Chhattisgarh Cyber Jagriti Abhiyan: 1.70 करोड़ नागरिकों तक पहुंचा पुलिस का सुरक्षा संदेश; म्यूल बैंक खातों पर सख्त कार्रवाई, 1930 से फ्रॉड पर रोक

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रायपुर, 18 अक्टूबर: डिजिटल तकनीक के अभूतपूर्व विस्तार ने जहाँ आम नागरिकों के दैनिक जीवन में मोबाइल बैंकिंग, ऑनलाइन पेमेंट और सोशल मीडिया को अनिवार्य बना दिया है, वहीं डिजिटल अरेस्ट, फर्जी निवेश (Stock Scam) और यूपीआई फ्रॉड जैसे साइबर अपराधों ने नई चुनौतियां भी खड़ी की हैं। इन परिस्थितियों में अपराधियों को पकड़ने के साथ-साथ अपराध होने से पहले ही नागरिकों को सजग बनाने की दूरगामी सोच के साथ छत्तीसगढ़ पुलिस ने देश के सबसे बड़े जन-जागरूकता अभियानों में से एक को सफलतापूर्वक पूरा किया है। Chhattisgarh Cyber Jagriti Abhiyan (छत्तीसगढ़ साइबर जागृति अभियान) के तहत 15 अगस्त से 2 अक्टूबर 2026 तक संचालित सात सप्ताह के विशेष अभियान में प्रदेश की 34 पुलिस इकाइयों ने 5 लाख से अधिक कार्यक्रम आयोजित कर रिकॉर्ड 1 करोड़ 70 लाख से अधिक नागरिकों तक सीधे साइबर सुरक्षा का सुरक्षा कवच पहुंचाया। इस दौरान आम जनता ने 5.5 लाख से अधिक अवेयरनेस सेल्फी लेकर इस अभियान को एक राज्यव्यापी जन-आंदोलन बना दिया।

मुख्य बिंदु (Key Highlights):

  • ‘Chhattisgarh Cyber Jagriti Abhiyan’: 34 पुलिस इकाइयों के माध्यम से 5 लाख से अधिक कार्यक्रम; 1.70 करोड़ नागरिकों तक सीधी पहुंच।
  • 7 विषय-आधारित सप्ताह: डिजिटल अरेस्ट, यूपीआई वित्तीय धोखाधड़ी, महिलाओं की ऑनलाइन सुरक्षा, फर्जी नौकरी और डेटा प्राइवेसी पर जागरूकता।
  • सोशल मीडिया पर 6 करोड़ व्यूज: भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) के सहयोग से 3,100 पोस्ट और 162 लघु फिल्मों की राष्ट्रीय प्रतियोगिता।
  • 8 जिलों के जमीनी नवाचार: रायपुर में बिजली बिलों पर चेतावनी संदेश, बिलासपुर में आकाशवाणी, जांजगीर में राखी अभियान और कोंडागांव में चेतना रथ।
  • म्यूल खातों और फर्जी सिम पर प्रहार: साइबर ठगी में प्रयुक्त किराए के बैंक खातों, संलिप्त बैंककर्मियों और अवैध सिम विक्रेताओं पर कड़ी कानूनी कार्रवाई।
  • हेल्पलाइन 1930 से रिकवरी दर में उछाल: उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने बताया—त्वरित रिपोर्टिंग से एफआईआर में आई कमी, रोकी जा रही ठगी की राशि।

Chhattisgarh Cyber Jagriti Abhiyan: 7 हफ्तों में 1.70 करोड़ नागरिकों तक सीधी पहुंच

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ पुलिस ने अपनी कार्यप्रणाली में बुनियादी बदलाव किया है।

