रायपुर, 30 अक्टूबर: छत्तीसगढ़ में समान नागरिक अधिकारों, सामाजिक न्याय और लैंगिक समानता की दिशा में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के निर्माण हेतु व्यापक जनभागीदारी और हितधारकों से संवाद का दौर निरंतर जारी है। शुक्रवार को राजधानी रायपुर में स्वयंप्रभा फाउंडेशन एवं आम्रपाली सहकारी गृह निर्माण संस्था मर्यादित के संयुक्त प्रतिनिधिमंडल ने उच्चस्तरीय Chhattisgarh UCC Committee (छत्तीसगढ़ यूसीसी समिति) के समक्ष महत्वपूर्ण सुझाव प्रस्तुत किए। समिति के सदस्य सेवानिवृत्त आईएएस श्री एम.के. राऊत और वरिष्ठ अधिवक्ता श्री मोहन पवार ने प्रतिनिधिमंडल के तर्कों को गंभीरतापूर्वक सुना और इन्हें विधिक परीक्षण में शामिल करने का भरोसा दिया। सामाजिक संगठनों ने विशेष रूप से रेखांकित किया कि यूसीसी का निर्माण ऐसा हो, जिससे प्रदेश की 32 प्रतिशत जनजातीय आबादी की विशिष्ट सांस्कृतिक परंपराएं अक्षुण्ण रहें, महिलाओं को पैतृक संपत्ति में बराबरी का हक मिले और लिव-इन रिलेशनशिप में जन्म लेने वाले बच्चों के भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
मुख्य बिंदु (Key Highlights):
- ‘Chhattisgarh UCC Committee’: सेवानिवृत्त आईएएस एम.के. राऊत व वरिष्ठ अधिवक्ता मोहन पवार को सौंपे गए सुझाव।
- 32% आदिवासी आबादी का संरक्षण: जनजातीय समाजों की रूढ़िजन्य परंपराओं और संवैधानिक अधिकारों को अक्षुण्ण रखने की मांग।
- महिलाओं को पैतृक संपत्ति में समान अधिकार: बहुविवाह पर पूर्ण प्रतिबंध और तलाक-भरण पोषण में न्यायसंगत प्रावधानों पर बल।
- लिव-इन रिलेशनशिप का अनिवार्य पंजीकरण: लिव-इन संबंधों से जन्मे बच्चों के उत्तराधिकार और संपत्ति अधिकारों की गारंटी।
- कानूनों का सरलीकरण: विवाह, उत्तराधिकार और पारिवारिक विवादों के निपटारे के लिए सभी नागरिकों हेतु एक समान व्यवस्था।
- प्रमुख सामाजिक प्रतिनिधि रहे शामिल: स्वयंप्रभा अध्यक्ष शिव नारायण मुंदड़ा, डॉ. मुकेश शाह और आम्रपाली अध्यक्ष इन्द्रनाथ सिंह।
Chhattisgarh UCC Committee: विवाह, तलाक और उत्तराधिकार कानूनों में समानता से मिलेगा न्याय
समान नागरिक संहिता समिति के समक्ष विचार प्रस्तुत करते हुए सामाजिक प्रतिनिधियों ने कहा कि एक आधुनिक और समतामूलक समाज के लिए सभी नागरिकों को समान कानूनी संरक्षण मिलना आवश्यक है।
Chhattisgarh UCC Committee को सौंपे गए ज्ञापन में स्वयंप्रभा फाउंडेशन के अध्यक्ष श्री शिव नारायण मुंदड़ा और डॉ. मुकेश शाह ने कहा कि विवाह, तलाक, गुजारा भत्ता, गोद लेने और संपत्ति उत्तराधिकार से जुड़े व्यक्तिगत कानूनों (Personal Laws) में व्याप्त विसंगतियों को दूर किया जाना चाहिए। कानूनों में एकरूपता आने से न केवल न्यायिक प्रक्रियाओं का सरलीकरण होगा, बल्कि आम नागरिकों को अदालतों के लंबे चक्कर काटने से मुक्ति मिलेगी और सभी को त्वरित न्याय प्राप्त हो सकेगा।
32% जनजातीय आबादी की परंपराओं और संवैधानिक सुरक्षा की रक्षा पहली शर्त
प्रतिनिधिमंडल ने छत्तीसगढ़ के अनूठे जनसांख्यिकीय स्वरूप को ध्यान में रखते हुए आदिवासियों के पारंपरिक अधिकारों का विशेष उल्लेख किया:
- रूढ़िजन्य व्यवस्था का सम्मान: प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि छत्तीसगढ़ की लगभग 32 प्रतिशत आबादी अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग से आती है। इन समुदायों की अपनी विशिष्ट सामाजिक संरचना, ग्राम सभा परंपराएं और सदियों पुरानी प्रथाएं हैं।
- अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े: समिति से आग्रह किया गया कि यूसीसी का प्रारूप तैयार करते समय जनजातीय समाज के संवैधानिक संरक्षण और प्रथागत कानूनों (Customary Laws) का पूर्ण ध्यान रखा जाए, जिससे उनकी सांस्कृतिक पहचान पर कोई आंच न आए।
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बहुविवाह पर रोक और बेटियों को पैतृक संपत्ति में समान हिस्सेदारी
महिला सशक्तिकरण और लैंगिक न्याय को समान नागरिक संहिता की मूल आत्मा बताते हुए संस्थाओं ने कड़े प्रावधानों की वकालत की:
