Published on July 8, 2026 | By Ishan Verma, Editor, theexamhub.in
भारत और आसियान (ASEAN) देशों के बीच व्यापार संबंधों को एक नई दिशा देने और द्विपक्षीय व्यापार को अधिक संतुलित व सुगम बनाने के लिए नई दिल्ली में AITIGA Joint Committee Meeting 2026 का आयोजन किया गया। यह बैठक भारत-आसियान वस्तु व्यापार समझौते (ASEAN-India Trade in Goods Agreement – AITIGA) की समीक्षा प्रक्रिया का एक अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा है। दोनों पक्षों ने वर्तमान वैश्विक आर्थिक परिदृश्य के अनुरूप इस समझौते को और अधिक आधुनिक, पारदर्शी और उद्योग-अनुकूल बनाने के लिए गंभीर चर्चा की है।
नई दिल्ली के वाणिज्य भवन में 6 से 10 जुलाई 2026 तक आयोजित इस बैठक में भारत और सभी 10 आसियान सदस्य देशों के प्रतिनिधिमंडलों ने हाइब्रिड प्रारूप (प्रत्यक्ष और ऑनलाइन) में भाग लिया। भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अनुसार, आसियान भारत का एक प्रमुख व्यापारिक भागीदार है, जो देश के वैश्विक व्यापार का लगभग 11 प्रतिशत हिस्सा संभालता है। ऐसे में आयोजित की गई यह AITIGA Joint Committee Meeting 2026 न केवल आर्थिक दृष्टि से बल्कि प्रतियोगी परीक्षाओं (जैसे UPSC और State PCS) के दृष्टिकोण से भी अंतर्राष्ट्रीय संबंधों (IR) और वैश्विक व्यापार नीतियों के तहत एक अत्यंत प्रासंगिक विषय है। इस विस्तृत विश्लेषण में हम इस बैठक के सभी मुख्य आयामों, उप-समितियों की भूमिका और भारत-आसियान व्यापार के भविष्य की रणनीति का अध्ययन करेंगे।
AITIGA Joint Committee Meeting 2026: त्वरित अवलोकन (Quick Highlights)
इस महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय बैठक और समझौते की समीक्षा से जुड़े प्रमुख तथ्यों को नीचे दी गई तालिका के माध्यम से समझा जा सकता है:
| महत्वपूर्ण बिंदु | विवरण |
|---|---|
| टूर्नामेंट/बैठक का नाम | 13वीं भारत-आसियान वस्तु व्यापार समझौता (AITIGA) संयुक्त समिति बैठक |
| आयोजन की तिथि और स्थान | 6 से 10 जुलाई 2026, वाणिज्य भवन, नई दिल्ली (भारत) |
| सह-अध्यक्षता (Co-chairs) | श्री नितिन कुमार यादव (अपर सचिव, वाणिज्य विभाग, भारत) और सुश्री मस्तुरा अहमद मुस्तफा (उप महानिदेशक, निवेश, व्यापार और उद्योग मंत्रालय, मलेशिया) |
| भागीदार आसियान देश | ब्रुनेई, कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओ पीडीआर, मलेशिया, म्यांमार, फिलीपींस, सिंगापुर, थाईलैंड और वियतनाम (सभी 10 देश) |
| द्विपक्षीय व्यापार मूल्य (2025-26) | USD 128 बिलियन (128 अरब डॉलर) |
| मुख्य ध्यान केंद्रित क्षेत्र | उत्पत्ति के नियम (Rules of Origin), सीमा शुल्क प्रक्रियाएं (Customs), बाजार पहुंच (Market Access) |
AITIGA Joint Committee Meeting 2026 की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
भारत और आसियान के बीच व्यापारिक संबंधों के इतिहास और वर्तमान समीक्षा की आवश्यकता को समझने के लिए इसकी पृष्ठभूमि पर नजर डालना आवश्यक है:
1. समझौते की शुरुआत
भारत और आसियान ने वर्ष 2003 में एक व्यापक आर्थिक सहयोग रूपरेखा समझौते (CECA) पर हस्ताक्षर किए थे। इसी के हिस्से के रूप में वर्ष 2009 में आसियान-भारत वस्तु व्यापार समझौते (AITIGA) पर हस्ताक्षर किए गए, जो 1 जनवरी 2010 से प्रभावी हुआ था।
2. समीक्षा की आवश्यकता क्यों पड़ी?
