Viksit Bharat G RAM G: महात्मा गांधी नरेगा की जगह 1 जुलाई 2026 से लागू हुआ नया कानून, अब हर साल 125 दिनों के रोजगार की वैधानिक गारंटी, ₹93,841 करोड़ का अंतरिम आवंटन

Viksit Bharat G RAM G Viksit Bharat G RAM G

नई दिल्ली, 24 अक्टूबर 2026: ‘विकसित भारत @2047’ के राष्ट्रीय विजन के अनुरूप देश के ग्रामीण विकास, सामाजिक सुरक्षा और आजीविका तंत्र में ऐतिहासिक संरचनात्मक सुधार लागू हो चुका है। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक प्रगति रिपोर्ट के अनुसार, Viksit Bharat G RAM G (विकसित भारत – रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन ग्रामीण) कानून, 2025 को 1 जुलाई 2026 से देश के सभी ग्रामीण अंचलों में सफलतापूर्वक लागू कर दिया गया है। महात्मा गांधी नरेगा (MGNREGA) से वीबी-जीरामजी में यह ऐतिहासिक परिवर्तन पूर्णतः निर्बाध (Seamless) और बिना किसी व्यवधान के संपन्न हुआ है, जिसके डिजिटल एवं प्रशासनिक तंत्र पहले ही दिन से पूरी तरह सक्रिय हैं।

नया कानून देश के प्रत्येक उस ग्रामीण परिवार को प्रत्येक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों के अकुशल शारीरिक श्रम (Wage Employment) की वैधानिक गारंटी प्रदान करता है, जिसके वयस्क सदस्य स्वेच्छा से कार्य करना चाहते हैं। यह कानून ग्रामीण भारत के सशक्तिकरण, समृद्धि और संतृप्तिकरण के लिए चार मुख्य विषयों—जल सुरक्षा, बुनियादी ग्रामीण अधोसंरचना, आजीविका अधोसंरचना और चरम मौसमी घटनाओं के प्रभाव न्यूनीकरण पर केंद्रित है। योजना के वित्तीय क्रियान्वयन के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए ₹93,841 करोड़ का अंतरिम आवंटन किया गया है, जिसमें से प्रथम किस्त के रूप में ₹25,880 करोड़ की ‘मदर सैंक्शन’ (Mother Sanction) जारी की जा चुकी है।

इस नई व्यवस्था की आत्मा ‘विकसित ग्राम पंचायत योजना’ (Viksit Gram Panchayat Plans – VGPPs) है, जिसमें ग्राम सभा के अनुमोदन से ‘बॉटम-अप’ (नीचे से ऊपर) जनभागीदारी आधारित नियोजन अनिवार्य किया गया है। इसके तहत चार मुख्य क्षेत्रों में 318 प्रकार के अनुमेय कार्य (Permissible Works) चिन्हित किए गए हैं। 24 सितंबर 2026 तक की आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, देश भर में 10.88 करोड़ सक्रिय श्रमिकों और 15.17 करोड़ जारी ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्डों के साथ 31.69 करोड़ से अधिक मानव दिवस (Person-days) सृजित किए जा चुके हैं, जिसमें महिलाओं की ऐतिहासिक भागीदारी 61.65 प्रतिशत दर्ज की गई है।

वीबी-जीरामजी (VB-G RAM G) राष्ट्रीय प्रगति: मुख्य सांख्यिकी (Quick Facts)24 सितंबर 2026 तक की अद्यतन स्थिति
कानून एवं प्रभावी तिथिViksit Bharat G RAM G Act, 2025 (1 जुलाई 2026 से लागू)
वैधानिक रोजगार गारंटीप्रति वित्तीय वर्ष 125 दिन (अकुशल शारीरिक श्रम)
सक्रिय श्रमिक एवं जारी कार्ड10.88 करोड़ सक्रिय श्रमिक | 15.17 करोड़ रोजगार गारंटी कार्ड
सृजित मानव दिवस एवं महिला सहभागिता31.69 करोड़ से अधिक मानव दिवस | 61.65% महिला भागीदारी
दैनिक मजदूरी दर दायरा₹300 से ₹450 प्रतिदिन (राज्यों के अनुसार)
मांग पर रोजगार प्राप्त परिवार2.23 करोड़ परिवारों के 2.81 करोड़ से अधिक श्रमिक
निर्माणाधीन कार्य एवं सक्रिय कार्यस्थल97.17 लाख प्रगतिरत कार्य | 20.16 लाख सक्रिय कार्यस्थल
कार्यरत ग्राम पंचायतेंदेश भर की लगभग 2.31 लाख ग्राम पंचायतें
केंद्रीय अंतरिम बजट आवंटन (2026-27)₹93,841 करोड़ (मदर सैंक्शन प्रथम किस्त: ₹25,880 करोड़)

