President Murmu Bastar Dussehra: बस्तर दशहरा में शामिल हुईं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु; मांझियों को ₹5,000 और चालकियों को ₹3,500 मानदेय का ऐलान

President Murmu Bastar Dussehra President Murmu Bastar Dussehra

जगदलपुर, 23 अक्टूबर: बस्तर की आराध्य देवी माँ दंतेश्वरी की पावन भूमि जगदलपुर में आयोजित 75 दिनों के विश्वविख्यात बस्तर दशहरा उत्सव ने आज उस समय नया इतिहास रच दिया जब देश की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु स्वयं इस पारंपरिक महापर्व की साक्षी बनीं। President Murmu Bastar Dussehra (राष्ट्रपति मुर्मु बस्तर दशहरा) समारोह को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि बस्तर दशहरा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि यह छत्तीसगढ़ के सांस्कृतिक गौरव, विभिन्न समाजों की सामूहिक आस्था, सामाजिक समरसता और सनातन जनजातीय लोकतंत्र का सबसे जीवंत प्रतीक है। इस गौरवशाली अवसर पर राज्य सरकार ने बस्तर की सांस्कृतिक परंपराओं को सहेजने वाले पारंपरिक प्रतिनिधियों के लिए खजाना खोल दिया। संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की ओर से बड़ी घोषणा करते हुए मांझियों का मासिक मानदेय 2,000 रुपये से बढ़ाकर 5,000 रुपये तथा चालकियों का मानदेय 1,500 रुपये से बढ़ाकर 3,500 रुपये करने का आधिकारिक ऐलान किया।

मुख्य बिंदु (Key Highlights):

  • ‘President Murmu Bastar Dussehra’: जगदलपुर में विश्वप्रसिद्ध बस्तर दशहरा उत्सव में शामिल हुईं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु।
  • मांझी और चालकी मानदेय में भारी बढ़ोतरी: मांझियों को अब ₹5,000 और चालकियों को ₹3,500 मिलेगा मासिक मानदेय।
  • सामूहिक सहभागिता का अनूठा उत्सव: 75 दिनों तक चलने वाले पर्व में रथ निर्माण से लेकर रथ खींचने तक हर समुदाय निभाता है अपनी तय जिम्मेदारी।
  • दंडकारण्य और माता शबरी की स्मृति: राष्ट्रपति ने कहा—’रामायण कालीन दंडकारण्य की सांस्कृतिक स्मृतियों में रची-बसी है बस्तर की पावन विरासत।’
  • माओवाद मुक्त बस्तर में नवनिर्माण: सीएम साय ने कहा—’गीदम में मेडिकल कॉलेज शुरू, जगदलपुर में सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल और रावघाट तक पहुंची रेल।’
  • प्रकृति संरक्षण का संदेश: राष्ट्रपति ने आदिवासियों की प्रकृति पूजा को सराहा; 27 अक्टूबर को होगी माँ दंतेश्वरी व मावली देवी की डोली विदाई।

President Murmu Bastar Dussehra: सामाजिक समरसता और सामूहिक आस्था का वैश्विक प्रतीक

बस्तर दशहरा दुनिया का सबसे लंबा चलने वाला लोक-उत्सव है, जिसमें रावण का दहन नहीं होता, बल्कि आदिशक्ति मां दंतेश्वरी और प्रकृति के विभिन्न रूपों की आराधना की जाती है।

President Murmu Bastar Dussehra सम्मेलन को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि इस उत्सव की सबसे अनूठी विशेषता इसकी सामूहिक सहभागिता है। जंगल से काष्ठ (लकड़ी) लाने से लेकर विशाल दो मंजिला रथ का निर्माण करने, बेलगाम रस्सियों से रथ खींचने, पहियों की पूजा करने और विभिन्न अनुष्ठानों तक समाज के हर गोत्र, जाति और समुदाय की जिम्मेदारी पूर्व-निर्धारित है। यह सामाजिक ताना-बाना आपसी सहयोग और सांस्कृतिक निरंतरता का ऐसा उदाहरण है जो पूरे विश्व को बंधुत्व की सीख देता है।

मांझियों का मानदेय ₹5,000 और चालकियों का ₹3,500: संस्कृति मंत्री का बड़ा ऐलान

समारोह में संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल ने माँ दंतेश्वरी, माँ मावली और बस्तर के समस्त ग्राम देवी-देवताओं को नमन करते हुए राष्ट्रपति का स्वागत किया और ऐतिहासिक मानदेय वृद्धि की घोषणा की:

  • मांझी मानदेय में ढाई गुना वृद्धि: बस्तर के परगना प्रमुखों यानी ‘मांझियों’ को अब प्रतिमाह मिलने वाले ₹2,000 के मानदेय को सीधे बढ़ाकर ₹5,000 मासिक कर दिया गया है।
  • चालकी मानदेय में बढ़ोतरी: मांझियों के सहयोगी और परंपराओं के संवाहक ‘चालकियों’ का मानदेय ₹1,500 से बढ़ाकर ₹3,500 मासिक किया गया है।
  • परंपरागत व्यवस्था का सम्मान: मंत्री ने कहा कि यह निर्णय बस्तर की सांस्कृतिक पहचान को पीढ़ियों से अक्षुण्ण रखने वाले हमारे पारंपरिक प्रतिनिधियों के प्रति कृतज्ञता की सच्ची अभिव्यक्ति है।
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मुरिया दरबार और दंडकारण्य की विरासत: संवाद से समाधान का भारतीय मॉडल

राष्ट्रपति ने बस्तर दशहरा के अभिन्न अंग ‘मुरिया दरबार’ की सराहना करते हुए इसे जमीनी लोकतंत्र की सबसे मजबूत जड़ बताया:

  • सामूहिक विचार-विमर्श की शक्ति: जब समाज के सभी प्रतिनिधि और प्रशासक आमने-सामने बैठकर चर्चा करते हैं, तो कठिन से कठिन समस्याओं का शांतिपूर्ण समाधान निकलता है। उन्होंने दो माह पूर्व राष्ट्रपति भवन में बस्तर के मांझी-चालकी शिष्टमंडल से हुई अपनी आत्मीय मुलाकात को याद किया।
  • रामायण कालीन दंडकारण्य: राष्ट्रपति ने कहा कि बस्तर की धरती रामायण कालीन दंडकारण्य से जुड़ी है, जहां प्रभु श्रीराम ने वनवास के दौरान लंबा समय बिताया था। माता शबरी की अनन्य भक्ति और मर्यादा पुरुषोत्तम के आदर्श बस्तर की सांस्कृतिक चेतना में समाए हुए हैं।
  • प्रकृति संरक्षण का जीवन दर्शन: उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज पेड़ों को केवल लकड़ी नहीं, बल्कि जीवनदाता (ऑक्सीजन, जल और औषधि प्रदाता) मानता है। एक पेड़ बनने में दशक लगते हैं, इसलिए हमें प्रकृति के दोहन के साथ उसके संवर्धन का संकल्प लेना होगा।

माओवाद से मुक्त बस्तर में नवनिर्माण: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का रिपोर्ट कार्ड

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राष्ट्रपति का स्वागत करते हुए कहा कि इस वर्ष का बस्तर दशहरा ऐतिहासिक है क्योंकि बस्तर अब हिंसक माओवाद के साए से मुक्त होकर विकास के स्वर्णिम पथ पर बढ़ रहा है:

  • स्वास्थ्य व मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर: जगदलपुर में अत्याधुनिक सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल शुरू हो चुका है और गीदम (दंतेवाड़ा) में नया मेडिकल कॉलेज इसी शैक्षणिक सत्र से प्रारंभ हो गया है।
  • शिक्षा का पुनरुद्धार: ओरछा और जगरगुंडा जैसे अति-संवेदनशील वनांचल में हाईटेक ‘एजुकेशन सिटी’ का निर्माण हो रहा है, ताकि आदिवासी बच्चों को घर के पास विश्वस्तरीय शिक्षा मिले।
  • रेल व रोड कनेक्टिविटी: आजादी के बाद पहली बार रायपुर से रावघाट तक नई पैसेंजर ट्रेन शुरू हो चुकी है और रावघाट-जगदलपुर रेल लाइन पर काम जारी है। रायपुर-विशाखापट्टनम 6-लेन एक्सप्रेसवे बस्तर के व्यापार को सीधे बंदरगाहों से जोड़ेगा।
  • आजीविका व होमस्टे: बस्तर में ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए नई होमस्टे नीति लागू की गई है और वन धन विकास केंद्रों से लाखों संग्राहकों को उपज का उचित मूल्य मिल रहा है।

राज्यपाल रमेन डेका: ‘सामूहिकता ही जनजातीय समाज की सबसे बड़ी ताकत’

समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल रमेन डेका ने कहा कि भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और बस्तर दशहरा यह सिखाता है कि समाज के हर छोटे-बड़े वर्ग को साथ लेकर कैसे चला जाता है। राजशाही खत्म होने के बाद भी जनता का अपनी परंपराओं को जीवंत रखना यह सिद्ध करता है कि हमारी लोक-आस्थाएं किसी सत्ता की मोहताज नहीं हैं।

“बस्तर दशहरा हमारी सांस्कृतिक चेतना, सामूहिक एकता और प्रकृति के प्रति अगाध श्रद्धा का अनुपम संगम है। विभिन्न गोत्रों और समुदायों की यह एकजुटता भारत के लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करती है। बस्तर के युवाओं में अपार प्रतिभा है, वे बस्तर ओलंपिक से निकलकर विश्व पटल पर देश का नाम रोशन करेंगे। कुटुम्ब जात्रा और 27 अक्टूबर को माँ दंतेश्वरी व मावली माता की डोली विदाई जैसी पावन रस्में बस्तर की आत्मा हैं। माँ दंतेश्वरी से प्रार्थना है कि छत्तीसगढ़ सदैव शांति और समृद्धि के पथ पर आगे बढ़ता रहे।”— श्रीमती द्रौपदी मुर्मु, राष्ट्रपति, भारत गणराज्य (बस्तर दशहरा, जगदलपुर संबोधन)

समारोह में उपस्थित शीर्ष मंत्रिमंडल एवं जनप्रतिनिधि

विश्वप्रसिद्ध बस्तर दशहरा के इस ऐतिहासिक मंच पर राज्य और केंद्र सरकार के प्रमुख जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे:

  • मंत्रिमंडल: उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा, वन मंत्री श्री केदार कश्यप, कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम, स्कूल शिक्षा मंत्री श्री गजेन्द्र यादव, महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े, संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल।
  • सांसद व विधायक: बस्तर सांसद एवं बस्तर दशहरा समिति के अध्यक्ष श्री महेश कश्यप, कांकेर सांसद श्री भोजराज नाग, जगदलपुर विधायक श्री किरण सिंह देव, कोण्डागांव विधायक सुश्री लता उसेंडी, जगदलपुर महापौर श्री संजय पाण्डे।
  • प्रशासनिक अमला: मुख्यमंत्री के सचिव श्री राहुल भगत, कमिश्नर श्री डोमन सिंह, आईजी श्री बी.एन. मीणा, कलेक्टर श्री आकाश छिकारा, एसपी श्री शलभ सिन्हा सहित बस्तर के सभी परगना मांझी, चालकी, मेंबर-मेंबरिन, नाइक-पाइक और लाखों श्रद्धालु।

बस्तर दशहरा एवं राष्ट्रपति आगमन: एक नजर में

  • उत्सव का नाम: विश्वप्रसिद्ध बस्तर दशहरा (Bastar Dussehra Festival 2026)
  • अवधि: लगभग 75 दिनों तक चलने वाला विश्व का सबसे लंबा लोक-पर्व
  • मुख्य अतिथि: महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु (President of India)
  • स्थल व तिथि: जगदलपुर, बस्तर, छत्तीसगढ़ (23 अक्टूबर 2026)
  • बड़ी सरकारी घोषणा: मांझियों का मानदेय ₹2,000 से बढ़कर ₹5,000 और चालकियों का ₹1,500 से बढ़कर ₹3,500 प्रति माह
  • आगामी मुख्य रस्में: कुटुम्ब जात्रा (देवी-देवताओं की विदाई) एवं 27 अक्टूबर को माँ दंतेश्वरी व मावली माता की डोली विदाई
  • बस्तर विकास आंकड़े: गीदम मेडिकल कॉलेज, जगदलपुर सुपर स्पेशियलिटी, रावघाट रेल सेवा, एजुकेशन सिटी ओरछा-जगरगुंडा

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

President Murmu Bastar Dussehra कार्यक्रम में पारंपरिक प्रतिनिधियों के लिए क्या बड़ी घोषणा की गई?

President Murmu Bastar Dussehra कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ सरकार ने मांझियों का मासिक मानदेय ₹2,000 से बढ़ाकर ₹5,000 तथा चालकियों का मानदेय ₹1,500 से बढ़ाकर ₹3,500 करने की ऐतिहासिक घोषणा की।

बस्तर दशहरा कितने दिनों तक चलता है और इसकी क्या विशेषता है?

बस्तर दशहरा लगभग 75 दिनों तक चलता है। इसकी विशेषता यह है कि इसमें रावण दहन नहीं होता, बल्कि विभिन्न समुदायों की भागीदारी से रथ निर्माण, रथ परिक्रमा और माँ दंतेश्वरी की आराधना की जाती है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने बस्तर की किस ऐतिहासिक परंपरा को सराहा?

राष्ट्रपति ने बस्तर के ‘मुरिया दरबार’ को प्रत्यक्ष जमीनी लोकतंत्र का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण बताया और रामायण कालीन दंडकारण्य, माता शबरी की भक्ति तथा जनजातीय प्रकृति पूजा के महत्व को रेखांकित किया।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बस्तर में किन नई स्वास्थ्य व अधोसंरचना सुविधाओं का उल्लेख किया?

मुख्यमंत्री ने गीदम में इसी सत्र से शुरू हुए नए मेडिकल कॉलेज, जगदलपुर के सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल, रावघाट नई पैसेंजर ट्रेन सेवा और ओरछा-जगरगुंडा में बन रही एजुकेशन सिटी का उल्लेख किया।

आधिकारिक स्रोत: राष्ट्रपति सचिवालय / बस्तर दशहरा समिति / संस्कृति विभाग / जनसंपर्क संचालनालय (DPR Raipur), छत्तीसगढ़ शासन

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