Chhattisgarh Ease of Doing Business Bill 2026: छत्तीसगढ़ विधानसभा से पारित हुआ ऐतिहासिक व्यापार सुगमता विधेयक, जोखिम आधारित परमिशन सिस्टम लागू करने वाला देश का पहला राज्य बना

Chhattisgarh Ease of Doing Business Bill 2026 Chhattisgarh Ease of Doing Business Bill 2026

Published on July 16, 2026 | By Ishan Verma, Editor, theexamhub.in


छत्तीसगढ़ में औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने, लालफीताशाही (Red Tapism) को समाप्त करने और छोटे कारोबारियों को इंस्पेक्टर राज से मुक्ति दिलाने की दिशा में एक क्रांतिकारी और ऐतिहासिक विधायी सुधार किया गया है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ विधानसभा ने सर्वसम्मति से ‘छत्तीसगढ़ ईज ऑफ डूइंग बिजनेस (विनिमय-मुक्ति एवं सुविधा) विधेयक, 2026’ को पारित कर दिया है। इस कानून के पारित होने के साथ ही छत्तीसगढ़ देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है, जहां उद्योगों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लिए पूर्णतः ‘जोखिम आधारित’ (Risk-based) और ‘विश्वास आधारित’ (Trust-based) बिजनेस परमिशन प्रणाली को कानूनी मान्यता दी गई है।

यह कानून न केवल नए निवेश को आकर्षित करने का एक मजबूत कूटनीतिक आधार बनेगा, बल्कि यह राज्य के 15 लाख से अधिक सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) के लिए व्यापारिक प्रक्रियाओं को सरल और पूर्वानुमेय (Predictable) बनाएगा। Chhattisgarh Ease of Doing Business Bill 2026 के माध्यम से राज्य सरकार ने हर साल लाइसेंस के नवीनीकरण (Annual Renewal) की अनिवार्यता को समाप्त कर दिया है और स्व-प्रमाणीकरण (Self-certification) व स्वतः स्वीकृति (Auto-approval) जैसे अभूतपूर्व प्रावधानों को लागू किया है। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) और राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए Chhattisgarh Ease of Doing Business Bill 2026 भारतीय अर्थव्यवस्था, सुशासन, व्यापार नीतियों (GS Paper III) और छत्तीसगढ़ की प्रशासनिक व्यवस्था (GS Paper VI) के तहत एक अत्यंत प्रासंगिक समसामयिक (Current Affairs) विषय है। इस विस्तृत विश्लेषण में हम इस ऐतिहासिक विधेयक के विभिन्न रणनीतिक पहलुओं, जोखिम-आधारित वर्गीकरण, त्रिस्तरीय निगरानी प्रणाली और परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण आयामों का गहराई से अध्ययन करेंगे।

Table of Contents

Chhattisgarh Ease of Doing Business Bill 2026: त्वरित अवलोकन (Quick Highlights)

छत्तीसगढ़ विधानसभा द्वारा पारित किए गए इस ऐतिहासिक व्यापार सुगमता कानून से जुड़े प्रमुख आंकड़ों, नीतिगत लक्ष्यों और प्रशासनिक विवरणों को नीचे दी गई तालिका के माध्यम से संक्षेपित किया गया है:

महत्वपूर्ण क्षेत्रChhattisgarh Ease of Doing Business Bill 2026 के प्रमुख तथ्य
विधेयक का पूरा नामछत्तीसगढ़ ईज ऑफ डूइंग बिजनेस (विनिमय-मुक्ति एवं सुविधा) विधेयक, 2026
पारित होने की तिथि व स्थान16 जुलाई 2026, छत्तीसगढ़ विधानसभा, रायपुर
ऐतिहासिक गौरवजोखिम और विश्वास आधारित व्यावसायिक अनुमति प्रणाली लागू करने वाला देश का पहला राज्य
लाभान्वित होने वाले MSMEsछत्तीसगढ़ के 15 लाख से अधिक सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई)
शामिल सरकारी सेवाएंराज्य शासन के 8 विभागों द्वारा प्रदान की जाने वाली 43 महत्वपूर्ण सेवाएं
मुख्य डिजिटल नवाचारसेल्फ-सर्टिफिकेशन (स्व-प्रमाणीकरण) और ऑटो-अप्रूवल (स्वतः स्वीकृति) प्रणाली
निगरानी ढांचामुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली परिषद के मार्गदर्शन में त्रिस्तरीय निगरानी प्रणाली
लाइसेंस नवीनीकरण नीतिप्रतिवर्ष लाइसेंस नवीनीकरण की अनिवार्यता को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है

