BSL-3 Lab IGKV Raipur: कृषि विश्वविद्यालय में शुरू हुई हाईटेक बायोसेफ्टी लैब; वैक्सीन रिसर्च और संक्रामक रोगों की रोकथाम को मिलेगी नई गति

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रायपुर, 12 अक्टूबर: कृषि, पशुपालन और मानव स्वास्थ्य से जुड़े जटिल संक्रामक रोगों की रोकथाम और वैज्ञानिक नवाचार के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ ने राष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ी छलांग लगाई है। राजधानी रायपुर स्थित प्रतिष्ठित इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय परिसर में स्थापित अत्याधुनिक BSL-3 Lab IGKV Raipur (बीएसएल-3 लैब आईजीकेवी रायपुर) उच्चस्तरीय जैव-सुरक्षा अनुसंधान के लिए पूरी तरह तैयार हो गई है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस वैज्ञानिक उपलब्धि की सराहना करते हुए कहा कि यह बायोसेफ्टी लेवल-3 प्रयोगशाला राज्य में संक्रामक रोगजनकों (Pathogens) की पहचान, उनके जीनोमिक अध्ययन, नैदानिक तकनीकों और वैक्सीन निर्माण संबंधी शोध को ऐतिहासिक गति प्रदान करेगी। विश्वविद्यालय परिसर में छत्तीसगढ़ बायोटेक प्रमोशन सोसायटी द्वारा नवनिर्मित ‘सुभाषचंद्र बोस बायोटेक इन्क्यूबेशन सेंटर’ के अंतर्गत स्थापित इस प्रयोगशाला का लोकार्पण विगत 28 सितंबर को किया गया था।

मुख्य बिंदु (Key Highlights):

  • ‘BSL-3 Lab IGKV Raipur’: इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय परिसर में अत्याधुनिक बायोसेफ्टी लेवल-3 प्रयोगशाला स्थापित।
  • उच्चस्तरीय जैव-सुरक्षा मानक: खतरनाक संक्रामक वायरस, बैक्टीरिया और रोगजनकों पर पूर्णतः नियंत्रित वातावरण में होगा सुरक्षित शोध।
  • जूनोटिक बीमारियों पर विशेष फोकस: पशुओं से मनुष्यों में फैलने वाले घातक रोगों की त्वरित पहचान और रोकथाम की तैयारी।
  • ‘वन हेल्थ’ (One Health) दृष्टिकोण: कृषि, पशु स्वास्थ्य और मानव चिकित्सा के बीच वैज्ञानिक समन्वय का बनेगा सशक्त केंद्र।
  • कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल के प्रयासों की सराहना: कृषि विवि की फाइटोसैनिटरी प्रयोगशाला और बायोटेक इनक्यूबेशन सेंटर से जुड़ा नया तंत्र।

BSL-3 Lab IGKV Raipur: संक्रामक रोगजनकों और वैक्सीन निर्माण का नया वैज्ञानिक केंद्र

कृषि एवं पशुपालन आधारित अर्थव्यवस्था वाले छत्तीसगढ़ में जैव-सुरक्षा अनुसंधान की यह सुविधा वैज्ञानिकों और शोधार्थियों के लिए मील का पत्थर साबित होगी।

BSL-3 Lab IGKV Raipur में उच्च जैव-सुरक्षा मानकों के अनुरूप एयर-प्रेशर, हेपा फिल्ट्रेशन और बायो-कंटेनमेंट की अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। इसके माध्यम से वैज्ञानिक उन संक्रामक रोगजनकों का सुरक्षित अध्ययन कर सकेंगे, जिनसे इंसानों या फसलों में महामारी फैलने का खतरा रहता है। इस लैब के जरिए विभिन्न गंभीर बीमारियों के खिलाफ नई दवाओं की स्क्रीनिंग, उन्नत डायग्नोस्टिक किट्स और वैक्सीन अनुसंधान को नई दिशा मिलेगी।

सुभाषचंद्र बोस बायोटेक इन्क्यूबेशन सेंटर में स्थापना: 28 सितंबर को हुआ था लोकार्पण