- सामाजिक कुप्रथाओं का खात्मा: आम्रपाली सहकारी गृह निर्माण संस्था के अध्यक्ष श्री इन्द्रनाथ सिंह ने कहा कि बहुविवाह जैसी कुरीतियों पर कानूनी रोक लगाई जाए। किसी भी धर्म या संप्रदाय की महिला को भरण-पोषण और गरिमापूर्ण जीवन से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।
- पैतृक संपत्ति में बेटियों का हक: पुत्र और पुत्री के बीच संपत्ति विभाजन में किसी भी प्रकार का लैंगिक भेदभाव समाप्त हो और बेटियों को पैतृक व अचल संपत्ति में बिना शर्त समान अधिकार मिले।
लिव-इन रिलेशनशिप का पंजीकरण और बच्चों के कानूनी अधिकारों की गारंटी
बदलते सामाजिक परिवेश में उभर रहे कानूनी शून्य (Legal Vacuum) को भरने के लिए समिति को दूरगामी सुझाव दिए गए:
- अनिवार्य विधिक पंजीकरण: लिव-इन संबंधों में रहने वाले जोड़ों के लिए एक सुव्यवस्थित पंजीकरण तंत्र विकसित किया जाए, जिससे शोषण और अपराधों की रोकथाम हो सके।
- बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा: प्रतिनिधियों ने जोर देकर कहा कि ऐसे संबंधों से जन्म लेने वाले मासूम बच्चों को जैविक माता-पिता की संपत्ति में पूर्ण उत्तराधिकार, नाम और कानूनी मान्यता मिलनी चाहिए, ताकि उनका सामाजिक और आर्थिक भविष्य पूरी तरह सुरक्षित रहे।
“समान नागरिक संहिता किसी वर्ग विशेष के विरुद्ध नहीं, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति और महिलाओं को समान कानूनी न्याय दिलाने का महाअभियान है। छत्तीसगढ़ में 32% जनजातीय परंपराओं का सम्मान करते हुए यदि विवाह, तलाक और संपत्ति अधिकारों में एकरूपता लाई जाती है, तो यह सामाजिक समरसता का आदर्श मॉडल बनेगा। समिति ने हमारे सुझावों को गंभीरता से संज्ञान में लिया है।”— श्री शिव नारायण मुंदड़ा (अध्यक्ष, स्वयंप्रभा फाउंडेशन) एवं श्री इन्द्रनाथ सिंह (अध्यक्ष, आम्रपाली संस्था)
समान नागरिक संहिता सुझाव प्रस्तुतीकरण: एक नजर में
- विषय: समान नागरिक संहिता सुझाव संवाद (Chhattisgarh UCC Committee)
- समिति सदस्य: सेवानिवृत्त आईएएस श्री एम.के. राऊत एवं वरिष्ठ अधिवक्ता श्री मोहन पवार
- सुझाव प्रस्तुतकर्ता: श्री शिव नारायण मुंदड़ा, डॉ. मुकेश शाह एवं श्री इन्द्रनाथ सिंह
- संस्थाएं: स्वयंप्रभा फाउंडेशन एवं आम्रपाली सहकारी गृह निर्माण संस्था मर्यादित, रायपुर
- तिथि व स्थल: 30 अक्टूबर 2026, रायपुर (छत्तीसगढ़)
- प्रमुख जनजातीय पहलू: 32% आदिवासी आबादी की रूढ़िजन्य परंपराओं व संवैधानिक संरक्षण का बचाव
- महिला अधिकार: बहुविवाह पर रोक, बेटियों को पैतृक संपत्ति में समान अधिकार, भरण-पोषण सुरक्षा
- लिव-इन सुधार: संबंधों का पंजीकरण एवं उत्पन्न बच्चों के संपत्ति व उत्तराधिकार अधिकारों की गारंटी
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Chhattisgarh UCC Committee के समक्ष किन संस्थाओं ने सुझाव प्रस्तुत किए?
समान नागरिक संहिता समिति के समक्ष रायपुर की स्वयंप्रभा फाउंडेशन (अध्यक्ष श्री शिव नारायण मुंदड़ा) और आम्रपाली सहकारी गृह निर्माण संस्था (अध्यक्ष श्री इन्द्रनाथ सिंह) ने सुझाव दिए।
समिति के किन वरिष्ठ सदस्यों ने इन सुझावों पर चर्चा की?
समिति के वरिष्ठ सदस्य सेवानिवृत्त आईएएस श्री एम.के. राऊत और वरिष्ठ अधिवक्ता श्री मोहन पवार ने प्रतिनिधिमंडल के सुझावों को सुना और विधिक परीक्षण का आश्वासन दिया।
आदिवासी समाज को लेकर यूसीसी समिति को क्या मुख्य सुझाव दिया गया?
सुझाव दिया गया कि छत्तीसगढ़ की 32 प्रतिशत जनजातीय आबादी की विशिष्ट संस्कृति, परंपराओं, रीति-रिवाजों और संवैधानिक अधिकारों को यूसीसी में पूरी तरह सुरक्षित रखा जाए।
लिव-इन रिलेशनशिप और महिलाओं के अधिकारों पर क्या प्रमुख मांगें रखी गईं?
लिव-इन संबंधों के कानूनी पंजीकरण, उससे जन्मे बच्चों को संपत्ति अधिकार देने, बहुविवाह पर प्रतिबंध लगाने और बेटियों को पैतृक संपत्ति में समान अधिकार देने का सुझाव दिया गया।
आधिकारिक स्रोत: समान नागरिक संहिता (UCC) समिति सचिवालय, छत्तीसगढ़ शासन / जनसंपर्क संचालनालय (DPR Raipur)