Chhattisgarh Ease of Doing Business Bill 2026 क्या है?

आजादी के बाद से ही भारतीय व्यापारिक परिदृश्य में किसी भी नए उद्योग या व्यवसाय को स्थापित करने के लिए पर्यावरण, श्रम, राजस्व, नगर निगम, जल प्रदाय और अग्नि सुरक्षा जैसे दर्जनों विभागों से लाइसेंस और एनओसी (NOC) लेनी पड़ती थी। इस प्रक्रिया में उद्यमियों का अत्यधिक समय और पैसा बर्बाद होता था, जिसे प्रशासनिक शब्दावली में ‘लाइसेंस राज’ या ‘लालफीताशाही’ कहा जाता है।

इसी विसंगति को जड़ से समाप्त करने के लिए Chhattisgarh Ease of Doing Business Bill 2026 को तैयार किया गया है। यह कानून पूरे व्यापारिक और औद्योगिक ढांचे को जोखिम के आधार पर वर्गीकृत करता है। कम जोखिम वाले छोटे उद्योगों (विशेषकर एमएसएमई) को बिना किसी सरकारी दफ्तर के चक्कर काटे, स्व-प्रमाणीकरण और ऑटो-अप्रूवल के जरिए तुरंत काम शुरू करने की वैधानिक स्वतंत्रता प्रदान की गई है। वहीं, पर्यावरण और मानव सुरक्षा की दृष्टि से संवेदनशील और अत्यधिक जोखिम वाले बड़े उद्योगों (जैसे रासायनिक संयंत्र, भारी धातु उद्योग) के लिए कड़े तकनीकी परीक्षण और भौतिक निरीक्षण की व्यवस्था को पहले की तरह ही सुरक्षित रखा गया है।

जोखिम और विश्वास आधारित अनुमति प्रणाली की कार्यप्रणाली

इस नए कानून के क्रियान्वयन और इसकी पारदर्शी कार्यप्रणाली को निम्नलिखित प्रमुख विधायी स्तंभों के माध्यम से समझा जा सकता है:

1. जोखिम आधारित वर्गीकरण (Risk-based Classification)

उद्योगों को उनकी गतिविधियों के आधार पर ‘कम’, ‘मध्यम’ और ‘उच्च’ जोखिम श्रेणियों में विभाजित किया जाएगा। कम जोखिम वाली व्यावसायिक गतिविधियों (जैसे छोटे खुदरा व्यापार, गैर-प्रदूषणकारी कुटीर उद्योग, आईटी सेवाएं) को न्यूनतम कागजी कार्रवाई और तुरंत मंजूरी दी जाएगी, जिससे छोटे कारोबारियों को बड़े उद्योगों जैसी जटिल प्रक्रियाओं से नहीं गुजरना पड़ेगा।

2. स्व-प्रमाणीकरण (Self-certification)

कम और मध्यम जोखिम वाले उद्यमों में बार-बार होने वाले विभागीय भौतिक निरीक्षणों को समाप्त कर दिया गया है। इसके स्थान पर उद्यमी स्वयं स्व-घोषणा (Self-declaration) कर सकेंगे या सरकार द्वारा अधिकृत पेशेवरों (जैसे लाइसेंसधारी आर्किटेक्ट, चार्टर्ड इंजीनियर्स) के प्रमाण-पत्र के आधार पर भवन अनुज्ञा और अन्य आवश्यक अनुमतियां प्राप्त कर सकेंगे।