विगत डेढ़ दशक में इस समझौते के तहत भारत का आसियान देशों के साथ व्यापार घाटा (Trade Deficit) काफी बढ़ गया है। भारतीय निर्यातकों को आसियान बाजारों में कई गैर-टैरिफ बाधाओं (Non-Tariff Barriers) का सामना करना पड़ता है। इसके अतिरिक्त, चीनी उत्पादों के आसियान देशों के रास्ते भारत में अवैध रूप से डंप (Dumping) होने की चिंताएं भी बढ़ गई हैं। इन्हीं विसंगतियों को दूर करने के लिए वर्ष 2022 में दोनों पक्षों ने इस समझौते की व्यापक समीक्षा करने का निर्णय लिया था, और इसी समीक्षा प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए वर्तमान AITIGA Joint Committee Meeting 2026 का आयोजन किया गया है।
“आसियान भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति और हिंद-प्रशांत दृष्टिकोण का एक केंद्रीय स्तंभ है। यह AITIGA Joint Committee Meeting 2026 दोनों पक्षों को एक अधिक संतुलित, निष्पक्ष और परस्पर लाभकारी व्यापार ढांचा तैयार करने का ऐतिहासिक अवसर प्रदान करती है।”— श्री नितिन कुमार यादव, सह-अध्यक्ष एवं अपर सचिव (वाणिज्य विभाग)
AITIGA Joint Committee Meeting 2026 के तहत उप-समितियों की बैठकें
इस संयुक्त समिति की बैठक के समानांतर तीन अत्यंत महत्वपूर्ण उप-समितियों की बैठकें भी आयोजित की गईं, जो इस समझौते के सबसे जटिल तकनीकी पहलुओं को सुलझाने का प्रयास कर रही हैं:
1. उत्पत्ति के नियमों पर उप-समिति (Sub-Committee on Rules of Origin – SC-ROO)
भारत के दृष्टिकोण से यह उप-समिति सबसे अधिक रणनीतिक है।
- तीसरे पक्ष की डंपिंग रोकना: ‘रूल्स ऑफ ओरिजिन’ (Rules of Origin) यह निर्धारित करते हैं कि किसी वस्तु का वास्तविक निर्माण किस देश में हुआ है। भारत चाहता है कि कड़े नियम बनाए जाएं ताकि चीन जैसे तीसरे देश आसियान देशों के साथ भारत के एफटीए (FTA) का दुरुपयोग कर अपने माल को भारत में न भेज सकें।
- मूल्य संवर्धन मानक: उत्पादों में स्थानीय मूल्य संवर्धन (Value Addition) के कड़े नियमों पर चर्चा की गई ताकि केवल वास्तविक आसियान उत्पादों को ही भारत में शुल्क-मुक्त या रियायती बाजार पहुंच मिल सके।
2. राष्ट्रीय उपचार और बाजार पहुंच पर उप-समिति (Sub-Committee on National Treatment and Market Access – SC-NTMA)
इस उप-समिति का उद्देश्य दोनों पक्षों के बाजारों में माल की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करना है:
- टैरिफ विसंगतियां दूर करना: कुछ कृषि और औद्योगिक उत्पादों पर दोनों पक्षों द्वारा लगाए जा रहे उच्च शुल्कों को तर्कसंगत बनाने पर चर्चा हुई।
- गैर-टैरिफ बाधाएं (NTBs): भारतीय कृषि और फार्मास्यूटिकल्स उत्पादों को आसियान देशों में जिन स्वच्छता और पादप-स्वच्छता (SPS) संबंधी बाधाओं का सामना करना पड़ता है, उन्हें कम करने पर जोर दिया गया।
3. सीमा शुल्क प्रक्रियाएं और व्यापार सुविधा उप-समिति (Sub-Committee on Customs Procedures and Trade Facilitation – SC-CPTF)
इस उप-समिति का मुख्य कार्य सीमाओं पर माल के क्लीयरेंस को तेज और पारदर्शी बनाना है। इसके तहत डिजिटल सीमा शुल्क प्रणालियों (Digital Customs) के एकीकरण और कागजी कार्रवाई को न्यूनतम करने के उपायों पर सहमति बनाने का प्रयास किया गया।
भारत-आसियान द्विपक्षीय व्यापार के आंकड़े
भारत और आसियान के बीच व्यापारिक संबंधों की सघनता को समझने के लिए इस बैठक में प्रस्तुत आधिकारिक आंकड़े इस प्रकार हैं:
- व्यापार मूल्य: वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान भारत और आसियान के बीच द्विपक्षीय व्यापार USD 128 बिलियन (128 अरब डॉलर) तक पहुंच गया है।
