रायपुर | 21 अगस्त 2026
छत्तीसगढ़ में स्कूली शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, शिक्षकों की कमी को दूर करने, बहुभाषी पाठ्यपुस्तकों के निर्माण और एआई (AI) आधारित तकनीकी मॉनिटरिंग को सुनिश्चित करने की दिशा में राज्य सरकार द्वारा बड़ा नीतिगत कदम उठाया गया है। आज 21 अगस्त 2026 को रायपुर स्थित छत्तीसगढ़ संवाद सभागार में आयोजित एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए स्कूल शिक्षा मंत्री श्री गजेंद्र यादव और विभागीय सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) के तहत किए गए कड़े सुधारों और नीतिगत बदलावों को प्रदर्शित करते हुए छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा विभाग उपलब्धियां के तहत विगत दो वर्षों का विस्तृत रिपोर्ट कार्ड जारी किया है।
इस रिपोर्ट के अनुसार, साय सरकार का मूल उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, तकनीक-सक्षम, समावेशी और पूरी तरह से विद्यार्थी-केंद्रित बनाना है। इसके तहत वनांचल और बस्तर के दूरस्थ अंचलों में बंद हो चुके स्कूलों को फिर से सक्रिय किया गया है, तथा शिक्षकों की ऑनलाइन उपस्थिति के लिए ‘टीके एप्प’ (TK App) जैसी डिजिटल विधाओं को सफलतापूर्वक धरातल पर उतारा गया है।
| महत्वपूर्ण संकेतक | छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा विभाग उपलब्धियां (2024-2026) के मुख्य आंकड़े व सांख्यिकी |
|---|---|
| मुख्य रिपोर्ट शीर्षक | छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा विभाग उपलब्धियां (विगत दो वर्षों का लेखा-जोखा) |
| विभागीय नेतृत्व | स्कूल शिक्षा मंत्री श्री गजेंद्र यादव एवं सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह |
| स्कूलों का युक्तियुक्तकरण (RTE) | NEP-2020 के तहत 10,538 स्कूलों एवं 15,165 शिक्षकों का सफल समायोजन |
| शिक्षक भर्ती और पदोन्नतियां | 2,104 पदों पर सीधी भर्ती संपन्न; विगत दो वर्षों में 7,000 से अधिक पदोन्नतियां |
| ऐतिहासिक भाषा-चित्रण (Mapping) | स्थानीय बोलियों (गोंडी, हल्बी, सादरी) के लिए देश का पहला भाषा-चित्रण राज्य |
| डिजिटल उपस्थिति ट्रैकिंग | ‘टीके एप्प’ (TK App) के माध्यम से प्रतिदिन लगभग 85% शिक्षकों की ऑनलाइन उपस्थिति |
| तकनीकी विद्या समीक्षा केंद्र | एआई (AI) आधारित निगरानी प्रणाली; बारकोड ट्रैकिंग से ₹40 करोड़ की बजटीय बचत |
| उत्कृष्ट विद्यालय योजना बजट | 150 स्वामी विवेकानंद उत्कृष्ट विद्यालयों के भवन निर्माण हेतु ₹100 करोड़ स्वीकृत |
प्रशासनिक कसावट, युक्तियुक्तकरण और छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा विभाग उपलब्धियां
राज्य के शासकीय स्कूलों में छात्र-शिक्षक अनुपात (PTR) को संतुलित करने और शिक्षकविहीन स्कूलों की समस्या को समाप्त करने के लिए विभाग ने क्रांतिकारी नीतिगत निर्णय लिए हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 और शिक्षा का अधिकार अधिनियम-2009 (RTE) के प्रावधानों के तहत स्कूलों के युक्तियुक्तकरण का ऐतिहासिक कदम उठाना छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा विभाग उपलब्धियां में प्रमुखता से दर्ज है:
- शिक्षकों और स्कूलों का सफल समायोजन: इसके तहत प्रदेश के कुल 10,538 विद्यालयों का समायोजन किया गया, जिससे 15,165 शिक्षकों एवं प्राचार्यों को उनकी योग्यता के अनुसार सही स्कूलों में स्थानांतरित किया गया। इस प्रक्रिया से 453 शिक्षकविहीन स्कूलों और 4,729 एकल-शिक्षकीय स्कूलों में पर्याप्त शिक्षकों की व्यवस्था कड़ाई से की गई है।
- पारदर्शी पदोन्नतियां और त्वरित भर्ती: विगत दो वर्षों में कुल 2,813 प्राचार्यों (टी-संवर्ग में 1,335 और ई-संवर्ग में 1,478) और 1,798 व्याख्याताओं की कड़ाई से पदोन्नति की गई है। इसके साथ ही, 2,104 शैक्षणिक पदों पर सीधी भर्ती की जा चुकी है, तथा 5,000 अन्य पदों पर भर्ती परीक्षा वर्तमान में प्रक्रियाधीन है।
- संविदा भर्ती हेतु सीबीटी (CBT) परीक्षा: स्वामी आत्मानंद और विवेकानंद उत्कृष्ट स्कूलों में 3,066 संविदा पदों पर भर्ती के लिए पहली बार ‘कंप्यूटर आधारित परीक्षा’ (CBT) शुरू की गई है, जिससे पूरी प्रक्रिया मानवीय हस्तक्षेप से मुक्त और पारदर्शी हो गई है।
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भाषा-चित्रण, बहुभाषी शिक्षा और नवीन पाठ्यपुस्तकों का निर्माण
छत्तीसगढ़ की जनजातीय और स्थानीय बोलियों को प्रारंभिक शिक्षा का माध्यम बनाकर बच्चों में सीखने की क्षमता (FLN) को सुदृढ़ करने के प्रयास किए गए हैं। इसके अतिरिक्त, छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा विभाग उपलब्धियां के अंतर्गत भाषा-चित्रण (Language Mapping) करने वाला देश का पहला राज्य बनना एक बहुत बड़ा वैज्ञानिक प्रयास है:
- स्थानीय बोलियों में पाठ्यपुस्तकें: कक्षा 1 और 2 के बच्चों के लिए 16 स्थानीय बोलियों (जैसे गोंडी, हल्बी, सादरी, सरगुजिहा) तथा 4 अंतर-राज्यीय भाषाओं में विशेष पाठ्यपुस्तकों का निर्माण किया गया है। इसके लिए बस्तर संभाग में 2,700 और सरगुजा संभाग में 2,368 शिक्षकों को विशेष द्विभाषी प्रशिक्षण प्रदान किया गया है।
- सरस्वती साइकिल और निःशुल्क गणवेश: स्कूली छात्राओं को सुरक्षित स्कूल पहुँच प्रदान करने के लिए ‘सरस्वती साइकिल योजना’ के तहत 1.62 लाख बालिकाओं को साइकिलें दी गईं। साथ ही कक्षा 1 से 8 तक के 28.63 लाख विद्यार्थियों को निःशुल्क गणवेश तथा 45.33 लाख छात्रों को सत्र प्रारंभ से पूर्व पुस्तकें वितरित की गईं।
विद्या समीक्षा केंद्र, एआई-आधारित निगरानी और छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा विभाग उपलब्धियां
आधुनिक प्रशासनिक सुशासन (Smart Governance) के तहत स्कूलों की दैनिक गतिविधियों की रीयल-टाइम ट्रैकिंग के लिए सूचना प्रौद्योगिकी का कड़ा उपयोग किया जा रहा है। डिजिटल नवाचारों के तहत विद्या समीक्षा केंद्र की स्थापना ने छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा विभाग उपलब्धियां के रिपोर्ट कार्ड को राष्ट्रीय स्तर पर अत्यधिक विश्वसनीय और पारदर्शी बनाया है:
- एआई (AI) आधारित विद्या समीक्षा केंद्र: इस उन्नत केंद्र के माध्यम से स्कूलों की अधोसंरचना, पेयजल, शौचालय, पीएम पोषण (मिड-डे मील) और ‘टीके एप्प’ के जरिए शिक्षकों की दैनिक उपस्थिति (जो वर्तमान में रिकॉर्ड 85% है) की कड़ाई से डिजिटल निगरानी की जा रही है।
