रायपुर, 10 अक्टूबर: बस्तर की सदियों पुरानी और विश्वप्रसिद्ध पारंपरिक ढोकरा (बेलमेटल) धातु शिल्प को अब राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कॉर्पोरेट ब्रांडिंग और प्रीमियम पहचान मिलने जा रही है। भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय (MoTA) ने देश भर के चुनिंदा जनजातीय शिल्पों को वैश्विक स्तर का बनाने के लिए शुरू की गई महत्वाकांक्षी योजना के तहत बस्तर के Bastar Dhokra Art Cluster (बस्तर ढोकरा आर्ट क्लस्टर) का चयन किया है। इसी सिलसिले में मंत्रालय के अवर सचिव डॉ. सुधीर कुमार के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय केंद्रीय दल ने बस्तर कलेक्टर आकाश छिकारा के समन्वय से जगदलपुर विकासखंड के ग्राम चिलकुटी का दौरा कर जमीनी कार्ययोजना को अंतिम रूप दिया। चिलकुटी को देश का आदर्श ‘मॉडल प्रीमियम क्लस्टर’ बनाया जाएगा।
मुख्य बिंदु:
- ‘Bastar Dhokra Art Cluster’: केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय बस्तर के ग्राम चिलकुटी को बनाएगा देश का मॉडल प्रीमियम क्लस्टर।
- उच्चस्तरीय केंद्रीय टीम का दौरा: मंत्रालय के अवर सचिव डॉ. सुधीर कुमार, सलाहकार नौरिन शाहिद और एक्सपर्ट जागेश्वर ने शिल्पकारों से की सीधी चर्चा।
- इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग हब: 1-वर्षीय कार्ययोजना के तहत एक ही परिसर में आधुनिक यूनिट, कच्चा माल बैंक और इन्वेंट्री सिस्टम होगा स्थापित।
- ‘बस्तर कला गुड़ी’ बनेगा मार्केटिंग केंद्र: बिचौलियों को हटाकर पारंपरिक कारीगरों को सीधे राष्ट्रीय ई-कॉमर्स और फाइव-स्टार रिटेल से जोड़ा जाएगा।
चिलकुटी में बनेगा मॉडल प्रीमियम क्लस्टर: 1 साल का इंटीग्रेटेड एक्शन प्लान
जनजातीय कार्य मंत्रालय और जिला प्रशासन ने चिलकुटी में निवासरत घड़वा (पारंपरिक ढोकरा शिल्पी) परिवारों के लिए एक समग्र एक-वर्षीय कार्ययोजना तैयार की है।
इसके तहत चिलकुटी में वन विभाग और आदिम जाति कल्याण विभाग के समन्वय से एक अत्याधुनिक **इंटीग्रेटेड क्लस्टर कैंपस** विकसित किया जाएगा। इस परिसर में धुआं-रहित आधुनिक भट्ठियां (Eco-friendly Furnaces), रॉ-मटीरियल बैंक (तांबा, पीतल और मोम का रियायती डिपो), गुणवत्ता जांच लैब और वैज्ञानिक इन्वेंट्री मैनेजमेंट सिस्टम स्थापित किया जाएगा, ताकि कारीगरों को उत्पादन में कोई तकनीकी बाधा न आए।
केंद्रीय दल ने देखी 4,000 साल पुरानी लॉस्ट-वैक्स कास्टिंग तकनीक
भ्रमण के दौरान केंद्रीय अवर सचिव डॉ. सुधीर कुमार, प्रोजेक्ट एसोसिएट सुश्री नौरिन शाहिद और क्लस्टर एक्सपर्ट श्री जागेश्वर ने चिलकुटी के शिल्पकार परिवारों की कार्यशालाओं में जाकर ढोकरा निर्माण की जटिल प्रक्रिया को बारीकी से समझा।
सिंधु घाटी सभ्यता की ‘डांसिंग गर्ल’ से जुड़ी इस प्राचीन लॉस्ट-वैक्स कास्टिंग (मोम ढलाई) तकनीक में कारीगर पहले मिट्टी का ढांचा बनाते हैं, फिर मधुमक्खी के मोम के महीन तारों से बारीक नक्काशी करते हैं, और अंत में भट्ठी में तपाकर पिघला हुआ पीतल-कांसा भरते हैं। केंद्रीय दल ने कारीगरों के अद्भुत हुनर की सराहना करते हुए कहा कि इस हस्तशिल्प में वैश्विक लग्जरी डेकोर मार्केट पर राज करने की पूरी क्षमता है।
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‘बस्तर कला गुड़ी’ बनेगा लाइव एक्सपीरियंस जोन और नेशनल मार्केटिंग हब
क्लस्टर योजना के अंतर्गत केवल उत्पादन नहीं, बल्कि बिक्री और ब्रांडिंग पर सबसे ज्यादा जोर दिया जा रहा है।
बस्तर जिला प्रशासन द्वारा विकसित **’बस्तर कला गुड़ी’ (Bastar Kala Gudi)** को एक शक्तिशाली मार्केटिंग और लाइव एक्सपीरियंस हब के रूप में अपग्रेड किया जा रहा है। यहाँ आने वाले देसी-विदेशी पर्यटकों को ढोकरा कला का लाइव डेमो देखने को मिलेगा। इसके साथ ही उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय स्तर की पैकेजिंग, स्टोरी-टेलिंग टैग्स (कलाकार का नाम व इतिहास) और बारकोडिंग कर उन्हें ट्राइब्स इंडिया (TRIFED), अमेज़न, फ्लिपकार्ट और प्रमुख हवाई अड्डों के प्रीमियम आउटलेट्स पर सीधे बेचा जाएगा।
“बस्तर का ढोकरा शिल्प केवल धातु का खिलौना या मूर्ति नहीं, बल्कि भारत की 4 हजार साल पुरानी जीवित विरासत है। चिलकुटी को मॉडल प्रीमियम क्लस्टर बनाकर हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि हमारे आदिवासी कलाकारों को उनकी अनूठी मेहनत का पूरा और वाजिब दाम मिले। आधुनिक तकनीक, ब्रांडिंग और बिचौलिया-मुक्त बाजार से जुड़कर बस्तर के शिल्पकार आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनेंगे।”— डॉ. सुधीर कुमार, अवर सचिव, जनजातीय कार्य मंत्रालय, भारत सरकार
बस्तर के आदिवासी शिल्पकारों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए इसके क्या मायने हैं?