3. स्वतः स्वीकृति (Deemed / Auto-approval)

Chhattisgarh Ease of Doing Business Bill 2026 के तहत सभी 43 सेवाओं के लिए विभागों को एक निश्चित समय सीमा (Time-limit) के भीतर निर्णय लेना होगा। यदि कोई विभाग निर्धारित समय सीमा के भीतर आवेदन पर कोई निर्णय नहीं लेता है या आपत्ति दर्ज नहीं करता है, तो पात्र मामलों में अनुमति को स्वतः स्वीकृत (Deemed Approved) मान लिया जाएगा और डिजिटल सिस्टम द्वारा स्वतः लाइसेंस जारी कर दिया जाएगा।

4. वार्षिक नवीनीकरण की अनिवार्यता समाप्त

उद्यमियों को सबसे बड़ी राहत देते हुए सरकार ने हर साल लाइसेंस या अनुमति के नवीनीकरण की अनिवार्यता को पूरी तरह समाप्त कर दिया है। अब एक बार स्वीकृत लाइसेंस जोखिम आधारित मानदंडों के आधार पर दीर्घकालिक रूप से वैध रहेंगे, जिससे उद्यमियों का ध्यान कागजी औपचारिकताओं के बजाय व्यापार के विस्तार पर केंद्रित होगा।

“छत्तीसगढ़ ईज ऑफ डूइंग बिजनेस विधेयक, 2026 हमारे राज्य के 15 लाख एमएसएमई उद्यमियों के आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता की नई पहचान बनेगा। यह कानून विश्वास और सुशासन पर आधारित छत्तीसगढ़ के नए औद्योगिक युग का शंखनाद है।”— मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय

एमएसएमई (MSME) क्षेत्र और स्थानीय व्यापार पर क्रांतिकारी प्रभाव

छत्तीसगढ़ एक खनिज समृद्ध और तेजी से बढ़ती औद्योगिक अर्थव्यवस्था है, जहां 15 लाख से अधिक सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम कार्यरत हैं, जो राज्य में कृषि के बाद रोजगार का सबसे बड़ा स्रोत हैं:

  • एमएसएमई के लिए विशेष रियायतें: Chhattisgarh Ease of Doing Business Bill 2026 के तहत एमएसएमई इकाइयों के लिए पानी के कनेक्शन की अनुमति केवल स्व-घोषणा के आधार पर मिलेगी। साथ ही, सोसाइटी या फर्म का पंजीकरण पूरी तरह से समयबद्ध ऑनलाइन प्रणाली से होगा।
  • 8 विभागों की 43 सेवाएं शामिल: इस कानून के पहले चरण के तहत राजस्व, श्रम, नगरीय प्रशासन, पर्यावरण संरक्षण मंडल, बिजली, जल संसाधन, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी और उद्योग विभाग की कुल 43 सेवाओं को इसके दायरे में लाया गया है।
  • लागत और समय में भारी कमी: विशेषज्ञों का मानना है कि इस कानून के पूर्ण क्रियान्वयन से छत्तीसगढ़ में नया कारोबार शुरू करने की लागत में 30% और समय में 70% तक की भारी कमी आएगी, जिससे युवाओं में स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा।

त्रिस्तरीय निगरानी ढांचा (Three-tier Monitoring Structure)

इस ऐतिहासिक कानून के पारदर्शी क्रियान्वयन और किसी भी प्रकार की प्रशासनिक कोताही को रोकने के लिए एक बेहद मजबूत त्रिस्तरीय संस्थागत ढांचा तैयार किया गया है:

  1. प्रथम स्तर (मुख्यमंत्री परिषद): नीतिगत मार्गदर्शन और सर्वोच्च निर्णयों के लिए मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में एक कार्यकारी परिषद का गठन किया गया है।
  2. द्वितीय स्तर (राज्य स्तरीय समिति): राज्य के मुख्य सचिव (Chief Secretary) की अध्यक्षता में गठित समिति सभी विभागों के बीच समन्वय और समयबद्ध अनुमतियों की नियमित समीक्षा करेगी।
  3. तृतीय स्तर (जिला स्तरीय समिति): जिला स्तर पर जिला कलेक्टर (District Collector) की अध्यक्षता में समिति स्थानीय स्तर पर एमएसएमई और नए उद्योगों को मिलने वाली अनुमतियों और शिकायतों की मॉनिटरिंग करेगी।

राष्ट्रीय संदर्भ: ईज ऑफ डूइंग बिजनेस (EoDB) और छत्तीसगढ़

उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (DPIIT), भारत सरकार द्वारा प्रतिवर्ष राज्यों की ‘बिजनेस रिफॉर्म्स एक्शन प्लान’ (BRAP) रैंकिंग जारी की जाती है। छत्तीसगढ़ ऐतिहासिक रूप से इस रैंकिंग में ‘एचीवर्स’ (Achievers) या उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले राज्यों की श्रेणी में शामिल रहा है।

Chhattisgarh Ease of Doing Business Bill 2026 के पारित होने के बाद, छत्तीसगढ़ ने देश के अन्य अत्यधिक औद्योगिक राज्यों जैसे गुजरात, महाराष्ट्र और तमिलनाडु को नीतिगत सुधारों के मामले में पीछे छोड़ दिया है। जोखिम आधारित वैधानिक सुधार लाने वाला पहला राज्य बनकर छत्तीसगढ़ ने देश में ‘सहकारी संघवाद’ (Cooperative Federalism) और न्यूनतम सरकार-अधिकतम शासन (Minimum Government, Maximum Governance) के मॉडल को धरातल पर साबित किया है।


प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए विशेष अनुभाग (Exam Relevance Section)

सीजीपीएससी (CGPSC) राज्य सेवा मुख्य परीक्षा के पेपर-V (छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था एवं उद्योग) और पेपर-VI (छत्तीसगढ़ का प्रशासनिक ढांचा एवं सुशासन) के लिए यह टॉपिक अत्यंत महत्वपूर्ण है।

CGPSC & UPSC Prelims Fact Box: Chhattisgarh Ease of Doing Business Bill 2026

  • जोखिम आधारित प्रणाली: कम जोखिम वाले उद्योगों को बिना भौतिक सरकारी निरीक्षण के स्व-घोषणा पर तुरंत कार्य शुरू करने की वैधानिक अनुमति देना।
  • डीम्ड अप्रूवल (Deemed Approval): तय समय सीमा में विभाग द्वारा निर्णय न लेने पर स्वतः स्वीकृति की कानूनी वैधता।
  • DPIIT: Department for Promotion of Industry and Internal Trade (वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार) जो भारत में राज्यों की व्यापार सुगमता रैंकिंग (BRAP) तय करता है।
  • लाभान्वित एमएसएमई संख्या: छत्तीसगढ़ के 15 लाख से अधिक सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम।

UPSC & CGPSC Mains Analysis (GS Paper III & VI: अर्थव्यवस्था, सुशासन एवं औद्योगिक नीति)

प्रश्न: “विश्वास-आधारित शासन (Trust-based Governance) और जोखिम-आधारित नियमन ही 21वीं सदी के भारत में लालफीताशाही को समाप्त करने और एक लचीली औद्योगिक अर्थव्यवस्था का निर्माण करने के सबसे मजबूत स्तंभ हैं।” हाल ही में छत्तीसगढ़ विधानसभा द्वारा पारित ईज ऑफ डूइंग बिजनेस विधेयक-2026 के विशेष संदर्भ में इस कथन की तर्कपूर्ण समालोचना कीजिए।

उत्तर की रूपरेखा:

  • प्रस्तावना: छत्तीसगढ़ विधानसभा द्वारा 16 जुलाई 2026 को पारित किए गए ऐतिहासिक Chhattisgarh Ease of Doing Business Bill 2026 के क्रांतिकारी विज़न और इसके ‘देश में पहला राज्य’ बनने के गौरव को संक्षेप में स्पष्ट करते हुए उत्तर प्रारंभ करें।
  • विश्वास-आधारित शासन के लाभ (सुशासन):
    • स्व-प्रमाणीकरण और थर्ड-पार्टी वेरिफिकेशन: उद्यमियों पर विश्वास प्रकट कर ‘इंस्पेक्टर राज’ और अनावश्यक भौतिक निरीक्षणों से मुक्ति दिलाना।
    • डीम्ड/ऑटो-अप्रूवल: फाइलों के लटकने की प्रवृत्ति पर रोक और प्रशासनिक जवाबदेही तय करना।
    • लाइसेंस नवीनीकरण की समाप्ति: ‘ईज ऑफ लिविंग’ और ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ का वास्तविक समामेलन।
  • जोखिम-आधारित वर्गीकरण का वैज्ञानिक दृष्टिकोण: समझाएं कि कैसे यह वर्गीकरण छोटे एमएसएमई उद्योगों को बड़े प्रदूषणकारी उद्योगों जैसी जटिल पर्यावरण और सुरक्षा प्रक्रियाओं से बचाता है, जिससे संसाधनों और समय की बचत होती है।
  • आर्थिक एवं सामाजिक प्रभाव: छत्तीसगढ़ के 15 लाख से अधिक एमएसएमई को प्रत्यक्ष लाभ, नई नौकरियों का सृजन, और ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय विनिर्माण (Local Manufacturing) का पुनरुद्धार।
  • चुनौतियां और सुरक्षात्मक पहलू: स्व-घोषणा के दुरुपयोग को रोकना, पर्यावरण मानकों (प्रदूषण नियंत्रण) और श्रमिक अधिकारों (Labor Rights) की सुरक्षा सुनिश्चित करना, और जिला व तहसील स्तर के प्रशासनिक अधिकारियों की मानसिकता में ‘नियंत्रक’ से ‘सुविधा प्रदाता’ (Facilitator) के रूप में बदलाव लाना।
  • निष्कर्ष: यह सारांश प्रस्तुत करें कि यह विधेयक केवल एक व्यापारिक सुधार नहीं है, बल्कि यह न्यूनतम सरकार-अधिकतम शासन की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है, जो ‘विकसित छत्तीसगढ़’ के सपने को समयबद्ध तरीके से धरातल पर साकार करने की मजबूत प्रशासनिक और आर्थिक रीढ़ साबित होगा।

संबद्ध स्टेटिक जीके (Static GK Connection)

औद्योगिक नीतियों, एमएसएमई और छत्तीसगढ़ के प्रशासनिक इतिहास से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण स्टेटिक तथ्य जो परीक्षाओं में पूछे जाते हैं:

  1. छत्तीसगढ़ की औद्योगिक नीति 2019-2024 (और इसके नए चरण): छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा समय-समय पर नई औद्योगिक नीतियां घोषित की जाती हैं, जिनमें कोर सेक्टर के उद्योगों के साथ-साथ खाद्य प्रसंस्करण (Food Processing), एग्रो-बेस्ड उद्योगों और एमएसएमई को विशेष सब्सिडी और रियायतें दी जाती हैं।
  2. एमएसएमई विकास अधिनियम, 2006 (MSMED Act, 2006): भारत सरकार का वह कानून जिसके तहत सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को परिभाषित और विनियमित किया जाता है। हाल ही में आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत इनकी परिभाषा में संशोधन कर निवेश और टर्नओवर की सीमा को बढ़ाया गया है।
  3. छत्तीसगढ़ का प्रशासनिक और विधायी ढांचा: छत्तीसगढ़ में एक सदनीय (Unicameral) विधायिका है, जिसमें वर्तमान में विधानसभा सीटों की कुल संख्या 90 है। नया ईज ऑफ डूइंग बिजनेस विधेयक इसी सदन द्वारा पारित किया गया है।

