Published on July 8, 2026 | By Ishan Verma, Editor, theexamhub.in
छत्तीसगढ़ के नवगठित वनांचल जिले मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (MCB) में जल सुरक्षा, भू-जल संवर्धन और ग्रामीण आजीविका को एक सूत्र में पिरोने के लिए शुरू किया गया Mor Gaon Mor Pani Campaign Chhattisgarh एक बड़ी सफलता के रूप में उभर रहा है। ‘विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन ग्रामीण’ (मनरेगा के तहत) के अंतर्गत संचालित इस अभियान ने जल संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़कर विकास की एक नई परिभाषा लिखी है। इस अभियान के तहत जिले के सुदूर क्षेत्रों में जल संचयन के बड़े और प्रभावी प्रयास किए जा रहे हैं।
आधिकारिक रिपोर्टों के अनुसार, इस अभियान के तहत जिले में अब तक 350 से अधिक आजीविका डबरियों (कृषि तालाबों) और 150 से अधिक सामुदायिक तालाबों का निर्माण, गहरीकरण तथा जीर्णोद्धार किया गया है। यह अभिनव प्रयोग वर्षा जल को सहेजने के साथ-साथ स्थानीय आदिवासियों और सीमांत किसानों को स्वरोजगार प्रदान कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रहा है। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) और अन्य राज्य स्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए Mor Gaon Mor Pani Campaign Chhattisgarh पर्यावरण भूगोल, ग्रामीण विकास और जल संरक्षण नीतियों के तहत एक अत्यंत महत्वपूर्ण समसामयिक (Current Affairs) विषय है। इस विस्तृत लेख में हम इस अभियान के विभिन्न चरणों, इसके आर्थिक-भौगोलिक प्रभावों और परीक्षा उपयोगी प्रासंगिक विषयों का विश्लेषण करेंगे।
Mor Gaon Mor Pani Campaign Chhattisgarh: मुख्य बिंदु (Quick Highlights)
इस अनूठे जल संरक्षण अभियान से जुड़े महत्वपूर्ण डेटा और तथ्यों को नीचे दी गई तालिका के माध्यम से समझा जा सकता है:
| महत्वपूर्ण बिंदु | विवरण |
|---|---|
| अभियान का नाम | “मोर गांव मोर पानी” अभियान (Mor Gaon Mor Pani Campaign Chhattisgarh) |
| संबद्ध योजना/मिशन | विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन ग्रामीण (मनरेगा आधारित) |
| लक्ष्य जिला | मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (MCB), छत्तीसगढ़ |
| निर्मित आजीविका डबरियां | 350 डबरियां (छोटे खेत तालाब) |
| विकसित सामुदायिक तालाब | 150 से अधिक तालाब (निर्माण एवं गहरीकरण) |
| मुख्य उद्देश्य | वर्षा जल संचयन, भू-जल पुनर्भरण, फसल विविधीकरण, मत्स्य पालन और पशुपालन |
Mor Gaon Mor Pani Campaign Chhattisgarh क्या है?
