Mandai Wildlife Reserve Singapore: पहुंचे CM साय, छत्तीसगढ़ के 44% जंगलों को ग्लोबल इको-टूरिज्म से जोड़ने की तैयारी

Mandai Wildlife Reserve Singapore Mandai Wildlife Reserve Singapore

रायपुर, 05 अक्टूबर: छत्तीसगढ़ के समृद्ध वन संसाधनों और दुर्लभ वन्यजीव संपदा को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन के नक्शे पर स्थापित करने के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सिंगापुर के विश्व विख्यात Mandai Wildlife Reserve Singapore (मंडाई वाइल्डलाइफ रिजर्व) का सघन अध्ययन दौरा किया। भारत सरकार के विदेश मंत्रालय द्वारा नमित प्रथम ‘सिंगापुर-इंडिया नेटवर्क फॉर ग्रोथ’ (SING) फोरम 2026 में भाग लेने पहुंचे मुख्यमंत्री साय ने हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के साथ इस विश्वस्तरीय रिजर्व में वन्यजीव संरक्षण, प्राकृतिक पर्यावास प्रबंधन और आधुनिक पर्यटक सुविधाओं की व्यवस्थाएं देखीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सिंगापुर के सफल अनुभवों से सीख लेकर छत्तीसगढ़ के लगभग 44 प्रतिशत वन क्षेत्र में स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल एक ऐसा टिकाऊ इको-टूरिज्म मॉडल विकसित किया जाएगा, जिससे वन्यजीवों की सुरक्षा के साथ स्थानीय युवाओं को रोजगार मिल सके।

मुख्य बिंदु:

  • ‘Mandai Wildlife Reserve Singapore’ (मंडाई वाइल्डलाइफ रिजर्व) का CM विष्णु देव साय और हरियाणा के CM नायब सिंह सैनी ने किया संयुक्त दौरा।
  • सिंगापुर-इंडिया नेटवर्क फॉर ग्रोथ (SING) फोरम 2026 के अंतर्गत आधुनिक वन्यजीव संरक्षण और ईको-टूरिज्म तकनीकों का लिया जायजा।
  • छत्तीसगढ़ के 44% वन भूभाग को वैश्विक पर्यटन से जोड़ने की योजना; कांगेर घाटी, अचानकमार और इंद्रावती में विकसित होंगी सुविधाएं।
  • विदेशी व्यवस्थाओं की हूबहू नकल के बजाय राज्य की स्थानीय भौगोलिक और जैव-विविधता संबंधी आवश्यकताओं के अनुरूप बनेगा मॉडल।

हरियाणा के CM नायब सैनी संग मंडाई रिजर्व का मुआयना: क्या देखा प्रतिनिधिमंडल ने?

सिंगापुर प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने मंडाई वाइल्डलाइफ रिजर्व के शीर्ष अधिकारियों और वन्यजीव विशेषज्ञों के साथ विस्तृत चर्चा की।

प्रतिनिधिमंडल ने देखा कि कैसे घने प्राकृतिक परिवेश के बीच वन्यजीवों को खुला और सुरक्षित वातावरण दिया जाता है, जहां पर्यटक बिना जानवरों को विचलित किए प्राकृतिक सफारी का आनंद लेते हैं। रिजर्व में कचरा प्रबंधन, प्लास्टिक मुक्त क्षेत्र, पर्यावरण-अनुकूल इलेक्ट्रिक वाहन, डिजिटल साइनेज और पर्यटकों के लिए इंटरएक्टिव जागरूकता केंद्रों की कार्यप्रणाली का अध्ययन किया गया।

छत्तीसगढ़ के 44% वन क्षेत्र में इको-टूरिज्म की असीम संभावनाएं

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने रेखांकित किया कि छत्तीसगढ़ का लगभग 44 प्रतिशत भूभाग वनों से आच्छादित है। बस्तर के घने साल वनों से लेकर सरगुजा की हरी-भरी पहाड़ियों तक फैली जैव विविधता राज्य को देश का सबसे समृद्ध प्राकृतिक क्षेत्र बनाती है।

राज्य के पास राष्ट्रीय उद्यान, बाघ अभयारण्य और समृद्ध वन क्षेत्र मौजूद हैं। सरकार का लक्ष्य इन प्राकृतिक संसाधनों को केवल बंद जंगलों के रूप में न रखकर, सुनियोजित पर्यटक सुविधाओं और स्थानीय जनजातीय भागीदारी से जोड़कर एक वैश्विक ईको-टूरिज्म हब बनाना है।


यह भी पढ़ें: सरस्वती साइकिल योजना: पगडंडियों से हाई स्कूल तक आसान हुआ सफर, सरगुजा की बेटियों ने बयां किया बदलाव


‘नकल नहीं, अपनी जरूरतों के हिसाब से बनाएंगे मॉडल’: मुख्यमंत्री साय

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि छत्तीसगढ़ में पर्यटन का विकास विदेशी मॉडलों की अंधी नकल करके नहीं किया जाएगा। सिंगापुर एक छोटा और अत्यधिक विकसित द्वीपीय देश है, जबकि छत्तीसगढ़ की भौगोलिक बनावट, विशाल वन क्षेत्र और यहां रहने वाले जनजातीय समुदायों की परंपराएं पूरी तरह अलग हैं।