- ग्लोबल ट्रेड शेयर: आसियान क्षेत्र भारत के कुल वैश्विक व्यापार का लगभग 11 प्रतिशत हिस्सा है, जो इसे भारत के सबसे बड़े आर्थिक सहयोगियों में से एक बनाता है।
- प्रमुख आयात-निर्यात वस्तुएं: भारत मुख्य रूप से आसियान देशों से कोयला, ताड़ का तेल (Palm Oil), इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और रसायन आयात करता है। वहीं भारत से जैविक रसायन, रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पाद, मशीनरी और फार्मास्यूटिकल्स आसियान देशों को निर्यात किए जाते हैं।
भारत के लिए इस बैठक का रणनीतिक और भू-राजनीतिक महत्व
आयोजित की गई यह AITIGA Joint Committee Meeting 2026 भारत की व्यापक विदेश नीति और भू-राजनीतिक लक्ष्यों के अनुकूल है:
- सप्लाई चेन लचीलापन (Supply Chain Resilience): कोविड-19 महामारी और वैश्विक संघर्षों के बाद दुनिया भर के देश चीन पर अपनी निर्भरता कम कर रहे हैं। भारत और आसियान मिलकर दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया में एक मजबूत और सुरक्षित वैकल्पिक आपूर्ति श्रृंखला का निर्माण कर सकते हैं।
- एक्ट ईस्ट नीति का सुदृढ़ीकरण: भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ (Act East Policy) नीति केवल सुरक्षा कूटनीति तक सीमित नहीं है, आर्थिक एकीकरण इसका एक अनिवार्य हिस्सा है।
- चीन को संतुलित करना: आसियान देशों में चीन का आर्थिक प्रभाव बहुत अधिक है। भारत द्वारा आसियान देशों के साथ मजबूत और संतुलित व्यापारिक संबंध स्थापित करना हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन के बढ़ते वर्चस्व को संतुलित करने का एक प्रभावी उपकरण है।
AITIGA समझौते की प्रमुख चुनौतियाँ
दोनों पक्षों के सकारात्मक दृष्टिकोण के बावजूद, वार्ता की राह में निम्नलिखित चुनौतियां प्रमुख रूप से सामने आ रही हैं:
- व्यापार संतुलन: आसियान देश भारत को दी जाने वाली बाजार पहुंच में कटौती नहीं करना चाहते, जबकि भारत इस समझौते से बढ़ रहे अपने व्यापार घाटे को कम करने के लिए कड़े सुरक्षात्मक उपाय (Safeguard Measures) चाहता है।
- विविध आर्थिक हित: आसियान कोई एकल आर्थिक इकाई नहीं है; इसमें सिंगापुर जैसे अत्यधिक विकसित देश भी शामिल हैं और लाओस तथा कंबोडिया जैसे विकासशील देश भी। इन सभी 10 देशों के आर्थिक हितों और प्राथमिकताओं में भारी अंतर है, जिससे आम सहमति बनाना जटिल हो जाता है।
- कृषि क्षेत्र की संवेदनशीलता: भारत के घरेलू किसान और ताड़ के तेल जैसे कृषि उद्योगों के हित आसियान से होने वाले सस्ते आयात से प्रभावित होते हैं, जिसे संतुलित करना भारत सरकार के लिए एक संवेदनशील राजनीतिक विषय है।
प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए विशेष अनुभाग (Exam Relevance Section)
UPSC Prelims Fact Box: AITIGA Joint Committee Meeting 2026
- AITIGA (आसियान-भारत वस्तु व्यापार समझौता): यह एक मुक्त व्यापार समझौता (FTA) है जिस पर 2009 में हस्ताक्षर किए गए थे और यह 2010 से प्रभावी है।
- आसियान (ASEAN) सदस्य देश: कुल 10 सदस्य – इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलीपींस, सिंगापुर, थाईलैंड, ब्रुनेई, वियतनाम, लाओस, म्यांमार और कंबोडिया। (भारत इसका सदस्य नहीं है, बल्कि एक संवाद भागीदार है)।
- रूल्स ऑफ ओरिजिन (Rules of Origin): किसी उत्पाद के राष्ट्रीय स्रोत को प्रमाणित करने वाले नियम, जो एफटीए के तहत रियायती शुल्कों का लाभ उठाने के लिए आवश्यक होते हैं।
- वाणिज्य भवन: नई दिल्ली में स्थित भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय का आधुनिक एकीकृत मुख्यालय।