छत्तीसगढ़ी बोली में “मोर गांव मोर पानी” का सीधा अर्थ है ‘मेरा गाँव मेरा पानी’। इस अभियान का मूल विज़न यह है कि गाँव में गिरने वाली बारिश की हर बूंद को गाँव की ही मिट्टी में सहेजा जाए ताकि जल संकट को समाप्त किया जा सके। Mor Gaon Mor Pani Campaign Chhattisgarh केवल सरकारी स्तर पर गड्ढे खोदने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह पारंपरिक जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने और बंजर या कम उपजाऊ ढलानी भूमि पर वर्षा जल को रोकने की एक वैज्ञानिक और समुदाय-नेतृत्व वाली पद्धति है।
मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (MCB) जिला मुख्य रूप से एक पहाड़ी और पठारी भौगोलिक संरचना वाला क्षेत्र है। यहाँ वर्षा ऋतु में पानी तेजी से बहकर निकल जाता है, जिसके कारण मानसून के तुरंत बाद जल स्तर गिरने लगता है और ग्रीष्मकाल में तीव्र जल संकट की स्थिति निर्मित हो जाती है। इस भौगोलिक बाधा को दूर करने के लिए जिला प्रशासन ने स्थानीय समुदायों के साथ मिलकर इस योजना की शुरुआत की है।
आजीविका डबरियां और Mor Gaon Mor Pani Campaign Chhattisgarh
इस अभियान का सबसे अनूठा और सफल पहलू है—’आजीविका डबरी’ (Livelihood Dabri) का निर्माण। छत्तीसगढ़ी लोक जीवन में ‘डबरी’ का अर्थ एक छोटे खेत तालाब (Farm Pond) से है, जो मुख्य रूप से ढलान वाले खेतों के निचले हिस्से में बनाई जाती है:
1. आजीविका डबरी की कार्यप्रणाली
जब मानसून के दौरान खेतों में वर्षा होती है, तो बहता हुआ अतिरिक्त पानी इन डबरियों में एकत्रित हो जाता है। यह रुकी हुई जलराशि धीरे-धीरे जमीन के भीतर रिसती है, जिससे आसपास के कुओं और नलकूपों का जल स्तर बढ़ जाता है।
2. बहुआयामी आजीविका के साधन
Mor Gaon Mor Pani Campaign Chhattisgarh के तहत निर्मित इन 350 डबरियों का उपयोग केवल पानी बचाने के लिए नहीं किया जा रहा है, बल्कि यह ग्रामीण परिवारों के लिए आय का एक सशक्त स्रोत बन गई हैं:
- मत्स्य पालन (Fisheries): किसान अपनी डबरियों में उन्नत किस्म की मछलियां पालकर अतिरिक्त आय अर्जित कर रहे हैं।
- सब्जी और उद्यानिकी (Vegetable & Horticulture): डबरी के चारों तरफ की मेढ़ों (Bunds) पर मौसमी सब्जियां और फलदार पौधे (जैसे पपीता, केला, नीबू) लगाए जा रहे हैं।
- पशुपालन (Animal Husbandry): मवेशियों के लिए पीने के पानी और चारे की व्यवस्था आसान हो गई है।
“जल संरक्षण ही भविष्य की जल सुरक्षा का आधार है। Mor Gaon Mor Pani Campaign Chhattisgarh न केवल जल स्तर को बढ़ा रहा है बल्कि ग्रामीण परिवारों को स्थानीय स्तर पर आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से सशक्त बना रहा है।”— जिला प्रशासन, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर
सामुदायिक तालाबों का गहरीकरण और जल संचयन क्षमता में वृद्धि
अभियान के अंतर्गत केवल व्यक्तिगत डबरियों पर ही ध्यान नहीं दिया गया है, बल्कि 150 से अधिक बड़े सामुदायिक तालाबों (Community Ponds) का जीर्णोद्धार और गहरीकरण (Desiltation) भी किया गया है:
- जल संचयन क्षमता का विस्तार: तालाबों के गहरीकरण से उनकी जल संचयन क्षमता में भारी वृद्धि हुई है, जिससे ग्रीष्म ऋतु में भी तालाब सूखे की चपेट में नहीं आते।