- बारकोड आधारित पाठ्यपुस्तक ट्रैकिंग: पुस्तकों के पारदर्शी वितरण और भौतिक सत्यापन के लिए बारकोड/स्कैनिंग व्यवस्था लागू की गई, जिससे पुस्तकों की कालाबाजारी रुकी और राज्य शासन को करीब ₹40 करोड़ की बड़ी बजटीय बचत हुई है।
- नियत नेल्ला नार और बंद स्कूल: बस्तर संभाग के नक्सल प्रभावित अंदरूनी क्षेत्रों में नियत नेल्ला नार योजना के तहत 97% गांवों में प्राथमिक शालाएं स्थापित की जा चुकी हैं। यहाँ 573 ‘शिक्षा दूतों’ की नियुक्ति कर 48 बंद स्कूलों को फिर से शुरू किया गया है तथा 36 नए स्कूल खोले गए हैं।
- विशेष पिछड़ी जनजातियों (PVTGs) हेतु छात्रावास: प्रधानमंत्री जनमन योजना के तहत 13 जिलों में 40 विशेष पिछड़ी जनजातियों के बच्चों के लिए पीवीटीजी छात्रावास स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें से 21 का निर्माण शुरू हो चुका है, तथा 33,000 से अधिक बच्चे पहले से ही 156 आवासीय विद्यालयों में रह रहे हैं।
UPSC & CGPSC Science & Social Welfare Fact Box: Vidya Samiksha Kendra, NEP & PESA
- विद्या समीक्षा केंद्र (VSK): यह शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के तहत स्थापित एक एआई-संचालित (AI-powered) डेटा रिपोजिटरी और मॉनिटरिंग सेंटर है, जो पीएम पोषण, यू-डाइस (UDISE+), और शिक्षकों की डिजिटल हाजिरी को एकीकृत कर ‘डेटा-संचालित नीतिगत निर्णय’ लेने की सुविधा प्रदान करता है।
- भाषा-चित्रण (Language Mapping): किसी क्षेत्र विशेष में बोली जाने वाली विभिन्न भाषाओं/बोलियों के भौगोलिक वितरण का वैज्ञानिक प्रलेखन करना। छत्तीसगढ़ ऐसा करने वाला देश का पहला राज्य है, जिसने प्रारंभिक शिक्षा (Class 1-3) को मातृभाषा में देने की एनईपी-2020 की नीति को धरातल पर उतारा है।
- सरस्वती साइकिल योजना: छत्तीसगढ़ की एक महत्वपूर्ण लोक-कल्याणकारी योजना है, जिसके तहत कक्षा 9वीं में प्रवेश लेने वाली अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और बीपीएल परिवारों की बालिकाओं को निःशुल्क साइकिल दी जाती है ताकि उनकी ड्रॉप-आउट दर को रोका जा सके।
UPSC & State PCS Mains Analysis: राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का विकेंद्रीकृत क्रियान्वयन, बहुभाषिकता और सामाजिक पूंजी
मुख्य परीक्षा के समाजशास्त्र, शिक्षा के अर्थशास्त्र (Economics of Education) और नीतिगत सुशासन के दृष्टिकोण से, छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा विभाग उपलब्धियां का यह कड़ा प्रशासनिक प्रारूप भारत की बहुभाषिकता (Multilingualism) को राष्ट्रीय सामाजिक पूंजी में बदलने का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रमुख सिद्धांतों के अनुसार, बच्चे अपनी मातृभाषा या स्थानीय बोली में जटिल अवधारणाओं को अधिक तीव्रता और स्पष्टता से समझते हैं, जिससे उनके संज्ञानात्मक विकास (Cognitive Development) को बढ़ावा मिलता है।