एक मिनट का रिवीज़न (One Minute Revision)

त्वरित परीक्षा उपयोगी पुनरीक्षण के लिए Chhattisgarh Ease of Doing Business Bill 2026 के सबसे महत्वपूर्ण बिंदु:

  • Historic Milestone: छत्तीसगढ़ विधानसभा ने 16 जुलाई 2026 को ‘छत्तीसगढ़ ईज ऑफ डूइंग बिजनेस विधेयक, 2026’ को सर्वसम्मति से पारित किया।
  • First in India: जोखिम आधारित (Risk-based) और विश्वास आधारित व्यावसायिक अनुमति प्रणाली लागू करने वाला छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य बना।
  • No Annual Renewal: हर साल लाइसेंस या व्यावसायिक अनुमतियों के नवीनीकरण की अनिवार्यता को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है।
  • Auto-Approval: निर्धारित समय सीमा में निर्णय न होने पर पात्र मामलों में अनुमति को स्वतः स्वीकृत (Deemed Approved) माना जाएगा।
  • Services Covered: राज्य शासन के 8 महत्वपूर्ण विभागों की 43 सेवाओं को पहले चरण में इस कानून के अंतर्गत शामिल किया गया है।
  • Three-Tier Watch: मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और जिला कलेक्टरों के नेतृत्व में त्रिस्तरीय मजबूत निगरानी व्यवस्था बनाई गई है।

अभ्यास प्रश्न (Practice MCQs)

निम्नलिखित बहुविकल्पीय प्रश्नों के माध्यम से इस कूटनीतिक और आर्थिक विषय पर अपने ज्ञान का परीक्षण करें:

प्रश्न 1: हाल ही में 16 जुलाई 2026 को छत्तीसगढ़ विधानसभा द्वारा पारित ‘छत्तीसगढ़ ईज ऑफ डूइंग बिजनेस विधेयक, 2026’ के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

1. जोखिम आधारित व्यावसायिक अनुमति व्यवस्था लागू करने वाला छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य बन गया है।
2. इसके तहत उद्योगों के लिए प्रतिवर्ष लाइसेंस नवीनीकरण की अनिवार्यता को समाप्त कर दिया गया है।
उपरोक्त में से कौन सा/से कथन सत्य है/हैं?

(A) केवल 1
(B) केवल 2
(C) 1 और 2 दोनों
(D) न तो 1 और न ही 2

उत्तर: (C) 1 और 2 दोनों
व्याख्या: साय सरकार द्वारा पारित यह विधेयक देश में अपनी तरह का पहला कानून है, जो जोखिम-आधारित वर्गीकरण लागू करता है और प्रतिवर्ष लाइसेंस नवीनीकरण के झंझट को पूरी तरह समाप्त कर देता है।

प्रश्न 2: ‘Chhattisgarh Ease of Doing Business Bill 2026’ के तहत समय सीमा के भीतर सरकारी विभाग द्वारा निर्णय न लेने पर पात्र मामलों में अनुमति को स्वतः स्वीकृत मानने के प्रावधान को क्या कहा जाता है?

(A) प्रोएक्टिव परमिशन (Proactive Permission)
(B) स्वतः स्वीकृति या ऑटो-अप्रूवल (Deemed/Auto-approval)
(C) कंडीशनल अप्रूवल (Conditional Approval)
(D) स्व-घोषणा प्रमाण-पत्र

उत्तर: (B) स्वतः स्वीकृति या ऑटो-अप्रूवल (Deemed/Auto-approval)
व्याख्या: इस नए कानून के तहत यदि कोई विभाग निर्धारित समय सीमा के भीतर आवेदन पर कोई निर्णय या आपत्ति दर्ज नहीं करता है, तो पात्र मामलों में अनुमति को ‘डीम्ड अप्रूव्ड’ या ‘ऑटो-अप्रूव्ड’ मान लिया जाता है।

प्रश्न 3: इस नव-पारित व्यापार सुगमता कानून के पहले चरण के तहत राज्य सरकार के कुल कितने विभागों की 43 महत्वपूर्ण सेवाओं को शामिल किया गया है?