Chhattisgarh Cyber Jagriti Abhiyan का मुख्य उद्देश्य केवल ठगी के बाद केस दर्ज करना नहीं, बल्कि नागरिकों को इतना तकनीकी रूप से सतर्क करना है कि वे जालसाजों के बिछाए जाल को पहली ही नजर में पहचान सकें। 15 अगस्त से शुरू होकर 2 अक्टूबर 2026 तक चले इस 7-सप्ताह के अभियान में पुलिस केवल शहरों के ऑडिटोरियम तक सीमित नहीं रही, बल्कि हाट-बाजारों, ग्राम पंचायतों, विशेष ग्राम सभाओं, स्कूलों, कॉलेजों और धार्मिक आयोजनों में जाकर किसानों, गृहिणियों, युवाओं और बुजुर्गों से सीधा संवाद किया।

7 विषय-आधारित सप्ताह: डिजिटल अरेस्ट, फर्जी निवेश और यूपीआई फ्रॉड से बचाव

अभियान को 7 अलग-अलग थीम वाले सप्ताहों में विभाजित कर हर प्रकार के साइबर खतरे की बारीकियों को आम जनता को समझाया गया:

  • 1. डिजिटल अरेस्ट और फर्जी कॉल से बचाव: नागरिकों को जागरूक किया गया कि पुलिस, सीबीआई, नारकोटिक्स या अदालत कभी भी वीडियो कॉल (WhatsApp/Skype) पर किसी को ‘डिजिटल अरेस्ट’ नहीं करती। डर दिखाकर पैसे ट्रांसफर कराने वालों से सावधान रहें।
  • 2. यूपीआई और ऑनलाइन बैंकिंग सुरक्षा: किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करने, अनजान क्यूआर (QR) कोड स्कैन न करने और कभी भी ओटीपी (OTP) व यूपीआई पिन साझा न करने के बुनियादी नियम सिखाए गए।
  • 3. फर्जी निवेश व पार्ट-टाइम जॉब का सच: टेलीग्राम ग्रुप्स, फर्जी ट्रेडिंग ऐप्स और घर बैठे टास्क पूरा कर लाखों रुपये कमाने के लुभावने विज्ञापनों की हकीकत समझाई गई।
  • 4. महिलाओं की सुरक्षा और डेटा गोपनीयता: सोशल मीडिया पर प्रोफाइल लॉक रखने, अनजान लोगों से वीडियो कॉल न उठाने और साइबर बुलिंग की रोकथाम पर युवतियों को प्रशिक्षित किया गया।

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जिलों के अनूठे नवाचार: बिजली बिल, राखी, चेतना रथ और आकाशवाणी से जागरूकता

इस अभियान की सबसे बड़ी ताकत जिला स्तर पर स्थानीय पुलिस द्वारा अपनी संस्कृति और दैनिक जीवन से जोड़कर किए गए नवाचार रहे, जिसके लिए 9 अक्टूबर को रायपुर के पं. दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित राज्यस्तरीय समारोह में 8 जिलों को सम्मानित किया गया:

  • रायपुर: जिले के लाखों उपभोक्ताओं के मासिक **बिजली बिलों पर साइबर ठगी से बचाव के चेतावनी संदेश** छपवाए गए, जो हर घर के ड्रॉइंग रूम तक पहुंचे।
  • बिलासपुर: आकाशवाणी के लाइव फोन-इन कार्यक्रम के माध्यम से पुलिस अधिकारियों ने लगभग **8 लाख श्रोताओं** के साइबर सुरक्षा से जुड़े सवालों के सीधे जवाब दिए।
  • जांजगीर-चांपा: रक्षाबंधन के पावन पर्व पर ‘एक राखी साइबर जागृति के नाम’ अभियान चलाकर 1 लाख 61 हजार लोगों तक सुरक्षा का संदेश पहुंचाया गया।
  • दुर्ग: ‘सुरक्षित दुर्ग, साइबर जागरूक दुर्ग’ अभियान में कॉलेज विद्यार्थियों ने नुक्कड़ नाटकों और प्रभात फेरियों से 15 हजार से अधिक नागरिकों को जागरूक किया।
  • कोंडागांव: वनांचल और अंदरूनी हाट-बाजारों तक संदेश पहुंचाने के लिए ऑडियो-वीडियो प्रचार सामग्री से लैस ‘साइबर चेतना रथ’ रवाना किए गए।
  • मुंगेली: ग्राम पंचायतों और विशेष ग्राम सभाओं के माध्यम से 15 हजार से अधिक ग्रामीणों को चौपाल पर बैठाकर साइबर फ्रॉड से बचने के उपाय सिखाए गए।
  • गरियाबंद: मितानिनों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और स्व-सहायता समूहों की 493 महिलाओं को विशेष मास्टर ट्रेनर बनाकर उनके जरिए गांव-गांव के परिवारों को जागरूक किया गया।
  • रायगढ़: राष्ट्रीय स्तर की लघु फिल्म प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसके माध्यम से युवाओं ने प्रभावशाली वीडियोज तैयार किए।

सोशल मीडिया पर 6 करोड़ व्यूज और 162 लघु फिल्में

भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C), गृह मंत्रालय के सहयोग से डिजिटल माध्यमों का व्यापक उपयोग किया गया। 3,100 से अधिक इन्फोग्राफिक्स, रील्स और वीडियो पोस्ट साझा किए गए, जिन्हें सोशल मीडिया पर 6.02 करोड़ (60.2 Million) से अधिक व्यूज मिले।

रायपुर में आयोजित राष्ट्रीय साइबर जागरूकता लघु फिल्म प्रतियोगिता में देश के 11 राज्यों के 35 जिलों से 162 फिल्में प्राप्त हुईं। इसके अतिरिक्त, कॉलेजों के तकनीकी युवाओं को ‘साइबर प्रहरी’ (Cyber Prahari) के रूप में जोड़ा गया, जो अब अपने मोहल्लों और सोशल मीडिया ग्रुप्स में साइबर सुरक्षा के नोडल वालंटियर के रूप में काम कर रहे हैं।

म्यूल बैंक खातों, फर्जी सिम और संगठित तस्कर गिरोह पर कड़ा प्रहार

जागरूकता के साथ-साथ छत्तीसगढ़ पुलिस ने साइबर अपराधियों के पूरे वित्तीय और तकनीकी बुनियादी ढांचे को ध्वस्त करने की समानांतर कार्रवाई की है:

  • म्यूल खातों (Mule Accounts) पर शिकंजा: गरीब और अनपढ़ ग्रामीणों को लालच देकर उनके नाम पर खोले जाने वाले ‘किराए के बैंक खातों’ की पहचान कर उन्हें फ्रीज किया गया। ऐसे खाते खोलने में मिलीभगत करने वाले बैंक कर्मचारियों पर भी सीधी एफआईआर दर्ज की गई।
  • फर्जी सिम नेटवर्क: बिना सत्यापन के थोक में प्री-एक्टिवेटेड सिम कार्ड बेचने वाले गिरोहों और पीओएस (POS) एजेंटों की धरपकड़ की गई।

हेल्पलाइन नंबर 1930 का त्वरित उपयोग: बढ़ रही रिकवरी दर

उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने स्पष्ट किया कि किसी भी साइबर धोखाधड़ी की स्थिति में पहले ‘गोल्डन ऑवर’ (पहले 2 से 4 घंटे) की भूमिका सबसे अहम होती है:

यदि नागरिक ठगी होते ही तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1090/1930 पर कॉल करते हैं या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराते हैं, तो पुलिस का साइबर सेल बैंक के नोडल अधिकारियों के साथ मिलकर ठगी गई राशि को जालसाज के खाते में ही फ्रीज कर देता है। पुलिस द्वारा 1930 के सघन प्रचार के कारण अब छत्तीसगढ़ में साइबर अपराधों की रिपोर्टिंग तेज हुई है, एफआईआर के मामलों में कमी आई है और नागरिकों के करोड़ों रुपये की रिकवरी दर में ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज की गई है।

“डिजिटल इंडिया के युग में मोबाइल हमारे हाथ का बैंक और पहचान बन चुका है। ऐसे में सतर्क नागरिक ही साइबर अपराधों के विरुद्ध सबसे मजबूत सुरक्षा कवच है। 1.70 करोड़ लोगों तक पुलिस का पहुंचना यह साबित करता है कि जनता अपनी सुरक्षा के प्रति जागरूक हो रही है। सात सप्ताह का यह अभियान कोई अंत नहीं, बल्कि एक निरंतर चलने वाली कार्यसंस्कृति की शुरुआत है। हमारा लक्ष्य है कि छत्तीसगढ़ का एक भी नागरिक अज्ञानता या डर की वजह से साइबर ठगी का शिकार न बने।”— विष्णु देव साय, मुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़ शासन (राज्यस्तरीय अभिनंदन समारोह संबोधन)

छत्तीसगढ़ पुलिस साइबर जागृति अभियान 2026: एक नजर में

  • अभियान का नाम: छत्तीसगढ़ पुलिस साइबर जागृति अभियान (7-सप्ताह विशेष अभियान)
  • अभियान अवधि: 15 अगस्त से 02 अक्टूबर 2026 (राज्यस्तरीय सम्मान: 09 अक्टूबर 2026)
  • शामिल पुलिस इकाइयां: प्रदेश की सभी 34 पुलिस इकाइयां (जिले एवं रेल पुलिस)
  • आयोजित कार्यक्रम: 5,00,000 (5 लाख) से अधिक जागरूकता कार्यक्रम
  • सीधी नागरिक पहुंच: 1,70,00,000 (1 करोड़ 70 लाख) से अधिक नागरिक
  • डिजिटल सहभागिता: 5.5 लाख+ अवेयरनेस सेल्फी | 6.02 करोड़+ सोशल मीडिया व्यूज (3,100+ पोस्ट्स)
  • राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर: 1930 (National Cyber Crime Helpline) एवं cybercrime.gov.in
  • सम्मानित 8 जिले: रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, जांजगीर-चांपा, मुंगेली, गरियाबंद, कोंडागांव, रायगढ़
  • प्रवर्तन कार्रवाई: म्यूल बैंक खाते, फर्जी सिम विक्रेता और संलिप्त बैंककर्मियों पर आपराधिक प्रकरण

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Chhattisgarh Cyber Jagriti Abhiyan के तहत कुल कितने नागरिकों तक पहुंच बनाई गई?

छत्तीसगढ़ पुलिस की 34 इकाइयों द्वारा 15 अगस्त से 2 अक्टूबर 2026 तक संचालित इस 7-सप्ताह के अभियान में 5 लाख से अधिक कार्यक्रम आयोजित कर रिकॉर्ड 1 करोड़ 70 लाख से अधिक नागरिकों तक सीधा सुरक्षा संदेश पहुंचाया गया।

साइबर ठगी होने की स्थिति में नागरिक को सबसे पहले क्या करना चाहिए?

किसी भी वित्तीय साइबर धोखाधड़ी की स्थिति में नागरिक को बिना किसी देरी के तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करना चाहिए या cybercrime.gov.in पोर्टल पर शिकायत दर्ज करनी चाहिए ताकि ठगी गई राशि को समय रहते फ्रीज कराया जा सके।

अभियान के दौरान जिलों द्वारा कौन-से अनूठे नवाचार किए गए?

रायपुर में बिजली बिलों पर चेतावनी संदेश छापे गए, जांजगीर में ‘एक राखी साइबर जागृति’ अभियान चला, बिलासपुर में आकाशवाणी पर फोन-इन हुआ, दुर्ग में नुक्कड़ नाटक और कोंडागांव में ‘साइबर चेतना रथ’ चलाए गए।

जागरूकता के साथ पुलिस ने साइबर अपराधियों के किस नेटवर्क पर प्रहार किया?

पुलिस ने साइबर ठगी में इस्तेमाल होने वाले म्यूल बैंक खातों (किराए के बैंक खाते), ऐसे खातों को खोलने में मदद करने वाले बैंक कर्मचारियों और फर्जी दस्तावेजों पर एक्टिवेटेड सिम कार्ड बेचने वाले गिरोहों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की।

आधिकारिक आलेख एवं स्रोत: पुलिस मुख्यालय (PHQ), छत्तीसगढ़ / गृह विभाग / जनसंपर्क संचालनालय (DPR Raipur), छत्तीसगढ़ शासन

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