- फसल विविधीकरण (Crop Diversification): पर्याप्त जल उपलब्ध होने के कारण किसान अब केवल पारंपरिक धान की फसल पर निर्भर नहीं हैं। वे रबी सीजन में दलहन, तिलहन और गेहूं जैसी दूसरी फसलें भी ले पा रहे हैं।
- पर्यावरण का दीर्घकालिक संरक्षण: ये बड़े जल निकाय स्थानीय जैव विविधता (Biodiversity) को बनाए रखने और क्षेत्र के तापमान को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
जनभागीदारी और Mor Gaon Mor Pani Campaign Chhattisgarh
किसी भी सरकारी योजना की स्थायी सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि स्थानीय जनता उसके साथ कितना जुड़ाव महसूस करती है। Mor Gaon Mor Pani Campaign Chhattisgarh ने इसे केवल एक प्रशासनिक योजना न रखकर एक वास्तविक ‘जन आंदोलन’ (People’s Movement) का रूप दे दिया है:
- महिला स्व-सहायता समूहों (SHGs) की भूमिका: छत्तीसगढ़ के ‘बिहान’ (Bihan) योजना के तहत काम करने वाले महिला समूहों को इन जल संरचनाओं के रख-रखाव, मत्स्य बीज डालने और मेढ़ों पर सब्जी उगाने के कार्यों में सीधे जोड़ा गया है।
- ग्राम पंचायतों का स्वामित्व: ग्राम पंचायतों को इन तालाबों की स्वच्छता, सुरक्षा और वृक्षारोपण की देखरेख की जिम्मेदारी दी गई है।
- सामुदायिक रखरखाव: ग्रामीण स्वयं श्रमदान और सामूहिक सहयोग के माध्यम से इन संरचनाओं की नियमित सफाई और संरक्षण सुनिश्चित कर रहे हैं।
मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (MCB) जिले का भौगोलिक परिचय
कोरिया (Koriya) जिले से अलग होकर वर्ष 2022 में अस्तित्व में आया यह जिला छत्तीसगढ़ का एक नवगठित जिला है। यह जिला मध्य प्रदेश की सीमा से लगा हुआ है और पहाड़ी, जंगली तथा पठारी भूभाग से घिरा हुआ है। इस विषम भौगोलिक परिस्थिति के कारण यहाँ जल संरक्षण के लिए बड़े बांधों के स्थान पर छोटे, विकेंद्रीकृत तालाब और डबरियां बनाना ही सबसे व्यावहारिक वैज्ञानिक समाधान है, जिसे Mor Gaon Mor Pani Campaign Chhattisgarh के जरिए सफलतापूर्वक लागू किया गया है।
प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए विशेष विश्लेषण (Exam Relevance Section)
CGPSC राज्य सेवा परीक्षा और यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए इस अभियान के विभिन्न सामाजिक-आर्थिक और पर्यावरणीय आयामों को समझना महत्वपूर्ण है।
CGPSC Prelims Fact Box: Mor Gaon Mor Pani Campaign Chhattisgarh
- डबरी (Dabri): छत्तीसगढ़ की एक पारंपरिक कृषि जल संरचना, जो 1-2 एकड़ क्षेत्र के वर्षा जल को संचित करने के लिए बनाई जाती है।
- MCB जिला: मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिला छत्तीसगढ़ का नवगठित जिला है, जिसकी सीमा मध्य प्रदेश से लगती है।
- जल संवर्धन की अन्य छत्तीसगढ़ी योजनाएं: नरवा, गरवा, घुरवा, बारी (NGGB) योजना। ‘नरवा’ का अर्थ है नालों का उपचार (Rivulet Treatment), जो भू-जल स्तर बढ़ाने के लिए है।
UPSC & CGPSC Mains Analysis: जल सुरक्षा एवं ग्रामीण विकास
प्रश्न: “पहाड़ी और वनांचल क्षेत्रों में बड़े बांधों की तुलना में विकेंद्रीकृत, समुदाय-नेतृत्व वाले लघु जल संरक्षण प्रयास अधिक टिकाऊ और प्रभावी होते हैं।” छत्तीसगढ़ के ‘मोर गांव मोर पानी’ अभियान के विशेष संदर्भ में इस कथन का परीक्षण कीजिए।
उत्तर की रूपरेखा:
- प्रस्तावना: मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले में संचालित Mor Gaon Mor Pani Campaign Chhattisgarh का परिचय देते हुए लघु जल निकायों की प्रासंगिकता से उत्तर प्रारंभ करें।
- बड़े बांधों बनाम लघु जल संरचनाओं का तुलनात्मक अध्ययन:
- भौगोलिक अनुकूलता: पहाड़ी और पठारी क्षेत्रों में बड़े बांधों के निर्माण से विशाल वन भूमि जलमग्न हो जाती है और विस्थापन की समस्या होती है, जबकि डबरियां और छोटे तालाब पर्यावरण को नुकसान पहुँचाए बिना पानी रोकते हैं।
- लागत और समय: डबरियों का निर्माण अत्यंत कम लागत और कम समय में स्थानीय श्रम (मनरेगा) का उपयोग करके किया जा सकता है।
- आजीविका सुरक्षा और सतत विकास (Sustainable Development):
- मत्स्य पालन, सब्जी उत्पादन और पशुपालन जैसी बहु-आयामी गतिविधियों के माध्यम से ग्रामीण आय में वृद्धि।
- वर्षा आधारित कृषि से सिंचित और बहु-फसलीय कृषि की ओर संक्रमण (फसल विविवधीकरण)।
- सुशासन और जनभागीदारी: ग्राम पंचायतों और महिला स्व-सहायता समूहों को जल संरक्षण का नियंत्रण सौंपने से परियोजनाओं का रखरखाव और स्थायित्व सुनिश्चित होता है।
- निष्कर्ष: यह सुझाव देते हुए उत्तर समाप्त करें कि ‘मोर गांव मोर पानी’ जैसे विकेंद्रीकृत मॉडलों को नीतिगत रूप से राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर जल नीति का मुख्य हिस्सा बनाया जाना चाहिए।
संबद्ध स्टेटिक जीके और अन्य योजनाएं (Static GK Connection)
छत्तीसगढ़ और राष्ट्रीय स्तर पर जल संरक्षण और ग्रामीण विकास से जुड़ी अन्य महत्वपूर्ण योजनाएं:
- नरवा विकास योजना (Narva Development Scheme): छत्तीसगढ़ सरकार की एक प्रमुख योजना जिसके तहत जंगलों और मैदानी क्षेत्रों के नालों का वैज्ञानिक उपचार (Catchment Area Treatment) कर भू-जल स्तर को बढ़ाया जा रहा है।
- जल जीवन मिशन (Jal Jeevan Mission): केंद्र सरकार की योजना जिसका उद्देश्य प्रत्येक ग्रामीण परिवार को ‘हर घर जल’ (Functional Household Tap Connection) प्रदान करना है।
- अटल भूजल योजना (Atal Bhujal Yojana): सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से देश के चिन्हित जल संकट वाले क्षेत्रों में भू-जल प्रबंधन में सुधार के लिए केंद्र सरकार की एक राष्ट्रीय योजना।
एक मिनट का रिवीज़न (One Minute Revision)
त्वरित दोहराव के लिए Mor Gaon Mor Pani Campaign Chhattisgarh के सबसे महत्वपूर्ण बिंदु:
- Target District: छत्तीसगढ़ का मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (MCB) जिला।
- Structure Scale: 350 व्यक्तिगत आजीविका डबरियां और 150 से अधिक सामुदायिक तालाबों का विकास।
- Multipurpose Use: वर्षा जल संचयन के साथ मत्स्य पालन, उद्यानिकी और सब्जी उत्पादन को बढ़ावा।
- Groundwater Recharge: पहाड़ी क्षेत्रों में बहने वाले मानसून जल को रोककर जल तालिका को ऊपर उठाना।
- Community Led: ग्राम पंचायतों, जनप्रतिनिधियों और महिला समूहों की भागीदारी से जन आंदोलन का रूप।
अभ्यास प्रश्न (Practice MCQs)
निम्नलिखित बहुविकल्पीय प्रश्नों के माध्यम से इस समसामयिक विषय पर अपनी तैयारी का स्व-मूल्यांकन करें:
प्रश्न 1: ‘Mor Gaon Mor Pani Campaign Chhattisgarh’ मुख्य रूप से छत्तीसगढ़ के किस जिले में जल संवर्धन और ग्रामीण आजीविका के लिए संचालित किया जा रहा है?