(A) 5 विभागों की
(B) 8 विभागों की
(C) 12 विभागों की
(D) 15 विभागों की

उत्तर: (B) 8 विभागों की
व्याख्या: इस कानून के पहले चरण के क्रियान्वयन के तहत राज्य शासन के 8 महत्वपूर्ण विभागों द्वारा प्रदान की जाने वाली 43 विशिष्ट नागरिक और व्यावसायिक सेवाओं को जोखिम आधारित अनुमति प्रणाली के दायरे में लाया गया है।

प्रश्न 4: इस ऐतिहासिक विधेयक (EoDB Bill 2026) के सुचारू और पारदर्शी क्रियान्वयन की देखरेख के लिए जिला स्तर पर गठित निगरानी समिति की अध्यक्षता किसके द्वारा की जाएगी?

(A) जिला पुलिस अधीक्षक (SP)
(B) जिला कलेक्टर (District Collector)
(C) स्थानीय विधायक
(D) जिला पंचायत मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO)

उत्तर: (B) जिला कलेक्टर (District Collector)
व्याख्या: इस कानून के प्रभावी अनुश्रवण के लिए त्रिस्तरीय ढांचा बनाया गया है, जिसमें जिला स्तर पर जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में निगरानी और समीक्षा समिति का गठन किया गया है।

प्रश्न 5: भारत सरकार का कौन सा विभाग राज्यों की ‘व्यापार सुगमता रैंकिंग’ (Business Reforms Action Plan – BRAP) का प्रतिवर्ष मूल्यांकन और घोषणा करता है?

(A) नीति आयोग (NITI Aayog)
(B) उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (DPIIT)
(C) कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय
(D) भारतीय रिजर्व बैंक (RBI)

उत्तर: (B) उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (DPIIT)
व्याख्या: केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के तहत कार्यरत ‘उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग’ (DPIIT) प्रतिवर्ष राज्यों की व्यापार सुगमता और सुधारों के क्रियान्वयन की राष्ट्रीय रैंकिंग (BRAP) जारी करता है।


Frequently Asked Questions (FAQs)

Q1. Chhattisgarh Ease of Doing Business Bill 2026 क्या है?

Chhattisgarh Ease of Doing Business Bill 2026 छत्तीसगढ़ विधानसभा द्वारा 16 जुलाई 2026 को पारित किया गया एक ऐतिहासिक व्यापार सुधार कानून है। यह व्यावसायिक स्थापना और संचालन अनुमतियों के लिए ‘जोखिम-आधारित’ और ‘विश्वास-आधारित’ प्रणाली लागू करने वाला देश का पहला अनूठा कानून है।

Q2. ‘जोखिम-आधारित’ व्यावसायिक अनुमति प्रणाली कैसे काम करती है?

इसके तहत उद्योगों और व्यवसायों को उनकी गतिविधियों के आधार पर ‘कम’, ‘मध्यम’ और ‘उच्च’ जोखिम श्रेणियों में बांटा जाता है। कम जोखिम वाले लघु उद्योगों और खुदरा व्यवसायों को बिना बार-बार के सरकारी भौतिक निरीक्षण के, स्व-घोषणा या अधिकृत पेशेवर के प्रमाण-पत्र पर तुरंत मंजूरी मिल जाएगी, जबकि उच्च जोखिम वाली परियोजनाओं के लिए तकनीकी परीक्षण की व्यवस्था यथावत रहेगी।

Q3. इस कानून के तहत ‘ऑटो-अप्रूवल’ (Auto-approval) का क्या मतलब है?

