AATAL Air Pollution Facility: दिल्ली-एनसीआर के लिए दुनिया की पहली अत्याधुनिक ‘वायु प्रदूषण विश्लेषण’ लैब का उद्घाटन

AATAL Air Pollution Facility AATAL Air Pollution Facility

नई दिल्ली, 24 अक्टूबर 2026: दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में वर्षों से गंभीर जन-चिंता का कारण बने वायु प्रदूषण के वैज्ञानिक, सटीक और स्थायी समाधान की दिशा में भारत ने वैश्विक स्तर पर तकनीकी नेतृत्व स्थापित किया है। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा पीएमओ, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने शनिवार को दिल्ली-एनसीआर के लिए विश्व की अपनी तरह की पहली एकीकृत वायु प्रदूषण विश्लेषण सुविधा AATAL Air Pollution Facility का भव्य उद्घाटन किया।

इस अत्याधुनिक प्रयोगशाला का आधिकारिक नाम ‘एकीकृत वायुमंडलीय रसायन विज्ञान और एरोसोल विषाक्तता विश्लेषण प्रयोगशाला’ (Integrated Atmospheric Chemistry and Aerosol Toxicity Analysis Laboratory – AATAL) है। यह नई सुविधा वायु गुणवत्ता की जांच को केवल पारंपरिक ‘एक्यूआई’ (AQI) आंकड़ों की रिपोर्टिंग तक सीमित न रखकर उससे कई कदम आगे ले जाएगी। AATAL यह सटीक रूप से उजागर करेगी कि दिल्ली की हवा में वास्तव में कौन-से प्रदूषक घुल रहे हैं, उनकी रासायनिक संरचना क्या है, वे कहाँ से उत्पन्न हो रहे हैं (Real-Time Sources), और उनके मानव स्वास्थ्य पर क्या गंभीर दुष्प्रभाव पड़ सकते हैं।

भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM) की दिल्ली शाखा में आयोजित इस उद्घाटन समारोह में पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव डॉ. टी. श्रीनिवास कुमार, आईआईटीएम के निदेशक डॉ. ए. सूर्यचंद्र राव तथा भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के महानिदेशक डॉ. मृत्युंजय महापात्रा उपस्थित रहे। यह सुविधा प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित ‘मिशन मौसम’ (Mission Mausam) के अंतर्गत स्थापित की गई है, जो उन्नत वायुमंडलीय माप उपकरणों, रासायनिक विश्लेषण और निर्णय-समर्थन क्षमताओं (Decision-Support Capabilities) को एक मंच पर लाती है।

अटल (AATAL) प्रदूषण विश्लेषण प्रयोगशाला: मुख्य तथ्य (Quick Facts)विवरण
सुविधा का नामAATAL Air Pollution Facility (Integrated Atmospheric Chemistry and Aerosol Toxicity Analysis Laboratory)
वैश्विक दर्जाविश्व की अपनी तरह की पहली एकीकृत वायु प्रदूषण व एरोसोल विषाक्तता लैब
उद्घाटनकर्ताडॉ. जितेंद्र सिंह (केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी व पृथ्वी विज्ञान मंत्री)
स्थलभारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM) की दिल्ली शाखा
छत्र केंद्रीय मिशन‘मिशन मौसम’ (Mission Mausam – प्रधानमंत्री द्वारा घोषित)
संबद्ध निर्णय प्रणालीआईआईटीएम का ‘एयरवाइज’ (AIRWISE – 400 मीटर रेजोल्यूशन पर 72 घंटे का पूर्वानुमान)
मुख्य पहचान क्षमतावाहनों, उद्योगों, पराली/बायोमास दहन, धूल व क्षेत्रीय प्रदूषण का रीयल-टाइम स्रोत विभाजन
सहयोगी विनियामक निकायवायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (GRAP क्रियान्वयन)

AQI के अंकों से आगे: रासायनिक संरचना और धातुओं की विषाक्तता की पहचान

डॉ. जितेंद्र सिंह ने AATAL Air Pollution Facility के क्रांतिकारी महत्व को समझाते हुए कहा कि भारत ने बीते 10-12 वर्षों में वायु गुणवत्ता पूर्वानुमान में अभूतपूर्व प्रगति की है:

  • 100 बनाम 200 की बहस का अंत: डॉ. सिंह ने कहा, “पहले चर्चा केवल इस बात पर घूमती थी कि प्रदूषण का स्तर 100 है या 200। यह नई सुविधा हमें यह समझने में मदद करेगी कि प्रदूषण किन तत्वों से मिलकर बना है और विभिन्न स्रोतों का इसमें कितना योगदान है। दिल्ली की जनता की चिंताओं को दूर करने और वैज्ञानिक साक्ष्यों पर कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए यह अनिवार्य था।”
  • विषाक्त तत्वों का रासायनिक विश्लेषण: यह प्रयोगशाला वायुमंडलीय गैसों और एरोसोल की रासायनिक संरचना का गहन विश्लेषण करने वाले आधुनिक उपकरणों से लैस है। यह पीएम 2.5 (PM2.5), भारी धातुओं (Heavy Metals), विषाक्त रासायनिक घटकों और जैविक कणों की अलग-अलग पहचान करेगी।
  • स्वास्थ्य जोखिमों का सटीक आकलन: सभी प्रदूषकों के स्वास्थ्य प्रभाव एक जैसे नहीं होते। कणों की सांद्रता (Concentration) के साथ-साथ उनकी रासायनिक विषाक्तता (Toxicity) को समझकर स्वास्थ्य विभाग विशिष्ट चिकित्सा परामर्श जारी कर सकेगा।

रीयल-टाइम सोर्स अपोर्शनमेंट: मौके पर 25% निकला वाहनों का धुआं

उद्घाटन के दौरान रीयल-टाइम स्रोत विभाजन (Real-time Source Apportionment) की क्षमता का प्रत्यक्ष उदाहरण सामने आया:

  • लाइव मॉनिटरिंग का उदाहरण: डॉ. जितेंद्र सिंह जब संवाददाताओं से बात कर रहे थे, उसी सटीक क्षण स्क्रीन पर प्रदर्शित हुआ कि दिल्ली का समग्र प्रदूषण स्तर लगभग 180 था और उसमें परिवहन (वाहनों) का योगदान लगभग 25 प्रतिशत था।
  • विशिष्ट स्रोतों की पहचान: AATAL वैज्ञानिकों को वाहनों के उत्सर्जन, औद्योगिक गतिविधियों, बायोमास और फसल अवशेष (पराली) जलाने, निर्माण एवं सड़क की धूल तथा पड़ोसी राज्यों से बहकर आने वाले प्रदूषकों के बीच सटीक अंतर करने में सक्षम बनाएगा। इससे सामान्य प्रतिबंध लगाने के बजाय लक्षित हस्तक्षेप (Targeted Interventions) संभव होंगे।

आईआईटीएम के ‘एयरवाइज’ (AIRWISE) से एकीकरण: 400 मीटर रेजोल्यूशन पर पूर्वानुमान

यह प्रयोगशाला आईआईटीएम के अत्याधुनिक सिस्टम AIRWISE (Air Quality Warning and Integrated Decision Support System for Emissions) से पूर्णतः एकीकृत है:

  • अति-सूक्ष्म स्थानिक रेजोल्यूशन: ‘मैकव्स’ (MAQWS) के प्रोजेक्ट डायरेक्टर डॉ. सचिन घुडे ने बताया कि एयरवाइज अगले 72 घंटों के लिए 400 मीटर के स्थानिक रेजोल्यूशन पर वायु गुणवत्ता का सटीक पूर्वानुमान प्रदान करता है। इससे यह पता चल सकेगा कि दिल्ली के किस विशिष्ट इलाके (Pocket) में प्रदूषण की क्या स्थिति रहेगी और वहाँ किन स्रोतों से प्रदूषण बढ़ सकता है।
  • 4 दिनों का अग्रिम पूर्वानुमान: यह एकीकृत प्रणाली रीयल-टाइम डेटा के साथ-साथ अगले 4 दिनों का अग्रिम पूर्वानुमान देगी, जिससे प्रशासन को मौसम बदलने से पहले ही कदम उठाने का समय मिलेगा। डॉ. घुडे ने इसे वैश्विक स्तर की प्रणाली बताते हुए भविष्य में अन्य शहरों में भी विस्तारित करने की संभावना जताई।

‘होल-ऑफ-गवर्नमेंट’ दृष्टिकोण और सीएक्यूएम (CAQM) के लिए साक्ष्य-आधारित आधार

डॉ. जितेंद्र सिंह ने जोर देकर कहा कि वायु प्रदूषण को कोई एक विभाग अलग-थलग रहकर हल नहीं कर सकता:

  • अंतर-विभागीय समन्वय: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘होल-ऑफ-गवर्नमेंट’ दृष्टिकोण के तहत पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC), राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और आपदा प्रबंधन एजेंसियां मिलकर वैज्ञानिक साक्ष्यों को धरातल पर क्रियान्वित करेंगी।
  • GRAP का प्रभावी क्रियान्वयन: वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) को अब जमीनी प्रतिबंध लगाने और ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के विभिन्न चरणों को लागू करने के लिए वैज्ञानिक माप-आधारित साक्ष्य प्राप्त होंगे, जिससे अनावश्यक आर्थिक नुकसान के बिना प्रदूषण फैलाने वाले विशिष्ट क्षेत्रों और गतिविधियों पर सटीक कार्रवाई की जा सकेगी।

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UPSC/CGPSC Static Facts: मिशन मौसम, CAQM कानून एवं GRAP रूपरेखा

प्रतियोगी परीक्षाओं (UPSC GS-3 पर्यावरण व प्रदूषण नियंत्रण, विज्ञान-प्रौद्योगिकी तथा GS-2 प्रशासनिक संस्थाएं) के दृष्टिकोण से मानक तथ्य:

  • मिशन मौसम (Mission Mausam – केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा स्वीकृत):
    • स्वीकृति: सितंबर 2024 में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा ₹2,000 करोड़ के वित्तीय परिव्यय के साथ 2 वर्षों (प्रथम चरण) के लिए स्वीकृत।
    • नोडल मंत्रालय: पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (MoES)। क्रियान्वयन संस्थाएं: भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD), भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM, पुणे) और राष्ट्रीय मध्यम अवधि मौसम पूर्वानुमान केंद्र (NCMRWF, नोएडा)।
    • उद्देश्य: वायुमंडलीय विज्ञान को अत्याधुनिक बनाना, नेक्स्ट-जेन रडार, सुपरकंप्यूटर और एआई आधारित सटीक मौसम व वायु प्रदूषण पूर्वानुमान विकसित करना।
  • वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM – Commission for Air Quality Management):
    • वैधानिक दर्जा: राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और सीमावर्ती क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग अधिनियम, 2021 के तहत गठित एक सांविधिक निकाय (Statutory Body)। इसने सर्वोच्च न्यायालय द्वारा गठित पूर्ववर्ती ‘ईपीसीए’ (EPCA) का स्थान लिया।
    • अधिकार क्षेत्र: दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के एनसीआर क्षेत्रों में वायु प्रदूषण के मामलों में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) और राज्य प्रदूषण बोर्डों के ऊपर इसके आदेश सर्वोपरि होते हैं।
  • ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP के 4 चरण):
    • चरण-I (खराब / Poor): AQI 201 से 300 (धूल नियंत्रण, निर्माण स्थलों पर निगरानी)।
    • चरण-II (बहुत खराब / Very Poor): AQI 301 से 400 (डीजल जनरेटरों पर पाबंदी, पार्किंग शुल्क में वृद्धि, पानी का छिड़काव)।
    • चरण-III (गंभीर / Severe): AQI 401 से 450 (गैर-आवश्यक निर्माण व तोड़फोड़ पर रोक, BS-III पेट्रोल व BS-IV डीजल वाहनों पर प्रतिबंध)।
    • चरण-IV (अति गंभीर / Severe+): AQI 450 से अधिक (ट्रकों के प्रवेश पर रोक, ऑड-ईवन प्रणाली, स्कूल बंद, सरकारी/निजी कार्यालयों में 50% वर्क फ्रॉम होम)।
  • आईआईटीएम पुणे (IITM – Indian Institute of Tropical Meteorology):
    • पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अधीन 1962 में स्थापित प्रमुख शोध संस्थान, जिसने देश का पहला राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता प्रणाली ‘सफर’ (SAFAR) विकसित किया था।

विश्लेषण: सामान्य प्रतिबंधों से ‘सर्जिकल हस्तक्षेप’ और वायु अभिशासन का नया युग

(UPSC Mains Analysis – Environmental Governance, Urban Air Pollution & Evidence-Based Policymaking)

1. सामान्य थोक प्रतिबंधों (Blanket Bans) से ‘सटीक लक्षित कार्रवाई’ (Targeted Interventions): दिल्ली-एनसीआर में हर सर्दी में वायु प्रदूषण गंभीर होते ही पूरे क्षेत्र में निर्माण कार्यों पर पूर्ण रोक लगा दी जाती है या ट्रकों का प्रवेश बंद कर दिया जाता है, जिससे दैनिक मजदूरों की आजीविका छिन जाती है और हजारों करोड़ का आर्थिक नुकसान होता है। AATAL Air Pollution Facility और ‘एयरवाइज’ का 400 मीटर रेजोल्यूशन यह बताएगा कि किस विशिष्ट 400 मीटर के इलाके में धूल प्रदूषण है और कहाँ वाहनों का। यह प्रशासन को पूरे शहर को बंद करने के बजाय केवल उन विशिष्ट स्रोतों और औद्योगिक इकाइयों पर ‘सर्जिकल एक्शन’ लेने का वैज्ञानिक आधार देता है।

2. रासायनिक विषाक्तता आधारित सार्वजनिक स्वास्थ्य नीति: अब तक वायु प्रदूषण को केवल ‘माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर’ (मास कंसंट्रेशन) में मापा जाता था, जिससे यह नहीं पता चलता था कि सांस में जा रहा धुआं पराली का है, पटाखों का या किसी रासायनिक कारखाने के भारी धातुओं (कैडमियम, आर्सेनिक, लेड) का। AATAL द्वारा एरोसोल की विषाक्तता का रीयल-टाइम अध्ययन भारतीय स्वास्थ्य नीति (ICMR और स्वास्थ्य मंत्रालय) को बीमारियों के सटीक कारणों की पहचान करने और अस्पतालों में श्वसन व हृदय रोगियों के लिए अग्रिम आईसीयू बेड व दवाइयां आरक्षित करने में गेम-चेंजर साबित होगा।


अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1. AATAL Air Pollution Facility का पूरा नाम क्या है और इसका उद्घाटन कहाँ किया गया?

इसका पूरा नाम ‘Integrated Atmospheric Chemistry and Aerosol Toxicity Analysis Laboratory’ (AATAL) है। इसका उद्घाटन केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह द्वारा आईआईटीएम (IITM) की दिल्ली शाखा में किया गया।

Q2. यह नई वायु प्रदूषण विश्लेषण सुविधा पारंपरिक AQI मापन से किस प्रकार भिन्न और उन्नत है?

यह सुविधा केवल प्रदूषण स्तर (AQI) बताने के बजाय यह रीयल-टाइम में उजागर करती है कि प्रदूषकों की रासायनिक संरचना क्या है, वे कहाँ से आ रहे हैं (वाहन, उद्योग, पराली या धूल), और उनकी विषाक्तता का मानव स्वास्थ्य पर क्या असर होगा।

Q3. AATAL के साथ एकीकृत ‘एयरवाइज’ (AIRWISE) सिस्टम की क्या विशेषताएं हैं?

आईआईटीएम का ‘एयरवाइज’ सिस्टम अगले 72 घंटों के लिए 400 मीटर के अति-सूक्ष्म स्थानिक रेजोल्यूशन पर वायु गुणवत्ता और उसके स्रोतों का सटीक पूर्वानुमान प्रदान करता है।

स्रोत (Source)

प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB Delhi), पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय एवं विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय, भारत सरकार, 24 अक्टूबर 2026.

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