(A) बस्तर जिला
(B) सरगुजा जिला
(C) मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (MCB) जिला
(D) राजनांदगांव जिला
उत्तर: (C) मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (MCB) जिला
व्याख्या: छत्तीसगढ़ के मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले में इस अभियान के तहत 350 आजीविका डबरियों और 150 से अधिक सामुदायिक तालाबों का विकास कर जल संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ा गया है।
प्रश्न 2: छत्तीसगढ़ी लोक जीवन और कृषि पद्धतियों के संदर्भ में ‘डबरी’ (Dabri) शब्द का क्या अर्थ है?
(A) पारंपरिक अनाज भंडारण गृह
(B) एक छोटा खेत तालाब (Farm Pond)
(C) सिंचाई के लिए प्रयुक्त होने वाला कुआं
(D) एक प्रकार की औषधीय फसल
उत्तर: (B) एक छोटा खेत तालाब (Farm Pond)
व्याख्या: छत्तीसगढ़ में खेतों के निचले हिस्सों में वर्षा जल को संचित करने और भू-जल पुनर्भरण के लिए बनाए जाने वाले छोटे तालाबों को ‘डबरी’ कहा जाता है।
प्रश्न 3: मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (MCB) जिले की सीमा निम्नलिखित में से किस भारतीय राज्य के साथ लगती है?
(A) ओडिशा
(B) मध्य प्रदेश
(C) महाराष्ट्र
(D) झारखंड
उत्तर: (B) मध्य प्रदेश
व्याख्या: एमसीबी (MCB) जिला छत्तीसगढ़ के उत्तर-पश्चिम में स्थित है और इसकी सीमा मध्य प्रदेश राज्य के साथ लगती है। इसका गठन वर्ष 2022 में कोरिया जिले से अलग करके किया गया था।
प्रश्न 4: ‘Mor Gaon Mor Pani Campaign Chhattisgarh’ के तहत डबरियों का उपयोग जल संचयन के अतिरिक्त किन आजीविका गतिविधियों के लिए किया जा रहा है?
1. मत्स्य पालन (Fisheries)
2. मेढ़ों पर सब्जी उत्पादन और उद्यानिकी
3. पशुपालन के लिए पेयजल आपूर्ति
सही विकल्प का चयन कीजिए:
(A) केवल 1 और 2
(B) केवल 2 और 3
(C) केवल 1 और 3
(D) 1, 2 और 3 सभी
उत्तर: (D) 1, 2 और 3 सभी
व्याख्या: इन आजीविका डबरियों का बहुआयामी उपयोग किया जा रहा है, जिसमें मत्स्य पालन, सब्जी उत्पादन, पशुपालन और बागवानी जैसी सभी सहायक गतिविधियां शामिल हैं।
प्रश्न 5: छत्तीसगढ़ सरकार की जल संवर्धन से संबंधित ‘नरवा विकास योजना’ के तहत ‘नरवा’ (Narva) शब्द का क्या अर्थ है?
(A) वृक्षारोपण क्षेत्र
(B) जैविक खाद गड्ढा
(C) नाला या जलधारा (Rivulet/Stream)
(D) पशु आश्रय गृह
उत्तर: (C) नाला या जलधारा (Rivulet/Stream)
व्याख्या: छत्तीसगढ़ की सुराजी गाँव योजना (NGGB) के तहत ‘नरवा’ का अर्थ नाला या प्राकृतिक जलधारा है, जिसका वैज्ञानिक ढंग से उपचार करके पानी को सहेजने का प्रयास किया जाता है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
Q1. Mor Gaon Mor Pani Campaign Chhattisgarh क्या है?