विकसित ग्राम पंचायत योजना (VGPP): नियोजन की ‘बॉटम-अप’ प्रक्रिया

Viksit Bharat G RAM G योजना का सबसे बड़ा संस्थागत सुधार विकेंद्रीकृत नियोजन है, जिसके तहत Viksit Gram Panchayat Plans (VGPPs) तैयार किए जा रहे हैं:

  • सहभागी योजना: ग्राम पंचायतें ग्राम सभा की सक्रिय भागीदारी और औपचारिक अनुमोदन से स्थानीय आवश्यकताओं के आधार पर कार्यों की पहचान और प्राथमिकता तय करती हैं।
  • परिसंपत्तियों की मैपिंग: ग्राम पंचायत के भीतर केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं के तहत पहले से निर्मित सभी परिसंपत्तियों, बुनियादी ढांचे और सेवा वितरण की कमियों (Gaps) की एक समग्र सूची तैयार की जाती है।
  • जीआईएस आधारित नियोजन: योजना निर्माण में इसरो के युक्तधारा (Yuktdhara), पीएम गति शक्ति, और भू-स्थानिक (GIS) टूल्स का अनिवार्य उपयोग किया जाता है, जिससे कार्यों के दोहरेपन (Duplication) पर पूर्ण विराम लगा है।
  • संपूर्ण-सरकार (Whole-of-Government) दृष्टिकोण: ग्राम पंचायत की योजनाएं केवल एक विभाग तक सीमित न रहकर विभिन्न मंत्रालयों के संसाधनों का अभिसरण (Convergence) करती हैं।
  • राष्ट्रीय स्तर पर एकीकरण: ग्राम पंचायत की योजनाएं ब्लॉक, जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर समेकित होकर ‘विकसित भारत राष्ट्रीय ग्रामीण अधोसंरचना स्टैक’ (National Rural Infrastructure Stack) का निर्माण करती हैं।
  • 318 अनुमेय कार्य: वीजीपीपी ढांचे के तहत चार प्राथमिक क्षेत्रों में 318 प्रकार के कार्यों को स्वीकृति दी गई है।

चार प्राथमिक विषयगत क्षेत्र (Thematic Focus Areas)

अकुशल मजदूरी को देश के स्थायी भौतिक विकास से जोड़ने के लिए कार्यों को चार स्पष्ट स्तंभों में बांटा गया है:

  1. जल सुरक्षा (Water Security): चेकडैम, तालाब पुनर्जीवन, परकोलेशन टैंक, वाटरशेड विकास, भूजल पुनर्भरण और नहर प्रणाली।
  2. बुनियादी ग्रामीण अधोसंरचना (Core Rural Infrastructure): बारहमासी संपर्क सड़कें, पुलिया, ग्राम पंचायत भवन, आंगनबाड़ी केंद्र, ग्रामीण पुस्तकालय और ठोस-तरल अपशिष्ट प्रबंधन (SLWM)।
  3. आजीविका अधोसंरचना (Livelihood-related Infrastructure): महिला एसएचजी (SHG) वर्कशेड, ग्रामीण हाट, भंडारण केंद्र, कोल्ड स्टोरेज, पशु शेड और कृषि प्रसंस्करण इकाइयां।
  4. चरम मौसमी घटनाओं का न्यूनीकरण (Mitigation of Extreme Weather Events): बाढ़ सुरक्षा दीवारें, चक्रवात आश्रय, तटबंध, लेवल टेरेसिंग और वन अग्नि सुरक्षा रेखाएं।

जमीनी प्रगति रिपोर्ट: 24 सितंबर 2026 तक के आधिकारिक आंकड़े

1 जुलाई 2026 को कानून लागू होने के बाद मात्र तीन माह के भीतर अभूतपूर्व परिणाम दर्ज किए गए हैं:

  • मांग आधारित रोजगार: देश के 2.23 करोड़ ग्रामीण परिवारों के 2.81 करोड़ से अधिक श्रमिकों को मांग के अनुरूप तुरंत रोजगार उपलब्ध कराया गया है।
  • सृजित परिसंपत्तियां: अब तक 2.83 लाख स्थायी परिसंपत्तियों का निर्माण पूर्ण हो चुका है, जबकि 97.17 लाख कार्य वर्तमान में प्रगतिरत (Under Execution) हैं।
  • भावी मांग हेतु अग्रिम तैयारी: भविष्य में रोजगार की मांग पूरी करने के लिए 73.24 लाख स्वीकृत कार्य रेडी-टू-एक्जीक्यूट स्थिति में उपलब्ध हैं।
  • व्यापक कवरेज: देश की 2.31 लाख ग्राम पंचायतों में लगभग 20.16 लाख सक्रिय कार्यस्थलों पर काम चल रहा है।
  • डीबीटी और मजदूरी: वित्त वर्ष 2026-27 में 3.76 करोड़ डीबीटी (DBT) लेन-देन संपन्न हुए हैं। दैनिक मजदूरी दर राज्यों के आर्थिक सूचकांकों के आधार पर ₹300 से ₹450 प्रतिदिन के बीच निर्धारित है।

प्रौद्योगिकी-सक्षम पारदर्शिता, ई-एमबी और फेस ऑथेंटिकेशन

योजना में लीकेज और भ्रष्टाचार को शून्य करने के लिए एंड-टू-एंड डिजिटल इकोसिस्टम स्थापित किया गया है:

  • फेस ऑथेंटिकेशन से हाजिरी: श्रमिकों का ई-केवाईसी (e-KYC) और दैनिक कार्यस्थल उपस्थिति चेहरे के प्रमाणीकरण (Face Authentication) और बायोमेट्रिक्स के जरिए ली जा रही है, जिससे फर्जी हाजिरी की गुंजाइश खत्म हो गई है।
  • इलेक्ट्रॉनिक माप पुस्तिका (e-MB): कार्यों का डिजिटल मापन और इलेक्ट्रॉनिक मेजरमेंट बुक (e-MB) के माध्यम से मूल्यांकन अनिवार्य किया गया है, जिसके बाद ही मोबाइल आधारित निगरानी से भुगतान स्वीकृत होता है।
  • एआई और पब्लिक पोर्टल: रीयल-टाइम डैशबोर्ड पर सैटेलाइट मैपिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित एनालिटिक्स से निगरानी हो रही है। आम नागरिकों के लिए पब्लिक पोर्टल पर प्रोजेक्ट रजिस्ट्रेशन नंबर (PRN) और एजेंसियों की रेटिंग उपलब्ध है। इसे ‘स्किल इंडिया डिजिटल हब’ से सीधे जोड़ा गया है।

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UPSC/CGPSC Static Facts: मनरेगा से वीबी-जीरामजी तक का सफर एवं विधिक प्रावधान

प्रतियोगी परीक्षाओं (UPSC GS-2 शासन व्यवस्था व सामाजिक न्याय, GS-3 ग्रामीण अर्थव्यवस्था तथा CGPSC Paper-5 ग्रामीण विकास) के दृष्टिकोण से मानक तथ्य:

  • ग्रामीण रोजगार गारंटी की ऐतिहासिक विकास यात्रा:
    • राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम, 2005 (NREGA): 23 अगस्त 2005 को संसद द्वारा पारित, 2 फरवरी 2006 से लागू। वर्ष 2009 में नाम बदलकर ‘महात्मा गांधी नरेगा’ (MGNREGA) किया गया। इसमें प्रत्येक ग्रामीण परिवार को 100 दिनों के अकुशल कार्य की कानूनी गारंटी थी।
    • द वीबी-जीरामजी एक्ट, 2025 (The VB-G RAM G Act, 2025): वर्ष 2025 में संसद द्वारा अधिनियमित, जो 1 जुलाई 2026 से पूरे देश में लागू हुआ। इसने मनरेगा का स्थान लिया और गारंटी को 100 दिन से बढ़ाकर 125 दिन कर दिया।
  • संवैधानिक दर्शन (Constitutional Underpinnings):
    • अनुच्छेद 21: गरिमापूर्ण जीवन जीने का अधिकार (आजीविका का अधिकार जीवन के अधिकार का अभिन्न अंग है – ओल्गा टेलिस बनाम बॉम्बे नगर निगम वाद)।
    • अनुच्छेद 41 (DPSP): राज्य अपनी आर्थिक सामर्थ्य के भीतर काम पाने और सार्वजनिक सहायता पाने का अधिकार सुनिश्चित करेगा।
    • अनुच्छेद 243G (11वीं अनुसूची): पंचायती राज संस्थाओं को 29 विषयों (कृषि, जल प्रबंधन, ग्रामीण आवास, सड़कें) पर आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय की योजनाएं तैयार करने की शक्ति।
  • डिजिटल सुशासन उपकरण:
    • युक्तधारा (Yuktdhara): इसरो (ISRO) के राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र (NRSC) और ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा विकसित भुवन-आधारित भू-स्थानिक नियोजन पोर्टल।
    • इलेक्ट्रॉनिक माप पुस्तिका (e-MB): भौतिक रजिस्टरों के स्थान पर फील्ड इंजीनियरों द्वारा मोबाइल ऐप पर दर्ज डिजिटल माप, जो समय और स्थान (Geo-coordinates) के साथ लॉक होता है।

विश्लेषण: 125 दिनों की वैधानिक गारंटी और ‘कल्याणकारी मजदूरी’ से ‘पूंजी निर्माण’ का रूपांतरण

(UPSC/CGPSC Mains Analysis – Rural Transformation, Fiscal Federalism & Rights-Based Welfare)

1. 100 से 125 दिनों का विस्तार और ग्रामीण आय सुरक्षा: जलवायु परिवर्तन और कृषि में अनिश्चितता के कारण ग्रामीण अंचलों में मौसमी बेरोजगारी (Seasonal Unemployment) सबसे बड़ी चुनौती रही है। Viksit Bharat G RAM G के तहत 125 दिनों की वैधानिक गारंटी और ₹300-₹450 की संशोधित न्यूनतम मजदूरी सीधे तौर पर ग्रामीण क्रय शक्ति (Rural Purchasing Power) को बढ़ाती है। 61.65% महिला भागीदारी यह दर्शाती है कि यह कानून केवल रोजगार नहीं, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के हाथ में स्वतंत्र वित्तीय संसाधन देकर लैंगिक समानता (Gender Empowerment) की धुरी बन चुका है।

2. ‘डिगिंग होल्स’ की आलोचना का अंत: 318 कार्यों और संपूर्ण-सरकार (Whole-of-Government) मॉडल: पूर्ववर्ती मनरेगा पर अक्सर यह आरोप लगता था कि इसमें बिना किसी उत्पादक परिणाम के केवल मिट्टी के कच्चे गड्ढे खोदे जाते हैं। वीबी-जीरामजी के तहत Viksit Gram Panchayat Plans (VGPPs) और 318 अनुमेय कार्यों (जल सुरक्षा, कोल्ड स्टोरेज, फूड प्रोसेसिंग शेड्स, एक्सट्रीम वेदर बैरियर्स) का समावेश ग्रामीण रोजगार को सीधे ‘स्थायी अधोसंरचना निर्माण’ से जोड़ता है। पीएम गति शक्ति और युक्तधारा के जरिए नियोजन करने से यह सुनिश्चित होता है कि गांव में खर्च होने वाला प्रत्येक रुपया गांव की भावी आर्थिक उत्पादकता (Capital Productivity) को कई गुना बढ़ाए।


अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1. Viksit Bharat G RAM G कानून देश में कब से लागू हुआ है?

The VB-G RAM G Act, 2025 पूरे देश के सभी ग्रामीण क्षेत्रों में 1 जुलाई 2026 से आधिकारिक रूप से लागू हुआ है, जिसने महात्मा गांधी नरेगा का स्थान लिया है।

Q2. नए कानून के तहत ग्रामीण परिवारों को कितने दिनों के रोजगार की वैधानिक गारंटी मिलती है?

इस कानून के तहत प्रत्येक पात्र ग्रामीण परिवार को, जिसके वयस्क सदस्य अकुशल शारीरिक श्रम हेतु तैयार हैं, प्रति वित्तीय वर्ष 125 दिनों के रोजगार की वैधानिक गारंटी प्रदान की गई है।

Q3. वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए राज्यों को कुल कितना अंतरिम बजट आवंटित किया गया है?

वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को ₹93,841 करोड़ का अंतरिम आवंटन किया गया है, जिसमें से प्रथम किस्त के रूप में ₹25,880 करोड़ की मदर सैंक्शन जारी की गई है।

स्रोत (Source)

प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB Delhi), ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार, 24 अक्टूबर 2026.

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