छत्तीसगढ़ बायोटेक प्रमोशन सोसायटी (CBPS) के सहयोग से इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय परिसर में नवनिर्मित सुभाषचंद्र बोस बायोटेक इन्क्यूबेशन सेंटर का लोकार्पण 28 सितंबर को किया गया था, जिसके अंतर्गत इस बीएसएल-3 विंग को मूर्तरूप दिया गया है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने विश्वविद्यालय के कुलपति एवं छत्तीसगढ़ बायोटेक प्रमोशन सोसायटी के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) डॉ. गिरीश चंदेल और उनकी वैज्ञानिक टीम के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्हें बधाई दी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के विजन के अनुरूप छत्तीसगढ़ में वैज्ञानिक अधोसंरचना का विस्तार राज्य के आत्मनिर्भर भविष्य की मजबूत नींव रख रहा है।


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जूनोटिक रोगों की पहचान और ‘वन हेल्थ’ (One Health) एप्रोच को मजबूती

कोरोना महामारी और बर्ड फ्लू जैसी बीमारियों के बाद पूरी दुनिया में ‘वन हेल्थ’ की अवधारणा सबसे महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जिसके तहत मानव स्वास्थ्य, पशु स्वास्थ्य और पर्यावरण को एक साथ रखकर देखा जाता है:

  • पशुओं से फैलने वाले रोगों पर निगरानी: छत्तीसगढ़ के वनांचल और ग्रामीण क्षेत्रों में मवेशियों से इंसानों में फैलने वाले जूनोटिक संक्रमणों (Zoonotic Diseases) की समय रहते पहचान की जा सकेगी।
  • प्रकोप से निपटने की पूर्व तैयारी: किसी भी संक्रामक बीमारी के आउटब्रेक (Outbreak) की स्थिति में नमूनों की जांच के लिए अब पुणे के एनआईवी (NIV) या दिल्ली पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा; रायपुर में ही सटीक परिणाम मिलेंगे।

फाइटोसैनिटरी प्रयोगशाला और कृषि जैव-प्रौद्योगिकी का अनूठा समन्वय

इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय पहले से ही कृषि जैव-प्रौद्योगिकी और फसल अनुसंधान के क्षेत्र में देश के अग्रणी संस्थानों में गिना जाता है।

विश्वविद्यालय की अत्याधुनिक फाइटोसैनिटरी प्रयोगशाला (Phytosanitary Laboratory) पहले से ही फसलों के नमूनों, मिट्टी, जल और फसल अवशेषों में कीटनाशकों व कवक के परीक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। अब बीएसएल-3 लैब के जुड़ने से पौधों में लगने वाले खतरनाक फंगल, बैक्टीरियल और वायरल संक्रमणों के आणविक (Molecular) स्तर पर अध्ययन में मदद मिलेगी, जिससे फसलों को कीट-व्याधियों से बचाने के नए जैविक समाधान तलाशे जा सकेंगे।

वैज्ञानिक मानव संसाधन का विकास: शोधार्थियों को मिलेगा अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण

इस उच्चस्तरीय प्रयोगशाला की स्थापना से राज्य के युवा वैज्ञानिकों, माइक्रोबायोलॉजिस्ट्स, शोधार्थियों और लैब तकनीशियनों को विश्वस्तरीय कार्यप्रणाली सीखने का अवसर मिलेगा:

  • बायोसेफ्टी प्रोटोकॉल ट्रेनिंग: शोधार्थियों को क्लास-3 बायोसेफ्टी एनवायरनमेंट में काम करने का व्यावहारिक अनुभव मिलेगा, जिससे राज्य में प्रशिक्षित वैज्ञानिक वर्कफोर्स तैयार होगी।
  • बायोटेक स्टार्टअप्स को बढ़ावा: इनक्यूबेशन सेंटर के तहत नए बायोटेक और फार्मास्यूटिकल स्टार्टअप्स को अपने अनुसंधानों के क्लीनिकल और प्री-क्लीनिकल परीक्षण के लिए लैब की सेवाएं उपलब्ध होंगी।

“इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में स्थापित बीएसएल-3 प्रयोगशाला छत्तीसगढ़ के वैज्ञानिक इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय है। कृषि और पशुपालन प्रधान राज्य होने के नाते हमें पौधों और मवेशियों की संक्रामक बीमारियों से निपटने के लिए अत्याधुनिक सुविधाओं की आवश्यकता थी। यह प्रयोगशाला ‘वन हेल्थ’ दृष्टिकोण को साकार करेगी और हमारे वैज्ञानिकों को वैक्सीन तथा दवाओं के शोध में आत्मनिर्भर बनाएगी। डॉ. गिरीश चंदेल और पूरी टीम को इस उत्कृष्ट कार्य के लिए हार्दिक बधाई।”— विष्णु देव साय, मुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़ शासन

कृषि, पशुपालन और मानव स्वास्थ्य के लिए इसके क्या मायने हैं?