Mor Gaon Mor Pani Campaign Chhattisgarh छत्तीसगढ़ के मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (MCB) जिले में संचालित एक अभिनव जल संरक्षण अभियान है। इसके तहत ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे खेत तालाबों (डबरियों) और सामुदायिक तालाबों का निर्माण कर जल संचयन को बढ़ावा दिया जा रहा है।
Q2. ‘आजीविका डबरी’ (Livelihood Dabri) क्या होती है और इसके क्या फायदे हैं?
आजीविका डबरी खेत के निचले ढलान पर खोदा गया एक छोटा तालाब होता है। यह वर्षा जल को रोककर भू-जल स्तर बढ़ाती है, और किसान इसके पानी का उपयोग मत्स्य पालन, मवेशियों को पानी पिलाने तथा मेढ़ों पर सब्जियां उगाकर अपनी आजीविका बढ़ाने के लिए करते हैं।
Q3. इस अभियान को किस सरकारी योजना के तहत संचालित किया जा रहा है?
इस अभियान को ‘विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन ग्रामीण’ (मनरेगा के तहत) के वित्तीय और प्रशासनिक ढांचे का उपयोग करते हुए जिला प्रशासन द्वारा स्थानीय ग्राम पंचायतों के सहयोग से संचालित किया जा रहा है।
Q4. मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिला जल संरक्षण के लिए डबरियों पर क्यों निर्भर है?
यह जिला मुख्य रूप से पहाड़ी, जंगली और असममित भौगोलिक ढलानों वाला क्षेत्र है। यहाँ भारी वर्षा का पानी बहुत तेजी से बहकर व्यर्थ हो जाता है। ऐसी परिस्थिति में बड़े बांधों के स्थान पर छोटे विकेंद्रीकृत तालाब (डबरियां) बनाना ही सबसे कुशल और पर्यावरण-अनुकूल तरीका है।
Q5. ‘मोर गांव मोर पानी’ अभियान में जनभागीदारी को कैसे बढ़ावा दिया जा रहा है?
इस अभियान के तहत स्थानीय ग्राम पंचायतों, जनप्रतिनिधियों और महिला स्व-सहायता समूहों (SHGs) को तालाबों के निर्माण, गहरीकरण और उनके रखरखाव में सीधे भागीदार बनाया गया है, जिससे यह अभियान एक सामाजिक जन आंदोलन बन गया है।
निष्कर्ष (Conclusion)
मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले में संचालित Mor Gaon Mor Pani Campaign Chhattisgarh पर्यावरण संरक्षण और सुदृढ़ ग्रामीण आजीविका के सुंदर समन्वय का एक जीवंत उदाहरण है। बड़े बांधों की जगह छोटे और विकेंद्रीकृत आजीविका डबरियों और सामुदायिक तालाबों के निर्माण ने यह साबित कर दिया है कि स्थानीय स्तर पर किए गए लघु प्रयास भी जल सुरक्षा सुनिश्चित करने में क्रांतिकारी बदलाव ला सकते हैं।
यह अभियान न केवल वर्षा जल का अधिकतम संचयन कर भू-जल स्तर को सुधार रहा है, बल्कि आदिवासियों और सीमांत किसानों को मत्स्य पालन और सब्जी उत्पादन जैसे आजीविका के बहुआयामी विकल्प प्रदान कर आत्मनिर्भर बना रहा है। जल संकट और जलवायु परिवर्तन की इस वैश्विक चुनौती के दौर में, छत्तीसगढ़ का यह ग्रामीण जनभागीदारी आधारित जल संवर्धन मॉडल देश के अन्य पहाड़ी और वनांचल क्षेत्रों के लिए सतत विकास का एक बेहतरीन मार्गदर्शक साबित हो सकता है।
Official Sources:
- Public Relations Department, Government of Chhattisgarh (DPRCG) (https://dprcg.gov.in)