रोन योजना: बिलासपुर की सीमा वर्मा बनीं ड्रोन दीदी — कीटनाशक-नैनो यूरिया छिड़काव से नई आय, मशरूम उत्पादन से भी आत्मनिर्भर

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रायपुर, 30 अगस्त 2026: बिलासपुर के मस्तुरी विकासखंड के ग्राम पोड़ी की सीमा वर्मा आज आत्मनिर्भरता की मिसाल बन रही हैं। ‘बिहान’ योजना से जुड़कर उन्होंने नमो दीदी ड्रोन योजना के तहत प्रशिक्षण प्राप्त किया और अब ड्रोन दीदी के रूप में खेतों में कीटनाशक, नैनो यूरिया और नैनो डीएपी का छिड़काव कर रही हैं। मशरूम उत्पादन से भी अतिरिक्त आय अर्जित कर रही हैं।

विवरणजानकारी
नामसीमा वर्मा
गांवपोड़ी, मस्तुरी विकासखंड, बिलासपुर
योजनाएंबिहान योजना + नमो दीदी ड्रोन योजना
कार्यड्रोन से कीटनाशक, नैनो यूरिया, नैनो डीएपी छिड़काव + मशरूम उत्पादन
लाभनई आय का स्रोत, आत्मनिर्भरता, बढ़ा आत्मविश्वास

सीमा वर्मा आसपास के किसानों के खेतों में ड्रोन से छिड़काव करती हैं। इससे किसानों को कम समय में छिड़काव की सुविधा मिल रही है और सीमा को भी अच्छी आय प्राप्त हो रही है। मशरूम उत्पादन से भी अतिरिक्त आमदनी अर्जित कर रही हैं। सीमा ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी एवं मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया है।


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विश्लेषण

(विश्लेषण)

पहला, कृषि में महिला तकनीकी भागीदारी। ड्रोन संचालन जैसे तकनीकी कार्य में ग्रामीण महिलाओं की भागीदारी — यह कृषि और महिला सशक्तिकरण दोनों के लिए एक सकारात्मक संकेत है।

दूसरा, बहुआयामी आजीविका मॉडल। ड्रोन छिड़काव + मशरूम उत्पादन — सीमा वर्मा का मॉडल दर्शाता है कि विविध आजीविका गतिविधियों से जुड़कर ग्रामीण महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकती हैं।

तीसरा, योजनाओं का जमीनी प्रभाव। बिहान योजना से जुड़ना, नमो दीदी ड्रोन योजना में प्रशिक्षण, और फिर स्वयं आय अर्जित करना — यह शासकीय योजनाओं के जमीनी प्रभाव का एक ठोस उदाहरण है।

CGPSC परीक्षा दृष्टि से प्रासंगिक

  • CGPSC Paper-2: सामाजिक न्याय — महिला सशक्तिकरण, ग्रामीण आजीविका
  • CGPSC Paper-2: कृषि — ड्रोन तकनीक, सटीक कृषि (Precision Agriculture)

तीन प्रमुख बातें

  • ड्रोन दीदी सीमा वर्मा: बिलासपुर, मस्तुरी की सीमा वर्मा — बिहान + नमो दीदी ड्रोन योजना से ड्रोन दीदी बनीं। कीटनाशक, नैनो यूरिया, नैनो डीएपी छिड़काव।
  • बहुआयामी आय: ड्रोन छिड़काव + मशरूम उत्पादन — दोनों से अतिरिक्त आय। परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार।
  • किसानों को भी लाभ: कम समय में खेतों में छिड़काव की सुविधा। आधुनिक कृषि तकनीक का ग्रामीण स्तर पर प्रसार।

स्रोत

छत्तीसगढ़ शासन, जनसंपर्क विभाग (DPRCG), 30 अगस्त 2026, रायपुर।

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