UPSC Mains Analysis (GS Paper II: अंतर्राष्ट्रीय संबंध)
प्रश्न: “आसियान के साथ भारत का बढ़ता व्यापार घाटा और गैर-टैरिफ बाधाएं द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों के पूर्ण विकास में बाधक रही हैं।” हाल ही में आयोजित AITIGA Joint Committee Meeting 2026 के आलोक में विश्लेषण कीजिए कि भारत किस प्रकार इस समझौते की समीक्षा के माध्यम से अपने आर्थिक और भू-राजनीतिक हितों को सुरक्षित कर सकता है।
उत्तर की रूपरेखा:
- प्रस्तावना: भारत-आसियान संबंधों के आर्थिक महत्व और हालिया 13वीं संयुक्त समिति बैठक का परिचय देते हुए उत्तर की शुरुआत करें।
- आर्थिक चुनौतियां (व्यापार घाटा): आंकड़ों के साथ समझाएं कि कैसे AITIGA के लागू होने के बाद भारत का आयात तेजी से बढ़ा है जबकि निर्यात उस अनुपात में नहीं बढ़ सका। गैर-टैरिफ बाधाओं (NTBs) का उल्लेख करें।
- समीक्षा के रणनीतिक लक्ष्य: ‘रूल्स ऑफ ओरिजिन’ को कड़ा करने की आवश्यकता (चीन से डंपिंग रोकने हेतु), कृषि और विनिर्माण क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए सुरक्षात्मक उपायों (Safeguards) का समावेश।
- भू-राजनीतिक आयाम: एक्ट ईस्ट पॉलिसी, इंडो-पैसिफिक विजन और चीन की आर्थिक आक्रामकता के संदर्भ में इस समीक्षा के महत्व को स्पष्ट करें।
- निष्कर्ष: यह सुझाव देते हुए निष्कर्ष निकालें कि एक संतुलित और न्यायसंगत व्यापार ढांचा ही दीर्घकालिक कूटनीतिक संबंधों की नींव बन सकता है, जो दोनों क्षेत्रों के समावेशी विकास में सहायक होगा।
संबद्ध स्टेटिक जीके (Static GK Connection)
आसियान (ASEAN) संगठन से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण स्टेटिक सामान्य ज्ञान तथ्य:
- स्थापना: आसियान की स्थापना 8 अगस्त 1967 को बैंकॉक घोषणापत्र (Bangkok Declaration) पर हस्ताक्षर के साथ हुई थी।
- मुख्यालय: आसियान का सचिवालय जकार्ता, इंडोनेशिया में स्थित है।
- भारत-आसियान संबंध: भारत वर्ष 1992 में आसियान का ‘क्षेत्रीय संवाद भागीदार’ (Sectoral Dialogue Partner) और 1995 में ‘पूर्ण संवाद भागीदार’ (Full Dialogue Partner) बना था। वर्ष 2012 में इस संबंध को सामरिक साझेदारी (Strategic Partnership) में उन्नत किया गया था।
- आसियान-भारत सेवा और निवेश समझौता: वस्तुओं के समझौते के बाद, दोनों पक्षों ने वर्ष 2014 में सेवा और निवेश क्षेत्र के लिए भी मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए थे।
एक मिनट का रिवीज़न (One Minute Revision)
त्वरित पुनरीक्षण के लिए AITIGA Joint Committee Meeting 2026 के सबसे महत्वपूर्ण बिंदु:
- AITIGA Review: इसका उद्देश्य 2010 से प्रभावी भारत-आसियान वस्तु व्यापार समझौते को आधुनिक और संतुलित बनाना है।
- Trade Deficit: भारत इस समीक्षा के जरिए आसियान देशों के साथ बढ़ रहे अपने व्यापार घाटे को कम करना चाहता है।
- Rules of Origin: इसका उद्देश्य आसियान देशों के रास्ते चीनी सामानों की भारत में होने वाली डंपिंग को प्रभावी ढंग से रोकना है।
- Bilateral Trade: वर्ष 2025-26 में भारत और आसियान के बीच कुल व्यापार $128 बिलियन रहा है।
- Co-Chairs: भारत से श्री नितिन कुमार यादव और मलेशिया से सुश्री मस्तुरा अहमद मुस्तफा ने इस बैठक की सह-अध्यक्षता की।
अभ्यास प्रश्न (Practice MCQs)
निम्नलिखित बहुविकल्पीय प्रश्नों के माध्यम से AITIGA Joint Committee Meeting 2026 के अपने ज्ञान का परीक्षण करें:
प्रश्न 1: हाल ही में जुलाई 2026 में 13वीं ‘AITIGA Joint Committee Meeting 2026’ का आयोजन कहाँ किया गया?