- बिचौलियों से मुक्ति और तिगुनी आमदनी: सीधे प्रीमियम मार्केट से जुड़ने पर जो कलाकृतियां बिचौलिए कौड़ियों के दाम खरीदते थे, उनके लिए शिल्पकारों को राष्ट्रीय स्तर की वास्तविक कीमतें मिलेंगी।
- स्वास्थ्य और काम के माहौल में सुधार: पारंपरिक धुएं वाली भट्ठियों की जगह क्लस्टर में आधुनिक ब्लोअर और सुरक्षित वर्कशेड मिलने से कारीगरों के स्वास्थ्य पर बुरा असर नहीं पड़ेगा।
- युवा पीढ़ी का कला से जुड़ाव: अच्छा मुनाफा और ब्रांड वैल्यू मिलने से आदिवासी युवा पलायन करने के बजाय अपनी पुश्तैनी ढोकरा कला को गर्व के साथ आगे बढ़ाएंगे।
बस्तर ढोकरा प्रीमियम क्लस्टर परियोजना: एक नजर में
- परियोजना: राष्ट्रीय ट्राइबल आर्टिजन मॉडल प्रीमियम क्लस्टर
- चयनित स्थल: ग्राम चिलकुटी, विकासखंड जगदलपुर, जिला बस्तर (छत्तीसगढ़)
- नोडल मंत्रालय: जनजातीय कार्य मंत्रालय (Ministry of Tribal Affairs), भारत सरकार
- केंद्रीय दल नेतृत्व: डॉ. सुधीर कुमार (अवर सचिव, MoTA)
- स्थानीय समन्वय: आदिवासी विकास विभाग, बिहान (NRLM) एवं जिला प्रशासन बस्तर
- शिल्प विधा: ढोकरा / बेलमेटल (हस्तनिर्मित कांसा-पीतल ढलाई)
- प्रमुख घटक: एकीकृत निर्माण यूनिट, रॉ-मटीरियल डिपो, मॉडर्न पैकेजिंग व ‘बस्तर कला गुड़ी’ हब
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
जनजातीय कार्य मंत्रालय की टीम ने बस्तर के किस गांव का दौरा किया?
मंत्रालय की उच्चस्तरीय टीम ने बस्तर जिले के जगदलपुर विकासखंड स्थित ग्राम चिलकुटी का दौरा कर ढोकरा शिल्प क्लस्टर की संभावनाओं का जायजा लिया।
चिलकुटी को किस रूप में विकसित करने की योजना है?
चिलकुटी को भारत सरकार की योजना के तहत एक समग्र ‘मॉडल प्रीमियम क्लस्टर’ के रूप में विकसित किया जाएगा, जहाँ आधुनिक मैन्युफैक्चरिंग, पैकेजिंग और रॉ-मटीरियल बैंक होगा।
ढोकरा शिल्प (Dhokra Art) क्या है?
ढोकरा बस्तर की पारंपरिक धातु ढलाई कला है, जिसे मोम, मिट्टी और पीतल-कांसे के मिश्रण से ‘लॉस्ट-वैक्स कास्टिंग’ (Lost-Wax Technique) के जरिए बिना किसी जोड़ के ढाला जाता है।
ढोकरा उत्पादों की बिक्री के लिए किस केंद्र को मार्केटिंग हब बनाया जा रहा है?
परियोजना के तहत ‘बस्तर कला गुड़ी एक्सपीरियंस जोन’ को मुख्य विपणन केंद्र (Marketing Hub) के रूप में विकसित किया जा रहा है ताकि शिल्पकार सीधे राष्ट्रीय बाजारों से जुड़ सकें।
स्रोत (Source): जनजातीय कार्य मंत्रालय, भारत सरकार / जिला जनसंपर्क कार्यालय (DPR), बस्तर