  • महामारियों की त्वरित रोकथाम: संक्रामक रोगाणुओं की पहचान तत्काल होने से किसी भी बीमारी को व्यापक रूप लेने से पहले ही रोका जा सकेगा।
  • किसानों की फसलों की सुरक्षा: पौधों के जानलेवा रोगों पर वैज्ञानिक रिसर्च से किसानों की उपज के नुकसान को न्यूनतम किया जा सकेगा।
  • राष्ट्रीय स्तर पर पहचान: इस उच्चस्तरीय वैज्ञानिक अधोसंरचना से इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा देश और दुनिया के कृषि अनुसंधान संस्थानों में और अधिक बढ़ेगी।

इंदिरा गांधी कृषि विवि बीएसएल-3 लैब परियोजना: एक नजर में

  • सुविधा का नाम: बायोसेफ्टी लेवल-3 प्रयोगशाला (BSL-3 Laboratory)
  • संस्थान: इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (IGKV), रायपुर, छत्तीसगढ़
  • मूल इकाई: सुभाषचंद्र बोस बायोटेक इन्क्यूबेशन सेंटर
  • नोडल एजेंसी: छत्तीसगढ़ बायोटेक प्रमोशन सोसायटी (CBPS)
  • लोकार्पण तिथि: 28 सितंबर 2026 (समीक्षा व वक्तव्य: 12 अक्टूबर 2026)
  • विश्वविद्यालय नेतृत्व: डॉ. गिरीश चंदेल (कुलपति, IGKV एवं सीईओ, CBPS)
  • प्रमुख शोध क्षेत्र: संक्रामक रोगजनक, वैक्सीन अनुसंधान, जूनोटिक रोग, फसल सुरक्षा एवं डायग्नोस्टिक्स
  • संबद्ध प्रयोगशाला: फाइटोसैनिटरी प्रयोगशाला (कृषि, जल एवं मृदा परीक्षण)

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

BSL-3 Lab IGKV Raipur की स्थापना किस केंद्र के अंतर्गत की गई है?

BSL-3 Lab IGKV Raipur की स्थापना छत्तीसगढ़ बायोटेक प्रमोशन सोसायटी द्वारा संचालित ‘सुभाषचंद्र बोस बायोटेक इन्क्यूबेशन सेंटर’ के अंतर्गत की गई है।

बायोसेफ्टी लेवल-3 (BSL-3) प्रयोगशाला का मुख्य कार्य क्या होता है?

यह एक उच्चस्तरीय नियंत्रित और सुरक्षित प्रयोगशाला होती है, जहाँ हवा और संपर्क से फैलने वाले खतरनाक संक्रामक रोगजनकों, वायरस और बैक्टीरिया पर बिना किसी संक्रमण के रिसाव के वैक्सीन व डायग्नोस्टिक शोध किया जाता है।

इस लैब से जूनोटिक रोगों के अध्ययन में क्या मदद मिलेगी?

यह लैब पशुओं से इंसानों में फैलने वाले जानलेवा जूनोटिक संक्रमणों की प्रारंभिक पहचान, रोग प्रकोप की रोकथाम और ‘वन हेल्थ’ दृष्टिकोण के तहत वैज्ञानिक समाधान खोजने में मदद करेगी।

प्रयोगशाला की स्थापना में किस प्रशासनिक और शैक्षणिक नेतृत्व की भूमिका रही?

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस उपलब्धि के लिए इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति एवं छत्तीसगढ़ बायोटेक प्रमोशन सोसायटी के सीईओ डॉ. गिरीश चंदेल के नेतृत्व की विशेष सराहना की है।

आधिकारिक स्रोत: इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय / छत्तीसगढ़ बायोटेक प्रमोशन सोसायटी / जनसंपर्क विभाग, रायपुर (छत्तीसगढ़ शासन)

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