यदि कोई उद्यमी किसी सेवा के लिए आवेदन करता है और संबंधित सरकारी विभाग निर्धारित समय सीमा के भीतर उस पर कोई निर्णय नहीं लेता है या आपत्ति दर्ज नहीं करता है, तो कानून के तहत उस अनुमति को ‘स्वतः स्वीकृत’ (Deemed/Auto-approved) मान लिया जाएगा और डिजिटल सिस्टम द्वारा स्वतः लाइसेंस जारी कर दिया जाएगा।

Q4. इस नए विधेयक से छत्तीसगढ़ के एमएसएमई (MSME) क्षेत्र को क्या लाभ होगा?

इस कानून से राज्य के 15 लाख से अधिक एमएसएमई को सीधा लाभ मिलेगा। उन्हें हर साल लाइसेंस नवीनीकरण कराने की अनिवार्यता से मुक्ति मिल गई है। साथ ही, सोसाइटी पंजीकरण, भवन अनुज्ञा और पानी के कनेक्शन जैसी महत्वपूर्ण अनुमतियां केवल स्व-घोषणा और समयबद्ध ऑनलाइन प्रणाली से सुगमता से मिल सकेंगी।

Q5. इस कानून के क्रियान्वयन की निगरानी के लिए क्या संस्थागत व्यवस्था की गई है?

विधेयक के तहत एक मजबूत त्रिस्तरीय निगरानी प्रणाली बनाई गई है: 1. सर्वोच्च नीतिगत फैसलों के लिए मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में परिषद, 2. राज्य स्तर पर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में क्रियान्वयन समिति, और 3. जिला स्तर पर जिला कलेक्टरों के नेतृत्व में निगरानी समिति।


निष्कर्ष (Conclusion)

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के कुशल नेतृत्व में छत्तीसगढ़ विधानसभा द्वारा सर्वसम्मति से पारित किया गया यह विधेयक Chhattisgarh Ease of Doing Business Bill 2026 देश के औद्योगिक और व्यापारिक नियमन के इतिहास में एक युगप्रवर्तक मील का पत्थर है। जोखिम आधारित और विश्वास आधारित अनुमति व्यवस्था लागू करने वाला पहला राज्य बनकर छत्तीसगढ़ ने यह साबित कर दिया है कि सुसुशासन का वास्तविक अर्थ उद्योगों पर अनावश्यक ‘नियंत्रण रखना’ नहीं बल्कि उन्हें एक ‘विश्वसनीय सुविधा प्रदाता’ (Facilitator) का पारदर्शी वातावरण देना है।

एमएसएमई के लिए स्व-प्रमाणीकरण, स्वतः स्वीकृति (Auto-approval) और प्रतिवर्ष लाइसेंस नवीनीकरण के झंझट को समाप्त करना राज्य की लालफीताशाही और भ्रष्टाचार को समाप्त करने की दिशा में सबसे मजबूत आर्थिक प्रहार है। 15 लाख से अधिक स्थानीय सूक्ष्म और लघु उद्यमियों को प्रत्यक्ष लाभ पहुँचाने वाला यह कानून ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में स्वरोजगार के एक नए युग का सूत्रपात करेगा। यद्यपि पर्यावरण मानकों और श्रमिक अधिकारों की सुरक्षा के साथ इस विश्वास-आधारित प्रणाली का जमीनी स्तर पर संतुलन बनाए रखना प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती होगी, परंतु मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और जिला कलेक्टरों के नेतृत्व में बनाई गई त्रिस्तरीय निगरानी व्यवस्था इस कानून के पारदर्शी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करेगी। यह ऐतिहासिक विधायी सुधार अंततः छत्तीसगढ़ को देश का सबसे पसंदीदा और सुरक्षित निवेश हब बनाकर ‘विकसित छत्तीसगढ़’ के सपने को समयबद्ध तरीके से धरातल पर साकार करने की सबसे मजबूत और अजेय रीढ़ साबित होगा।

Official Sources:

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