(A) जकार्ता, इंडोनेशिया
(B) कुआलालंपुर, मलेशिया
(C) नई दिल्ली, भारत
(D) बैंकॉक, थाईलैंड
उत्तर: (C) नई दिल्ली, भारत
व्याख्या: 13वीं भारत-आसियान वस्तु व्यापार समझौता (AITIGA) संयुक्त समिति और उससे संबंधित बैठकें 6 से 10 जुलाई 2026 तक नई दिल्ली के वाणिज्य भवन में हाइब्रिड प्रारूप में आयोजित की गईं।
प्रश्न 2: भारत-आसियान वस्तु व्यापार समझौता (AITIGA) किस वर्ष से लागू हुआ था?
(A) 2005
(B) 2010
(C) 2015
(D) 2020
उत्तर: (B) 2010
व्याख्या: इस समझौते पर वर्ष 2009 में हस्ताक्षर किए गए थे और यह 1 जनवरी 2010 से आधिकारिक रूप से प्रभावी हुआ था।
प्रश्न 3: ‘AITIGA Joint Committee Meeting 2026’ के दौरान हुई वार्ताओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस बैठक की सह-अध्यक्षता भारत और वियतनाम द्वारा की गई थी।
2. वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान भारत और आसियान के बीच द्विपक्षीय व्यापार 128 अरब डॉलर तक पहुंच गया है।
उपरोक्त में से कौन सा/से कथन सत्य है/हैं?
(A) केवल 1
(B) केवल 2
(C) 1 और 2 दोनों
(D) न तो 1 और न ही 2
उत्तर: (B) केवल 2
व्याख्या: पहला कथन गलत है क्योंकि इस बैठक की सह-अध्यक्षता भारत (श्री नितिन कुमार यादव) और मलेशिया (सुश्री मस्तुरा अहमद मुस्तफा) द्वारा संयुक्त रूप से की गई थी। दूसरा कथन पूरी तरह सही है।
प्रश्न 4: मुक्त व्यापार समझौतों (FTAs) में ‘उत्पत्ति के नियम’ (Rules of Origin) का मुख्य उद्देश्य क्या होता है?
(A) सदस्य देशों के बीच वीजा नियमों को आसान बनाना
(B) किसी उत्पाद के वास्तविक उत्पादन देश का निर्धारण कर अवैध डंपिंग को रोकना
(C) केवल समुद्री परिवहन के मार्गों को विनियमित करना
(D) कृषि सब्सिडी के स्तर को तय करना
उत्तर: (B) किसी उत्पाद के वास्तविक उत्पादन देश का निर्धारण कर अवैध डंपिंग को रोकना
व्याख्या: रूल्स ऑफ ओरिजिन यह सुनिश्चित करते हैं कि एफटीए का लाभ केवल भागीदार देशों को ही मिले, न कि किसी तीसरे देश (जैसे चीन) को, जो अपने माल को भागीदार देश के रास्ते डंप करने का प्रयास कर रहा हो।
प्रश्न 5: निम्नलिखित में से कौन सा देश आसियान (ASEAN) का सदस्य नहीं है?
(A) लाओस
(B) वियतनाम
(C) भारत
(D) ब्रुनेई
उत्तर: (C) भारत
व्याख्या: भारत आसियान का सदस्य देश नहीं है, बल्कि वह इसका एक महत्वपूर्ण रणनीतिक और संवाद भागीदार (Dialogue Partner) है। आसियान में केवल 10 दक्षिण-पूर्वी एशियाई देश सदस्य हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Q1. AITIGA Joint Committee Meeting 2026 क्या है?
AITIGA Joint Committee Meeting 2026 भारत और 10 आसियान देशों के बीच जुलाई 2026 में नई दिल्ली में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक है। इसका मुख्य उद्देश्य वर्ष 2010 से लागू ‘भारत-आसियान वस्तु व्यापार समझौते’ (AITIGA) की समीक्षा प्रक्रिया को तेज करना और द्विपक्षीय व्यापार विसंगतियों को दूर करना है।
Q2. भारत इस समझौते (AITIGA) की समीक्षा क्यों चाहता है?
भारत मुख्य रूप से इस समझौते के कारण आसियान देशों के साथ बढ़ रहे अपने भारी व्यापार घाटे (Trade Deficit) को कम करने, भारतीय निर्यातकों के लिए गैर-टैरिफ बाधाओं को समाप्त करने और ‘उत्पत्ति के नियमों’ (Rules of Origin) को कड़ा कर चीनी सामानों के अवैध प्रवेश को रोकने के लिए इस समझौते की समीक्षा कर रहा है।
Q3. भारत और आसियान के बीच वर्तमान में कितना द्विपक्षीय व्यापार होता है?
वित्तीय वर्ष 2025-26 के आंकड़ों के अनुसार, भारत और आसियान के बीच कुल द्विपक्षीय व्यापार 128 अरब डॉलर (USD 128 Billion) के स्तर पर पहुंच गया है, जो भारत के कुल वैश्विक व्यापार का लगभग 11 प्रतिशत है।
Q4. इस बैठक में किन प्रमुख उप-समितियों ने भाग लिया?
इस बैठक के दौरान मुख्य रूप से तीन उप-समितियों ने गहन चर्चा की: 1. उत्पत्ति के नियम (Rules of Origin) उप-समिति, 2. राष्ट्रीय उपचार और बाजार पहुंच (National Treatment and Market Access) उप-समिति, और 3. सीमा शुल्क प्रक्रियाएं एवं व्यापार सुविधा (Customs Procedures and Trade Facilitation) उप-समिति।
Q5. ‘AITIGA Joint Committee Meeting 2026’ की सह-अध्यक्षता किसने की?
इस बैठक की सह-अध्यक्षता भारत के वाणिज्य विभाग के अपर सचिव श्री नितिन कुमार यादव और मलेशिया के निवेश, व्यापार और उद्योग मंत्रालय की उप महानिदेशक सुश्री मस्तुरा अहमद मुस्तफा द्वारा की गई।
निष्कर्ष (Conclusion)
नई दिल्ली में आयोजित की गई यह AITIGA Joint Committee Meeting 2026 भारत और आसियान देशों के बीच आर्थिक कूटनीति के एक नए और परिपक्व अध्याय को दर्शाती है। यद्यपि विगत वर्षों में मुक्त व्यापार समझौते से भारत का व्यापार घाटा बढ़ा है, परंतु इस समीक्षा बैठक के सकारात्मक परिणाम दोनों क्षेत्रों के लिए एक नई शुरुआत बन सकते हैं। ‘उत्पत्ति के नियमों’ को सख्त बनाकर और गैर-टैरिफ बाधाओं को दूर कर एक संतुलित आर्थिक वातावरण तैयार किया जा सकता है।
यह समीक्षा न केवल व्यापारिक हितों की रक्षा करेगी बल्कि भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति को सामरिक और भू-राजनीतिक मोर्चे पर भी मजबूती प्रदान करेगी। वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला के विविधीकरण के इस दौर में, भारत और आसियान की यह मजबूत और न्यायसंगत साझेदारी आने वाले समय में संपूर्ण हिंद-प्रशांत क्षेत्र में आर्थिक स्थिरता, साझा समृद्धि और नियम-आधारित व्यापार व्यवस्था सुनिश्चित करने में मुख्य भूमिका निभाएगी।
Official Sources:
- Press Information Bureau (PIB) Delhi (https://pib.gov.in)