छत्तीसगढ़ जैसे जनजातीय बहुल और भाषाई रूप से विविध राज्य में, बस्तर और सरगुजा की 16 बोलियों में द्विभाषी पाठ्यपुस्तकें तैयार करना और 5,000 से अधिक शिक्षकों को तदनुसार प्रशिक्षित करना सामाजिक समावेशन (Social Inclusion) का बेहतरीन नमूना है। यह प्रयोग न केवल आदिवासी बच्चों की ड्रॉप-आउट दर को कड़ाई से नियंत्रित करता है, बल्कि ‘नियत नेल्ला नार’ जैसी पहलों के माध्यम से बस्तर के सुदूर बंद पड़े स्कूलों को पुनः सक्रिय कर उग्रवाद-प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा और विकास के बीच रणनीतिक सेतु का काम करता है। यह समग्र और एआई-सक्षम सुशासन सीधे तौर पर संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (SDG-4: गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, SDG-10: असमानताओं में कमी, और SDG-5: लैंगिक समानता) के समयबद्ध लक्ष्यों को पूरा करने में छत्तीसगढ़ के मानव पूंजी निर्माण की सबसे मजबूत प्रशासनिक रीढ़ साबित होगा।
अभ्यास प्रश्न (Practice MCQs)
निम्नलिखित बहुविकल्पीय प्रश्नों के माध्यम से इस महत्वपूर्ण स्कूली शिक्षा रिपोर्ट और छत्तीसगढ़ के शैक्षणिक सामान्य ज्ञान पर अपने ज्ञान का परीक्षण करें:
प्रश्न 1: हाल ही में रायपुर में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में रेखांकित की गई छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा विभाग उपलब्धियां रिपोर्ट के अनुसार, पाठ्यपुस्तक वितरण प्रणाली में बारकोड-आधारित ट्रैकिंग को लागू करने से राज्य शासन को कितने करोड़ रुपये की बजटीय बचत हुई है?
(A) ₹10 करोड़ की
(B) ₹40 करोड़ की (Direct savings of ₹40 Crore)
(C) ₹100 करोड़ की
(D) ₹25 करोड़ की
उत्तर: (B) ₹40 करोड़ की (Direct savings of ₹40 Crore)
व्याख्या: स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा पुस्तकों के पारदर्शी वितरण और भौतिक सत्यापन के लिए लागू की गई बारकोड स्कैनिंग तकनीक के कारण अपव्यय और लीकेज रुका, जिससे राज्य सरकार को ₹40 करोड़ की प्रत्यक्ष बचत हुई है।
प्रश्न 2: राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) के सिद्धांतों के अनुकूल, छत्तीसगढ़ देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है जिसने अपनी जनजातीय और स्थानीय बोलियों के संरक्षण और शैक्षणिक उपयोग के लिए कौन-सा वैज्ञानिक सर्वेक्षण पूरा किया है?
(A) छत्तीसगढ़ शैक्षिक डिजिटल एटलस
(B) भाषा-चित्रण (Language Mapping of Chhattisgarh)
(C) मोर बोली-मोर साक्षरता सर्वेक्षण
(D) बस्तर भाषाई सुशासन सूचकांक
उत्तर: (B) भाषा-चित्रण (Language Mapping of Chhattisgarh)
व्याख्या: छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य है जिसने स्कूली शिक्षा में स्थानीय बोलियों के कुशल समावेश के लिए ‘भाषा-चित्रण’ (Language Mapping) की वैज्ञानिक प्रक्रिया को पूरा कर शिक्षकों को तदनुसार प्रशिक्षित किया है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
Q1. छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा विभाग उपलब्धियां के तहत शिक्षकों की ऑनलाइन उपस्थिति के लिए कौन-सा मोबाइल एप्लिकेशन क्रियान्वित किया जा रहा है?
छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा विभाग उपलब्धियां रिपोर्ट के अनुसार, शिक्षकों की नियमित और पारदर्शी उपस्थिति दर्ज करने के लिए आधार-आधारित ‘टीके एप्प’ (TK App) क्रियान्वित किया जा रहा है, जिससे वर्तमान में प्रतिदिन लगभग 85% शिक्षकों की ऑनलाइन हाजिरी दर्ज हो रही है।
Q2. बजट वर्ष 2026-27 के तहत ‘स्वामी विवेकानंद उत्कृष्ट विद्यालय योजना’ के लिए क्या प्रावधान किए गए हैं?
चालू वित्तीय वर्ष के बजट में राज्य के प्रत्येक विकासखंड में कम से कम एक उत्कृष्ट विद्यालय स्थापित करने के उद्देश्य से 150 स्वामी विवेकानंद उत्कृष्ट विद्यालयों के भवन निर्माण और सुचारू संचालन के लिए ₹100 करोड़ का कड़ा बजटीय प्रावधान किया गया है।
Q3. विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (PVTGs) के बच्चों के लिए छात्रावास निर्माण के लिए क्या कदम उठाए गए हैं?
प्रधानमंत्री जनमन योजना के अंतर्गत छत्तीसगढ़ के 13 संवेदनशील जिलों में 40 पीवीटीजी (PVTG) छात्रावास स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें से 21 का निर्माण कार्य द्रुत गति से जारी है, ताकि इन बच्चों को स्कूलों के समीप आवासीय सुविधा मिल सके।
तीन मुख्य निष्कर्ष (3 Key Takeaways)
- शिक्षकीय ढाँचे का सुदृढ़ीकरण: छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा विभाग उपलब्धियां के अंतर्गत पिछले दो वर्षों में 2,813 प्राचार्यों और 1,798 व्याख्याताओं की पारदर्शी पदोन्नति की गई है तथा आरटीई मानकों के अनुकूल 10,538 स्कूलों का सफल युक्तियुक्तकरण किया गया है।
- बहुभाषिक शिक्षा में राष्ट्रीय कीर्तिमान: स्थानीय बोलियों (कर्मा, गोंडी, हल्बी, सादरी) के संरक्षण के लिए छत्तीसगढ़ देश का पहला भाषा-चित्रण (Language Mapping) करने वाला राज्य बन गया है, जिससे कक्षा 1 से 3 तक के बच्चों को मातृभाषा में शिक्षा दी जा रही है।
- एआई (AI) आधारित स्मार्ट सुशासन: ‘विद्या समीक्षा केंद्र’ की स्थापना और बारकोड पाठ्यपुस्तक ट्रैकिंग प्रणालियों के कुशल उपयोग ने शिक्षा व्यवस्था में पूर्ण पारदर्शिता लाई है और राज्य के राजस्व की भारी बचत की है।
UPSC & CGPSC Relevance (यूपीएससी और सीजीपीएससी प्रासंगिकता)
यह विषय मुख्य रूप से सीजीपीएससी मुख्य परीक्षा पेपर-6 (छत्तीसगढ़ का सामाजिक परिदृश्य, महत्वपूर्ण लोक-कल्याणकारी योजनाएं, शिक्षा का अधिकार, जनजातीय विकास), पेपर-3 (छत्तीसगढ़ का प्रशासनिक ढांचा), तथा संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के सामान्य अध्ययन पेपर-2 (सरकारी नीतियां और उनका क्रियान्वयन, सामाजिक क्षेत्र/शिक्षा का विकास और प्रबंधन, राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का क्रियान्वयन, और डिजिटल सुशासन सुधार) के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण और प्रासंगिक समसामयिक विषय है।
Official Source (आधिकारिक स्रोत)
यह लेख छत्तीसगढ़ शासन के स्कूल शिक्षा विभाग, पत्र सूचना कार्यालय (PIB/DPRCG), राष्ट्रीय शिक्षा नीति राज्य क्रियान्वयन विंग, और स्कूल शिक्षा मंत्री श्री गजेंद्र यादव की अध्यक्षता में 21 अगस्त 2026 को रायपुर में आयोजित विभागीय प्रेस कॉन्फ्रेंस के आधिकारिक विवरणों और सांख्यिकीय प्रगति प्रतिवेदनों पर आधारित है।
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