इसलिए सिंगापुर के सफल प्रबंधन और आधुनिक तकनीकों से सीख लेकर उन्हें छत्तीसगढ़ की जमीनी जरूरतों के अनुसार ढाला जाएगा। मुख्य लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि जंगल और वन्यजीव पूरी तरह सुरक्षित रहें और जंगलों के किनारे बसे ग्रामीणों व युवाओं को गाइड, होमस्टे और हॉस्पिटैलिटी के क्षेत्र में स्थायी आजीविका मिले।

कांगेर घाटी से अचानकमार तक: वैश्विक पर्यटन सर्किट की तैयारी

मुख्यमंत्री ने प्रदेश के प्रमुख संरक्षित क्षेत्रों का उल्लेख करते हुए कहा कि बस्तर की विश्व प्रसिद्ध कांगेर घाटी (तीरथगढ़ और कुटुमसर गुफाएं), अचानकमार टाइगर रिजर्व, इंद्रावती टाइगर रिजर्व और गरियाबंद का उदंती-सीतानदी अभयारण्य छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक क्षमता के सबसे बड़े स्तंभ हैं।

इन क्षेत्रों में वन संरक्षण, स्थानीय ग्राम वन समितियों की भागीदारी और आधुनिक पर्यटन अधोसंरचना का ऐसा संतुलित समन्वय किया जाएगा, जिससे विदेशी और राष्ट्रीय पर्यटक बिना किसी असुविधा के छत्तीसगढ़ के जंगलों का दीदार कर सकें।

“छत्तीसगढ़ के जंगलों में असीमित प्राकृतिक सौंदर्य और जैव विविधता है। मंडाई वाइल्डलाइफ रिजर्व के अनुभवों से सीखकर हम अपने वनांचलों में आधुनिक और जिम्मेदार पर्यटन का ऐसा तंत्र विकसित करेंगे, जिससे हमारे जंगल भी सुरक्षित रहें और ग्रामीण युवाओं को अपने ही अंचल में सम्मानजनक रोजगार मिल सके।”— विष्णु देव साय, मुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़ शासन

स्थानीय आदिवासियों, युवाओं और राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए इसके क्या मायने हैं?

  • जनजातीय युवाओं के लिए रोजगार: मंडाई रिजर्व की तर्ज पर स्थानीय युवाओं को वाइल्डलाइफ नेचुरलिस्ट, सफारी ड्राइवर और ट्रैकर के रूप में प्रशिक्षित किया जाएगा।
  • मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व में सुधार: आधुनिक निगरानी और कोर-बफर जोन प्रबंधन से ग्रामीण बस्तियों में वन्यजीवों के प्रवेश और फसलों के नुकसान को वैज्ञानिक तरीके से रोका जा सकेगा।
  • ग्लोबल टूरिज्म मैप पर पहचान: अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं विकसित होने से विदेशों से आने वाले बर्ड वाचर्स, वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर्स और पर्यावरण शोधार्थियों की आवाजाही छत्तीसगढ़ में बढ़ेगी।

मंडाई वाइल्डलाइफ रिजर्व अध्ययन दौरे के मुख्य बिंदु

  • प्रमुख स्थल: Mandai Wildlife Reserve Singapore (मंडाई वाइल्डलाइफ रिजर्व)
  • सहभागी नेतृत्व: छत्तीसगढ़ CM विष्णु देव साय और हरियाणा CM नायब सिंह सैनी
  • प्राथमिक फोकस: पर्यावास संरक्षण, आधुनिक सफारी प्रबंधन और इको-टूरिज्म।
  • छत्तीसगढ़ का लक्ष्य: 44% वन क्षेत्र को जिम्मेदार और सतत पर्यटन से जोड़ना।
  • फोकस अभयारण्य: कांगेर घाटी, अचानकमार, इंद्रावती और उदंती-सीतानदी।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Mandai Wildlife Reserve Singapore के दौरे पर मुख्यमंत्री के साथ कौन-से अन्य मुख्यमंत्री मौजूद रहे?

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के साथ हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी भी मंडाई वाइल्डलाइफ रिजर्व के अध्ययन दौरे पर उपस्थित रहे।

छत्तीसगढ़ सरकार सिंगापुर के वन्यजीव मॉडल से क्या सीख लेगी?

सरकार सिंगापुर की आधुनिक पर्यावास सुरक्षा, पर्यावरण-अनुकूल पर्यटन सुविधाओं और सफारी प्रबंधन की श्रेष्ठ तकनीकों को छत्तीसगढ़ की स्थानीय जरूरतों के अनुसार अपनाएगी।

छत्तीसगढ़ में इको-टूरिज्म के लिए किन प्रमुख क्षेत्रों को विकसित किया जाएगा?

बस्तर की कांगेर घाटी, अचानकमार टाइगर रिजर्व, इंद्रावती टाइगर रिजर्व और उदंती-सीतानदी अभयारण्य में अंतरराष्ट्रीय स्तर की इको-टूरिज्म सुविधाएं विकसित की जाएंगी।

छत्तीसगढ़ का कितना प्रतिशत भूभाग वनों से आच्छादित है?

छत्तीसगढ़ का लगभग 44 प्रतिशत भूभाग समृद्ध वनों, राष्ट्रीय उद्यानों और अभयारण्यों से आच्छादित है, जो इसे देश का प्रमुख हरित राज्य बनाता है।

स्रोत (Source): छत्तीसगढ़ जनसंपर्क विभाग (DPR Raipur / सिंगापुर ब्यूरो)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *