रायपुर, 20 सितम्बर 2026: सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों (MSME) और विनिर्माण क्षेत्र को सुदृढ़ बनाकर वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ की तर्ज पर ‘विकसित छत्तीसगढ़’ के निर्माण के लिए राज्य सरकार ने एक ठोस और दीर्घकालिक आर्थिक रोडमैप तैयार किया है। राजधानी रायपुर के साइंस कॉलेज परिसर में लघु उद्योग भारती द्वारा आयोजित 14वें ‘इंडिया इंडस्ट्रियल फेयर’ को संबोधित करते हुए छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी ने घोषणा की कि राज्य के योजना विभाग द्वारा मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में Chhattisgarh Anjor Vision Document तैयार कराया गया है, जो देश के अग्रणी राज्यों के साथ छत्तीसगढ़ के संतुलित और तीव्र विकास की दिशा तय करेगा।
समारोह में वित्त मंत्री श्री चौधरी ने प्रदेश में एमएसएमई, स्टार्टअप्स, विनिर्माण, रोजगार और निजी निवेश को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य पर कार्य कर रहा है और भारत की अर्थव्यवस्था अब एक ऐतिहासिक ‘लंबी छलांग’ लगाने के लिए पूरी तरह तैयार है। इस महायज्ञ में छत्तीसगढ़ अपनी प्राकृतिक संपदा और मानव संसाधनों के बल पर अग्रणी भूमिका निभाएगा। इसके लिए दूरगामी 2047 के लक्ष्य के साथ-साथ वर्ष 2030 और 2035 जैसे मध्यकालिक लक्ष्य तथा वार्षिक कार्ययोजनाएं तय की जा रही हैं, ताकि विजन को चरणबद्ध रूप से धरातल पर उतारा जा सके।
देश के आर्थिक इतिहास का उल्लेख करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि भारत ने अतीत में ’21वीं सदी’ और ‘विजन 2020’ जैसे नारे देखे, लेकिन उनके क्रियान्वयन के लिए आवश्यक संरचनात्मक सुधारों और दीर्घकालिक नीतियों का अभाव रहा। उन्होंने रेखांकित किया कि वर्ष 1991 के गंभीर आर्थिक संकट से सीख लेते हुए आज भविष्य की मजबूत अर्थव्यवस्था गढ़ी जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश में सर्विस सेक्टर का तेजी से विस्तार हुआ है, लेकिन रोजगार के व्यापक अवसर पैदा करने के लिए अब ‘लेबर-इंटेंसिव मैन्युफैक्चरिंग’ (Labor-Intensive Manufacturing) और लघु उद्योगों को मजबूती देना अनिवार्य है, जो स्थानीय सप्लाई चेन की रीढ़ हैं।
| अंज़ोर विजन एवं 14वां इंडस्ट्रियल फेयर: मुख्य तथ्य (Quick Facts) | विवरण |
|---|---|
| मुख्य विजन दस्तावेज | Chhattisgarh Anjor Vision Document (योजना विभाग द्वारा तैयार) |
| लक्ष्य कालखंड | दीर्घकालिक: 2047 | मध्यकालिक: 2030 एवं 2035 | साथ ही वार्षिक लक्ष्य |
| संबोधनकर्ता | श्री ओ.पी. चौधरी (वित्त मंत्री, छत्तीसगढ़ शासन) |
| आयोजन एवं स्थल | 14वां इंडिया इंडस्ट्रियल फेयर, साइंस कॉलेज परिसर, रायपुर |
| आयोजक संस्था | लघु उद्योग भारती |
| आर्थिक प्राथमिकताएं | लेबर-इंटेंसिव मैन्युफैक्चरिंग, एमएसएमई, स्टार्टअप्स एवं सप्लाई चेन सुदृढ़ीकरण |
| उल्लेखित ऐतिहासिक सबक | वर्ष 1991 का आर्थिक संकट एवं पूर्ववर्ती योजनाओं में रोडमैप का अभाव |
‘छत्तीसगढ़ अंज़ोर विजन डॉक्यूमेंट’: 2030, 2035 और 2047 की चरणबद्ध रणनीति
वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी ने Chhattisgarh Anjor Vision Document के नीतिगत स्वरूप को स्पष्ट करते हुए कहा:
- योजना विभाग का खाका: मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य के योजना विभाग द्वारा यह विजन डॉक्यूमेंट तैयार कराया गया है, ताकि 2047 तक विकसित भारत के निर्माण में छत्तीसगढ़ की प्रभावी और मजबूत भागीदारी सुनिश्चित हो सके।
- चरणबद्ध लक्ष्य निर्धारण: 2047 का लक्ष्य केवल एक दूरगामी कल्पना नहीं है। इसे व्यावहारिक रूप देने के लिए वर्ष 2030 (एसडीजी लक्ष्य) और वर्ष 2035 के मध्यकालिक पड़ाव तय किए गए हैं, जिन्हें वार्षिक लक्ष्यों और बजट आवंटनों से जोड़ा जा रहा है।
- विरासत और विकास का समन्वय: विकास के साथ-साथ छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, जनजातीय पहचान और पर्यावरण संरक्षण को भी विजन का अभिन्न हिस्सा बनाया गया है।
1991 के आर्थिक संकट का सबक: दीर्घकालिक संरचनात्मक सुधारों की अनिवार्यता
आर्थिक नीतियों के ऐतिहासिक विश्लेषण पर प्रकाश डालते हुए वित्त मंत्री ने कहा:
- अतीत की कमियां: भारत ने पहले भी ’21वीं सदी’ और ‘विजन 2020’ जैसे बड़े लक्ष्य निर्धारित किए, लेकिन उनके अनुरूप आवश्यक संरचनात्मक सुधारों और दीर्घकालिक कार्ययोजनाओं के अभाव में वे लक्ष्य पूरी तरह प्राप्त नहीं हो सके।
- 1991 का संकट: वर्ष 1991 का विदेशी मुद्रा संकट देश के लिए एक गंभीर चेतावनी था। उस दौर की परिस्थितियों से सबक लेते हुए आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बुनियादी ढांचे, नवीकरणीय ऊर्जा और रणनीतिक क्षेत्रों में भारी पूंजी निवेश किया जा रहा है, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था खड़ी की जा सके।
लेबर-इंटेंसिव मैन्युफैक्चरिंग: रोजगार सृजन का सबसे बड़ा आधार
वित्त मंत्री ने भारतीय अर्थव्यवस्था में रोजगार की प्रकृति पर गंभीर विचार रखे:
- सर्विस सेक्टर बनाम मैन्युफैक्चरिंग: भारत में आईटी और सेवा क्षेत्र का विस्तार तीव्र रहा है, लेकिन केवल सर्विस सेक्टर करोड़ों युवाओं को रोजगार नहीं दे सकता। इसके लिए मैन्युफैक्चरिंग और विशेषकर श्रम-सघन विनिर्माण (Labor-Intensive Manufacturing) को तेजी से बढ़ावा देना होगा।
- लघु उद्योग और सप्लाई चेन: छोटे और मध्यम उद्योग (MSME) न केवल स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार और रोजगार पैदा करते हैं, बल्कि बड़े उद्योगों के लिए मजबूत ‘सप्लाई चेन’ का निर्माण भी करते हैं।
- अनुकूल औद्योगिक वातावरण: राज्य सरकार नीतिगत सुधारों, सिंगल विंडो क्लीयरेंस और निवेश-अनुकूल नीतियों के माध्यम से छत्तीसगढ़ में ऐसा माहौल तैयार कर रही है जिससे एमएसएमई और स्टार्टअप्स को नई ऊर्जा मिले।
CGPSC Static Facts: राज्य योजना आयोग, 1991 का संकट एवं विनिर्माण अर्थशास्त्र (100% प्रामाणिक तथ्य)
प्रतियोगी परीक्षाओं (CGPSC राज्य सेवा परीक्षा Paper-5 भारत एवं छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था तथा Paper-2 लोक प्रशासन) के दृष्टिकोण से मानक तथ्य:
- छत्तीसगढ़ राज्य योजना आयोग (State Planning Commission):
- संरचना: राज्य योजना आयोग के पदेन अध्यक्ष मुख्यमंत्री होते हैं। योजना विभाग (Planning Department) इसके प्रशासनिक कार्यों और दीर्घकालिक विजन दस्तावेजों (जैसे ‘अंज़ोर विजन@2047’) के निर्माण के लिए नोडल एजेंसी है।
- कार्य: सतत विकास लक्ष्यों (SDG 2030) की निगरानी, राज्य की वार्षिक योजनाओं का समन्वय और आर्थिक प्राथमिकताओं का निर्धारण।
- वर्ष 1991 का आर्थिक संकट एवं एलपीजी (LPG) सुधार:
- पृष्ठभूमि: वर्ष 1991 में भारत भुगतान संतुलन (Balance of Payments – BoP) के गंभीर संकट से घिरा, जहाँ विदेशी मुद्रा भंडार मात्र 2-3 सप्ताह के आयात के लिए बचा था।
- सुधार: तत्कालीन सरकार ने उदारीकरण (Liberalisation), निजीकरण (Privatisation) और वैश्वीकरण (Globalisation) पर आधारित ‘नई आर्थिक नीति 1991’ लागू की, जिसने भारतीय अर्थव्यवस्था को बाजार-उन्मुख बनाया।
- लेबर-इंटेंसिव बनाम कैपिटल-इंटेंसिव मैन्युफैक्चरिंग:
- श्रम-सघन (Labor-Intensive): वे उद्योग जहाँ पूंजी की तुलना में मानव श्रम का अधिक उपयोग होता है (जैसे टेक्सटाइल, परिधान, खाद्य प्रसंस्करण, चमड़ा, हस्तशिल्प)। नीति आयोग के अनुसार, कृषि से अतिरिक्त श्रम बल को अवशोषित करने के लिए यह क्षेत्र अनिवार्य है।
- पूंजी-सघन (Capital-Intensive): वे उद्योग जहाँ भारी मशीनरी और पूंजी अधिक लगती है लेकिन रोजगार सीमित होता है (जैसे स्टील, सीमेंट, रिफाइनरी)। छत्तीसगढ़ ऐतिहासिक रूप से पूंजी-सघन उद्योगों का केंद्र रहा है, जिसे अब श्रम-सघन विनिर्माण की ओर मोड़ा जा रहा है।
विश्लेषण: ‘अंज़ोर विजन’ का कालखंड ढांचा और संरचनात्मक रोजगार रूपांतरण
(UPSC/CGPSC Mains Analysis – Industrial Economics, Employment Elasticity & Planning)
1. ‘विजन स्लोगन’ से ‘समयबद्ध पड़ाव’ (2030-2035-2047) का संक्रमण: वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी द्वारा 1991 के संकट और ‘विजन 2020’ की विफलताओं का विश्लेषण अत्यंत यथार्थवादी है। Chhattisgarh Anjor Vision Document की सबसे बड़ी शक्ति यह है कि यह 2047 के अमूर्त लक्ष्य को 2030 (एसडीजी समय-सीमा) और 2035 के मापने योग्य लक्ष्यों (Measurable Indicators) में विभाजित करता है। जब दीर्घकालिक विजन को वार्षिक राज्य बजट और विभागीय आउटकम बजट (Outcome Budgeting) से जोड़ा जाता है, तो नीतिगत भटकाव समाप्त होता है।
2. रोजगार लोच (Employment Elasticity) और एमएसएमई का महत्व: भारी उद्योगों (स्टील, स्पंज आयरन, एल्युमिनियम) में प्रति करोड़ रुपये के निवेश पर मुश्किल से 2 से 3 प्रत्यक्ष नौकरियां पैदा होती हैं, जबकि एमएसएमई और लेबर-इंटेंसिव मैन्युफैक्चरिंग में प्रति करोड़ निवेश पर 20 से 25 रोजगार सृजित होते हैं। छत्तीसगढ़ जैसे युवा बहुल राज्य में जहाँ कृषि पर 70% से अधिक जनसंख्या निर्भर है, कृषि से गैर-कृषि क्षेत्र में श्रम का शांतिपूर्ण स्थानांतरण केवल लघु उद्योगों और खाद्य प्रसंस्करण के माध्यम से ही संभव है। ‘अंज़ोर विजन’ इसी संरचनात्मक आर्थिक परिवर्तन (Structural Transformation) की आधारशिला रखता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Q1. Chhattisgarh Anjor Vision Document किस विभाग द्वारा तैयार कराया गया है और इसका लक्ष्य क्या है?
यह विजन दस्तावेज मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य के योजना विभाग द्वारा तैयार कराया गया है, जिसका लक्ष्य 2047 तक विकसित भारत के साथ विकसित छत्तीसगढ़ का निर्माण करना है।
Q2. वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने दीर्घकालिक विजन को लागू करने के लिए किन मध्यकालिक लक्ष्यों का उल्लेख किया?
वित्त मंत्री ने बताया कि वर्ष 2047 के दीर्घकालिक लक्ष्य को चरणबद्ध तरीके से धरातल पर उतारने के लिए वर्ष 2030 और वर्ष 2035 जैसे मध्यकालिक लक्ष्यों के साथ वार्षिक लक्ष्य तय किए जा रहे हैं।
Q3. रोजगार सृजन के लिए वित्त मंत्री ने किस विशिष्ट प्रकार के विनिर्माण पर विशेष जोर दिया?
वित्त मंत्री ने सर्विस सेक्टर के साथ-साथ रोजगार के व्यापक अवसर पैदा करने के लिए ‘लेबर-इंटेंसिव मैन्युफैक्चरिंग’ (श्रम-सघन विनिर्माण), लघु उद्योगों और एमएसएमई को मजबूत करने पर जोर दिया।
स्रोत (Source)
छत्तीसगढ़ जनसंपर्क विभाग (DPR Chhattisgarh) आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति, 20 सितम्बर 2026.
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